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अमेरिकी मिलिट्री बेस पर ट्रम्प से मिलेंगे पुतिन:88KM दूर तैनात रहेंगे रूसी जेट, 54 साल पहले निक्सन से जापान के राजा यहीं मिले थे

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वॉशिंगटन,एजेंसी। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और रूस के राष्ट्रपति पुतिन 15 अगस्त को अलास्का में मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं के बीच 7 साल बाद हो रही इस मुलाकात का एजेंडा रूस-यूक्रेन जंग रोकना है।

ट्रम्प और रूस के पुतिन के बीच अलास्का के सबसे बड़े शहर एंकरेज में एलमेंडॉर्फ-रिचर्डसन मिलिट्री बेस पर वन-टू-वन मीटिंग होगी। उनके बीच सिर्फ एक ट्रांसलेटर (अनुवादक) होगा।

दोनों के बीच क्या बात होगी, इसका ब्योरा नहीं आएगा। मुलाकात के बाद दोनों नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।

54 साल पहले 1971 में इसी सैन्य बेस ने राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन और जापान के राजा हिरोहितो की ऐतिहासिक मुलाकात की मेजबानी की थी।

यह पहली बार था, जब कोई जापानी राजा विदेशी धरती पर आए थे।

यह पहली बार था, जब कोई जापानी राजा विदेशी धरती पर आए थे।

अमेरिकी बेस से 88 किमी की दूरी पर तैनात रहेंगे रूसी जेट

पुतिन के अलास्का पहुंचने से पहले उनकी आर्मर्ड लिमोजिन ऑरस सेनट रूसी कार्गो विमान से पहले ही बेस पर पहुंच गई है। मीटिंग में इस्तेमाल होने वाले पानी की बोतल और कप भी पुतिन की टीम द्वारा सील किए जाएंगे।

अलास्का से 88 किमी दूर आनादिर में रूसी फाइटर जेट को तैनात किया गया है।

पुतिन के साथ उनकी एफएसओ (फेडरल प्रोटेक्टिव सर्विस) यूनिट आएगी। यह एजेंसी पुतिन की हर विदेश यात्रा को सुरक्षित रखती है।

आइस फोर्ट्रेस कहलाने वाले इस मिलिट्री बेस पर पहले से 32 हजार अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। ट्रम्प के सुरक्षा प्रोटोकॉल के मुताबिक कीहोल (केएच-11) रीकॉन सैटेलाइट्स भी एक्टिव रहेंगे। वहीं, साइबर सुरक्षा के लिए बेस का पूरा नेटवर्क एयर-गैप्ड (इंटरनेट से कट) किया जाएगा।

पूरे क्षेत्र में 300 किमी के दायरे तक नो-फ्लाई जोन लागू होगा। बेस के भीतर और बाहर दोहरी लेयर सुरक्षा होगी। पहली में सैन्य पुलिस और नेशनल गार्ड, दूसरी में स्पेशल फोर्सेज और सीक्रेट सर्विस की काउंटर-असॉल्ट टीम। ट्रम्प का एयर फोर्स वन विमान उतरने के साथ ही फुल-टाइम मिलिट्री गार्ड में रहेगा।

7 दिन पहले ट्रम्प-पुतिन मुलाकात का प्लान बना

ट्रम्प और पुतिन 2022 से जारी रूस-यूक्रेन जंग को खत्म करने को लेकर बातचीत शुरू करने के लिए मिल रहे हैं। ट्रम्प ने 2023-24 के राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान कई मौकों पर वादा किया था कि वे राष्ट्रपति बनने के बाद 24 घंटे के भीतर रूस-यूक्रेन जंग को खत्म करवा देंगे। उनको राष्ट्रपति बने 6 महीने से ज्यादा हो गया, लेकिन ट्रम्प का यह वादा अभी तक पूरा नहीं हो सका।

