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ओली के बाद नेपाल की सत्ता पर किसका कब्जा:रैपर बालेन शाह और पूर्व जज सुशीला कार्की बड़े दावेदार, राजा ज्ञानेंद्र की वापसी भी मुमकिन

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काठमांडू,एजेंसी। नेपाल इस समय अपने सबसे बड़े नागरिक आंदोलन से गुजर रहा है। भ्रष्टाचार और शासन से नाराज जनता ने सरकार का तख्तापलट कर दिया। नतीजा यह हुआ कि प्रधानमंत्री ओली को इस्तीफा देकर भागना पड़ा।

राजनीतिक संकट गहराने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि देश की बागडोर किसके हाथ में होगी। इस आंदोलन में 5 चेहरों की चर्चा हो रही है, जिनके बारे में माना जा रहा है कि वे अंतरिम प्रधानमंत्री हो सकते हैं…

सुशीला कार्की- भ्रष्टाचार विरोधी चेहरा

सुशीला कार्की को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख रखने के लिए जाना जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शिक्षक के रूप में की और बाद में जज बनीं। जब सुशीला 2016 में नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस बनीं, तो यह अपने आप में ऐतिहासिक था।

एक साल बाद 2017 में उन पर संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया। आरोप लगाया गया कि वे फैसलों में राजनीतिक दबाव के खिलाफ खड़ी हो रही हैं और न्यायपालिका की आजादी का गलत इस्तेमाल कर रही हैं।

असल में, नेताओं को डर था कि अगर कार्की कोर्ट में ऐसे ही सख्ती दिखाती रहीं, तो उनकी राजनीति और सत्ता को बड़ा नुकसान हो सकता है। इसलिए उन्होंने संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाकर उन्हें पद से हटाने की कोशिश की।

महाभियोग प्रस्ताव आने के बाद सैकड़ों छात्र, महिलाएं और आम लोग काठमांडू की सड़कों पर उतर आए। सुप्रीम कोर्ट ने भी एक ऐतिहासिक आदेश देकर कहा कि जब तक महाभियोग की सुनवाई पूरी नहीं होती, तब तक सुशीला कार्की को काम करने से नहीं रोका जा सकता।

रिटायरमेंट के बाद सुशीला कार्की सरकार के खिलाफ कई आयोजनों में शामिल होती दिखीं।

रिटायरमेंट के बाद सुशीला कार्की सरकार के खिलाफ कई आयोजनों में शामिल होती दिखीं।

जून 2017 में उनकी रिटायरमेंट से सिर्फ एक दिन पहले संसद ने महाभियोग प्रस्ताव वापस ले लिया गया। अब 8 साल बाद वे पीएम बनने की सबसे बड़ी दावेदार कही जा रही हैं।

बालेन शाह- रैपर से काठमांडू के मेयर

काठमांडू के मेयर बनने से पहले बालेंद्र शाह, जिन्हें लोग बालेन के नाम से जानते हैं, नेपाल के अंडरग्राउंड हिप-हॉप सीन में दिखते थे। कभी छतों पर रैप बैटल करते, तो कभी म्यूजिक वीडियो बनाते। उनके गानों में गरीबी, पिछड़ापन और भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाए जाते थे।

इन्हीं गीतों ने उन्हें युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया। उनके रैप में अक्सर नेताओं की बेइज्जती की जाती थी, लेकिन तब लोग चौंक गए जब बालेन ने मई 2022 में काठमांडू से मेयर पद के लिए चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया।

बालेन काले ब्लेजर, काली जींस और काले धूप के चश्मे में प्रचार करने जाते, जिसकी खूब चर्चा हुई। निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले सिर्फ 33 साल के बालेन ने बड़े-बड़े दिग्गजों को चुनाव में हरा दिया। वह न‍िर्दलीय उम्‍मीदवर बनकर मेयर का चुनाव जीतने वाले पहले शख्स बने।

नेपाल में काठमांडू के मेयर की हैसियत कई केंद्रीय मंत्री से भी अधिक मानी जाती है। ऐसे में इस जीत की चर्चा सिर्फ नेपाल में नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में हुई। साल 2023 में टाइम मैगजीन ने उन्हें दुनिया के टॉप 100 प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया। न्यूयॉर्क टाइम्स ने उनकी प्रोफाइल स्टोरी की।

