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छत्तीसगढ़

हरि लीला ट्रस्ट का ‘सफलता संकल्प उत्सव 2025’ भव्य रूप से संपन्न, मंच से भारत के भविष्य का हुआ सम्मान

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इतिहास रच गया “सफलता संकल्प उत्सव 2025” – ज्ञान, प्रेरणा और सम्मान का सबसे बड़ा मंच बना जांजगीर
“सफलता संकल्प उत्सव 2025” बना ऐतिहासिक – पहली बार 800 से अधिक प्रतिभाओं को एक ही मंच से सम्मानित किया गया
हरि लीला ट्रस्ट का ऐतिहासिक आयोजन – जिले और प्रदेश में पहली बार 800 से ज्यादा विद्यार्थियों, समाजसेवियों और प्रेरक व्यक्तित्वों का हुआ सामूहिक सम्मान
जिले में पहली बार एक ही मंच से 800 से अधिक प्रतिभाओं का सम्मान – हरि लीला ट्रस्ट का “सफलता संकल्प उत्सव 2025” बना मिसाल

जांजगीर। हरि लीला ट्रस्ट, बनारी (जांजगीर-नैला) द्वारा आयोजित ‘सफलता संकल्प उत्सव 2025’ का भव्य समापन ट्रस्ट के अध्यक्ष लीलाधर सुल्तानिया के मार्गदर्शन में अपार सफलता के साथ हुआ। इस आयोजन में इतिहास रचा गया जिसके तहत् पहली बार 800 से अधिक प्रतिभाओं को एक ही मंच से सम्मानित किया गया। आयोजन में छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने इसे अभूतपूर्व बना दिया। कार्यक्रम के मंच से सभी अतिथियों ने हरि लीला ट्रस्ट की परंपरा, दृष्टिकोण और आयोजन के स्वरूप की जमकर सराहना की। इस अवसर पर कार्यक्रम में अतिथि के रूप में जांजगीर-चांपा विधायक व्यास कश्यप, विधायक अकलतरा राघवेन्द्र सिंह, पूर्व नेता प्रतिपक्ष छ.ग. विधानसभा नारायण चंदेल, भाजपा प्रदेश मंत्री हर्षिता पाण्डेय, भाजुमो प्रदेश अध्यक्ष राहुल योगराज टिकरिहा, अंबेश जांगड़े जिलाध्यक्ष भाजपा, गुलाब सिंह चंदेल, नगर पालिका अध्यक्ष जांजगीर रेखा गढ़ेवाल, जिला पंचायत सदस्य गगन जयपुरिया, चांपा नगर पालिका प्रदीप नामदेव, इंजी. रवि पाण्डेय सहित अन्य अतिथि व गणमान्यजन मौजूद रहें।
हर पल सिखने की जिज्ञासा होनी चाहिए- लीलाधर सुल्तानिया


हरिलीला ट्रस्ट के अध्यक्ष लीलाधर सुल्तानिया के जन्मदिवस 16 अक्टूबर के अवसर पर प्रेरणा सेवा और सम्मान की परंपरा है जिसके तहत जरूरतमंदो के विशेष सहयोग के लिए हर साल विशेष आयोजन कराये जाते है साथ ही युवाओं और छात्रों को भविश्य की नई दिशा प्रदान करने कैरियर मेला और मोटिवेशनल आयोजन भी होते है जिसमें विश्वविख्यात मोटिवेटर और स्पीकर सोनू शर्मा, अवध ओझा, पूर्व आई.ए.एस. ओ.पी. चौधरी, शंकर गोयनका दिल्ली, डॉ. संतोष राय भिलाई शिरकत कर चुकें हैं। इस बार भी इसी तारतम्य में इस बार भी सफलता संकल्प उत्सव 2025 का आयोजन किया गया। जिसमें छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न प्रदेषो के विश्वविद्यालय, कालेज और इंस्टीटयूट के विशय विषेशज्ञो ने युवाओं का मार्गदर्षन किया। इस दौरान ट्रस्ट के अध्यक्ष लीलाधर सुल्तानिया ने कहा कि हर व्यक्ति के जीवन में अवसर आता है जो अवसर का सदउपयोग करता है वही सफलता की ऊचाईया छूता है साथ ही कहा कि सीखने की कोई उम्र नही होती है हर पल सीखने की ललक उम्मीदों का जिंदा रखती हैं।
करियर गाइडेंस मेला बना युवाओं का आकर्षण केंद्र
आयोजन के दौरान लगे कैरियर गाइडेंस मेले में छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न प्रांतो के 25  प्रमुख विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों के वाइस चांसलर, प्रोफेसर एवं विभाग प्रमुखों ने सहभागिता की। उन्होंने छात्रों को नए करियर विकल्पों, उच्च शिक्षा और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की दिशा में मार्गदर्शन दिया और युवाओं को सफलता के लिए प्रेरित किया।

