राहुल गांधी बोले-ये BJP-RSS का भीड़तंत्र, विपक्ष बोला-अल्पसंख्यकों को बदनाम कर रहे, धर्मांतरण-मानव-तस्करी के आरोप झूठे
रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के दुर्ग में केरल की 2 कैथोलिक ननों की गिरफ्तारी को लेकर दिल्ली में संसद के बाहर प्रदर्शन हुआ है। मिशनरी सिस्टर्स को धर्मांतरण और मानव तस्करी के आरोप में पकड़ा गया है। गिरफ्तारी के विरोध में सोमवार को केरल से विपक्ष के सांसदों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ पर लिखा- छत्तीसगढ़ में 2 कैथोलिक ननों को उनकी आस्था के कारण निशाना बनाकर जेल भेज दिया गया। यह न्याय नहीं, बल्कि भाजपा-RSS का भीड़तंत्र है।
यह एक खतरनाक पैटर्न को दर्शाता है। ये बीजेपी के शासन में अल्पसंख्यकों का सिस्टेमैटिक उत्पीड़न है। UDF सांसदों ने संसद में विरोध प्रदर्शन किया। हम चुप नहीं बैठेंगे। धार्मिक स्वतंत्रता एक संवैधानिक अधिकार है। हम ननों की तत्काल रिहाई और इस अन्याय के लिए जवाबदेही की मांग करते हैं।
वहीं इस मामले में दुर्ग रेलवे स्टेशन से बरामद की गई युवती की मां ने बताया कि- ‘हमने अपनी बेटी को खुद भेजा था, अपने पैर पर खड़ा होने के लिए।’ जबकि युवती के जीजा ने बताया था कि मैंने कहा था किसी पर विश्वास करके ऐसे नहीं भेजना, लेकिन मेरी बात किसी ने नहीं मानी।
संसद के बाहर UDF सांसदों का प्रदर्शन-
ननों की गिरफ्तारी के खिलाफ संसद परिसर में विपक्ष के सांसदों ने सोमवार को प्रदर्शन किया।
2 मिशनरी सिस्टर को भिलाई थाना-3 के दुर्ग जीआरपी चौकी लाया गया है, जहां उनसे पूछताछ की जा रही है।
वहीं कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा, ‘हमने ननों की हिरासत के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। वे केरल की रहने वाली हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ में काम कर रही हैं।’
उन्होंने कहा कि ‘वे नियमों के तहत 3 युवतियों को नौकरी के लिए ले जा रही थीं, लेकिन वहां की (छत्तीसगढ़) सरकार और बजरंग दल ने आरोप लगाया कि यह तस्करी का मामला है और वे युवतियों को धर्मांतरण के लिए ले जा रही थीं। यह पूरी तरह से झूठ था।’
केसी वेणुगोपाल ने कहा- ‘ननों ने पुलिस को बताया कि हम उन्हें कानूनी तौर पर ले जा रहे हैं और हमारे पास उनके माता-पिता की अनुमति है, लेकिन पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी। भाजपा शासित राज्यों में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं’।
अल्पसंख्यकों को बदनाम किया जा रहा- प्रियंका गांधी
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा -मैं 25 जुलाई को छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन पर हुई घटना की निंदा करती हूं। दो ईसाई ननों-सिस्टर वंदना और सिस्टर प्रीति को बिना किसी कानूनी आधार के हिरासत में लिया गया। उन पर धर्मांतरण और मानव तस्करी के झूठे आरोप लगाए गए हैं। ये अल्पसंख्यक अधिकारों पर एक गंभीर हमला है।
प्रियंका गांधी ने आगे लिखा यह केवल एक मामला नहीं है। भाजपा शासन में अल्पसंख्यकों को सिस्टेमैटिक रूप से परेशान और बदनाम किया जा रहा है। भीड़ द्वारा न्याय और सांप्रदायिक निशाना बनाने का हमारे लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं है। कानून का शासन कायम रहना चाहिए।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग में ननों की गिरफ्तारी के खिलाफ संसद परिसर में विपक्ष के सांसदों ने किया प्रदर्शन।
