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कोरबा

पूजा करनी है तो प्रकृति की करें, व्यक्ति की नहीं-पंडित विजय शंकर मेहता

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कथा सुनकर रोज मुस्कुराने वाले श्रोतागणों की आंखों में आज बह रहे थे आंसू


कोरबा। पितृमोक्षार्थ गयाश्राद्धांतर्गत मातनहेलिया परिवार द्वारा जश्न रिसोर्ट कोरबा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा वाचक पंडित विजय शंकर मेहता ने आज बड़े ही मार्मिक कथा सुनाई। आज की कथा में विरह थी, माता-पिता के साथ संतान का बिछुड़ना, कृष्ण के साथ गोपी-गोपियों का बिछुड़ना, नंदराय-यशोदा के साथ कृष्ण का बिछुड़ना था। भगवान श्रीकृष्ण वृंदावन छोड़कर मथुरा गमन कर गए और कंस को मारकर 11 साल से कारागार में बंद अपने पिता वासुदेव और देवकी को छुड़ाना था। एक तरफ नंदराय-यशोदा के साथ विरह तो दूसरी ओर वासुदेव-देवकी के साथ मिलन की परमानुभूति थी। मार्मिक कथा सुनकर स्वयं कथा वाचक पंडित विजय शंकर मेहता की आंखों में आंसू बह रहे थे तो दूसरी ओर श्रोतगण भी जीवन में विरह की कथा सुनकर भावुक होकर आंसू बह रहे थे। कथा जब संगीतमय मिल रही थी तो श्रोताओं के मन में कथा का प्रसंग आंखों में तैरने लगे और भगवान कृष्ण का मथुरा गमन के समय मां यशोदा की तीक्ष्ण और मार्मिक बातों का कृष्ण के पास कोई जवाब नहीं था। माता यशोदा को श्रीकृष्ण ने बस यही कहा-मां मुझे बड़ा काम करना है और धर्म की संस्थापना करनी है। भगवान कृष्ण ने कई राक्षसों सहित कंस को मारकर हिंसा का इतिहास बंद किया, वासुदेव-देवकी को कारागार से मुक्त किया और हस्तिनापुर जाने की तैयारी की कथा सुनाई और कहा कि मुझे महाभारत के जरिए धर्म की स्थापना करनी है। कृष्ण-रूक्मिणी विवाह की मनोरम कथा भी सुनाई।


