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छत्तीसगढ़

Modi@75… नरेन्द्र मोदी युगांतरकारी नेतृत्व के प्रतीक

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आज नरेंद्र मोदी का नाम विश्व के शीर्ष नेताओं में गिना जाता है। टाइम और फोर्ब्स जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाएँ उन्हें दुनिया के सबसे शक्तिशाली व्यक्तियों की सूची में शामिल करती हैं। अमेरिका, रूस, फ्रांस, जापान जैसे देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनके व्यक्तिगत रिश्ते भारत की कूटनीति को नई ऊँचाइयों तक ले गए हैं।

नरेंद्र मोदी आज केवल भारत के प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि वैश्विक परिदृश्य के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व भारतीय लोकतंत्र की गौरवगाथा को नई ऊँचाइयों तक ले गया है। साधारण परिवार में जन्मा एक बालक, जिसने जीवन के संघर्षों को तपस्या की तरह जिया, आज विश्व राजनीति ही नहीं, सम्पूर्ण मानवता का मार्गदर्शक बन गया है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि यदि व्यक्ति में अटूट परिश्रम, कर्मनिष्ठा और राष्ट्रनिष्ठा का अदम्य संकल्प हो, तो वह इतिहास की धारा को भी मोड़ सकता है। नरेंद्र मोदी का उदय किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि भर नहीं है, बल्कि यह भारत की जाग्रत चेतना और आत्मविश्वास का प्रतीक है। इक्कीसवीं सदी के भाल पर अपने कर्त्तृत्व की जो अमिट रेखाएं उन्होंने खींची हैं, वे विश्व राजनीति, मानवता एवं राष्ट्रीयता के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगी। राजनीति-क्रांति के साथ-साथ वे व्यक्ति-क्रांति एवं समाज-क्रांति के सूत्रधार है। उनके विराट व्यक्तित्व को किसी उपमा से उपमित करना उनके व्यक्तित्व को ससीम बनाता है। उनके लिये तो इतना ही कहा जा सकता है कि वे अनिर्वचनीय हैं। इस वर्ष उनका 75वां जन्मोत्सव मनाते हुए समूचा राष्ट्र अपूर्व गर्व और गौरव की अनुभूति कर रहा है।

मोदी का व्यक्तित्व अनेक विलक्षणताओं का समवाय है, वह कठोर परिश्रम और मिशनरी दृष्टिकोण का जीवंत उदाहरण है। उनके दिन और रात का प्रत्येक क्षण राष्ट्र के लिए समर्पित रहता है। वे चौबीस घंटे भारत के लिए जीते हैं और योजनाओं को केवल कागजों पर नहीं छोड़ते, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारते हैं। उनका मंत्र “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” केवल राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि भारत के सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन को नई दिशा देने वाला दर्शन है। उन्होंने राजनीति को सत्ता की होड़ से निकालकर सेवा और राष्ट्रनिर्माण का साधन बना दिया। काल के अनंत प्रवाह में 75 वर्षों का मूल्य बहुत नगण्य होता है, पर मोदी ने उद्देश्यपूर्ण जीवन जीकर जो ऊंचाइयां और उपलब्धियां हासिल की हैं, वे किसी कल्पना की उड़ान से भी अधिक है। अपने जीवन के सार्थक प्रयत्नों से उन्होंने इस बात को सिद्ध किया है कि साधारण पुरुष वातावरण से बनते हैं, किन्तु महामानव वातावरण बनाते हैं। समय और परिस्थितियां उनका निर्माण नहीं करती, वे स्वयं समय और परिस्थितियों का निर्माण करते हैं। साधारण पुरुष जहां अवसर को खोजते रहते हैं, वहां महापुरुष नगण्य अवसरों को भी अपने कर्तृत्व की छेनी से तराश कर महान् बना देते हैं।