इसके उलट रूस ने यूक्रेन पर हवाई हमले और तेज कर दिए। इससे नाराज होकर ट्रम्प ने रूस को पीस डील पर बात करने के लिए 50 दिन का वक्त दिया था। ट्रम्प ने तत्काल युद्धविराम पर सहमति नहीं होने पर और कड़े अमेरिकी प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी थी। 8 अगस्त को यह डेडलाइन खत्म हो गई।

डेडलाइन से दो दिन पहले 6 अगस्त को अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने मॉस्को में पुतिन से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद ही ट्रम्प और पुतिन के बीच मुलाकात का प्लान बना। 8 अगस्त को ट्रम्प ने मुलाकात का ऐलान किया।

इस मुलाकात के बाद फिलहाल सीजफायर की उम्मीद नहीं है। व्हाइट हाउस ने भी तुरंत सीजफायर से इनकार करते हुए कहा कि इस मीटिंग का मकसद यह समझना है कि यूक्रेन जंग को खत्म करने के रास्ते क्या हो सकते हैं।

ट्रम्प और पुतिन अलास्का में ही क्यों मिल रहे हैं

बीबीसी के मुताबिक ट्रम्प और पुतिन के अलास्का में ही मिलने की सबसे बड़ी वजह सुरक्षा है। अलास्का की मुख्य भूमि का सबसे नजदीकी हिस्सा रूस के चुकोटका से सिर्फ 90 किलोमीटर दूर है। पुतिन बिना किसी ‘दुश्मन’ देश के ऊपर से उड़ान भरे वहां पहुंच सकते हैं।

इस क्षेत्र में रूस के कुछ एयरफोर्स बेस और सैन्य निगरानी स्टेशन हैं, जहां परमाणु हथियार भी हो सकते हैं। पुतिन का यहां पर मिलना ज्यादा सुरक्षित होगा।

दूसरी वजह है दूरी। अलास्का यूक्रेन और यूरोप से काफी दूर है। यह पुतिन की उस सोच के मुताबिक है, जिसमें वह कीव और यूरोपीय संघ के नेताओं को बीच में लाए बिना सीधे अमेरिका से बात करना चाहते हैं।

अलास्का में पुतिन के लिए क्या कोई रिस्क है, एक्सपर्ट से जाने

भारत के रिटायर्ड एडमिरल गिरीश कुमार गर्ग कहते हैं- यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की पहल पर हो रही है, मुझे नहीं लगता कि अमेरिका अलास्का में पुतिन की सुरक्षा को लेकर कोई जोखिम उठाएगा। यह न केवल अमेरिका-रूस संबंधों के भविष्य के लिए, बल्कि रूस-यूक्रेन युद्ध के लिए भी खतरनाक हो सकता है।

रूस ने अमेरिकी धरती पर बैठक के लिए सहमत होने से पहले पुतिन की सुरक्षा की गारंटी मांगी होगी। पुतिन अलास्का में अमेरिकी जाल में फंस जाएं, वो इतने बेवकूफ नहीं हैं।

पुतिन का EU या किसी और ज्यादा सुरक्षित जगह जाने के बजाय अमेरिका जाने के लिए तैयार होना उनके अमेरिका के साथ संबंध सुधारने के प्रयास के तौर पर भी देखा जा सकता है।

पुतिन यूक्रेन का 20% हिस्सा छोड़ने को तैयार नहीं

रूस ने यूक्रेन के करीब 20% हिस्से, यानी लगभग 1 लाख 14 हजार 500 वर्ग किलोमीटर पर कब्जा कर रखा है। इसमें क्रीमिया, डोनेट्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन, और जापोरिजिया जैसे क्षेत्र शामिल हैं। रूस इन क्षेत्रों को अपनी सामरिक और ऐतिहासिक धरोहर मानता है और इन्हें छोड़ने को तैयार नहीं है।

पुतिन साफ कह चुके हैं कि यूक्रेन से शांति को लेकर बातचीत तभी हो सकती है जब यूक्रेन, रूस के कब्जाए गए क्षेत्रों से अपना दावा छोड़े और उन इलाकों को रूस के हिस्से के रूप में स्वीकारे। इसके अलावा पुतिन की यह शर्त भी है कि यूक्रेन नाटो में शामिल होने की अपनी मंशा छोड़ दे।

