विदेश
चीन ने अमेरिका तक मार करने वाली मिसाइलें दिखाईं:विक्ट्री डे परेड में माओ जैसी ड्रेस में पहुंचे राष्ट्रपति जिनपिंग, कहा- हम डरते नहीं, आगे बढ़ते हैं
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5 months agoon
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Divya Akashबीजिंग,एजेंसी। दूसरे विश्व युद्ध में जापान की हार के 80 साल पूरे होने पर चीन में बुधवार को विक्ट्री डे परेड मनाया गया। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने राजधानी बीजिंग के थियानमेन चौक पर परेड की सलामी ली। जिनपिंग के भाषण के बाद सैन्य परेड निकाली गई।
जिनपिंग ने कहा कि चीन किसी की धमकियों से नहीं डरता और हमेशा आगे बढ़ता रहता है। उन्होंने लोगों से इतिहास याद रखने और जापान के खिलाफ लड़ने वाले सैनिकों को सम्मान देने की अपील की।
BBC ने बताया कि परेड में हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल्स, YJ-21 एंटी-शिप क्रूज मिसाइल और JL-3 पनडुब्बी से छोड़ी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल शामिल थी।
वहीं DF-5C न्यूक्लियर इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल का एडवांस वर्जन 6F भी दिखाया गया। यह मिसाइल अमेरिका तक मार सकती है।
चीन की विक्ट्री डे परेड की तस्वीरें…
1. जिनपिंग का रौब

राष्ट्रपति जिनपिंग ने विक्ट्री डे परेड का निरीक्षण किया। शी जिनपिंग ने माओ-स्टाइल सूट पहनी हुई थी। उन्होंने मेड इन चाइना रेड फ्लैग लिमोजीन की खुली छत से खड़े होकर सेना का निरीक्षण किया।

परेड की शुरुआत से पहले जिनपिंग ने भाषण दिया।

परेड में जिनपिंग के साथ उनकी पत्नी, दाईं तरफ पुतिन और बायीं तरफ किम जोंग उन दिखाई दिए।
2. परेड में सैनिकों का मार्च

परेड में शामिल चीनी नौसेना के जवान।

परेड में शामिल चीनी महिला सैनिकों का दस्ता।

परेड के लिए मार्च करते पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के सैनिक।

परेड में 100+ हथियार, 45+ सैन्य टुकड़ियां और 100+ विमान हुए। सभी हथियार स्वदेशी हैं, जो चीन की सैन्य ताकत और तकनीक को दिखाते हैं।
3. हथियारों का प्रदर्शन

बीजिंग के आसमान में चीनी झंडा लिए हेलीकॉप्टरों का एक बेड़ा भी उड़ान भर रहा था। वे ‘80’ की आकृति बनाते हुए उड़ रहे थे।

चीन ने अपने ड्रोन हथियारों का प्रदर्शन किया।

चीन ने YJ-21 हाइपरसोनिक एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइल का प्रदर्शन किया।

चीन ने परेड में अपनी DF-61 मिसाइलें दिखाईं।
4. परेड से इतर मुलाकातें

व्लादिमीर पुतिन और किम जोंग-उन पूर्व सैनिकों के साथ हाथ मिलाते हुए।

किम जोंग उन के साथ उनकी बेटी किम जू आए भी चीन पहुंची हैं। जू को किम जोंग उन का उत्तराधिकारी माना जाता है।
यह चीन की अब तक की सबसे बड़ी सैन्य परेड है। परेड से पहले शी जिनपिंग के साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन समेत दुनिया के 25 देशों के नेता मंच पर दिखाई दिए।
रिपोर्ट्स के मुताबिक बीजिंग इस परेड के जरिए यह साबित किया कि वह अमेरिका का विकल्प है और दुनिया में गैर-पश्चिमी देशों का नेतृत्व करने की ताकत रखता है।
भारत के पड़ोस से पाकिस्तानी PM शहबाज शरीफ, पाकिस्तानी आर्मी चीफ असीम मुनीर, नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली और मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू परेड में मौजूद रहे।