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा सीधे अल्पसंख्यकों को टारगेट कर रही है। इस मामले को लेकर हमारे संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने केंद्रीय गृहमंत्री और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखा है।
दीपक बैज बोले- कार्रवाई को सार्वजनिक करे सरकार
छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने इस मामले में कहा कि भाजपा की सरकार धर्मांतरण के नाम पर केवल राजनीति कर रही है। जिस तरह से ये मामला सामने आया है, सरकार को निष्पक्ष ढंग से जांच करनी चाहिए। पूरी कार्रवाई को सार्वजनिक करना चाहिए। सरकार इसे राजनीतिक एजेंडा बनाकर काम कर रही है।
पूरी कांग्रेस पार्टी धर्मांतरण की समर्थक- सुनील सोनी
वहीं इस मामले में बीजेपी के पूर्व सांसद और रायपुर दक्षिण से विधायक सुनील सोनी ने कहा- इस बात से प्रमाणित होता है कि पूरी की पूरी कांग्रेस पार्टी धर्मांतरण और मतांतरण की समर्थक है। भूपेश बघेल के 5 साल की सरकार में धर्मांतरण तेजी से हुआ है। उसको संरक्षण पूरी तरह से कांग्रेस पार्टी ने दिया है।
सुनील सोनी ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ के अंदर में कोई भी व्यक्ति सामाजिक संरचना को बिगाड़ेगा, धार्मिक आस्था पर ठेस पहुंचाएगा या धर्मांतरण कराएगा, वह जेल में जाएगा। आप कितना भी प्रदर्शन करें या ट्वीट करें। विष्णुदेव सरकार में आने वाले समय में धर्मांतरण को लेकर सख्त कानून बनेगा।
बेलतरा से भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला ने कहा कि पिछली भूपेश बघेल की सरकार ने चर्चों को वोट बैंक की राजनीति का माध्यम बनाकर सरंक्षण दिया। वोट बैंक की राजनीति में पूरी कांग्रेस पार्टी मतांतरित हो चुकी है।
दुर्ग रेलवे स्टेशन में हुई थी गिरफ्तारी
25 जुलाई को दुर्ग रेलवे स्टेशन में धर्मांतरण और ह्यूमन ट्रैफिकिंग को लेकर जमकर बवाल हुआ था। 2 मिशनरी सिस्टर (नन) और एक युवक पर 3 आदिवासी युवतियों को UP के आगरा में काम दिलाने के बहाने बेचने ले जाने का आरोप है। मामला भिलाई थाना-3 के दुर्ग जीआरपी चौकी का है।
जानकारी के मुताबिक नारायणपुर की युवतियों को आगरा ले जाने वालों का नाम सुखमन मंडावी और मिशनरी सिस्टर प्रीति और वंदना है। ये तीनों लोग कमलेश्वरी, ललिता और सुखमति नाम की युवती को आगरा लेकर जा रहे थे, जिन्हें बजरंग दल ने पकड़ा है।
बताया जा रहा है कि पकड़े गए मिशनरी सिस्टर और युवक के पास पादरी का नंबर और 7 नाबालिग लड़कियों की तस्वीरें मिली हैं। साथ ही कुछ दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। तीनों लड़कियों को भिलाई सखी सेंटर में रखा गया है, जबकि 2 मिशनरी सिस्टर और युवक GRP की हिरासत में हैं।
ये तीन तस्वीरें देखिए…
भिलाई थाना-3 के दुर्ग जीआरपी चौकी में बड़ी संख्या में बजरंग दल के कार्यकर्ता पहुंचे।
दुर्ग GRP चौकी में धर्मांतरण और ह्यूमन ट्रैफिकिंग को लेकर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने जमकर बवाल किया।
नारायणपुर की इन 3 युवतियों को दुर्ग रेलवे स्टेशन से छुड़ाया गया है।
अब जानिए क्या है पूरा मामला?