जेलेंस्की यूक्रेन की एक इंच जमीन भी देने को राजी नहीं

यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की यूक्रेन की एक इंच जमीन भी रूस को नहीं देंगे। उनका मानना है कि अगर यूक्रेन अभी पीछे हटता है तो इससे देश की संप्रभुता और सुरक्षा कमजोर हो सकती है। साथ ही रूस को भविष्य में और ज्यादा हमले करने का मौका मिल सकता है।

ट्रम्प ने 13 अगस्त को यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की और यूरोपीय नेताओं के साथ वर्चुअल मीटिंग की। इस मीटिंग में ट्रम्प ने जंग खत्म करने के लिए जमीन अदला-बदली की बात कही।

जेलेंस्की ने बिना किसी शर्त के युद्धविराम की मांग की। जेलेंस्की ने कहा कि रूस को किसी भी हाल में यूक्रेन का दूसरा बंटवारा नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने ट्रम्प से युद्धविराम और सुरक्षा गारंटी देने की बात कही।

यूरोपीय देश भी यूक्रेन के सरेंडर करने के पक्ष में नहीं

यूरोपीय देश, खासकर जर्मनी, ब्रिटेन और फ्रांस, यूक्रेन के आत्मसमर्पण के पक्ष में नहीं हैं। वे रूस की शर्तों को मानने से इनकार कर चुके हैं और यूक्रेन की संप्रभुता का समर्थन करते हैं। यूरोपीय देशों का मानना है कि बिना यूक्रेन को शामिल किए या सुरक्षा गारंटी दिए कोई समझौता करना गलत होगा। इससे शांति वार्ता में सहमति बनाना मुश्किल हो रहा है।

जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने बुधवार को ट्रम्प के साथ हुई वर्चुअल बैठक के दौरान यूक्रेनी सुरक्षा हितों को ध्यान में रख कर पुतिन से बातचीत करने को कहा है। वहीं, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि यूक्रेन में किसी भी क्षेत्रीय आदान-प्रदान पर केवल यूक्रेन के साथ ही चर्चा की जानी चाहिए।

उन्होंने आगे कहा, “हमें यूक्रेन का समर्थन जारी रखना चाहिए, और जब मैं ‘हम’ कहता हूं, तो मेरा मतलब यूरोपियन और अमेरिकन दोनों से हैं।” ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के प्रवक्ता ने वर्चुअल मीटिंग के बाद कहा कि यूक्रेन को किसी भी शांति समझौते के तहत विश्वसनीय सुरक्षा गारंटी मिलनी चाहिए।

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विदेश

शाही महल में डिनर, फोन पर बात और जंग खत्म:दिन में ईरान को धमकाने वाले ट्रम्प रात को चिल्लाकर बोले- डील साइन

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वॉशिंगटन, एजेंसी। अमेरिका-ईरान जंग खत्म करने के समझौते पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार रात फ्रांस के वर्साय पैलेस में दस्तखत कर दिए। दिलचस्प बात यह रही कि कुछ घंटे पहले तक वही ट्रम्प ईरान को धमका रहे थे। G7 समिट के दौरान उन्होंने कहा था कि अगर 60 दिन में अंतिम समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका फिर से ईरान पर बम बरसाएगा।

लेकिन शाम ढलते-ढलते तस्वीर बदल गई। G7 समिट के समापन के बाद ट्रम्प फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के विशेष निमंत्रण पर वर्साय पैलेस पहुंचे। वहां डिनर से पहले दोनों नेताओं को फोन पर किसी से बातचीत करते देखा गया। इसके कुछ देर बाद ट्रम्प ने ईरान के साथ शांति समझौते (MoU) पर दस्तखत कर दिए।

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विदेश

यूक्रेन ने रूस पर सबसे बड़ा ड्रोन अटैक किया:1000 से ज्यादा ड्रोन, क्रूज मिसाइलें भी दागीं, जेलेंस्की बोले- यूक्रेन जलेगा तो रूस भी जलेगा