सामान्य ज्ञान महापरीक्षा अभियान के विजेताओं का हुआ सम्मान


कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा सामान्य ज्ञान महापरीक्षा अभियान, जिसमें विधानसभा जांजगीर-चांपा क्षेत्र के 106 विद्यालयों के 12500 छात्रों ने भाग लिया। इसमें विद्यालय स्तर से चयनित विजेताओं में से सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागियों को मंच पर सम्मानित किया गया। प्रथम स्थानः जय भारत स्कूल, जांजगीर के योगेश राज – रू.21,000 नगद, मोमेंटो एवं प्रशस्ति पत्र। द्वितीय स्थानः स्वामी आत्मानंद उ.मा.वि. क्रमांक-1, जांजगीर के उद्धव जायसवाल – रू.11,000 नगद, मोमेंटो एवं प्रशस्ति पत्र। तृतीय स्थानः गुरुकुल इंटरनेशनल स्कूल, जांजगीर के पार्थ तिवारी – रू.5,100 नगद, मोमेंटो एवं प्रशस्ति पत्र।
इसके अलावा सात सांत्वना पुरस्कार स्वरूप रू.2,100 नगद, मोमेंटो एवं प्रशस्ति पत्र दिए गए –
त्रिशिका बजाज (ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल), जय सोनी (स्वामी आत्मानंद उ.मा.वि. चांपा), प्रीतम सिंह विजय (स्वामी आत्मानंद उ.मा.वि. क्र.1 जांजगीर), अविनाश विश्वकर्मा (गोल्डन इरा चांपा), आयुष करी (डीपीएस चांपा), उपेंद्र साहू (जीएलडी पब्लिक स्कूल खैरताल) एवं विशाल कश्यप (शा. उ.मा.वि. महंत)।
सीजी बोर्ड के प्रावीण्य सूची मे आई छात्रा खुशी देवांगन को मिला विशेष सम्मान
हरि लीला ट्रस्ट द्वारा प्रतिवर्ष की परंपरा के अनुसार, इस वर्ष भी छत्तीसगढ़ बोर्ड की कक्षा 12वीं की प्रावीण्य सूची में स्थान पाने वाली बलौदा विकासखंड के शा. हायर. सेकेण्डरी स्कूल पंतोरा की छात्रा खुशी देवांगन को ₹21,000 नगद, मोमेंटो और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया।
सफलता संकल्प उत्सव 2025 के मंच से हुए सम्मानित
कवि:- ईश्वरी यादव, विजय राठौर, संतोष कश्यप, सतीष कुमार सिंह, प्रमोद आदित्य, अनुभव तिवारी, दयानंद गोपाल, संतोषी श्रद्धा महंत, उमाकांत टैगोर, योगेश्वर सिंह, अंकित राठौर, समाज सेवी संस्था: – श्री श्री दुर्गा पूजा समिति नैला, कचहरी चौक का राजा, स्नेक रेस्क्यू टीम, विप्लव सेवा संस्थान, वाला मोहल्ला गणेश सेवा समिति / वाला मोहल्ला दुर्गा पूजा समिति, पुरूष सहायता केन्द्र, मारवाड़ी युवा मंच नैला-जांजगीर, जागृति शाखा नैला-जांजगीर, चेम्बर ऑफ कामर्स नैला जांजगीर, भीमा तालाब मॉर्निंग ग्रुप, एक कदम समाज सेवी संस्था, मारवाड़ी युवा मंच चांपा, चेम्बर ऑफ कामर्स चांपा, चांपा सेवा संस्थान, मॉर्निंग वॉक योग समिति चांपा, शबरी माता सेवा संस्थान, वेलविसर फाउंडेशन अकलतरा, नारायण सेवा समिति षिवरीनारायण, व्यापारी सेवा समिति राहौद, मॉ-बाबू जी फाउंडेशन नवागढ़, भूतपूर्व सैनिक संघ, भारत स्काउड गाइड, गौ सेवा समिति, लायंस क्लब जांजगीर, खिलाड़ी – कु. शिक्षा दिनकर, कु. मंदाकनी श्रीवास, शैलेन्द्र कहरा, निहाल पाण्डेय,  प्रशांत कहरा, राज्यपालः- रमाकांत पाण्डेय, राजेन्द्र जायसवाल, एम.