खेल
मंधाना फास्टेस्ट वनडे सेंचुरी लगाने वाली भारतीय बनीं:50 गेंद पर शतक पूरा, ऑस्ट्रेलिया ने 413 रन का टारगेट दिया, मूनी ने 138 बनाए
नई दिल्ली,एजेंसी। स्मृति मंधाना ने वनडे क्रिकेट इतिहास में भारत से सबसे तेज सेंचुरी लगा दी है। नई दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में शनिवार को उन्होंने महज 50 गेंद पर शतक लगाया। विमेंस वनडे में उन्होंने खुद के ही 70 बॉल पर सेंचुरी के रिकॉर्ड को सुधारा। यह विमेंस वनडे में ओवरऑल दूसरा सबसे तेज शतक रहा। ऑस्ट्रेलिया की मेग लैनिंग 45 गेंद पर सेंचुरी लगा चुकी हैं।
इंडिया विमेंस फिलहाल ऑस्ट्रेलिया के सामने 413 रन के टारगेट का पीछा कर रही है। टीम ने 20 ओवर के बाद 2 विकेट खोकर 206 रन बना लिए हैं। प्रतिका रावल और हरलीन देओल के विकेट के बाद हरमनप्रीत कौर और स्मृति मंधाना ने भारत को संभाल लिया।
ऑस्ट्रेलिया ने पहले बैटिंग करते हुए 47.5 ओवर में 412 रन बना दिए। बेथ मूनी ने नहज 57 गेंद पर शतक लगाया। वहीं जॉर्जिया वोल ने 81 और एलिस पेरी ने 68 रन की पारी खेली। भारत से अरुंधत्ति रेड्डी ने 3 विकेट लिए। रेणुका ठाकुर और दीप्ति शर्मा ने 2-2 विकेट लिए।
मंधाना ने विराट कोहली का रिकॉर्ड तोड़ा
वनडे क्रिकेट में मेंस और विमेंस दोनों वर्ग में स्मृति मंधाना ने भारत से फास्टेस्ट सेंचुरी का रिकॉर्ड अपने नाम किया। उन्होंने मेंस टीम के विराट कोहली का रिकॉर्ड तोड़ा, जिन्होंने भी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ही 2013 में 52 गेंद पर शतक लगाया था।

स्मृति मंधाना ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज में लगातार दूसरी सेंचुरी लगाई।
भारत के खिलाफ पहली बार 400 रन बने
विमेंस क्रिकेट में भारत के खिलाफ पहली बार ही किसी टीम ने वनडे में 400 रन बनाए। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया ने ही भारत के खिलाफ 371 रन बनाए थे। ऑस्ट्रेलिया ने अपने बेस्ट स्कोर की बराबरी भी की, टीम ने 1997 के वर्ल्ड कप में डेनमार्क के खिलाफ भी 412 रन ही बनाए थे।
वोल ने 81, पेरी ने 68 रन बनाए
दिल्ली में ऑस्ट्रेलिया विमेंस ने टॉस जीतकर बैटिंग चुनी। कप्तान एलिसा हीली ने महज 18 गेंद पर 30 रन बना दिए। वे 5वें ओवर में आउट हुईं। उनके बाद जॉर्जिया वोल और एलिस पेरी ने सेंचुरी पार्टनरशिप की और टीम को 150 तक पहुंचा दिया।
वोल 68 बॉल पर 81 रन बनाकर आउट हुईं। उन्होंने अपनी पारी में 14 चौके लगाए। पेरी ने फिर नंबर-4 पर उतरीं बेथ मूनी के साथ पारी संभाली। दोनों के बीच भी सेंचुरी पार्टनरशिप हुईं, पेरी 68 रन बनाकर आउट हुईं। पेरी ने 7 चौके और 2 छक्के लगाए।