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मॉस्को/कीव, एजेंसी। यूक्रेन ने गुरुवार को रूस पर अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला किया। रूस के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, रातभर में करीब 1,000 ड्रोन और चार क्रूज मिसाइलों को मार गिराया गया। इनमें करीब 200 ड्रोन राजधानी मॉस्को की तरफ बढ़ रहे थे। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा, “हम यह युद्ध नहीं चाहते थे, लेकिन अगर यूक्रेन जलेगा तो मॉस्को भी जलेगा।”

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक हमले में दक्षिणी रोस्तोव क्षेत्र का एक ऑयल डिपो धमाके से तबाह हो गया। यहां मौजूद एक व्यक्ति की मौत हो गई। मॉस्को की कपोतन्या ऑयल रिफाइनरी पर भी हमला हुआ। विस्फोट के बाद ऑयल डिपो टैंक का ढक्कन कई मीटर ऊपर उछल गया और आसमान में काले धुएं के गुबार छा गए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पास के एक शॉपिंग सेंटर में भी आग लग गई। ड्रोन का मलबा गिरने से कुछ रिहायशी और व्यावसायिक इमारतों को नुकसान पहुंचा। कई ऊंची इमारतों को खाली कराया गया। हमले के बाद मॉस्को के हवाई अड्डों पर कुछ समय के लिए उड़ानों पर रोक लगाई गई।

जेलेंस्की बोले- हमने रूस के हमले का जवाब दिया

जेलेंस्की ने मॉस्को पर हमले को पिछले हफ्ते कीव पर रूस की कार्रवाई का जवाब बताया। उन्होंने कहा कि यूक्रेनी सेना ने उन ठिकानों को निशाना बनाया, जो रूस के युद्ध अभियान को सहारा दे रहे हैं।

जेलेंस्की ने कहा कि अब समय आ गया है कि रूस युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीतिक रास्ता अपनाए। उन्होंने यूक्रेन की विभिन्न सैन्य और खुफिया एजेंसियों की कार्रवाई की तारीफ भी की।

हमले के समय रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन कजान में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के नेताओं के साथ शिखर बैठक में मौजूद थे। उन्होंने यूक्रेन के इस हमले पर अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

जेलेंस्की ने X पर पोस्ट कर मॉस्को पर हमले की जिम्मेदारी ली।

जेलेंस्की ने X पर पोस्ट कर मॉस्को पर हमले की जिम्मेदारी ली।

2023 से रूसी राजधानी पर ड्रोन हमले बढ़े

2022 में युद्ध शुरू होने के बाद यूक्रेन के ड्रोन हमले सीमित थे। 2023 में पहली बार उसके ड्रोन मॉस्को तक पहुंचे, लेकिन तब हमलों में कुछ ही ड्रोन इस्तेमाल किए जाते थे।

अब यूक्रेन लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम हो गया है, जबकि रूस ने भी राजधानी के चारों ओर मजबूत एयर डिफेंस तैनात कर रखा है।

इस वजह से युद्ध अब सिर्फ फ्रंटलाइन तक सीमित नहीं रहा। दोनों देश तेल डिपो, रिफाइनरी और दूसरे रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना रहे हैं।

G7 देशों ने यूक्रेन को मदद देने का ऐलान किया

मॉस्को पर बड़े हमले के बीच G7 देशों ने यूक्रेन के लिए सैन्य मदद बढ़ाने का ऐलान किया है। संगठन ने कहा कि यूक्रेन को ज्यादा एयर डिफेंस सिस्टम, इंटरसेप्टर और लंबी दूरी के हथियार दिए जाएंगे।

इसके अलावा रूस के तेल और गैस कारोबार पर प्रतिबंध और सख्त किए जाएंगे। G7 देशों ने सर्दियों से पहले यूक्रेन की बिजली और ऊर्जा जरूरतों के लिए भी अतिरिक्त मदद देने का भरोसा दिया है।

वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उन्हें लगा था कि रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कराना आसान होगा, लेकिन दोनों देशों के बीच गहरी दुश्मनी ने बातचीत को मुश्किल बना दिया है।

उन्होंने कहा कि उनकी वोलोदिमिर जेलेंस्की और व्लादिमिर पुतिन दोनों से अच्छी बातचीत हुई है और वह इस युद्ध का अंत देखना चाहते हैं।

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वो Luxury Villa जिसे देखने दुनिया भर से आते हैं रईस, 32 कमरे और आलीशान Pool, जानें कौन है इसका मालिक और क्या है कीमत?