बालेन शाह ने आम नेताओं के विपरीत ब्लैक ब्लेजर, ब्लैक चश्मा और ब्लैक पैंट में प्रचार किया।

बालेन शाह ने आम नेताओं के विपरीत ब्लैक ब्लेजर, ब्लैक चश्मा और ब्लैक पैंट में प्रचार किया।

बालेन की जीत को नेपाल में ‘बालेन इफेक्ट’ कहा गया। इसका असर ये हुआ कि नवंबर 2022 में होने वाले आम चुनाव में युवा निर्दलीय उम्मीदवारों की एक लहर पैदा हो गई। बिजनेस, डॉक्टर, एयरलाइन जैसे चमकदार पेशा छोड़ युवा राजनीति में उतर आए।

सबने वादा किया कि वे उस पुराने, भ्रष्ट राजनीतिक वर्ग का मुकाबला करेंगे, जिस पर दशकों से बुज़ुर्ग नेताओं का कब्जा है। छह महीने बाद हुए चुनाव में इसका असर भी दिखा। संसद में 25 युवा नेता आए।

बालेन शाह पर यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि वे युवाओं को गुमराह कर सरकार के खिलाफ भड़का रहे हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर उनकी अपार लोकप्रियता बताती है कि बहुत सारे युवा उन्हें अगला प्रधानमंत्री मानने लगे हैं।

रबि लामिछाने- प्रदर्शनकारियों ने जेल से आजाद कराया

लामिछाने नेपाल के युवाओं में बेहद लोकप्रिय हैं। वे पहले टीवी पत्रकार थे और भ्रष्ट नेताओं से सीधे और कठिन सवाल पूछने के अंदाज से मशहूर हुए। उन्होंने 2013 में 62 घंटे से ज्यादा लगातार टॉक शो चलाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। फिर ‘सिद्ध कुरा जनता संग’ जैसे कार्यक्रमों से भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता की आवाज बन गए।

2022 में उन्होंने टीवी छोड़ राजनीति में कदम रखा और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी बनाई। उनकी पार्टी ने चुनाव में 20 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया। खुद उन्होंने भी बड़ी जीत दर्ज की और कुछ ही महीनों बाद उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री बने।

रबि लामिछाने ने पहली बार पार्टी बनाई और चुनाव लड़े। उनकी पार्टी को 20 सीटें मिलीं।

रबि लामिछाने ने पहली बार पार्टी बनाई और चुनाव लड़े। उनकी पार्टी को 20 सीटें मिलीं।

लेकिन सफलता ज्यादा देर नहीं टिकी। जनवरी 2023 में उनकी नागरिकता पर सवाल उठे। आरोप था कि अमेरिकी नागरिकता छोड़ने के बाद उन्होंने नेपाली नागरिकता दोबारा सही तरीके से नहीं ली। सुप्रीम कोर्ट ने उनका चुनाव रद्द कर दिया और वे मंत्री पद से हट गए। हालांकि बाद में उन्होंने औपचारिकताएं पूरी कीं और फिर से उपचुनाव जीता, इस बार और भी बड़े अंतर से।

लेकिन विवाद उनका पीछा नहीं छोड़ते। कभी पत्रकार की आत्महत्या के लिए जिम्मेदार ठहराए गए, कभी दोहरे पासपोर्ट रखने के आरोप लगे, कभी सरकारी अनुबंधों में गड़बड़ी के। उन पर यह भी आरोप लगा कि उनके फाउंडेशन ने अस्पतालों के लिए मिलने वाली रकम का दुरुपयोग किया।

सबसे गंभीर मामला तब आया जब उन्हें सहकारी धोखाधड़ी केस में फंसा दिया गया। अप्रैल 2025 में उच्च न्यायालय के आदेश के बाद उनकी गिरफ्तारी हुई और सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी हिरासत बरकरार रखी, यह कहते हुए कि सबूतों से छेड़छाड़ का खतरा है।

वह जेल में मुकदमे का इंतजार कर ही रहे थे कि देश में भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों की लहर उठी और लोगों ने उन्हें जबरन जेल से आजाद करा लिया। अब उन्हें भी सत्ता का दावेदार माना जा रहा है।