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अमेरिका ने इंडियन मैप वाला पोस्ट हटाया:PoK-अक्साई चिन को भारत का हिस्सा दिखाया था, पाकिस्तान-चीन से तनाव की अटकलें लगी थीं
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1 hour agoon
February 11, 2026By
Divya Akashवॉशिंगटन डीसी,एजेंसी। अमेरिका ने बुधवार को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और अक्साई चिन (चीन के कब्जे वाला इलाका) को भारत का हिस्सा दिखाने वाला पोस्ट डिलीट कर दिया है।
यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने 7 फरवरी को भारत-अमेरिका के बीच हुए ट्रेड एग्रीमेंट के बाद किए गए पोस्ट में इंडियन मैप शेयर किया था। जारी होने के बाद यह नक्शा चर्चा में आ गया था।
अब तक अमेरिकी एजेंसियां इंडियन मैप में PoK और अक्साई चिन को विवादित इलाके के तौर पर अलग रंग या ‘डॉटेड लाइन्स’ से दिखाती थी। हालांकि, इस पोस्ट में ऐसा कोई निशान या लाइन नहीं थी, बल्कि पूरे क्षेत्र को भारत का अभिन्न हिस्सा दिखाया गया था।
इस बदलाव के बाद कई एक्सपर्ट का कहना था कि पाकिस्तान और चीन के साथ अमेरिका के रिश्तों में तनाव के बीच यह कदम भारत के समर्थन का संकेत हो सकता है। वहीं, कुछ लोगों ने इसे गलती से जारी हुआ बताया। इन तमाम अटकलों के बीच अब USTR ने यह पोस्ट हटा दिया है। हालांकि, इस पर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
अमेरिका ने यह इंडियन मैप शेयर किया था…

अमेरिकी ट्रेड ऑफिस ने यह इंडियन मैप अंतरिम व्यापार समझौते के फ्रेमवर्क के ऐलान के साथ पोस्ट किया था, जिसे अब हटा दिया गया है।
PoK को लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच लंबे समय से विवाद
भारत और पाकिस्तान के बीच PoK विवाद जम्मू-कश्मीर क्षेत्र से जुड़ा सबसे पुराना विवाद है। यह 1947 से चला आ रहा है और दोनों देशों के बीच युद्ध, तनाव और कूटनीतिक लड़ाई का कारण बना हुआ है।
विवाद की शुरुआत
- 1947: भारत-पाकिस्तान विभाजन- भारत के विभाजन के समय जम्मू-कश्मीर एक रियासत (प्रिंसली स्टेट) थी, जिसके महाराजा हरि सिंह हिंदू थे, लेकिन आबादी में मुस्लिम बहुमत में थे। विभाजन के नियम के अनुसार, रियासतें भारत या पाकिस्तान में शामिल हो सकती थीं या स्वतंत्र रह सकती थीं।
- 1947-48: पहला भारत-पाकिस्तान युद्ध- पाकिस्तान से आए मिलिशिया ने कश्मीर पर हमला किया। महाराजा हरि सिंह ने मदद के लिए भारत से संपर्क किया और 26 अक्टूबर 1947 को इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन (विलय पत्र) पर हस्ताक्षर किए, जिससे जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा बन गया। भारत ने सैन्य मदद भेजी।युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने क्षेत्र के पश्चिमी और उत्तरी हिस्से पर कब्जा कर लिया, जिसे अब PoK कहा जाता है। 1949 में UN की मध्यस्थता से युद्धविराम हुआ और सीजफायर लाइन (बाद में लाइन ऑफ कंट्रोल – LoC) बनाई गई, जो दोनों देशों के नियंत्रण को अलग करती है।
- भारत का दावा- भारत कहता है कि पूरा जम्मू-कश्मीर (PoK सहित) उसका अभिन्न अंग है, क्योंकि महाराजा ने भारत में विलय किया था। 2019 में अनुच्छेद 370 हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। भारत PoK को अवैध कब्जा मानता है और इसे वापस लेने की बात करता है।
- पाकिस्तान का दावा- पाकिस्तान कहता है कि कश्मीर मुस्लिम बहुल क्षेत्र है, इसलिए वह पाकिस्तान का हिस्सा होना चाहिए। पाकिस्तान PoK को आजाद कश्मीर कहता है और वहां अपनी तरह की सरकार चलाता है। पाकिस्तान UN के पुराने प्रस्तावों का हवाला देता है, जिसमें कश्मीरियों को जनमत संग्रह का अधिकार देने की बात थी।
पाकिस्तानी PM बोले थे- कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा बनेगा
अमेरिका के मैप शेयर करने से पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 5 फरवरी को बयान जारी कर कहा था कि कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा बनेगा।
शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान कश्मीरियों के साथ मजबूती से खड़ा है और जम्मू-कश्मीर विवाद का हल कश्मीर के लोगों की इच्छा के मुताबिक होना चाहिए। शहबाज ने कहा कि जम्मू-कश्मीर विवाद का समाधान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों को लागू करने से ही हो सकता है।
उन्होंने कहा, ‘मैं पाकिस्तानी लोगों और पाकिस्तानी नेतृत्व की ओर से कश्मीर के अपने भाइयों के साथ एकजुटता दिखाने आया हूं।’ उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने इस क्षेत्र को पाकिस्तान की लाइफ लाइन बताया था।
शहबाज बोले- कश्मीर का मुद्दा हमारी फॉरेन पॉलिसी की नींव है
शहबाज शरीफ ने कहा कि कश्मीर का मुद्दा पाकिस्तान की फॉरेन पॉलिसी का आधार है। शहबाज ने भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए चार दिवसीय सैन्य संघर्ष को भी याद किया। उन्होंने दावा किया कि इस संघर्ष के बाद कश्मीर मुद्दा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी ताकत के साथ उठाया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भारत अब प्रॉक्सी के जरिए आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। पाकिस्तान, मिलिटेंट ग्रुप बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) को भारत का समर्थन मिलने का दावा करता है, जबकि भारत ऐसे आरोपों को हमेशा खारिज करता रहा है।

