नई दिल्ली,एजेंसी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) जल्द ही कुछ खिलाड़ी और अभिनेताओं की करोड़ों की संपत्तियां जब्त करने जा रहा है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत ऑनलाइन बेटिंग एप 1xBet के प्रमोशन मामले में होगी।
ऑफिशियल सोर्स ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया कि 1xBet एप से मिले एडवर्टाइजमेंट पैसों का इस्तेमाल कुछ सेलिब्रिटीज ने अलग-अलग तरह की संपत्ति खरीदने में किया है। ऐसे में इन्हें प्रोसीड्स ऑफ क्राइम यानी अपराध से कमाई गई संपत्ति माना गया है।
ED जल्द ही सेलिब्रिटीज की इन चल-अचल संपत्तियों को जब्त करने का आदेश जारी करेगी। कुछ सेलिब्रिटीज की संपत्तियां संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों में भी हैं। फिलहाल इनकी कीमत और मूल्यांकन किया जा रहा है।
पिछले कुछ हफ्तों में ED ने 1xBet एप मामले में क्रिकेटर युवराज सिंह, सुरेश रैना, रॉबिन उथप्पा और शिखर धवन, अभिनेता सोनू सूद, अभिनेत्री मिमी चक्रवर्ती (पूर्व TMC सांसद) और अंकुश हाजरा (बंगाली सिनेमा) से पूछताछ की है। कुछ ऑनलाइन इन्फ्लुएंसर्स से भी सवाल किए गए।
सट्टेबाजी मामले में ED ने कब-किससे पूछताछ की
23 सितंबर: युवराज सिंह दिल्ली ED ऑफिस पहुंचे। यहां अधिकारियों ने उनसे ऑनलाइन बेटिंग एप (1xBet) के प्रमोशन मामले में 7 घंटे पूछताछ की।
24 सितंबर: ED की टीम ने दिल्ली ऑफिस में एक्टर सोनू सूद से लगभग 7 घंटे तक पूछताछ की। PMLA के तहत बयान दर्ज किया गया है।
4 सितंबर: पूर्व क्रिकेटर शिखर धवन गुरुवार को ऑनलाइन बेटिंग एप (1xBet) के प्रमोशन मामले में ED के सामने पूछताछ के लिए पेश हुए थे।
बैंक अकाउंट और ट्रांजैक्शन से जानकारी सामने आई
ED ने खिलाड़ी, अभिनेता और इन्फ्लुएंसर्स के बयान मनी लॉन्ड्रिंग कानून (PMLA) की धारा 50 के तहत दर्ज किए हैं। कई सेलिब्रिटीज ने अपने बैंक अकाउंट और ट्रांजैक्शन की डिटेल्स भी दीं, जिनसे पता चला कि उन्हें एडवर्टाइजमेंट फीस कैसे मिली। कुछ और खिलाड़ियों और एक्टर्स से अभी पूछताछ बाकी है। एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला (1xBet की इंडिया एंबेसडर) को भी बुलाया गया था, लेकिन वह उस समय विदेश में होने के कारण पेश नहीं हुईं।
युवराज सिंह ने ये तस्वीर 2022 में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर की थी।
मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के नियमों के अनुसार, अपराध से जुड़ी संपत्तियों को जब्त कर लिया जाता है ताकि दोषी उनका फायदा न उठा सकें। आदेश जारी होने के बाद इसे PMLA के तहत बनाए गए एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी को भेजा जाएगा और कोर्ट से मंजूरी मिलते ही चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
करोड़ों की ठगी और टैक्स चोरी की जांच