कुलमान घिसिंग- नेपाल में बिजली की समस्या खत्म की

कुलमान घिसिंग को नेपाल में बिजली कटौती की समस्या को खत्म करने के लिए जाना जाता है। साल 2016 में जब वे नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (NEA) के मैनेजिंग डायरेक्टर बने तो देश में बिजली की समस्या आम थी। 18-18 घंटे तक बिजली की कटौती होती थी। अगले 2 साल में ही उन्होंने पूरे देश में बिजली की समस्या को लगभग खत्म कर दिया।

उनकी इस उपलब्धि के चलते उन्हें ‘उज्यालो नेपाल का अभियंता’ यानी कि नेपाल को रोशनी की राह दिखाने वाला कहा जाने लगा। कुलमान की लीडरशिप में नेपाल ने 2023-24 में भारत को बिजली निर्यात करना शुरू किया। उन्होंने पहली बार NEA को घाटे से निकालकर मुनाफा दिलाया।

मार्च 2025 में सरकार ने कुलमान को अचानक बर्खास्त कर दिया। दरअसल, उन्होंने उद्योगपतियों का 24 अरब रुपए का बकाया बिजली बिल माफ करने से इनकार किया था। इससे नाराज होकर सरकार ने उनके खिलाफ एक्शन लिया था। उनकी बर्खास्तगी को लेकर बहुत विवाद हुआ। इससे देशभर में उनकी लोकप्रियता बढ़ी।

कुलमान की बर्खास्तगी के बाद देशभर में उनके समर्थन में विरोध प्रदर्शन हुए।

कुलमान की बर्खास्तगी के बाद देशभर में उनके समर्थन में विरोध प्रदर्शन हुए।

इसके बाद उन्होंने ‘उज्यालो नेपाल’ अभियान शुरू किया, इससे युवाओं का रुझान उनकी तरफ हुआ। उन्होंने 2025 में बहरीन, यूएई, और कतर की यात्रा की और प्रवासी नेपालियों का समर्थन जुटाया। अब वे भी नेपाल के अंतरिम पीएम के दावेदार हैं।

सन्दुक रुइट- जेन जी आंदोलन के समर्थक

सन्दुक रुइट नेपाल के मशहूर नेत्र विशेषज्ञ हैं। रुइट ने छोटे चीरे वाली मोतियाबिंद सर्जरी शुरू की थी, इससे सर्जरी का खर्च कम हुआ। इस तरीके को दुनियाभर के देशों में अपनाया गया। इसके बाद वे ‘गॉड ऑफ साइट’ यानी ’दृष्टि के देवता’ नाम से मशहूर हुए।

रुइट ने 1994 में तिलगंगा नेत्र विज्ञान संस्थान की स्थापना की थी जो हर हफ्ते 2500 मरीजों का इलाज करता है। इसमें 40% सर्जरी मुफ्त है। उन्होंने अपने करियर में मोतियाबिंद सर्जरी करके 1.8 लाख लोगों की आंखों की रोशनी लौटाई है।

सन्दुक रुइट की लोकप्रियता दुनियाभर में है।

सन्दुक रुइट की लोकप्रियता दुनियाभर में है।

ऑस्ट्रेलिया, बहरीन और भारत जैसे देशों में उनके संपर्क हैं, जो उनकी अंतरराष्ट्रीय छवि को मजबूत बनाते हैं। हालांकि रुइट ने कभी कोई राजनीतिक पद नहीं संभाला है। 2023 में उन्हें राष्ट्रपति बनाने की चर्चा थी, इस पर उन्होंने कहा था कि राष्ट्रपति का पद मेरे लिए नहीं है। सन्दुक ने जेन जी आंदोलन को समर्थन दिया है।

डॉ. रुइट को रेमन मैग्सेसे पुरस्कार (2006), पद्म श्री (2018), ईसा पुरस्कार (2023), भूटान का राष्ट्रीय मेरिट पुरस्कार (2015), नेपाल का राष्ट्रीय प्रतिभा पुरस्कार (2019) जैसे सम्मान मिल चुके हैं।

ज्ञानेंद्र शाह- नेपाल के आखिरी राजा

ज्ञानेंद्र शाह 1950-51 में महज 3 साल की उम्र में पहली बार राजा बने थे। उस समय उनके दादा त्रिभुवन भारत भाग गए थे और शाही परिवार संकट में था। तब राणा शासकों ने छोटी उम्र के ज्ञानेंद्र को गद्दी पर बिठा दिया ताकि आसानी से शासन चलाया जा सके। हालांकि कुछ ही महीनों बाद त्रिभुवन वापस लौटे और वे फिर से राजा बने।