नरेन्द्र मोदी का जन्म एवं पालन-पोषण वडनगर, बॉम्बे राज्य (वर्तमान गुजरात) में 17 सितंबर 1950 को हुआ। जहाँ उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा पूरी की। आठ साल की उम्र में उनका आरएसएस से परिचय हुआ और वे 1971 में गुजरात में संगठन के पूर्णकालिक कार्यकर्ता बन गए। और 1998 में महासचिव बने। वे भारतीय राजनीति के जुझारू, कर्मठ एवं जीवट वाले नेता हैं जो 2014 से भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यरत हैं। मोदी 2001 से 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और वाराणसी से सांसद हैं। इस वर्ष अपने 75वें जन्मदिन पर मोदी मध्य प्रदेश के धार जिले के भैंसोला गांव में रहेंगे। इस दिन प्रधानमंत्री मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड एपेरल पार्क का भूमि पूजन करेंगे। कपास आधारित उद्योगों पर आधारित यह पार्क 6 लाख किसानों को फायदा देगा। इसके अलावा स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान का शुभारंभ करेंगे, इस अभियान का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत कर उनकी पहुंच को बेहतर करना, गुणवत्तापूर्वक देखभाल और जागरूकता सुनिश्चित करना है। इसके अलावा महिलाओं के लिए कई अन्य योजनाओं की भी शुरुआत होगी।

मोदी के नेतृत्व में भारत ने जिन उपलब्धियों को हासिल किया है, वे युगांतरकारी कही जा सकती हैं। आर्थिक क्षेत्र में जीएसटी, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया जैसी योजनाओं ने देश को नई गति दी। सामाजिक क्षेत्र में स्वच्छ भारत अभियान, उज्ज्वला योजना, जन धन योजना, आयुष्मान भारत जैसी पहल ने करोड़ों गरीबों को सम्मानजनक जीवन का आधार दिया। राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक ने भारत की नई आक्रामक और निर्णायक छवि प्रस्तुत की। इन सबके बीच सबसे महत्वपूर्ण यह रहा कि मोदी ने भारतीय समाज में आत्मविश्वास का संचार किया और यह भावना मजबूत की कि भारत अब किसी से पीछे नहीं रहेगा। वैश्विक मंच पर नरेंद्र मोदी ने भारत की प्रतिष्ठा को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया। संयुक्त राष्ट्र महासभा में उनके विचार, जी-20 शिखर सम्मेलन में भारत की अध्यक्षता, कोप-26 जैसे पर्यावरण मंचों पर उनकी स्पष्ट प्रतिबद्धता, विश्व को यह संदेश देती है कि भारत अब केवल दर्शक नहीं, बल्कि निर्णायक भूमिका निभाने वाला राष्ट्र है। कोविड महामारी के दौरान वैक्सीन मैत्री योजना ने यह सिद्ध कर दिया कि भारत अपनी सीमाओं से परे जाकर पूरी मानवता के लिए सोचता है। यही कारण है कि आज भारत को विश्वगुरु की भूमिका निभाने वाला देश माना जाने लगा है और नरेंद्र मोदी इस नई पहचान के प्रेरक बने हैं।

मेरे लिए भी नरेंद्र मोदी का व्यक्तित्व केवल दूर से देखने का विषय नहीं रहा, बल्कि उनके साथ जुड़े अनेक आत्मीय अनुभव आज भी मेरे जीवन की स्मृतियों में ताज़ा है। वर्ष 2007 में जब मैं सुखी परिवार फाउंडेशन के महामंत्री के रूप में कार्य कर रहा था, तब गुजरात के आदिवासी अंचल कवांट में एक विशाल आदिवासी सम्मेलन गणि राजेन्द्र विजयजी के नेतृत्व में हमने आयोजित किया था। उस सम्मेलन में नरेंद्र मोदी स्वयं पधारे थे। उस समय वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे और कार्यक्रम में उपस्थित आदिवासी समाज की ऊर्जा और उत्साह के बीच गणि राजेन्द्र विजयजी ने बड़ी आत्मीयता से उनको कहा था-“अब आप दिल्ली चलो।” गणिजी का यह वाक्य केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी धर्मगुरु की अंतरदृष्टि थी, जो बाद में सार्थक भी हुई। गणि राजेंद्र विजयजी के प्रभाव से उस सम्मेलन में करीब डेढ़ लाख आदिवासी एकत्र हुए थे और मोदीजी ने उस सम्मेलन को जिस संवेदनशीलता और गंभीरता से संबोधित किया, वह उनकी लोकमंगलकारी दृष्टि और आदिवासी समाज के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का प्रमाण था। मेरे लिए यह केवल एक व्यक्तिगत संस्मरण नहीं, बल्कि इस बात का साक्षात अनुभव है कि मोदीजी किस तरह जीवन के हर स्तर पर मिलने वाले लोगों और परिस्थितियों को दूरगामी दृष्टि से देखते हैं और उनमें राष्ट्र निर्माण की संभावनाएँ खोजते हैं।