यह जांच अवैध बेटिंग एप से जुड़ी है। कंपनी पर आरोप है कि उसने लोगों और निवेशकों से करोड़ों रुपए की ठगी की है या बड़े पैमाने पर टैक्स की चोरी की है।
कंपनी का दावा है कि 1xBet एक वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त बुकी है, जो पिछले 18 सालों से बेटिंग इंडस्ट्री में है। इसके ग्राहक हजारों खेल आयोजनों पर दांव लगा सकते हैं। कंपनी की वेबसाइट और एप 70 भाषाओं में उपलब्ध हैं। 1xBet चांस बेस्ड गेम्स एप है।
सरकार ने बेटिंग एप पर बैन लगाया
फैंटेसी स्पोर्ट्स जैसे ड्रीम-11, रमी, पोकर वगैरह सब ऑनलाइन बेटिंग एप बैन हो गए हैं। यह फैसला भारत सरकार के हाल ही में पास किए गए ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 के बाद लिया गया है। इस बिल के तहत ऑनलाइन बेटिंग एप पर पूरी तरह पाबंदी है।
2017 में सुप्रीम कोर्ट ने ड्रीम-11 जैसे फैंटेसी खेलों को स्किल्स का खेल बताया था। हालांकि बेटिंग एप कभी भी भारत में लीगल नहीं थे।
ऑनलाइन बेटिंग एप से आर्थिक नुकसान हो रहा
सरकार का कहना है कि ऑनलाइन बेटिंग एप की वजह से लोगों को मानसिक और आर्थिक नुकसान हो रहा है। कुछ लोग गेमिंग की लत में इतना डूब गए कि अपनी जिंदगी की बचत तक हार गए और कुछ मामलों में तो आत्महत्या की खबरें भी सामने आईं।
इसके अलावा मनी लॉन्ड्रिंग और नेशनल सिक्योरिटी को लेकर भी चिंताएं हैं। सरकार इसे रोकने के लिए सख्त कदम उठाना चाहती है। मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद के मानसून सत्र में कहा था, “ऑनलाइन मनी गेम्स से समाज में एक बड़ी समस्या पैदा हो रही है। इनसे नशा बढ़ रहा है, परिवारों की बचत खत्म हो रही है। अनुमान है कि करीब 45 करोड़ लोग इससे प्रभावित हैं और मिडिल-क्लास परिवारों के 20,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।” उन्होंने यह भी बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे गेमिंग डिसऑर्डर के रूप में मान्यता दी है।
नई दिल्ली, एजेंसी। फेस्टिव सीजन चल रहा है। इस दौरान लोग अपने घर जाने की तैयारियां करते हैं। अपने घर जाने के लिए लोग ट्रेन से जाते हैं। यदि आप अक्टूबर के महीने में ट्रेन का सफर करने वाले हैं, तो थोड़ा सावधान हो जाए। असल में सेंट्रल रेलवे 1 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक, खास ‘टिकट चेकिंग अभियान’ चलाने जा रहा है।
आइए आपको बताते हैं रेलवे के ये नए नियम क्या हैं और आपको ट्रैवल करने से पहले किन बातों का ध्यान रखना बेहद जरुरी है।
कम से कम एक ओरिजिनल ID होना है जरूरी
इस अभियान के चलते सबसे बड़ा नियम है ‘वन टिकट, वन ओरिजिनल आईडी’। रेलवे के अधिकारियों ने साफ कहा है कि अब सफर के समय सिर्फ टिकट होना ही काफी नहीं है, बल्कि आपके पास अपना ओरिजिनल पहचान पत्र होना जरुरी है।