इसके बाद ज्ञानेंद्र लंबे समय तक परछाईं में ही रहे। 1 जून 2001 को शाही नरसंहार में उनके बड़े भाई राजा बीरेंद्र, महारानी ऐश्वर्या और शाही परिवार के कई सदस्य मारे गए। इस त्रासदी के बाद अचानक ज्ञानेंद्र शाह को नेपाल की गद्दी संभालनी पड़ी। यही पल उनकी दूसरी और सबसे बड़ी राजनीतिक वापसी का जरिया बना।

नेपाल में 2008 में 240 साल पुरानी राजशाही को समाप्त कर दिया गया और लोकतंत्र बहाल हुआ। ज्ञानेंद्र को राजमहल खाली करना पड़ा। इसके बाद ज्ञानेंद्र लंबे समय तक खामोश रहे, लेकिन हाल के वर्षों में फिर चर्चा में आए।

ज्ञानेंद्र शाह को फिर से राजा बनाए जाने की मांग पिछले 2 साल से चल रही है।

ज्ञानेंद्र शाह को फिर से राजा बनाए जाने की मांग पिछले 2 साल से चल रही है।

लोकतंत्र से निराश खासकर हिंदू राष्ट्रवादी संगठनों ने उन्हें प्रतीक बनाकर राजशाही की वापसी की मांग तेज कर दी है। उनकी रैलियों में नारे लगते हैं—“राजा आओ, देश बचाओ।” अब ओली सरकार के पतन और मौजूदा राजनीतिक संकट के बीच उन्हें अगला पीएम दावेदार माना जाने लगा है।

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अमेरिकी रियल एस्टेट कंपनी Opendoor का भारत से एग्जिट, 250 कर्मचारियों होंगे प्रभावित

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मुंबई, एजेंसी। अमेरिका की डिजिटल रियल एस्टेट कंपनी ओपनडोर (Opendoor) भारत में अपना कामकाज बंद करने का ऐलान किया है। कंपनी के इस फैसले से भारतीय दफ्तरों में काम करने वाला करीब 250 कर्मचारियों की नौकरी चली जाएगी। कंपनी के सीईओ काज नेजैटियन ने अपने सोशल मीडिया पर और कर्मचारियों को भेजे गए संदेश में इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कंपनी अपनी बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन स्ट्रेटेजी के तहत ऑपरेशनल रोल्स को अमेरिका में अपने ग्राहकों के करीब ले जा रही है।

कर्मचारियों को भेजे गए ईमेल में कंपनी ने कहा, ”कंपनी बीते कुछ महीनों से अपने ऑपरेशनल रोल्स को वापस अमेरिका में शिफ्ट कर रही थी। इस नए कदम से ये प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और ओपनडोर का भारत में कामकाज बंद हो जाएगा।” नेजैटियन ने कर्मचारियों को भेजे गए इस ईमेल को भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया है।

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AI और तकनीकी बदलाव बने वजह

कंपनी का कहना है कि ओपनडोर के अधिकांश ग्राहक अमेरिका में हैं इसलिए ग्राहक सहायता और परिचालन गतिविधियों को वहीं से संचालित करना अधिक प्रभावी रहेगा। कंपनी ने पहले कई मैनुअल वर्कफ्लो को मैनेज करने के लिए भारत में एक बड़ी टीम बनाई थी लेकिन टेक्नोलॉजी में सुधार और AI-इनेबल्ड टीमें आने से इन कामों को विदेश में रखने की जरूरत कम हो गई है।

सीईओ ने भारत में कर्मचारियों के योगदान की तारीफ की

काज नेजैटियन ने अपने नोट में लिखा, ”आज हमने भारत में अपने सहयोगियों को अलविदा कहना शुरू कर दिया, क्योंकि हम भारत में अपना कामकाज बंद कर रहे हैं।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ये फैसला भारत में काम करने वाली टीम के परफॉर्मेंस से जुड़ा नहीं था। उन्होंने भारत में कर्मचारियों के योगदान की तारीफ की और उन्हें टैलेंटेड प्रोफेशनल बताया, जो दूसरी कंपनियों के लिए भी बहुत काम के साबित होंगे।