जॉर्जिया वोल ने 14 चौके लगाकर 81 रन बनाए।
मूनी ने 57 गेंद पर शतक लगाया
मूनी ने तेजी से बैटिंग की और महज 57 गेंद पर शतक लगा दिया। यह विमेंस वनडे में तीसरी सबसे तेज सेंचुरी की बराबरी रही। उनसे पहले ऑस्ट्रेलिया की ही कैरेन रोल्टन ने 2000 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ भी 57 गेंद पर ही शतक लगाया था। फास्टेस्ट सेंचुरी का रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया की ही पूर्व कप्तान मेग लैनिंग के नाम है। जिन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ महज 45 गेंद पर शतक लगा दिया था। मंधाना ने इसी मुकाबले में सेकेंड फास्टेस्ट सेंचुरी का रिकॉर्ड बनाया।

बेथ मूनी ने विमेंस वनडे में दूसरा सबसे तेज शतक लगाया।
आखिर में बिखर गई ऑस्ट्रेलिया विमेंस
मूनी ने एश्ले गार्डनर के साथ फिफ्टी पार्टनरशिप की और टीम को 300 के पार पहुंचाया। गार्डनर ने 24 गेंद पर 39 रन बनाए। उनके बाद ताहलिया मैक्ग्रा 14 ही रन बना सकीं। मूनी भी 75 गेंद पर 138 रन बनाकर आउट हुईं। वे 45वें ओवर में छठे विकेट के रूप में पवेलियन लौटीं। उनके बाद टीम ने 33 रन बनाने में ही आखिरी 4 विकेट गंवा दिए।
ऑस्ट्रेलिया विमेंस ने 47.5 ओवर में 412 रन बनाकर 10 विकेट भी गंवा दिए। भारत के लिए अरुंधत्ति रेड्डी ने 86 रन देकर 3 विकेट लिए। दीप्ति शर्मा और रेणुका ठाकुर को 2-2 विकेट मिले। क्रांति गौड़ और स्नेह राणा के हाथ 1-1 सफलता लगी। राधा यादव ने 4 ओवर में 48 रन दिए, लेकिन वे कोई विकेट नहीं ले सकीं।

इंडिया विमेंस ने 13 गेंद पहले ही ऑस्ट्रेलिया को ऑलआउट कर दिया।
ऑस्ट्रेलिया ने अपने बेस्ट स्कोर की बराबरी की
ऑस्ट्रेलिया विमेंस ने वनडे में दूसरी बार ही 400 रन का आंकड़ा पार किया। टीम 1997 में डेनमार्क के खिलाफ भी 412 रन ही बना चुकी हैं। विमेंस क्रिकेट में न्यूजीलैंड ने 4 और भारत ने 1 बार 400 से ज्यादा रन बनाए हैं। टॉप-3 स्कोर न्यूजीलैंड के नाम हैं। टीम ने 2018 में आयरलैंड के खिलाफ 491 रन बनाए थे, यह हाईएस्ट स्कोर है।
इंडिया विमेंस का बेस्ट स्कोर 435 रन है, भारत ने भी आयरलैंड के खिलाफ ही यह स्कोर बनाया था। आयरलैंड के खिलाफ विमेंस वनडे में सबसे ज्यादा 4 बार 400 से ज्यादा रन बने हैं। पाकिस्तान, भारत और डेनमार्क के खिलाफ 1-1 बार यह रिकॉर्ड बना।