मोदीजी के व्यक्तित्व का एक बड़ा पक्ष मानवीय संवेदनाओं से भरा हुआ है। चाहे गरीबों को पक्का मकान उपलब्ध कराना हो, किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाना हो, बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करना हो या स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएँ आम जन तक पहुँचाना हो, मोदी का हर कदम जीवन को सरल और सम्मानजनक बनाने पर केंद्रित है। वे न्यूनतम सरकार और अधिकतम शासन के सिद्धांत पर चलते हुए प्रशासन को अधिक सक्षम और प्रभावी बनाते हैं। उनका नेतृत्व केवल आधुनिकता और विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति और अध्यात्म से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। उनके प्रयासों से योग को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली और 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का निर्णय हुआ। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम और केदारनाथ धाम का पुनरुद्धार उनके सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और आस्था के प्रति गहरे सम्मान को प्रकट करता है। इस प्रकार वे आधुनिक भारत और प्राचीन भारत की आत्मा के बीच एक सेतु का कार्य करते हैं।

आज नरेंद्र मोदी का नाम विश्व के शीर्ष नेताओं में गिना जाता है। टाइम और फोर्ब्स जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाएँ उन्हें दुनिया के सबसे शक्तिशाली व्यक्तियों की सूची में शामिल करती हैं। अमेरिका, रूस, फ्रांस, जापान जैसे देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनके व्यक्तिगत रिश्ते भारत की कूटनीति को नई ऊँचाइयों तक ले गए हैं। आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, शांति और विकास जैसे मुद्दों पर उनकी स्पष्ट और निर्णायक आवाज़ आज पूरी दुनिया सुनती है। उनका 75वां जन्मोत्सव केवल एक व्यक्ति के जीवन का उत्सव नहीं है, बल्कि उस युगांतरकारी यात्रा का प्रतीक है जिसने भारत को नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर किया है। वे उस नेतृत्व के धनी हैं जिसने भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए हैं। कठोर परिश्रम, राष्ट्रनिष्ठा और मिशनरी दृष्टि से ओतप्रोत नरेंद्र मोदी भारतीय राजनीति का ही नहीं, विश्व राजनीति का भी स्वर्णिम अध्याय हैं। आने वाला समय इस बात का साक्षी बनेगा कि उनका नेतृत्व न केवल एक नए भारत का निर्माण करेगा, बल्कि विश्व को भी शांति, सहयोग और विकास का नया मार्ग दिखाएगा।

– ललित गर्ग , Agency

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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में दो दिन में 9 करोड़ का गांजा पकड़ाया:लग्जरी कारों-बसों से हो रही तस्करी, रायगढ़, मनेंद्रगढ़ और सूरजपुर में कार्रवाई

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रायगढ़/मनेंद्रगढ़, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में पिछले 2 दिनों में कुल 8 करोड़ 65 लाख रुपए का गांजा पकड़ा गया है। अलग-अलग जिलों में लग्जरी कारों और बसों के जरिए से इसकी तस्करी हो रही थी।

शुक्रवार को 2 अलग-अलग कार्रवाई में कारों से गांजा मिला। रायगढ़ जिले में करीब 300 किलो गांजा मिला, जिसकी कीमत 1 करोड़ 50 लाख रुपए है।

मनेंद्रगढ़ में 6 क्विंटल गांजा पकड़ा गया, जिसकी कीमत करीब 3 करोड़ रुपए हैं। एक दिन पहले सूरजपुर जिले में पुलिस ने बस से 4.15 करोड़ के गांजे की गठरियां पकड़ी थीं। जिनका वजन 8 क्विंटल 30 किलो था।

रायगढ़ में 2 लग्जरी कारों से करीब 300 किलो गांजा बरामद हुआ।

रायगढ़ में 2 लग्जरी कारों से करीब 300 किलो गांजा बरामद हुआ।

मनेंद्रगढ़ में 6 क्विंटल गांजा पकड़ाया, जिसकी कीमत करीब 3 करोड़ रुपए हैं।

मनेंद्रगढ़ में 6 क्विंटल गांजा पकड़ाया, जिसकी कीमत करीब 3 करोड़ रुपए हैं।

सूरजपुर में बस में मिली थी गांजे की गठरियां।

सूरजपुर में बस में मिली थी गांजे की गठरियां।

केस 1- रायगढ़ में लग्जरी कारों में मिला गांजा

जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार (5 जून) सुबह पुलिस को सूचना मिली कि, ओडिशा के सोनपुर इलाके से गांजे की बड़ी खेप 2 सफेद कारों में भरकर मध्यप्रदेश के अनूपपुर ले जाई जा रही है।