एल. कौशिक, हरप्रसाद पाटले, घनश्याम प्रसाद देवांगन, जयंती दुबे, सुरेन्द्र कुमार सोनी, बोधीराम साहू,  देवकुमार सूर्यवंशी, कृष्ण कुमार कश्यप, नरेन्द्र कुमार लहरे, अर्चना शर्मा, अनुराग तिवारी, राजेश सूर्यवंशी, दिनेश रोहित चतुर्वेदी, कामता प्रसाद सिंह, अमृत लाल साहू, प्रतिक्षा सिंह, जेइई, नीट, सीए, सीएस. इसरो, पीएससी, एस.आई. के चयनित सम्मानित हुए।
आयोजन को मिली अभूतपूर्व सफलता
अपने स्वागत उद्बोधन के दौरान ट्रस्ट के सचिव अमर सुल्तानिया ने कहा कि यह आयोजन केवल सम्मान का मंच नहीं, बल्कि समाज में मेहनत, संकल्प और सफलता की चेतना जगाने का प्रयास है। उन्होंने सभी अतिथियों, गुरूजनों, छात्रों, विद्यालय प्रबंधनो, पालकों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया और आगामी वर्ष में इसे और व्यापक स्वरूप देने का संकल्प दोहराया।
इस अवसर पर मंच का संचालन दीपक यादव, हितेश यादव ने किया और आभार प्रदर्शन कार्यक्रम के संयोजक प्रकाश शर्मा ने किया।
इस अवसर पर हरिलीला ट्रस्ट की ओर से मनीश तिवारी, मुकेष भोपालपुरिया, जितेन्द्र खाण्डे, सुनील पाण्डे, साकेत तिवारी, सुधीर झाझड़िया, रामेश्वर पटेल, मणिकांत अग्रवाल, वृन्दावन सिंह (रामलल्ला) विरेन्द्र सिंह, विवेक सिंह, राजेन्द्र साहू, कमल राठौर, अविनाश द्विवेदी, सागर राठौर, रोहित कुलदीप, रवि पाण्डेय, रमेश सोनवानी, धीरज तिवारी, संदीप पाण्डेय, संतोष राठौर, हितेश साहू, डिगेश मनहर, भोजराम साहू, इन्द्र कुमार कश्यप, ईष्वर चन्द्रा, प्रितम दास, समीर माथुर, संदीप माथुर, आयुश सिंह, उमेष राठौर, पुष्पेन्द्र निर्मलकर, पंकज कहरा, अमित यादव, राकेष रूपवानी, रघुनंदन  कश्यप, दिनेश राठौर, सुनील कश्यप, गोलू दुबे, छत्रपाल विजय, हरि सोनवानी, संजीता माली, प्रतीमा डाहरे, उमा सोनी, दुलोरिन चौरसिया, संतोशी दुबे, देवानंद गढ़ेवाल, छबि कष्यप, सोनू यादव, अमन यादव, अनिल जाटवर, प्रांशु राठौर, बादल बजाज, पिंकु राठौर, दिपक सिंघानिया, विक्रांत अग्रवाल, पियुष सराफ, अखिल बंसल, आकाश सिंघानिया, निकुंज भोपालपुरिया, संतोष  जब्बल, गौतम यादव, विक्रांत बघेल मौजूद रहे।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : फिल्में समाज को संदेश देने का सशक्त माध्यम- राज्यपाल डेका