देश
अब रूस नहीं, अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदेगा भारत:दावा- सरकारी कंपनियों को अमेरिकी क्रूड लेने को कहा, ट्रेड डील के बाद फैसला
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1 hour agoon
February 11, 2026By
Divya Akashनई दिल्ली,एजेंसी। भारत सरकार ने देश की सरकारी तेल रिफाइनरी कंपनियों से कहा है कि वे अब अमेरिका और वेनेजुएला से ज्यादा कच्चा तेल खरीदने पर विचार करें। अमेरिकी मीडिया ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है।
ब्लूमबर्ग के मुताबिक, अमेरिका के साथ हुई हालिया ट्रेड डील के बाद भारत सरकार ने यह अनुरोध किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रेड डील के ऐलान के दौरान कहा था कि भारत ने रूसी तेल का आयात पूरी तरह बंद करने का वादा किया है।
प्राइवेट डील के जरिए क्रूड मंगाने की तैयारी
सरकार ने कंपनियों से कहा है कि जब भी टेंडर के जरिए स्पॉट मार्केट से तेल खरीदें, तो अमेरिकी तेल को प्राथमिकता दें। सरकार ने वेनेजुएला के कच्चे तेल को लेकर भी ऐसा अनुरोध किया है। हालांकि वेनेजुएला का तेल व्यापारियों के साथ प्राइवेट बातचीत से मंगाया जाएगा।
सरकार बोली- देश की ऊर्जा सुरक्षा पहले
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि भारत व्यापार समझौते के हिस्से के रूप में रूसी कच्चा तेल लेना बंद करने पर सहमत हो गया है। हालांकि, भारत ने अब तक सार्वजनिक रूप से इस दावे पर सीधा कोई जवाब नहीं दिया है। भारत का कहना रहा है कि वह अपने तेल के स्रोतों में विविधता ला रहा है और देश की ऊर्जा सुरक्षा उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
अमेरिकी तेल मंगाने में 2 बड़ी चुनौतियां
विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय रिफाइनरीज के लिए अमेरिकी और वेनेजुएला का तेल बड़े पैमाने पर लेना इतना आसान नहीं है। इसकी दो मुख्य वजहें हैं:
- रिफाइनिंग क्षमता: भारत की ज्यादातर रिफाइनरीज ‘मीडियम क्रूड’ के हिसाब से बनी हैं, जबकि अमेरिकी तेल ‘लाइट और स्वीट’ यानी कम सल्फर वाला होता है। इसे प्रोसेस करना भारतीय यूनिट्स के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं है।
- लागत और मालभाड़ा: अमेरिका से भारत की दूरी बहुत ज्यादा है। बढ़ते फ्रेट रेट्स (मालभाड़ा) के कारण वहां से तेल मंगाना महंगा पड़ता है। इसकी तुलना में कजाकिस्तान और पश्चिम अफ्रीका से तेल मंगाना सस्ता और नजदीक पड़ता है।
सरकारी कंपनियों ने 40 लाख बैरल क्रूड मंगाया
हाल ही में सरकारी कंपनियों जैसे IOC, BPCL और HPCL ने वेनेजुएला से करीब 40 लाख बैरल तेल खरीदा है। निकोलस मादुरो सरकार पर अमेरिकी नियंत्रण के बाद अब विटोल और ट्रेफिगुरा जैसी बड़ी कंपनियां वेनेजुएला के तेल की मार्केटिंग कर रही हैं। निजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी रिलायंस ने भी 2025 के मध्य के बाद पहली बार वेनेजुएला से तेल की खेप खरीदी है।
अमेरिका से तेल का आयात लगभग दोगुना करने का लक्ष्य
भारतीय रिफाइनर हर साल अमेरिका से करीब 4 लाख बैरल प्रतिदिन तेल ले सकते हैं। यह पिछले साल के 2.25 लाख बैरल प्रतिदिन के मुकाबले काफी ज्यादा होगा।
हालांकि, ये कीमत और रूस के साथ कूटनीतिक संबंधों पर टिका है। फिलहाल पेट्रोलियम मंत्रालय और सरकारी तेल कंपनियों ने इस मामले में आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।
भारत ने 2019 के बाद वेनेजुएला से तेल लेना बंद कर दिया था
अमेरिका ने 2019 में वेनेजुएला पर सेंक्शंस लगा दिए थे। इस वजह से भारत समेत कई देशों ने वेनेजुएला का तेल खरीदना बंद कर दिया था। वेनेजुएला पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (OPEC) का सदस्य है। उसके पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, लेकिन वह वैश्विक सप्लाई का करीब 1% ही देता है।
भारत ने 2024 में दोबारा वेनेजुएलाई तेल खरीदना शुरू किया
अमेरिका ने कुछ समय के लिए (2023-2024 में) वेनेजुएला पर आंशिक रूप से सेंक्शंस ढीले किए, जिससे भारत ने फिर से वेनेजुएला से तेल खरीदा।
- 2024 में भारत का आयात औसतन 63,000 से 1 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया।
- 2025 में वेनेजुएला से भारत का तेल आयात बढ़कर करीब 1.41 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
- मई 2025 में अमेरिका ने एक बार फिर से वेनेजुएला के तेल पर सख्ती बढ़ा दी।