ऑस्ट्रेलिया विमेंस ने दूसरी बार ही विमेंस वनडे में 400 रन का आंकड़ा पार किया।
मंधाना ने भारत के लिए फास्टेस्ट वनडे फिफ्टी लगाई
413 रन के टारगेट का पीछा करने उतरी इंडिया विमेंस को स्मृति मंधाना और प्रतिका रावल ने तेज शुरुआत दिलाई। दोनों ने 3.3 ओवर में 32 रन की पार्टरनशिप कर ली। प्रतिका 10 रन बनाकर आउट हुईं। मंधाना ने फिर हरलीन देओल के साथ फिफ्टी पार्टनरशिप कर स्कोर 80 के पार पहुंचा दिया। हरलीन 11 रन बनाकर आउट हुईं।
मंधाना ने तेजी से खेलना जारी रखा और महज 23 गेंद पर फिफ्टी लगा दी। यह भारत के लिए वनडे में सबसे कम गेंदों पर अर्धशतक का रिकॉर्ड है। मंधाना ने ऋचा घोष का रिकॉर्ड तोड़ा, जिन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ 2021 में 26 गेंद पर फिफ्टी लगा दी थी। इंटरनेशनल में यह रिकॉर्ड वेस्टइंडीज की डिएंड्रा डॉटिन के नाम है। जिन्होंने महज 20 गेंद पर श्रीलंका के खिलाफ फिफ्टी लगा रखी है।
शुरुआती 10 ओवर में भारत ने 2 विकेट खोकर 96 रन बनाए। यह पहले पावरप्ले में इंडिया विमेंस का हाईएस्ट स्कोर है। इससे पहले इसी साल टीम ने आयरलैंड के खिलाफ पावरप्ले-1 में 90 रन बनाए थे। मंधाना ने कप्तान हरमनप्रीत कौर के साथ पारी को संभाला।
कैंसर अवेयरनेस के लिए पिंक जर्सी पहनकर उतरी इंडिया विमेंस
इंडिया विमेंस टीम ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस के लिए आज पिंक कलर की जर्सी पहनकर खेलने उतरी। भारतीय क्रिकेट में पहली बार ही किसी भी वर्ग की टीम ने कैंसर अवेयरनेस के लिए इंटरनेशनल लेवल पर अलग जर्सी पहनी।

ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस के लिए इंडिया विमेंस टीम पिंक जर्सी पहनकर खेलने उतरी।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच फिलहाल वनडे सीरीज 1-1 से बराबर है। ऑस्ट्रेलिया विमेंस ने अब तीसरे मैच में 412 रन बनाकर भारत के सामने वर्ल्ड कप से पहले बड़ा टारगेट रख दिया।

खेल
कभी ‘पनौती’ कहकर हुई थीं ट्रोल, आज पति की ‘Lucky Charm’ बनीं अनुष्का शर्मा, 8 साल से फिल्मों से हैं दूर
अहमदाबाद, एजेंसी। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार खिलाड़ी विराट कोहली और बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा की जोड़ी देश की सबसे चर्चित जोड़ियों में से एक मानी जाती है। हाल ही में आईपीएल 2026 के फाइनल में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) की शानदार जीत के बाद एक बार फिर अनुष्का शर्मा चर्चा में आ गई हैं। टीम की जीत के जश्न के दौरान कैमरा बार-बार उनकी ओर घूमता नजर आया और सोशल मीडिया पर भी उनकी खुशी भरे वीडियो तेजी से वायरल होने लगे।

RCB की जीत के बाद फिर चर्चा में आईं अनुष्का
अहमदाबाद में खेले गए आईपीएल 2026 के फाइनल मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने गुजरात टाइटन्स को हराकर लगातार दूसरी बार ट्रॉफी अपने नाम की। इस ऐतिहासिक जीत के बाद जहां विराट कोहली और पूरी टीम सुर्खियों में रही, वहीं स्टैंड्स में मौजूद अनुष्का शर्मा की प्रतिक्रियाओं ने भी लोगों का ध्यान खींच लिया। मैच खत्म होने के बाद सोशल मीडिया पर फैंस ने अनुष्का को विराट कोहली की “लकी चार्म” बताना शुरू कर दिया। कई यूजर्स का मानना है कि अनुष्का की मौजूदगी टीम के लिए शुभ साबित हुई है।

एक वक्त था जब ट्रोलिंग का करना पड़ता था सामना
हालांकि, आज जो लोग अनुष्का को लकी चार्म बता रहे हैं, कुछ साल पहले तस्वीर बिल्कुल अलग थी। शादी से पहले जब भी अनुष्का किसी मैच में विराट कोहली या टीम इंडिया को सपोर्ट करने पहुंचती थीं और टीम का प्रदर्शन अच्छा नहीं होता था, तो सोशल मीडिया पर उन्हें निशाना बनाया जाता था। कई बार लोगों ने बिना किसी वजह के टीम की हार का जिम्मेदार भी उन्हें ठहराया। यहां तक कि उन्हें “पनौती” और “मनहूस” जैसे अपमानजनक शब्दों से भी ट्रोल किया गया। क्रिकेट और निजी जीवन को जोड़कर देखे जाने की इस सोच की उस समय काफी आलोचना भी हुई थी।
वक्त बदला और बदल गई लोगों की सोच
समय के साथ हालात भी बदले और लोगों का नजरिया भी। आज वही अनुष्का शर्मा फैंस के बीच विराट कोहली की सबसे बड़ी ताकत और सपोर्ट सिस्टम के रूप में देखी जाती हैं। RCB की लगातार दूसरी खिताबी जीत के बाद सोशल मीडिया पर उनके लिए प्यार और सम्मान से भरे पोस्ट देखने को मिल रहे हैं। मैदान पर विराट की उपलब्धियों के साथ-साथ फैंस अब अनुष्का के समर्थन और उनकी मौजूदगी को भी सकारात्मक नजरिए से देखने लगे हैं।