इस कथा के पूर्व पंडित विजय शंकर मेहता ने भगवान कृष्ण की वह लीला सुनाई, जब कृष्ण 7 साल के थे। कृष्ण ने देखा पूरा ब्रजवासी हाथ में थाली सजाकर घर से निकल रहे थे। कृष्ण ने मां यशोदा से पूछा- मां सभी ब्रजवासी कहां जा रहे हैं। उत्तर मिला-मानसून का समय आ रहा है और हम अच्छी वर्षा के लिए इंद्र की पूजा करने जा रहे हैं। भगवान ने इंद्र की पूजा रूकवाई और गोवर्धन की पूजा की। इंद्र रूष्ट हो गए, सात दिन तक भयंकर वर्षा हुई, सात साल के बालक ने एक ऊंगली में गोवर्धन को उठाया और ब्रजवासियों की रक्षा की। इंद्र का घमंड चूर हुआ। इंद्र आए तो कृष्ण से पूछा-आपने ऐसा क्यों किया? कृष्ण ने कहा-तुम लोगों के लिए बारिश का माध्यम हो, इस उपकार के बदले खुद की पूजा कराना भ्रष्टाचार है। कृष्ण ने कहा- प्रकृति की पूजा करें, व्यक्ति की नहीं।
प्रकृति से प्रेम करें, एक-एक पेड़ का मान बढ़ाएं
जीवन प्रबंधन गुरू एवं कथा वाचक पंडित मेहता ने कहा कि जीवन तभी समृद्ध और खुशहाल होगा, जब प्रकृति आबाद रहेगी। एक-एक पेड़ का मान बढ़ाएं, नुकसान न पहुंचाएं, पानी की एक-एक बंूद बचाएं, स्वच्छता को कर्त्तव्य समझें। अन्न की रक्षा करें, तभी भूखे को भरपेट भोजन मिलेगा।
कृष्ण की रासलीला निष्काम थी
भगवान कृष्ण को कर्मयोगी कहा जाता है। कृष्ण की रासलीला पर कई प्रश्न खड़े करने वाले लोग मिल जाते हैं, लेकिन आध्यात्म की नजर से देखें। आपको निष्काम नजर आएगी। कृष्ण ने कभी सत्ता नहीं स्वीकारी और बड़े-बड़े कर्म कर कर्मयोगी बने और धर्म की स्थापना की।
पिता सृष्टि के निर्माण की अभिव्यक्ति हैं
ब्रज छोड़कर जब कृष्ण मथुरा गए और कंस का वध किया, तो यह समाचार नंदराय को भी मिला। नंदराय, कृष्ण के महल के बाहर खड़े थे, जब यह बात कृष्ण को पता चली, तो दौड़े-दौड़े पिता के चरणों में गिर पड़े। नंदराय की जिद्द पर कृष्ण बोले-मुझे इससे भी बड़ा लक्ष्य हासिल करना है, मुझे ब्रज जाने के लिए जिद्द न करें। इस प्रसंग को सुनाते हुए पंडित मेहता ने कहा- जब खाली हाथ नंदराय ब्रज गए तो उनकी आंखों में आंसू की नदियां बह रही थी और यह दृश्य देखकर पूरा ब्रह्मांड भी रोया था। श्रोतागणों मां बच्चों के लिए मीठी पालनहार है, तो पिता सृष्ठि के निर्माण की अभिव्यक्ति है। पिता जीवन है, सम्बल है, पिता शक्ति है। जब पिता का साया उठ जाता है, तो लोग अनाथ हो जाते हैं, इसलिए जब तक माता-पिता हैं, उनका कहना मानो, उनकी सेवा करो, यही जीवन का यथार्थ है।
राजकुमार का शिक्षा प्रकल्प देखकर चकित हूं
समय निकालकर आज पंडित विजय शंकर मेहता मड़वारानी के पास खरहरकुड़ा स्थित नितेश कुमार मेमोरियल लायंस पब्लिक स्कूल पहुंचे और वहां का निरीक्षण कर काफी प्रभावित हुए। कथा स्थल पर उन्होंने कहा-राजकुमार का शिक्षा प्रकल्प देखकर चकित हूं। वहां गरीब और ग्रामीण बच्चों को शिक्षा देकर राजकुमार ने सबसे बड़ा काम का उदाहरण दिया है, यही धन का सच्चा सदुपयोग है। पंडित विजय शंकर मेहता ने करीब एक घंटा बच्चों को मोटीवेट किया और कहा- अभी जितनी मेहनत करोगे, आगे चलकर भविष्य उज्ज्वल बना सकोगे। 29 अगस्त को कथा वाचक राजसूय यज्ञ, सुदामा चरित्र की कथा सुनाएंगे।

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कोरबा

श्रद्धा महिला मंडल, एसईसीएल बिलासपुर द्वारा वृद्धाश्रम में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन

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बिलासपुर/कोरबा। श्रद्धा महिला मंडल, एसईसीएल बिलासपुर द्वारा दिनांक 08 जून 2026 को माता रानी की कुटिया वृद्धाश्रम में निवासरत वृद्ध महिलाओं के लिए एक निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया।

यह कार्यक्रम श्रद्धा महिला मंडल की अध्यक्षा एवं एसईसीएल परिवार की प्रथम महिला श्रीमती शशि दुहन के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ।

इस अवसर पर मंडल की आदरणीय उपाध्यक्षगण भी उपस्थित रहीं। सभी ने वृद्धाश्रम में रह रही वृद्धजनों से आत्मीय संवाद कर उनका कुशलक्षेम जाना तथा उनका उत्साहवर्धन किया।

शिविर में* डॉ पारुली साहू एवं उनकी टीम द्वारा 25 वृद्धजनों का स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक परामर्श एवं मार्गदर्शन प्रदान किया* गया। शिविर में रक्तचाप (BP), नाड़ी (Pulse), CBC, RBS, HbA1c, लिवर प्रोफाइल, किडनी प्रोफाइल एवं लिपिड प्रोफाइल सहित विभिन्न जांचें निःशुल्क की गईं। स्वास्थ्य परीक्षण के उपरांत जरूरतमंद महिलाओं को निःशुल्क दवाइयों का वितरण किया गया।

कार्यक्रम के दौरान श्रीमती शशि दुहन ने वृद्धाश्रम की महिलाओं को हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया तथा उनके स्वास्थ्य की नियमित देखभाल हेतु प्रतिमाह स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित करने की घोषणा की।
शिविर के उपरांत वृद्धाश्रम में निवासरत 25 बुजुर्गों को पौष्टिक नाश्ता एवं फल की टोकरियाँ वितरित की गईं, जिससे उनके प्रति स्नेह, सम्मान एवं अपनत्व का भाव व्यक्त किया जा सके।
इस सेवा कार्य में समिति की सदस्याओं ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई।
यह स्वास्थ्य शिविर श्रद्धा महिला मंडल की सामाजिक सेवा, करुणा एवं जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्धता का एक सराहनीय प्रयास रहा, जिससे वृद्धाश्रम की महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ प्राप्त हुआ तथा उनमें सुरक्षा एवं अपनत्व की भावना का संचार हुआ।