सूचना मिलने के बाद पुलिस ने अलग-अलग रास्तों पर नाकेबंदी कर चेकिंग शुरू की। इसी दौरान कटकलिया मार्ग पर एक इनोवा क्रिस्टा और एक मारुति सुजुकी XL-6 को रोककर जांच की।

जांच के दौरान पुलिस ने देखा कि इनोवा क्रिस्टा में दो नंबर प्लेट लगी हुई थीं। गाड़ी में ओडिशा नंबर प्लेट OD-10-H-0050 के नीचे छत्तीसगढ़ नंबर CG-13-BY-6540 की दूसरी नंबर प्लेट लगी थी। इससे पुलिस को शक हुआ, जिसके बाद वाहन में सवार युवकों से पूछताछ शुरू की गई।

कार में मिला 300 किलो गांजा

इसके बाद पुलिस ने आरोपियों के दोनों कारों की तलाशी ली। जांच के दौरान दोनों वाहनों से करीब 300 किलो गांजा मिला। जब्त गांजा की कीमत बाजार में लगभग 1 करोड़ 50 लाख रुपए है।

1 करोड़ 86 लाख की संपत्ति जब्त

पुलिस तीनों आरोपियों को हिरासत में लेकर थाने पहुंची। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे गांजा की यह खेप मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले में अपने साथियों तक पहुंचाने जा रहे थे।

इसके बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। पुलिस ने उनके पास से 300 किलो गांजा, दो कारें और पांच मोबाइल फोन जब्त किए हैं। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 1 करोड़ 86 लाख रुपए बताई जा रही है।

पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(b) और 29 के तहत मामला दर्ज किया है। फिलहाल मामले की जांच और आगे की कार्रवाई जारी है।

रायगढ़ पुलिस ने कार सवार 3 तस्करों को गिरफ्तार किया।

रायगढ़ पुलिस ने कार सवार 3 तस्करों को गिरफ्तार किया।

आरोपियों को किया गिरफ्तार

धर्मेंद्र मौर्य (27) निवासी अनूपपुर (मध्यप्रदेश)

निखिल कश्यप (23) निवासी रामानुजगंज

रिंकु कश्यप (28) निवासी सरगुजा

केस 2 – मनेंद्रगढ़ में 3 करोड़ का गांजा पकड़ाया

मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के नागपुर चौकी क्षेत्र में पुलिस ने 2 कारों से करीब 6 क्विंटल गांजा जब्त किया है। जिसकी कीमत करीब 3 करोड़ बताई जा रही है। पुलिस को देखते ही तस्कर गाड़ी छोड़कर भाग गए।

पुलिस गाड़ी नंबरों के आधार पर फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि गांजा किस स्थान से लाया जा रहा था और इसे कहां पहुंचाया जाना था।

सूरजपुर में बस में गांजा भरकर तस्करी हो रही थी।

सूरजपुर में बस में गांजा भरकर तस्करी हो रही थी।

केस 3 – सूरजपुर में बस से पकड़ाया 4 करोड़ का गांजा

सूरजपुर जिले में गुरुवार को पुलिस ने बस से 4.15 करोड़ का गांजा जब्त किया था। 8 क्विंटल 30 किलो गांजा कपड़ों की गठरियों में छिपाकर रखा गया था। बस के जरिए झाड़ू बेचने की आड़ में गांजा कटनी भेजा जा रहा था। बस में महिला और पुरुष सवार थे।

पुलिस ने ड्राइवर समेत 6 महिलाओं को गिरफ्तार किया है। महिलाओं के साथ 4 दुधमुंहे बच्चे भी थे। मामले में 18 से 19 अन्य आरोपी फरार हैं। उनकी तलाश के लिए पुलिस की अलग-अलग टीमें जुटी हुई हैं। मामला जयनगर थाना क्षेत्र का है।