दरअसल, शुक्रवार सुबह 8:30 बजे 2 मिशनरी सिस्टर और एक युवक 3 लड़कियों के साथ रेलवे स्टेशन पर घूम रहे थे। इस दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने एक लड़की को रोते हुए देखा। इस दौरान उसके साथ आया युवक लड़की से कह रहा था कि तुम इतनी दूर आ गई हो, इसलिए तुम्हें जाना होगा।
इस दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ता युवक की बातचीत सुन रहे थे। ऐसे में उन्हें मिशनरी सिस्टर और युवक पर शक हुआ। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने तीनों से पूछताछ की। पता चला कि मिशनरी सिस्टर और युवक तीनों लड़कियों को आगरा ले जा रहे थे।
मिशनरी सिस्टर और युवक के बीच बातचीत पर शक होने पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने स्टेशन पर हंगामा खड़ा कर दिया। हंगामे के बीच तीनों लड़कियों, 2 ननों और उनके साथ एक युवक को जीआरपी ने पकड़ लिया और थाने ले आई। उनसे पूछताछ की जा रही है।
रेलवे स्टेशन पर बजरंग दल कार्यकर्ताओं का हंगामा
बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने मानव तस्करी और धर्मांतरण का आरोप लगाकर दुर्ग रेलवे स्टेशन के GRP चौकी में नारेबाजी कर हंगामा शुरू कर दिया। साथ ही कार्यकर्ताओं ने बजरंग दल के दुर्ग संयोजक रवि निगम और बजरंग दल की प्रदेश संयोजिका ज्योति शर्मा को सूचना दी।
इस दौरान बजरंग दल की प्रदेश संयोजिका ज्योति शर्मा कार्यकर्ताओं के साथ पहुंची। ज्योति शर्मा ने मिशनरी सिस्टर (नन) पर युवतियों को नौकरी का झांसा देकर ले जाकर बेचने और धर्मांतरण का आरोप लगाया था। साथ ही कहा कि यह मामला सिर्फ नौकरी दिलाने का नहीं, बल्कि मानव तस्करी और धर्मांतरण से जुड़ा है।
पकड़े गए युवक के पास मिले 3 आधार कार्ड
ज्योति शर्मा ने बताया कि तीनों युवतियां नारायणपुर के ओरछा की रहने वाली हैं। वह ओरछा गांव से नारायणपुर घूमने के लिए निकली थी। उनके घर वाले ओरछा थाने में मिशनरी सिस्टर और युवक के खिलाफ FIR दर्ज करा रहे हैं। तीनों आरोपी मिलकर युवतियों को बेचते हैं। पकड़े गए युवक के 3 आधार कार्ड हैं।
ज्योति शर्मा ने बताया कि मिशनरी सिस्टर और युवक के पास से एक डायरी मिली है। उसमें कई राज्यों के नाम हैं। इसके अलावा डायरी में पादरियों के नंबर भी हैं। साथ ही 8-10 लड़कियों के फोटो भी मिले हैं। इनको भी बेचने की आशंका है।
युवती की मां बोली- हमने बेटी को खुद भेजा था
नारायणपुर जिले की तीनों युवतियों कमलेश्वरी प्रधान, ललिता और सुखमति के परिजन उन्हें अपने साथ ले जाने रविवार को दुर्ग पहुंचे। जीआरपी थाने से जरूरी कार्रवाई के बाद परिजन युवतियों को साथ ले जाने का इंतजार कर रहे हैं।
इस दौरान कमलेश्वरी प्रधान की मां बुधिया प्रधान ने कहा कि- ‘हमने अपनी बेटी को खुद भेजा था, अपने पैर पर खड़ा होने के लिए।’
दुर्ग रेलवे स्टेशन से बरामद कमलेश्वरी की मां बुधिया प्रधान ने कहा- बेटी को हमने खुद भेजा था।
जीजा ने कहा- हम युवतियों को कहीं नहीं भेजना चाहते
हालांकि, कमलेश्वरी प्रधान के जीजा अवस लाल धनेलिया ने बताया था कि मैंने कहा था कि किसी पर विश्वास करके ऐसे नहीं भेजना है, लेकिन मेरी बात किसी ने नहीं मानी। कुकराझर थाने से फोन आया था। इस पर मैंने उन्हें लड़कियों की वापसी की बात कही। हम युवतियों को कहीं नहीं भेजना चाहते हैं।
वहीं नारायणपुर के ओरछा थाना प्रभारी रॉबिनशन ने बताया कि घरवालों को थाने बुलाया गया था। घरवालों ने बताया कि काम के लिए गए हैं, लेकिन किसके साथ गए हैं, इसकी जानकारी नहीं है। घरवालों की ओर से कोई भी गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई थी।
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ प्रदेश तीरंदाजी संघ ने राज्य में तीरंदाजी को बढ़ावा देने के लिए खिलाड़ियों को जरूरी खेल सामग्री और बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं देने की मांग की है। संघ के अध्यक्ष कैलाश मुरारका ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र भेजकर अपनी मांग रखी है।