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अमेरिका में मोदी की धूम: PM मोदी के रिकॉर्ड कार्यकाल की अमेरिकी नेताओं ने की जमकर तारीफ

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वॉशिंगटन, एजेंसी।  भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले चुने हुए प्रधानमंत्री बनने के मील के पत्थर को हासिल करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिकी सांसदों, बिजनेस लीडर्स और भारतीय समुदाय के प्रमुख सदस्यों ने तारीफ़ की है। उन्होंने भारत की वैश्विक स्थिति को बदलने और अमेरिका के साथ संबंधों को मजबूत करने का श्रेय मोदी के नेतृत्व को दिया।
अमेरिकी सीनेटर जॉन कॉर्निन ने बधाई देने की शुरुआत की और मोदी को पद पर 4,399 दिन पूरे करने पर बधाई दी।

कॉर्निन ने कहा, “प्रधानमंत्री @narendramodi को भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले चुने हुए प्रधानमंत्री बनने पर बधाई – तीन लोकतांत्रिक जनादेशों के ज़रिए 1.4 अरब लोगों का भरोसा जीतकर 4,399 दिनों का नेतृत्व किया।” उन्होंने आगे कहा, “25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने से लेकर भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनाने तक, PM मोदी का कार्यकाल बदलाव लाने वाला रहा है। अमेरिका-भारत साझेदारी पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत हुई है।”

इंडियन अमेरिकन CEO काउंसिल के सह-संस्थापक और टेक्सास इकोनॉमिक डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के चेयरमैन अरुण अग्रवाल ने कहा कि यह मील का पत्थर पिछले बारह वर्षों में भारत में आए बदलाव पर विचार करने का मौका देता है। अग्रवाल ने इस मौके पर लिखे एक लेख में कहा, “2026 का भारत 2014 का भारत नहीं है।” उन्होंने कहा कि “इस बात से इनकार करना मुश्किल है कि आज भारत एक दशक पहले की तुलना में वैश्विक मंच पर ज़्यादा मज़बूती से खड़ा है, ज़्यादा मुखर है और ज़्यादा ध्यान आकर्षित करता है।” भारत को अब केवल संभावनाओं वाले देश के रूप में नहीं, बल्कि तेज़ी से उन संभावनाओं को हकीकत में बदलने वाले देश के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा, “कई दशकों तक, भारत को अक्सर भारी क्षमता वाले देश के रूप में वर्णित किया जाता था। आज, इसे तेज़ी से उस क्षमता को साकार करने वाले देश के रूप में देखा जा रहा है।”

उन्होंने कहा कि पिछले बारह वर्षों को संभवतः उस दौर के रूप में याद किया जाएगा जिसने “भारत के उत्थान को गति दी और भारत क्या हासिल कर सकता है, इस बारे में वैश्विक धारणा को बदल दिया।” पालो ऑल्टो नेटवर्क्स के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी निकेश अरोड़ा ने भी मोदी को इस उपलब्धि पर बधाई दी। अरोड़ा ने लिखा, “प्रधानमंत्री @narendramodi को भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले चुने हुए प्रधानमंत्री बनने पर बधाई – तीन लोकतांत्रिक जनादेशों के ज़रिए 1.4 अरब लोगों का भरोसा जीतकर 4,399 दिनों का नेतृत्व किया।” उन्होंने कहा, “25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने से लेकर भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने तक, पीएम मोदी का कार्यकाल बदलाव लाने वाला रहा है। हम अमेरिका-भारत की लगातार जारी रहने वाली साझेदारी की उम्मीद करते हैं।”

अमेरिकी गायिका और भारत की समर्थक मैरी मिलबेन ने इस मौके को “एक महान देश की यात्रा में एक ऐतिहासिक, लोकतांत्रिक मील का पत्थर” बताया। उन्होंने कहा, “आज, मैं अपने दोस्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड बनाने पर दिल से बधाई देती हूं।” “आपकी मज़बूत लीडरशिप, 140 करोड़ भारतीयों की तरक्की, एकता और उम्मीदों के प्रति आपकी अटूट प्रतिबद्धता, और साथ ही एक मज़बूत भारत के लिए आपकी पक्की सोच ने बदलाव के एक दौर को आकार देने में मदद की है।” मिलबेन ने नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच रिश्तों को आगे बढ़ाने में मोदी की भूमिका की भी तारीफ़ की।