फिल्मों से दूर लेकिन चर्चा में हमेशा रहती हैं
अनुष्का शर्मा पिछले कुछ वर्षों से फिल्मों से दूरी बनाए हुए हैं। उनकी आखिरी रिलीज फिल्म ‘जीरो’ थी, जो साल 2018 में सिनेमाघरों में आई थी। इसके बाद उन्होंने किसी फिल्म में अभिनय नहीं किया। हालांकि, फिल्मों से दूर रहने के बावजूद अनुष्का अक्सर अपनी पर्सनल लाइफ, परिवार और क्रिकेट मैचों में मौजूदगी को लेकर सुर्खियों में बनी रहती हैं।

परिवार को दे रही हैं प्राथमिकता
विराट कोहली और अनुष्का शर्मा आज दो बच्चों के माता-पिता हैं और दोनों अपने परिवार के साथ ज्यादा समय बिताना पसंद करते हैं। यही वजह है कि अनुष्का ने पिछले कुछ सालों में अपने प्रोफेशनल काम से ज्यादा अपने परिवार और बच्चों पर ध्यान दिया है।
ट्रोलिंग से तारीफ तक का सफर
अनुष्का शर्मा की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सार्वजनिक जीवन में लोगों की राय कितनी जल्दी बदल सकती है। कभी सोशल मीडिया पर आलोचना झेलने वाली अनुष्का आज लाखों लोगों के लिए प्रेरणा हैं। चाहे वह अपनी फिटनेस हो, परिवार के प्रति समर्पण हो या फिर मुश्किल समय में मजबूत बने रहना, अनुष्का ने हर दौर में खुद को गरिमा और आत्मविश्वास के साथ संभाला है।

आज जब लोग उन्हें विराट कोहली की “लकी चार्म” कह रहे हैं, तो यह सिर्फ क्रिकेट की जीत का जश्न नहीं बल्कि उस सफर की भी पहचान है, जिसमें उन्होंने आलोचनाओं के बीच खुद को मजबूत बनाए रखा।
खेल
विनेश फोगाट एशियन गेम्स ट्रायल में हारीं:बोलीं- पूरे सिस्टम से लड़ी, वापसी करूंगी, बैन के बाद सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल की मंजूरी दी थी
पानीपत, एजेंसी। ओलिंपियन रेसलर विनेश फोगाट शनिवार को एशियन गेम्स ट्रायल का सेमीफाइनल मैच हार गईं। 53 किलो कैटेगरी में लगातार दो बाउट जीतने के बाद उन्हें जींद की मीनाक्षी गोयत ने हराया। विनेश अब एशियन गेम्स में हिस्सा नहीं ले पाएंगी।
हार के बाद विनेश ने कहा- मैं पूरे सिस्टम के खिलाफ लड़ रही थी। एक तरफ मैं थी और दूसरी तरफ सभी लोग थे। मैं फिर वापसी करूंगी।

रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) ने एंटी-डोपिंग नियमों का हवाला देते हुए फोगाट को 26 जून 2026 तक घरेलू प्रतियोगिताओं में भाग लेने पर बैन लगा दिया था।
विनेश ने इसके खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, डिवीजन बेंच ने विनेश के पक्ष में फैसला सुनाया था। WFI ने फोगाट का ट्रायल रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- विनेश शानदार रेसलर हैं, उन्होंने देश को गर्व महसूस कराया। विनेश को एशियन गेम्स 2026 के चयन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी जाती है।
विनेश के मैच की PHOTOS…