उदाहरण के तौर पर, यदि आप अपने परिवार के चार लोगों के लिए एक ही टिकट बुक किया है, तो उन चारों में से कम से कम किसी एक व्यक्ति के पास उसका ओरिजिनल आईडी कार्ड होना बहुत जरुरी है। यदि चेकिंग के दौरान असली आईडी नहीं दिखा पाए, तो टीटीई उस पर यात्रा करने वाले सभी लोगों को बिना टिकट मान सकता है और आप पर जुर्माना लग सकता है।
कोटा और ई-पास वालों के लिए नियम सख्त
रेलवे के मुताबिक, अगर आप किसी खास कोटे या कंसेशन पर सफर कर रहे हैं? यदि हां, तो आपको अपनी पात्रता को साबित करने के लिए सभी दास्तावेज ओरिजिनल ही साथ रखें। इतना ही नहीं, जो लोग रेलवे के ई-पास या पीटीओ का इस्तेमाल करके यात्रा करने पर, आपको असली पहचान पत्र दिखाना होगा। उनकों इस बात का ध्यान देना होगा कि ट्रेन में बैठने से पहले उनका ई-पास संबंधित अथॉरिटी से सही तरीके से एक्सचेंज करा लिया गया हो।
जनरल टिकट वालों की भी होगी हाई-टेक चेकिंग
दरअसल, यह चेकिंग अभियान सिर्फ स्लीपर या एसी कोच तक ही नहीं, बल्कि आप जनरल डिब्बे में सफर कर रहे हैं, तो आप वहां भी चेकिंग स्टाफ टिकटों की असलियत जांचेगा। वहीं, जरुरत पड़ने पर रेलवे अधिकारी टीटीई ऐप की मदद से किसी भी टिकट को तुरंत वेरिफाई कर सकते हैं।
भारतीय रेलवे क्यों कर रहा है इतनी सख्ती
सेंट्रल रेलवे ने बताया है कि, इसके पीछे मकसद है सिस्टम में होने वाली धोखाधड़ी को खत्म करना है, जाने इसके मुख्य कारण है-
– भारतीय रेलवे में होने वाले आर्थिक नुकसान को रोकना।
– वहीं, रिजर्वेशन की सुविधाओं का जो लोग गलत फायदा उठाते हैं, उन लोगों को पकड़ना।
– इसके अलावा, पास और कंसेशन के नाम पर होने वाले फर्जीवाड़े पर लगाम लगाना।
– सही यात्रियों की पहचान करना और टिकटों की वैधता जांचना।
चेकिंग में कौन-कौन से पहचान पत्र चलेंगे?
इस बीच, रेलवे ने उन दास्तावेजों की एक लिस्ट भी दी है, जिन्हे आप सफर के दौरान अपनी पहचान साबित करने के लिए दिखा सकते हैं ये ओरिजनल आईडी-
-आधार कार्ड -वोटर आईडी कार्ड -पासपोर्ट या पैन कार्ड -ड्राइविंग लाइसेंस – केंद्र या राज्य सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले फोटो और सीरियल नंबर वाला कार्ड – मान्यता प्राप्त स्कूल/कॉलेज का फोटो वाला स्टूडेंट आईडी कार्ड – किसी राष्ट्रीयकृत बैंक की पासबुक, जिस पर आपकी फोटो लगी हो। – बैंक का क्रेडिट कार्ड जिस पर आपकी लैमिनेटेड फोटो हो।
नई दिल्ली, एजेंसी। आमतौर पर शेयर बाजार सोमवार से शुक्रवार तक खुले रहते हैं। मार्केट में शनिवार और रविवार को छुट्टी रहती है। कई बार किसी खास मौके, पर्व और त्योहार पर भी बाजार बंद होता है। कल से लगातार तीन दिन शेयर बाजार में कारोबार नहीं होगा। शुक्रवार (02 अक्टूबर) को गांधी जयंती है, ऐसे में BSE और NSE बंद रहेंगे। इसके बाद शनिवार और रविवार की नियमित छुट्टी के कारण बाजार अब सीधे सोमवार, 5 अक्टूबर को खुलेगा।
2 अक्टूबर को क्यों बंद रहेगा बाजार?
महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर को देशभर में राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मनाई जाती है। इसी के चलते भारतीय शेयर बाजार में भी इस दिन ट्रेडिंग नहीं होगी। निवेशकों को शुक्रवार को इक्विटी, डेरिवेटिव्स समेत बाजार से जुड़े कारोबार के लिए बाजार बंद मिलेगा।
2026 में शेयर बाजार की प्रमुख छुट्टियां
अवसर
तारीख
दिन
दशहरा
20 अक्टूबर
मंगलवार
दिवाली बलिप्रतिपदा
10 नवंबर
मंगलवार
गुरु नानक देव जी का प्रकाश गुरुपर्व
24 नवंबर
मंगलवार
क्रिसमस
25 दिसंबर
शुक्रवार
आज बाजार में रही गिरावट
आज (1 अक्टूबर) शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स 0.79 फीसदी यानी कि 570.59 अंक गिरकर लाल निशान में 71,909.70 पर बंद हुआ। इस दौरान इसके 30 शेयरों में से केवल 6 में बढ़त दिखी, जबकि 24 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। इनमें इन्फोसिस में सबसे अधिक 4.02 फीसदी की तेजी और मारुति में सबसे ज्यादा गिरावट 4.59 फीसदी नजर आई।
वहीं, 50 शेयरों वाला निफ्टी 0.88 फीसदी यानी 198.50 अंक लुढ़ककर 22,421.95 पर बंद हुआ। इसके 50 शेयरों में से 13 में तेजी और 37 में गिरावट दर्ज की गई।
नई दिल्ली, एजेंसी। सरकार ने त्योहारों के मौसम में चीनी की पर्याप्त आपूर्ति और उचित कीमत सुनिश्चित करने के लिए डीलर के पास चीनी रखने की सीमा घटाकर 1,000 क्विंटल कर दी। यह सीमा 15 अक्टूबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगी और डीलर अधिकतम 15 दिन तक का स्टॉक रख सकेंगे। इसके साथ ही, खाद्य मंत्रालय ने कहा कि कोलकाता और उसके विस्तारित महानगरीय क्षेत्र तथा असम में क्षेत्र विशेष की जरूरतों को देखते हुए स्टॉक सीमा 2,000 क्विंटल होगी।
मंत्रालय ने बयान में कहा कि एक अक्टूबर से नए चीनी सत्र की शुरुआत के साथ त्योहारी अवधि में ग्राहकों को उचित कीमत पर चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार कदम उठा रही है। मंत्रालय ने कहा, ”चीनी की मात्रा और उसे रखने की अवधि सीमित करके सरकार का उद्देश्य आपूर्ति शृंखला में चीनी की व्यवस्थित आवाजाही सुनिश्चित करना और उपभोक्ताओं के लिए इसकी लगातार उपलब्धता बनाए रखना है।”
कोलकाता और असम के लिए अलग सीमा
कोलकाता और उसके विस्तारित महानगरीय क्षेत्र तथा असम के लिए अलग स्टॉक सीमा उस क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखकर तय की गई है। मंत्रालय ने कहा कि कोलकाता… उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक से चीनी खरीदता है और पूर्वी भारत के साथ पूर्वोत्तर राज्यों को भी इसकी आपूर्ति करता है।
मंत्रालय ने कहा कि असम के लिए सीमा तय करते समय भौगोलिक परिस्थितियों, परिवहन सुविधाओं और पूर्वोत्तर के उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखा गया है। उसने कहा कि संशोधित नियमों का उद्देश्य आपूर्ति श्रृंखला में चीनी के अनावश्यक भंडारण को रोकना और मिलों से डीलर के जरिये अंतिम उपभोक्ता तक इसकी सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
भंडारण और जमाखोरी पर रोक का उद्देश्य
यह कदम जमाखोरी, सट्टेबाजी और डीलर द्वारा स्टॉक जमा करने पर अंकुश लगाने के लिए उठाया गया है। इससे पहले अगस्त में सरकार ने डीलर के लिए देशभर में 4,000 क्विंटल की स्टॉक सीमा तय की थी। यह सीमा एक अगस्त से 30 नवंबर तक लागू की गई थी। इसके तहत चीनी मिलने की तारीख से अधिकतम 30 दिन तक स्टॉक रखने की अनुमति थी। बाद में 15 सितंबर से यह सीमा घटाकर 2,000 क्विंटल कर दी गई।
चीनी के खुदरा दाम में 15% गिरावट
मंत्रालय के मुताबिक, चीनी का औसत खुदरा मूल्य अगस्त के उच्चतम स्तर से अब 15 प्रतिशत घट चुका है और आपूर्ति शृंखला में कम कीमतों का लाभ मिलने के साथ इसमें आगे भी गिरावट आने की उम्मीद है। मिलों की कीमतों में करीब 28 प्रतिशत की गिरावट आई है और वे पिछले तीन सप्ताह से स्थिर हैं।
सरकार ने कहा कि चीनी मिलों, डीलर, थोक विक्रेताओं और अन्य बाजार प्रतिभागियों को चीनी की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करनी चाहिए और जमाखोरी एवं सट्टेबाजी रोकनी चाहिए। थोक और खुदरा विक्रेताओं से मिलों की कीमतों में आई तेज गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं तक ‘तत्काल’ पहुंचाने को कहा गया है।