संघ ने बताया कि वह करीब 30 साल से खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने और उन्हें प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए तैयार करने का काम कर रहा है। संघ का कहना है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में तीरंदाजी की प्रतिभाएं हैं, जिन्हें बेहतर सुविधाएं मिलने पर आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है।
संघ के मुताबिक राज्य, जिला, स्कूल और आदिवासी स्तर की तीरंदाजी प्रतियोगिताएं जल्द शुरू होने वाली हैं। इन प्रतियोगिताओं के लिए आर्चरी स्टैंड, बट्स, टारगेट फेस, पिन समेत कई अन्य खेल सामग्री की जरूरत होगी।
संघ खिलाड़ियों और खेल संस्थाओं को यह सामग्री करीब 25 प्रतिशत कम कीमत पर उपलब्ध कराता है। जिला संघ, स्कूल, प्रशिक्षण केंद्र और खिलाड़ी अपनी जरूरत की सामग्री की जानकारी समय पर संघ को दे सकते हैं।
संघ के मुताबिक राज्य, जिला, स्कूल और आदिवासी स्तर की प्रतियोगिताएं शुरू होने वाली हैं।
आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों को अवसर
संघ अध्यक्ष ने बताया कि पिछले करीब 30 सालों से जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों से भाग लेने या प्रतियोगिता में भेजने के नाम पर कोई शुल्क नहीं लिया गया है। उन्होंने बताया कि यह व्यवस्था एनएमडीसी, एनटीपीसी, राज्य सरकार और अन्य सहयोगियों की मदद से चलती रही है।
संघ का कहना है कि इस व्यवस्था से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के खिलाड़ियों को भी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने और आगे बढ़ने का मौका मिलता है।
हर जिले में संसाधन और कोच की मांग
संघ ने कहा कि पदक के लिए प्रतिभा के साथ नियमित अभ्यास, प्रशिक्षित कोच, बेहतर खेल सामग्री और प्रतियोगिताओं का अनुभव जरूरी है। इसलिए हर जिले में तीरंदाजी के लिए जरूरी संसाधन और प्रशिक्षित कोच उपलब्ध कराने की मांग की गई है। संघ का मानना है कि इससे ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के अधिक खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का मौका मिलेगा।
सरकार से सहयोग की उम्मीद
संघ ने मुख्यमंत्री से तीरंदाजी के लिए आवश्यक खेल संसाधन और आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। साथ ही संबंधित विभाग को इस दिशा में जरूरी पहल के निर्देश देने की मांग की है। संघ का लक्ष्य हर जिले से प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराना और राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश के लिए अधिक पदक हासिल करना है।
जशपुर, एजेंसी। जशपुरनगर में राष्ट्रीय खेल दिवस पर शनिवार को जशपुर में खेल और विकास का संगम देखने को मिला। पुरानी टोली स्थित कम्युनिटी हॉल में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने ‘चेकमेट एट जशपुर–अखिल भारतीय ओपन फिडे रेटेड शतरंज प्रतियोगिता 2026’ का शुभारंभ किया।
प्रतियोगिता में देश के 12 राज्यों से 175 से अधिक खिलाड़ी और कोच शामिल हो रहे हैं। साथ ही, उप मुख्यमंत्री ने जिले को करीब 93 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की सौगात भी दी।
12 राज्यों से पहुंचे खिलाड़ी-कोच, साथ ही 93 करोड़ के विकास कार्यों का भूमिपूजन
29 अगस्त से 1 सितंबर तक चलेगी प्रतियोगिता
अखिल भारतीय शतरंज प्रतियोगिता 29 अगस्त से 1 सितंबर तक आयोजित होगी। इसके लिए कुल 2.50 लाख रुपए की पुरस्कार राशि निर्धारित की गई है। मुख्य वर्ग के विजेता को 50 हजार रुपए और ट्रॉफी, उपविजेता को 30 हजार और तीसरे स्थान पर रहने वाले खिलाड़ी को 20 हजार रुपए व ट्रॉफी दी जाएगी।
महिला, वरिष्ठ, विभिन्न आयु और रेटिंग वर्गों के साथ जशपुर व सरगुजा संभाग के खिलाड़ियों के लिए भी विशेष पुरस्कार रखे गए हैं। प्रतियोगिता फिडे स्विस प्रणाली के तहत 8 चक्रों में खेली जाएगी।