मिनाक्षी से मैच हारने के बाद मैट छोड़ने से पहले विनेश बोलीं- मैं इस मैट पर वापस आऊंगी। हालांकि, बाद में वो दुखीं भी दिखीं।

विनेश फोगाट को पटखनी देतीं नीशू। हालांकि, विनेश ने वापसी करते हुए मुकाबला 7-6 से जीत लिया।

ज्योति सिहाग से हुए पहले मुकाबले की शुरुआत से ही विनेश आक्रामक नजर आईं।

53 किलो वेट कैटेगरी में विनेश फोगाट को विनर घोषित करते रेफरी।
विनेश बोलीं- मै फेल नहीं हुई
विनेश हार के बाद भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा- हार को अपनी असफलता नहीं मानती। मैं फेल नहीं हुई हूं। मैं फिर वापसी करूंगी। मेरा संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है और भविष्य में फिर से खुद को साबित करने के लिए मैट पर लौटूंगी।
विनेश फोगाट को पहले केवल 50 किलोग्राम वर्ग में खेलने को कहा गया, जिस पर उन्होंने विरोध जताया। विवाद के बाद WFI अध्यक्ष संजय सिंह के हस्तक्षेप से उन्हें 53 किलोग्राम वर्ग के ट्रायल में भी उतरने की अनुमति मिली। ट्रायल से पहले विनेश फोगाट ने कहा कि वजन-माप के लिए उन्हें करीब एक घंटे इंतजार कराया गया। उन्होंने कहा कि यहां किसी पर अब भरोसा नहीं है।
विनेश का मैच 2 बार रुका
मीनाक्षी से पहले विनेश का मुकाबला नीशू से हुआ। शुरूआत में नीशू ने विनेश को पटखनी देकर पांच पॉइंट हासिल किए। इसके बाद विनेश ने चार पॉइंट बटोरे। इस दौरान रेफरी से विनेश और उनके पति सोमबीर राठी की कहासुनी हो गई। आपत्ति के बाद मैच थोड़ी देर के लिए रोका गया। WFI के अध्यक्ष संजय सिंह भी मैट पर पहुंच गए। रेफरी ने विनेश को 7-6 से विजेता घोषित किया। नीशू ने विनेश से हाथ तक नहीं मिलाया।

वार्मअप करतीं विनेश फोगाट।
विनेश के ट्रायल का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा
विनेश फोगाट को एशियन गेम्स 2026 के ट्रायल में शामिल करने को लेकर विवाद हुआ था। कुश्ती से दूरी बनाए रखने के कारण WFI ने अपनी चयन नीति का हवाला देते हुए विनेश को ट्रायल में खेलने की अनुमति नहीं दी, जिसके बाद विनेश ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट ने कहा कि मां बनने के कारण किसी खिलाड़ी को अवसर देने से इनकार नहीं किया जा सकता और उन्हें ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दे दी। WFI इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 29 मई को सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इसके बाद, विनेश को एशियन गेम्स के चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति मिल गई।
पूर्व WFI अध्यक्ष बृजभूषण पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे
विनेश ने अगस्त 2024 में पेरिस ओलिंपिक में डिस्क्वालिफाई होने के बाद कुश्ती से संन्यास की घोषणा की थी। हालांकि, उन्होंने 16 महीने बाद दिसंबर 2025 में संन्यास वापसी की घोषणा की।
18 जनवरी 2023 को रेसलर विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देकर बृजभूषण पर महिला रेसलर्स के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।
आरोपों पर कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण ने कहा था- किसी भी तरह का उत्पीड़न नहीं हुआ है। अगर हुआ है तो मैं फांसी पर लटक जाऊंगा। उन्होंने कहा था कि अब ये खिलाड़ी नेशनल लेवल पर भी खेलने योग्य नहीं रहे।
खेल
शोक में डूबा खेल जगत… नहीं रहे Olympian राजा रणधीर सिंह, 79 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस
नई दिल्ली, एजेंसी। भारतीय खेल जगत के लिए आज का दिन एक अपूरणीय क्षति और गहरे शोक का है। देश के अनुभवी खेल प्रशासक और एशियाई खेलों में निशानेबाजी (Shooting) का पहला स्वर्ण पदक जीतने वाले दिग्गज ओलंपियन राजा रणधीर सिंह का आज निधन हो गया। वह 79 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से उम्र से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे थे।
कई दिनों तक अस्पताल में इलाज कराने के बाद उन्होंने अपने दिल्ली स्थित आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से भारतीय खेलों के उस स्वर्णिम अध्याय का अंत हो गया है जिसे उन्होंने खिलाड़ी और प्रशासक दोनों रूपों में संवारा था। राजा रणधीर सिंह के परिवार में उनकी पत्नी विनीता और तीन बेटियां महिमा, सुनैना और राजेश्वरी हैं।
राजेश्वरी भी एक निशानेबाज हैं। स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं के कारण सिंह ने हाल में एशियाई ओलंपिक परिषद (ओसीए) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्हें 2024 में चार साल के कार्यकाल के लिए चुना गया था जबकि वह 1991 से 2015 तक इस संस्था में महासचिव रह चुके थे।

भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के सचिव राजीव भाटिया ने कहा, ”गहरे दुख के साथ हम राजा रणधीर सिंह के निधन की दुखद खबर साझा कर रहे हैं जो आज 27 मई 2026 को स्वर्ग सिधार गए। उन्होंने कहा, एक विशिष्ट ओलंपियन, अर्जुन पुरस्कार विजेता और भारत, एशिया और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति में सबसे सम्मानित खेल प्रशासकों में से एक राजा रणधीर सिंह ने निशानेबाजी खेल और ओलंपिक आंदोलन के विकास में अमूल्य योगदान दिया।
भाटिया ने कहा, एनआरएआई और पूरा निशानेबाजी समुदाय इस अपूरणीय क्षति पर शोक व्यक्त करता है और उनके परिवार तथा प्रियजनों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त करता है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे। सिंह के शानदार खेल करियर में पांच ओलंपिक में भागीदारी और 1978 के बैंकॉक एशियाई खेलों में ऐतिहासिक ट्रैप स्वर्ण पदक शामिल था जिससे उन्हें 1979 में अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया था।

उन्होंने तोक्यो 1964 (रिजर्व निशानेबाज), मेक्सिको 1968, म्यूनिख 1972, मॉन्ट्रियल 1976, मॉस्को 1980 और लॉस एंजिल्स 1984 में ओलंपिक में हिस्सा लिया। खेलों की तरह ही अपने सफल प्रशासनिक करियर में उन्होंने 1987 से 2010 तक भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के महासचिव के तौर पर तथा 2001 से 2014 तक अलग अलग भूमिकाओं में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के सदस्य के रूप में कार्य किया। वह 2003 में दो साल के लिए विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) में आईओसी के प्रतिनिधि बन गए।
पटियाला के पूर्व महाराजा और क्रिकेटर भूपिंदर सिंह के वंशज रणधीर सिंह भारत के सबसे जाने-माने खेल प्रशासकों में से एक थे। भारतीय खेलों की अक्सर बिखरी हुई प्रशासनिक व्यवस्था में आम सहमति बनाने की अपनी काबिलियत के लिए उनकी प्रशंसा की जाती थी। देश में ओलंपिक आंदोलन को बढ़ावा देने का श्रेय भी बड़े पैमाने पर उन्हें ही दिया जाता था।
उनकी बेटी राजेश्वरी ने उनकी निशानेबाजी की विरासत को बरकरार रखा और वह भी ट्रैप निशानेबाज हैं। राजेश्वरी ने 2022 के एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने के अलावा 2016 की एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक भी जीता था। वहीं उनकी बेटी सुनैना ने 2018 में आईओए की उपाध्यक्ष बनकर खेल प्रशासन में अपनी एक अलग जगह बनाई। वह आईओए की अंतरराष्ट्रीय संबंधों और शिक्षा समिति की सदस्य भी हैं।
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