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बीजिंग, एजेंसी। खूबसूरत वादियों, शांत समंदर या किसी खूबसूरत आइलैंड (द्वीप) पर अपना एक आलीशान घर होना हर किसी का सपना होता है। जरा सोचिए, एक ऐसा घर जो चारों तरफ से नीले पानी और पहाड़ों से घिरा हो, जिसमें तैरने के लिए एक शानदार इनफिनिटी पूल हो और अंदर कदम रखते ही सात सितारा होटल जैसी लक्जरी का अहसास हो। चीन के सूझोउ (Suzhou) शहर में स्थित एक ऐसा ही आलीशान महलनुमा घर इस समय पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह चीन का अब तक का सबसे महंगा घर है जिसकी भव्यता और कीमत सुनकर अच्छे-अच्छों के होश उड़ जाते हैं।

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क्या है इस महल का नाम और कहां है स्थित?

इस आलीशान विला को ‘ताओहुआयुआन’ (Taohuayuan) नाम दिया गया है। चीनी भाषा में इसका मतलब होता है ‘यूटोपिया’ (Utopia)—यानी एक ऐसी आदर्श और शांत दुनिया जहां सिर्फ सुख और शांति हो। यह घर चीन की मशहूर ‘दुशु झील’ (Dushu Lake) के ठीक बीच में बने एक बेहद खूबसूरत प्राइवेट आइलैंड (निजी द्वीप) पर स्थित है।

कौन है इसका रहस्यमयी मालिक? 

इस घर की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसका असली मालिक कौन है यह आज तक कोई नहीं जानता। इस आलीशान प्रॉपर्टी का मालिकाना हक पूरी तरह से गुप्त (गुमनाम) रखा गया है जो इसे और ज्यादा रहस्यमयी बनाता है।

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जानिए इसकी खासियतें

रिपोर्ट के मुताबिक इस घर को तैयार करने में दुनिया भर के बेहतरीन आर्किटेक्ट्स को लगाया गया था। यह प्रॉपर्टी करीब 72,400 वर्ग फुट के विशाल एरिया में फैली हुई है। इसे पूरी तरह से बनकर तैयार होने में 3 साल से भी ज्यादा का समय लगा था। इस घर के अंदर कुल 32 आलीशान बेडरूम और 32 हाई-टेक बाथरूम बनाए गए हैं।

घर का नक्शा इस तरह तैयार किया गया है कि इसके हर एक कमरे में सूरज की प्राकृतिक रोशनी (Natural Light) सीधी पहुंचती है। इस पूरे विला का डिजाइन यूनेस्को की विश्व धरोहरों से प्रेरित है। इसे फेंगशुई के सभी नियमों को ध्यान में रखकर बनाया गया है और इसे तराशने के लिए खास पारंपरिक कारीगरों की मदद ली गई थी।

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कितनी है इस Luxury Villa की कीमत?

चीन के बाजार में इसकी कीमत 1 अरब युआन है। डॉलर में आंका जाए तो यह संपत्ति लगभग 150 मिलियन डॉलर की है। भारतीय मुद्रा के हिसाब से इस एक अकेले घर की कीमत करीब 1200 करोड़ रुपये बैठती है। खूबसूरत बगीचों, पारंपरिक चीनी नक्काशी और आधुनिक सुख-सुविधाओं से लैस इस द्वीप-महल को देखने और इसकी एक झलक पाने के लिए दुनिया भर से रईस और टूरिस्ट चीन पहुंचते हैं।

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