उन्होंने कहा, “मैं अमेरिका-भारत संबंधों को आगे बढ़ाने में आपकी लीडरशिप का सम्मान करती हूं। आपने कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों के कार्यकाल देखे हैं-कुछ के साथ आपके बहुत अच्छे संबंध रहे और दूसरों के प्रति आपने बहुत शालीनता दिखाई-फिर भी आप स्पष्ट कूटनीति अपनाने में कभी नहीं डगमगाए, जिससे भारतीय लोगों के हितों और हमारे दोनों देशों की भलाई को बढ़ावा मिला।”

इस उपलब्धि को आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बताते हुए उन्होंने आगे कहा, “अब, भारत के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेता के तौर पर, आपने पीढ़ियों को बड़े सपने देखने, कड़ी मेहनत करने और मातृभूमि की शान बढ़ाने में योगदान देने के लिए प्रेरित किया है।” 

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मॉरीशस की मोदी के 12 साल के रिकॉर्ड पर की बड़ी टिप्पणीः ‘सलाम…आप ग्लोबल साउथ की सबसे बुलंद आवाज’

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नई दिल्ली, एजेंसी। भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi के लगातार 12 वर्ष पूरे कर देश के सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर दुनिया भर से बधाइयों का सिलसिला जारी है। इसी कड़ी में मॉरीशस के विदेश मंत्री Dhananjay Ramful ने उनकी इस उपलब्धि को भारतीय जनता के अटूट विश्वास का प्रतीक बताया है।

‘भारत को बदलने वाले नेता हैं मोदी’
एएनआई को दिए एक विशेष साक्षात्कार में रामफुल ने कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि मोदी को यह सम्मान इसलिए मिला है क्योंकि भारत की जनता ने लगातार उन पर भरोसा जताया है। रामफुल के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी केवल भारत के नेता नहीं बल्कि एक वैश्विक नेता हैं, जिन्होंने देश के विकास और परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मॉरीशस के विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में ऐसे कार्यक्रम शुरू किए, जिनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की नीतियों में समावेशी विकास की स्पष्ट झलक दिखाई देती है और यही उनकी लोकप्रियता का बड़ा कारण है।

‘ग्लोबल साउथ की आवाज बने मोदी’
रामफुल ने प्रधानमंत्री मोदी को वैश्विक दक्षिण (Global South) का मजबूत प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा विकासशील देशों की चिंताओं और समस्याओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रमुखता से उठाया। उन्होंने विशेष रूप से भारत की G20 अध्यक्षता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह विकासशील देशों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था।  रामफुल ने कहा कि मॉरीशस को G20 की बैठकों में आमंत्रित करना और African Union को G20 का स्थायी सदस्य बनाने में भारत की भूमिका इस बात का प्रमाण है कि मोदी केवल वादे नहीं करते, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारते भी हैं।

भारत-मॉरीशस संबंधों को नई मजबूती
विदेश मंत्री ने भारत और Mauritius के बीच मजबूत होते संबंधों का श्रेय भी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व को दिया। उन्होंने 2015 में मॉरीशस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू किए गए SAGAR (Security and Growth for All in the Region) मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पहल ने हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग को नई दिशा दी। रामफुल ने कहा कि भारत मॉरीशस का एक भरोसेमंद विकास साझेदार रहा है। हाल ही में मॉरीशस के प्रधानमंत्री Navin Ramgoolam की भारत यात्रा के दौरान नई वित्तीय सहायता की घोषणा की गई। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की मदद से मॉरीशस में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं पूरी हुई हैं, जिनमें मेट्रो एक्सप्रेस और आधुनिक ईएनटी अस्पताल जैसी प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ती भारत की ताकत
प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्षीय कार्यकाल को भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका, आर्थिक विकास और कूटनीतिक प्रभाव के दौर के रूप में देखा जा रहा है। मॉरीशस के विदेश मंत्री की यह टिप्पणी भी इसी बात को रेखांकित करती है कि भारत अब केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर प्रभावशाली भूमिका निभाने वाला देश बन चुका है।

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