ड्राइवर ने कहा कि किसी बाबू ने बस अंबिकापुर के कालीघाट से बुक की थी। सामान मध्य प्रदेश के कटनी जिले के पिपरिया कला ले जाया जा रहा था। कालीघाट से करीब 20-22 लोग बस में बैठे थे।

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कोरबा

हर पौधा बनेगा एक स्मृति, हर वृक्ष रचेगा हरित विरासत की नई कहानीः सीईओ राजेश कुमार सिंह

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बालकोनगर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बालको टाउनशिप में ‘स्मृति उद्यान’ का शुभारंभ किया। बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक राजेश कुमार सिंह ने फीता काटकर इसका उद्घाटन किया। इसके उपरांत 100 से अधिक प्रतिभागियों ने अमलतास के पौधे रोपे। इस अवसर पर बालको के वरिष्ठ अधिकारी, यूनियन के पदाधिकारी, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में उनके परिवारजन उपस्थित रहे।

‘स्मृति उद्यान’ केवल एक पौधारोपण पहल नहीं है, बल्कि एक ऐसा भावनात्मक मंच है, जहां प्रत्येक पौधा उन प्रियजनों को समर्पित किया गया जिन्होंने जीवन को प्रेम, मार्गदर्शन और प्रेरणा से समृद्ध किया। वृक्ष केवल प्रकृति का उपहार नहीं हैं, बल्कि जीवन, आशा और निरंतरता के प्रतीक भी हैं। आज लगाया गया एक पौधा आने वाले वर्षों में छाया, स्वच्छ वायु और पर्यावरण संरक्षण का माध्यम बनेगा।

बालको के सीईओ एवं निदेशक राजेश कुमार सिंह ने कहा, “स्मृति उद्यान हमारे प्रियजनों की यादों को प्रकृति के माध्यम से सहेजने का एक अनूठा प्रयास है। यहाँ लगाया गया प्रत्येक पौधा अपने साथ एक व्यक्तिगत कहानी, एक भावना और एक स्मृति लेकर बढ़ेगा। आज रोपे गए अमलतास के पौधे स्मरण और प्रकृति के बीच एक स्थायी संबंध का प्रतीक हैं। यह पहल केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरित एवं सस्टेनेबल भविष्य के निर्माण की दिशा में हमारा दीर्घकालिक निवेश है।”

स्मृति उद्यान विश्व पर्यावरण दिवस से प्रारंभ हुआ एक दीर्घकालिक अभियान है, जो आने वाले वर्षों तक लोगों की भावनाओं और प्रकृति को जोड़ता रहेगा। भविष्य में भी कर्मचारी, उनके परिवारजन एवं समुदाय के सदस्य अपने जीवन के विशेष अवसरों जैसे जन्मदिन, विवाह वर्षगाँठ, किसी उपलब्धि का उत्सव अथवा किसी प्रियजन की स्मृति पर यहाँ आकर पौधारोपण कर सकेंगे। आने वाले वर्षों में यह उद्यान कई कहानियों, स्मृतियों और वृक्षों का जीवंत संग्रह बन जाएगा।

स्मृति उद्यान में औषधीय गुणों से भरपूर अमलतास के पौधे लगाए गए हैं, जो आने वाले वर्षों में अपने आकर्षक सुनहरे पीले पुष्पों से टाउनशिप की सुंदरता को और बढ़ाएंगे। यह न केवल प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ाता है, बल्कि मधुमक्खियों एवं तितलियों जैसे परागणकर्ताओं को आकर्षित कर जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह वृक्ष पर्यावरणीय स्थिरता एवं जलवायु अनुकूलन के लिए भी उपयोगी माना जाता है।

कार्यक्रम के दौरान पौधारोपण में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाणपत्र तथा उनके घरों एवं आसपास लगाए गए पौधों की देखभाल को प्रोत्साहित करने के लिए जैविक खाद भी वितरित की गई।

स्मृति उद्यान के अलावा बीते तीन महीनों में बालको द्वारा टाउनशिप के विभिन्न हरित क्षेत्रों में लगभग 4,000 पौधों का रोपण किया गया है, जिनमें 2,000 बोगनवेलिया एवं 2,000 पेंसिलवेनिया के पौधे शामिल हैं। इस पहल ने टाउनशिप की हरियाली और सौंदर्य को और समृद्ध किया है। टाउनशिप में पहले से ही फॉरेस्ट वॉकवे, नेहरू गार्डन तथा अन्य प्रमुख हरित स्थल मौजूद हैं। बालको का यह सतत प्रयास पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सामुदायिक सहभागिता को एक साथ जोड़ते हुए एक हरित एवं टिकाऊ भविष्य के निर्माण की दिशा’ में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के उद्योगों पर पर्यावरण विभाग सख्त:94 को नोटिस जारी, 3.03 करोड़ का वसूला जुर्माना; रायपुर की हवा में 4% सुधार