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कोरबा

क्षतिग्रस्त और अधूरी पुलिया-एप्रोच रोड से बारिश में आवाजाही होगी बाधित, ग्रामीणों को घूमकर जाना पड़ेगा

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कोरबा। क्षतिग्रस्त व अधूरी पुलिया-एप्रोच रोड से बारिश में फिर से आवाजाही बाधित होगी। इससे उपनगर बांकीमोंगरा, हरदीबाजार, चैतमा के ग्रामीणों को वैकल्पिक सड़क से घूमकर जाना पड़ेगा। बारिश में संपर्क टूटने पर स्कूली छात्रों, कामकाजी लोगों को सबसे अधिक परेशानी होगी, जो सड़क मार्ग से रोज आवाजाही करनी पड़ती है। हरदीबाजार से नेवसा, उतरदा, सिल्ली, बोईदा, निरतु की ओर आवाजाही के लिए लीलागर नदी पर बनी पुरानी पुलिया की ऊंचाई कम है। 24 घंटे से भी कम बारिश में नदी का जलस्तर बढ़ने पर पुलिया के ऊपर से पानी बहता है। इससे गांवों को संपर्क टूटने पर सबसे अधिक परेशानी नेवसा समेत आसपास गांवों के स्कूली छात्रों को होती है, जो हरदीबाजार व दीपका के स्कूलों में पढ़ाई करते हैं। यह सड़क हरदीबाजार को बलौदा सीपत व मस्तूरी से भी जोड़ती है, इस कारण यात्री बसें भी मार्ग से गुजरती है।

हरदीबाजार से नेवसा की दूरी लीलागर नदी का पुलिया पारकर 2 किलोमीटर है। वहीं रतिजा की ओर से बायपास सड़क से आवाजाही पर 5 किलोमीटर दूरी पड़ेगी। पुलिया की कम ऊंचाई के मद्देनजर नया पुल का निर्माण कराया है, जो बनकर तैयार हो गया है, लेकिन पुल के दोनों ओर की एप्रोच रोड अब तक नहीं बनाया है। सड़क पर मिट्‌टी पड़ी है। नौतपा की विदाई से मानसून भी अब करीब है। आने वाले दिनों प्री-मानसून बारिश की संभावना है। एप्रोच रोड को पुल के लेवल के हिसाब से निर्माण नहीं कराने पर वाहनों से आवाजाही मुश्किल होगी। पिछले साल बारिश में पश्चिम क्षेत्र बांकीमोंगरा के + लीलागर नदी पर निर्मित पुल का अधूरा एप्रोच रोड।

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कोरबा

लो वोल्टेज और कटौती पर ग्रामीणों का हल्लाबोल

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कोरबा/पाली। 5 ग्राम पंचायतों में बिजली आपूर्ति की लचर व्यवस्था पर ग्रामीणों ने पाली सब स्टेशन कार्यालय में जमकर नारेबाजी की। लगभग 2 घंटे धरना देने के बाद पुलिस शासन की मौजूदगी में सब स्टेशन के बिजली अफसरों के साथ परिसर में ही वार्ता हुई। इसके बाद ग्रामीणों का आंदोलन समाप्त हुआ। सब स्टेशन कार्यालय के निकट से ग्रामीणों ने रैली की शक्ल में बिजली दफ्तर पहुंचे। इस दौरान गांवों में बिजली कटौती व लो वोल्टेज का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने कहा कि अनाफ-शनाफ बिजली बिल भेजा रहा है। खराब पड़े ट्रांसफार्मर को बदलने में ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

सिल्ली, परसदा, शिवपुर, निरधी, पोलमी पंचायत के गांवों के हजारों उपभोक्ता लो वोल्टेज व बिजली कटौती से परेशान हैं। कई बार मौखिक व लिखित शिकायत के बाद भी अफसरों ने ध्यान नहीं दिया। दफ्तर परिसर में ग्रामीणों के साथ बिजली अधिकारियों की वार्ता हुई। उनकी बिजली संबंधी समस्याओं के निराकरण का भरोसा दिलाया। इसके बाद ग्रामीणों ने आंदोलन स्थगित कर दिया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर यदि 10 दिनों के भीतर समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया तो चक्काजाम आंदोलन करने मजबूर होंगे।

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