बोले- शतरंज जीवन में धैर्य और रणनीति सिखाता है
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि मेजर ध्यानचंद की जयंती पर 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है। जशपुर की प्राकृतिक वादियों में अखिल भारतीय शतरंज प्रतियोगिता का आयोजन गौरव की बात है।
उन्होंने कहा कि शतरंज भारत की प्राचीन परंपरा से जुड़ा खेल है। इसके 64 खानों और 32 मोहरों में जीवन की कई सीख छिपी हैं। यह व्यक्ति को धैर्य, एकाग्रता, रणनीति और सोच-समझकर निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने में मदद करता है। उन्होंने विश्वनाथन आनंद जैसे खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए जशपुर से नई शतरंज प्रतिभाओं को आगे लाने पर जोर दिया।
दादा-पोता भी साथ खेल सकते हैं शतरंज
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय महामंत्री योगेश बापट ने कहा कि वनांचल क्षेत्र जशपुर में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता होना बड़ी उपलब्धि है। इससे स्थानीय खिलाड़ियों को देशभर के खिलाड़ियों के साथ खेलने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि शतरंज की खासियत है कि उम्र की कोई सीमा नहीं होती। दादा और पोता भी एक साथ बैठकर खेल सकते हैं। यह खेल एकाग्रता, अनुशासन, शांति और धैर्य सिखाता है। खिलाड़ी जीतता है या कुछ सीखता है, इसलिए इसे सिर्फ हार-जीत के नजरिए से नहीं देखना चाहिए।
नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत ने प्रतियोगिता को जशपुर के लिए गौरव बताया। कलेक्टर रोहित व्यास ने बताया कि जिले में इंडोर स्टेडियम, कुनकुरी स्टेडियम के साथ फुटबॉल, क्रिकेट और रॉक क्लाइंबिंग की सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
93 करोड़ के विकास कार्यों का भूमिपूजन
कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री ने करीब 93 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। इनमें 86.99 करोड़ रुपए की अमृत मिशन जल प्रदाय योजना और करीब 7 करोड़ रुपए की गंदे पानी के शुद्धीकरण से जुड़ी वाटर फिल्टर परियोजनाएं शामिल हैं।
इसके अलावा जशपुर नगर के लिए 4.68 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की घोषणा की गई। इसमें रानी सती तालाब के विकास के लिए 4.30 करोड़ रुपए, हाईटेक बस स्टैंड के लिए 11.99 करोड़ रुपए और वशिष्ठ कम्युनिटी हॉल के जीर्णोद्धार के लिए 80 लाख रुपए की राशि स्वीकृत किए जाने की जानकारी दी गई। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जशपुर के विकास में धन की कमी नहीं होने दी जाएगी।
रायपुर, एजेंसी। राज्य खेल एवं युवा कल्याण विभाग की ओर से शनिवार को पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में राज्य खेल अलंकरण समारोह-2026 आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि रहे, जबकि उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने अध्यक्षता की। केंद्रीय मंत्री तोखन लाल साहू, डॉ. रमन सिंह समेत प्रदेश के कई मंत्री और विधायक भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
इस बार समारोह में 2023-24, 2024-25 और 2025-26 यानी तीन साल के राज्य खेल अलंकरण एक साथ दिए गए। राज्य खेल अलंकरण में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों, कोचों और टीमों को अलग-अलग श्रेणियों में सम्मानित किया गया। तीन साल का सम्मान एक साथ दिए जाने से लंबे समय से लंबित सम्मान भी दिए गए।
2025-26 के नगद पुरस्कारों में 21 खेलों के खिलाड़ियों और प्रतिभागियों को कुल 325 पुरस्कार दिए गए। इनमें किक बॉक्सिंग और कुडो के पुरस्कार सबसे ज्यादा रहे। वहीं एथलेटिक्स में 2 और बैडमिंटन में 1 पुरस्कार दिया गया।
टीम प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन करने वाली टीमों को मुख्यमंत्री ट्रॉफी से सम्मानित किया गया। समारोह में अलग-अलग जिलों के खिलाड़ियों के साथ पैरा खेलों के खिलाड़ियों को भी सम्मानित किया गया।