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रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में प्रदूषण फैलाने वाले इंडस्ट्रीज पर पर्यावरण संरक्षण मंडल ने सख्ती बढ़ा दी है। पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन करने वाले इंडस्ट्रीज के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है।

जनवरी 2025 से मई 2026 के बीच रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने 94 इंडस्ट्रीज को नोटिस जारी किए हैं, जबकि 82 इंडस्ट्रीज के उत्पादन बंद करने और उनके बिजली कनेक्शन काटने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा 3.03 करोड़ रुपए का जुर्माना भी वसूला गया है। वहीं, राजधानी की हवा में लगभग 4 प्रतिशत सुधार दर्ज किया गया है।

पाल्यूशन फैलाने वाले उद्योगों पर पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारियों ने कार्रवाई की है।

पाल्यूशन फैलाने वाले उद्योगों पर पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारियों ने कार्रवाई की है।

इन जिलों में नियमित निगरानी

पर्यावरण संरक्षण मंडल के मुताबिक रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, धमतरी, महासमुंद और गरियाबंद जिलों के उद्योगों की लगातार जांच की जा रही है। जांच के दौरान जिन उद्योगों में हवा और पानी को प्रदूषित करने से जुड़े नियमों का उल्लंघन मिला, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।

यह कार्रवाई वायु प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम 1981 और जल प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम 1974 के तहत की गई।

रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने 94 इंडस्ट्रीज को नोटिस जारी किए हैं।

रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने 94 इंडस्ट्रीज को नोटिस जारी किए हैं।

इंडस्ट्रीज पर करोड़ों का जुर्माना

जांच में 96 इंडस्ट्रीज पर कुल 2 करोड़ 40 लाख 65 हजार रुपए से ज्यादा का पर्यावरण जुर्माना लगाया गया। इसके अलावा 136 उद्योगों और संस्थानों पर, जो बिना ढंके कच्चा माल, उत्पाद और कचरा ले जा रहे थे, उन पर 51 लाख रुपए से ज्यादा का जुर्माना लगाया गया।

फ्लाई ऐश के गलत तरीके से परिवहन और डंपिंग के मामले में 2 उद्योगों पर 12 लाख रुपए की अतिरिक्त पेनल्टी भी लगाई गई। इस तरह कुल जुर्माना 3 करोड़ 3 लाख रुपए से अधिक पहुंच गया है।

प्रदूषण फैलाने वाले इंडस्ट्रीज पर पर्यावरण संरक्षण मंडल ने सख्ती बढ़ा दी है।

प्रदूषण फैलाने वाले इंडस्ट्रीज पर पर्यावरण संरक्षण मंडल ने सख्ती बढ़ा दी है।

सिंगल-यूज प्लास्टिक पर भी कार्रवाई

पर्यावरण मंडल ने प्रतिबंधित सिंगल-यूज प्लास्टिक के निर्माण और इस्तेमाल के खिलाफ अभियान चलाया। इस दौरान एक उद्योग का उत्पादन बंद कराया गया और उस पर 87 हजार 500 रुपए का जुर्माना लगाया गया।

दूसरे उद्योग पर 6 लाख 25 हजार रुपए की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई गई। इसके अलावा दो अन्य इकाइयों का भी उत्पादन बंद करने की कार्रवाई की गई है।

रायपुर की हवा हुई बेहतर

पर्यावरण विभाग की सख्ती का असर रायपुर की हवा पर भी दिखा है। साल 2024 में रायपुर का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 65.38 था, जो 2025 में घटकर 62.86 हो गया। यानी शहर की हवा में करीब 4 प्रतिशत सुधार हुआ है। यह स्तर संतोषजनक श्रेणी में आता है।

पर्यावरण संरक्षण मंडल ने साफ किया है कि पर्यावरण नियमों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। आगे भी नियम तोड़ने वाले उद्योगों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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