विदेश
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री बोले- अमेरिका ने हमारा इस्तेमाल किया:मतलब निकलने पर टॉयलेट पेपर की तरह फेंका, साथ देने की कीमत आज भी चुका रहे
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2 hours agoon
February 11, 2026By
Divya Akashइस्लामाबाद,एजेंसी। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बुधवार को संसद में कहा कि अमेरिका ने अपने फायदे के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल किया और काम निकलने के बाद उसे टॉयलेट पेपर की तरह फेंक दिया। पाकिस्तान रक्षा मंत्री ने कहा,
हमने अफगानिस्तान में दो जंग लड़ीं। इसमें इस्लाम और मजहब के नाम पर हिस्सा लिया, लेकिन असल में दो सैन्य तानाशाहों (जिया-उल-हक और परवेज मुशर्रफ) ने वैश्विक ताकत का समर्थन पाने के लिए ऐसा किया।
उन्होंने 1979 में सोवियत संघ के हस्तक्षेप का जिक्र करते हुए कहा कि यह कदम अफगान सरकार के न्योते पर उठाया गया था, लेकिन अमेरिका ने इसे सीधा हमला बताकर अपनी तरह से नरेटिव तैयार किया।
आसिफ ने पाकिस्तान की अमेरिका के साथ 1999 के बाद हुई नई रणनीतिक साझेदारी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 11 सितंबर 2001 के हमलों के बाद अमेरिका के साथ खड़े होने की कीमत पाकिस्तान आज भी चुका रहा है।
आसिफ बोले- पाकिस्तान ने इतिहास से सबक नहीं सीखा
आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान ने इतिहास से सबक नहीं सीखा और अपने छोटे फायदे के लिए कभी अमेरिका, कभी रूस और कभी ब्रिटेन की ओर झुकता रहा। उन्होंने कहा कि अब इन देशों का यहां पहले से ज्यादा प्रभाव है, जो 30-40 साल पहले नहीं था।
उन्होंने यह भी माना कि पाकिस्तान का आतंकी इतिहास रहा है। आसिफ ने कहा कि अफगानिस्तान की दो जंगों में शामिल होना पाकिस्तान की बड़ी भूल थी और आज देश में जो आतंकवाद है, वह उन्हीं गलतियों का नतीजा है।
आसिफ बोले- जंग को सही ठहराने के लिए एजुकेशन सिस्टम में बदलाव किए
आसिफ ने कहा कि हम अपने इतिहास और गलतियों को स्वीकार नहीं करते। आज का आतंकवाद उन्हीं डिक्टेटरों की गलतियों का नतीजा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को जो नुकसान हुआ, उसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती।
ख्वाजा आसिफ ने यह भी दावा किया कि इन जंगो को सही ठहराने के लिए पाकिस्तान की एजुकेशन सिस्टम में जानबूझकर बदलाव किए गए। उनके मुताबिक, यह बदलाव आज भी सिस्टम में मौजूद हैं।
आसिफ ने बिल क्लिंटन के दौरे का जिक्र किया
उन्होंने साल 2000 में अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की इस्लामाबाद की कुछ घंटों की यात्रा का जिक्र किया। क्लिंटन भारत दौरे के बाद थोड़े समय के लिए पाकिस्तान आए थे।