राज्य खेल अलंकरण में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों, कोचों और टीमों को अलग-अलग श्रेणियों में सम्मानित किया गया।
तीन साल के खेल अलंकरण एक साथ, 2025-26 में 325 सम्मान
राज्य खेल अलंकरण सामान्य तौर पर हर साल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों, कोचों और टीमों को दिए जाते हैं। इस बार 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के तीन वर्षों के लंबित अलंकरण एक साथ दिए गए।
पुरस्कारों में शहीद राजीव पांडेय पुरस्कार, शहीद कौशल यादव पुरस्कार, वीर हनुमान सिंह पुरस्कार, शहीद विनोद चौबे सम्मान और शहीद पंकज विक्रम सम्मान शामिल हैं। टीम स्पर्धाओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाली टीमों को मुख्यमंत्री ट्रॉफी भी दी गई।
अलग-अलग खेलों में खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर अलंकरण दिए गए।
21 खेलों के खिलाड़ियों को 325 पुरस्कार
2025-26 के नगद पुरस्कारों में 21 खेलों के खिलाड़ियों और अन्य प्रतिभागियों को कुल 325 पुरस्कार दिए गए। इनमें किक बॉक्सिंग और कुडो के खिलाड़ियों को सबसे ज्यादा पुरस्कार मिले। वहीं एथलेटिक्स में 2 और बैडमिंटन में 1 पुरस्कार दिया गया। अलग-अलग खेलों में खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर ये पुरस्कार दिए गए।
दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर के खिलाड़ियों की मजबूत मौजूदगी
अलंकरण सूची में दुर्ग-भिलाई के खिलाड़ियों ने हॉकी, टेबल टेनिस, बैडमिंटन, कुश्ती, नेटबॉल और मास्टर्स बैडमिंटन जैसे खेलों में जगह बनाई। हॉकी में भूमिका उपाध्याय, टेबल टेनिस में काजल, बैडमिंटन में संगीता राजगोपाल, कुश्ती में गामा यादव और वेटलिफ्टिंग में भूपेंद्र कुमार गडे का नाम शामिल है।
वहीं, बिलासपुर के खिलाड़ियों ने शूटिंग, तैराकी, तीरंदाजी समेत कई खेलों में अच्छा प्रदर्शन किया। सीता साहू, शशांक मसीह, स्वाती साहू, संकेत सामुएल और अजित्या सिंह सहित कई खिलाड़ियों को अलंकरण सूची में शामिल किया गया है।
अलंकरण सूची में दुर्ग-भिलाई के खिलाड़ियों की हॉकी, टेबल टेनिस, बैडमिंटन, कुश्ती, नेटबॉल और मास्टर्स बैडमिंटन जैसे खेलों में भागीदारी रही।
पैरा खिलाड़ियों को भी मिला सम्मान
खेल अलंकरण में पैरा खिलाड़ियों और पैरा खेलों को भी शामिल किया गया। सूची में पैरा एथलेटिक्स, पैरा फेंसिंग, पैरा जूडो, पैरा तैराकी और व्हीलचेयर फेंसिंग के खिलाड़ी शामिल रहे। महासमुंद के सुखदेव ने 100 मीटर और 1500 मीटर में राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक हासिल किए हैं।
बिलासपुर की सीता साहू और स्वाती साहू ने व्हीलचेयर फेंसिंग में स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीते हैं। पैरा जूडो और पैरा तैराकी के खिलाड़ियों को भी उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।
अलंकरण सूची में बालोद, राजनांदगांव, बीजापुर और रायगढ़ समेत अन्य जिलों के खिलाड़ियों के नाम भी शामिल हैं।
दूसरे जिलों के खिलाड़ियों की भी रही भागीदारी
अलंकरण सूची में बालोद, राजनांदगांव, बीजापुर और रायगढ़ समेत अन्य जिलों के खिलाड़ियों के नाम भी शामिल हैं। बालोद के अमित कुमार ने एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक हासिल किया। राजनांदगांव के महेंद्र ध्रुवे का वॉलीबॉल और ज्ञानेश्वरी यादव का बैडमिंटन में नाम शामिल है।
बीजापुर के राकेश कडती सॉफ्टबॉल और रायगढ़ के अमन तिवारी व दिव्यांशु देवांगन भी सूची में हैं। सॉफ्टबॉल और तीरंदाजी की बालिका टीमों में छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली खिलाड़ियों की भी भागीदारी रही।
मुख्यमंत्री ट्रॉफी में टीमों का प्रदर्शन
व्यक्तिगत खिलाड़ियों के अलावा राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाली टीमों को मुख्यमंत्री ट्रॉफी दी गई। 2023-24 में व्हीलचेयर फेंसिंग पुरुष टीम ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। टीम में बिरेन्द्र नवरंग, हरिहर सिंह राजपूत, आशीष पटेल और महेंद्र साहू शामिल थे, जबकि सूरज साहू टीम मैनेजर रहे।
इसी वर्ष जूनियर बालिका सॉफ्टबॉल टीम ने 41वीं जूनियर नेशनल चैंपियनशिप, पटना में कांस्य पदक जीता। टीम में चंद्रकांता बरेठ, प्रतिमा सोना और रेणुका तेलम समेत 16 से अधिक खिलाड़ी शामिल थीं।
महिला तीरंदाजी टीम ने रजत के बाद जीता स्वर्ण
2024-25 में सीनियर महिला तीरंदाजी टीम ने झारखंड में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीता। टीम में सुलोचना राज, चंदनी साहू, हर्षिता साहू और सुशीला नेताम शामिल थीं। टीम के कोच ईतवारी सिंह राज रहे। 2025-26 में इसी टीम ने हैदराबाद में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया। टीम में चांदनी साहू, सुलोचना राज, पायल मरावी और माया शामिल थीं। कोच इतवारी राज रहे।
महासमुंद के सुखदेव ने पैरा एथलेटिक्स में राष्ट्रीय स्तर पर 100 मीटर और 1500 मीटर में स्वर्ण पदक हासिल किए। बिलासपुर की सीता साहू और स्वाती साहू ने व्हीलचेयर फेंसिंग में स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीते। पैरा फेंसिंग, पैरा जूडो और पैरा तैराकी के खिलाड़ियों को भी उनकी उपलब्धियों के आधार पर सम्मान मिला।
रायपुर की जानकारी, पैरा खिलाड़ियों की जानकारी और बाकी विश्लेषण को अलग कर दिया है। अनावश्यक सवाल और दोहराव हटाए हैं, जबकि दिए गए प्रमुख तथ्य रखे हैं।
रायपुर के खिलाड़ियों की भी रही मजबूत मौजूदगी
राजधानी रायपुर के खिलाड़ियों को भी अलग-अलग खेलों में उनके प्रदर्शन के लिए सम्मान मिला। टेबल टेनिस, वुशु, बैडमिंटन और वेटलिफ्टिंग में रायपुर के कई खिलाड़ी सूची में शामिल हैं। भाठागांव के राजीव साहू का नाम शहीद पंकज विक्रम पुरस्कार 2023-24 की सूची में है।
विवेकानंद नगर के गिरीराज बागड़ी ने वेटरन राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है। प्रणय नंद मजूमदार का नाम 2025-26 की सूची में शामिल है। प्रदीप जोशी और अस्विनम देवांगन भी सूची में हैं।
वुशु में दिहलापारा की प्रियंका ठाकुर ने राष्ट्रीय स्तर पर कांस्य पदक हासिल किया है, जबकि सत्ती बाजार की मानसी डुंभरे 2024-25 की सीनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में शामिल रहीं। बैडमिंटन में सुजय तम्बोली को 2025-26 के शहीद राजीव पांडेय पुरस्कार के लिए चुना गया।
दिव्यांश अग्रवाल ने जूनियर राष्ट्रीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक हासिल किया और देवेंद्र नगर के ईशान भटनागर का नाम 2024-25 की बैडमिंटन सूची में शामिल है। वेटलिफ्टिंग में अजय दीप सारंग को वीर हनुमान सिंह सम्मान 2025-26 के लिए चुना गया है। उन्होंने राष्ट्रीय चैंपियनशिप में स्वर्ण और रजत पदक हासिल किए हैं। एवन कुमार जैन का नाम भी सूची में शामिल है।
किक बॉक्सिंग और कुडो के सबसे ज्यादा अलंकरण
2025-26 की सूची में किक बॉक्सिंग और कुडो को मिलाकर 146 अलंकरण दिए गए हैं। यह कुल 325 अलंकरणों का करीब 45 प्रतिशत है। वहीं एथलेटिक्स में 2 और बैडमिंटन में 1 अलंकरण दर्ज है। अलंकरण अलग-अलग खेलों की प्रतियोगिता, श्रेणी और खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर दिए गए हैं।
छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाड़ियों को भी जगह
अलंकरण सूची में बड़े शहरों के साथ छोटे शहरों, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों से आने वाले खिलाड़ियों के नाम भी शामिल हैं। सॉफ्टबॉल और तीरंदाजी की बालिका टीमों में ऐसे खिलाड़ियों की भागीदारी रही। इससे राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों के खिलाड़ियों की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में मौजूदगी सामने आती है।