आसिफ ने कहा कि इससे साफ दिखता है कि दोनों देशों का रिश्ता सिर्फ मतलब तक सीमित हो गया था। उस समय अमेरिका ने सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ पर लोकतंत्र, परमाणु प्रसार और आतंकवाद को लेकर दबाव डाला था।
2000 में पाकिस्तान का प्रधानमंत्री कोई नहीं था, क्योंकि उस समय देश में सैन्य शासन चल रहा था। नवंबर 1997 से अक्टूबर 1999 तक नवाज शरीफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री थे।
12 अक्टूबर 1999 को जनरल परवेज मुशर्रफ ने तख्तापलट करके नवाज शरीफ की सरकार को हटा दिया और खुद चीफ एक्जीक्यूटिव बन गए। 1999 के बाद से 2002 तक पाकिस्तान में कोई निर्वाचित प्रधानमंत्री नहीं था।
मुशर्रफ ने सत्ता संभाली और 2002 में चुनाव करवाए, जिसके बाद जफरुल्लाह खान जमाली प्रधानमंत्री बने।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ बिल क्लिंटन। तस्वीर- 4 जुलाई, 1999 की है।
शिया मस्जिद पर हमले की निंदा की
यह बयान उस समय आया जब संसद ने इस्लामाबाद की शिया मस्जिद में हुए हमले के खिलाफ निंदा का प्रस्ताव पास किया। 6 फरवरी को नमाज के दौरान हुए इस आत्मघाती हमले में 31 लोगों की मौत हो गई और 169 लोग घायल हुए। इस हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट समूह ने ली है।
आसिफ ने राजनीतिक एकता की अपील की और कहा कि आतंकवाद की निंदा जैसे मुद्दे पर भी एकजुटता नहीं दिख रही। उन्होंने कहा कि देश की एक ऐसी पहचान होनी चाहिए जिस पर कोई मतभेद न हो और उन लोगों की आलोचना की जो राजनीतिक कारणों से पीड़ितों के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुए।

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 6 फरवरी को जुमे की नमाज के दौरान शिया मस्जिद में आत्मघाती हमला हुआ था।
अमेरिकी विदेश मंत्री बोले थे- भारत की कीमत पर पाकिस्तान से दोस्ती नहीं
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हाल ही में को कहा था कि अमेरिका, पाकिस्तान के साथ अपने रिश्ते को मजबूत करना चाहता है, लेकिन भारत की कीमत पर नहीं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रुबियो ने बताया था कि अमेरिका और पाकिस्तान पहले से ही आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करते रहे हैं, लेकिन इससे भारत के साथ उसकी अच्छी दोस्ती को कोई नुकसान नहीं होगा।
जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत ने अमेरिका-पाकिस्तान की नजदीकी पर चिंता जताई, तो रुबियो ने कहा कि भारतीय डिप्लोमेसी में समझदारी है। वे जानते हैं कि हमें कई देशों से रिश्ते रखने पड़ते हैं। उनके भी कुछ देशों से रिश्ते हैं। यह समझदारी भरी विदेश नीति का हिस्सा है।


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