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फिल्में समाज को संदेश देने का सशक्त माध्यम- राज्यपाल श्री डेका
फिल्में समाज को संदेश देने का सशक्त माध्यम- राज्यपाल श्री डेका
फिल्में समाज को संदेश देने का सशक्त माध्यम- राज्यपाल श्री डेका

रायपुर। फिल्में और डॉक्युमेंट्री केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि समाज को जागरूक करने और सकारात्मक संदेश देने का एक प्रभावी साधन हैं। राज्यपाल रमेन डेका ने आज राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के सम्मान समारोह में उक्त बातें कही। यह कार्यक्रम रायपुर के एक निजी होटल में छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम और संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था।

          राज्यपाल ने कहा कि आदिम युग से ही मनुष्य विभिन्न माध्यमों से अपने विचार और संदेश व्यक्त करता रहा है। समय के साथ नाटक, रेडियो, टेलीविजन और अब डिजिटल माध्यमों ने इस भूमिका को और व्यापक बनाया है। उन्होंने कहा कि पहले सिनेमा का मूल उद्देश्य केवल धन अर्जित करना नहीं था, बल्कि समाज को संदेश देना और जागरूक करना था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी भारतीय सिनेमा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

          राज्यपाल ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बस्तर में नक्सलवाद के विरुद्ध उल्लेखनीय सफलता मिली है। फिल्म निर्माताओं को चाहिए कि अब वे बस्तर की समृद्ध संस्कृति से  देश और दुनिया  को परिचित कराएं। इससे क्षेत्र की सकारात्मक छवि को मजबूती मिलेगी।

          राज्यपाल ने सद्गति, चरणदास चोर और देवदास जैसी फिल्मों और नाटकों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन और जागरूकता लाने वाली फिल्मों की आज भी उतनी ही आवश्यकता है। राज्यपाल ने कहा की लोककलाओं, लोकगीतों, जनजातीय परंपराओं और पर्व-त्योहारों जैसे हमारे धरोहर को स्थायी रूप से संरक्षित करने का महत्वपूर्ण माध्यम डॉक्यूमेंट्री फिल्में हैं। उन्होंने कलाकारों से लोककला, लोकगीत, जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। 

          राज्यपाल ने कहा कि मोबाइल की बढ़ती लत आज गंभीर सामाजिक समस्या बनती जा रही है। बच्चे खेल के मैदानों से दूर हो रहे हैं और उनकी रचनात्मकता प्रभावित हो रही है। उन्होंने कलाकारों  से आग्रह किया कि वे नई पीढ़ी को कला, संगीत, नाटक और नृत्य जैसी रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए आगे आएं। इस अवसर पर राज्यपाल ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त डॉक्युमेंट्री फिल्मों छत्तीसगढ़ के भीम दाऊ चिंताराम, हैप्पी बर्थडे और स्क्रीन के निर्माता-निर्देशकों को सम्मानित किया।

          कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन संस्कृति विभाग के संचालक संजय कन्नौजे ने दिया। छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। आभार प्रदर्शन प्रसिद्ध फिल्म निर्माता-निर्देशक मनोज वर्मा ने किया। कार्यक्रम में विधायक पुरंदर मिश्रा, विभिन्न डॉक्युमेंट्री फिल्मों के निर्माता-निर्देशक कलाकार एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : स्ट्रीट वेंडर्स के सपनों को मिली नई उड़ान

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छत्तीसगढ़ में 1.12 लाख से अधिक वेंडर्स को मिला आर्थिक संबल

 रायपुर। कभी सड़क किनारे ठेला लगाकर सब्जियां बेचने वाले, चाय-नाश्ते की छोटी दुकान चलाने वाले या फिर फुटपाथ पर रोजी-रोटी कमाने वाले लाखों स्ट्रीट वेंडर (रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों) के लिए पूंजी की कमी सबसे बड़ी चुनौती थी। बैंक ऋण तक पहुंच नहीं होने के कारण उनका व्यवसाय सीमित था। लेकिन प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना ने इन छोटे उद्यमियों के जीवन में बदलाव की नई कहानी लिखी है।

    छत्तीसगढ़ में इस योजना के माध्यम से अब तक 1 लाख 12 हजार 36 से अधिक स्ट्रीट वेंडर (पथ विक्रेताओं) को 256 करोड़ 94 लाख रुपये से अधिक की ऋण सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है। योजना ने न केवल उनके कारोबार को मजबूती दी है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक आजीविका का नया अवसर भी प्रदान किया है। 

    कोविड-19 महामारी के दौरान आजीविका पर पड़े गंभीर प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने 1 जून 2020 को प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में काम करने वाले स्ट्रीट वेंडर को बिना गारंटी कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने व्यवसाय को फिर से शुरू कर सकें और उसका विस्तार कर सकें। योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी प्रकार की गारंटी की आवश्यकता नहीं होती। समय पर ऋण चुकाने वाले हितग्राहियों को अगले चरण में अधिक राशि का ऋण प्राप्त करने का अवसर मिलता है। 

    योजना के तहत लाभार्थियों को चरणबद्ध तरीके से ऋण उपलब्ध कराया जाता है। प्रथम चरण में 10,000 रूपए तक का ऋण, द्वितीय चरण में 20,000 रूपए तक का ऋण तथा तृतीय चरण में 50,000 रूपए तक का ऋण दिया जाता है। अर्थात इस योजना के अंतर्गत न्यूनतम 10 हजार रुपये से लेकर अधिकतम 50 हजार रुपये तक की कार्यशील पूंजी ऋण सहायता प्राप्त की जा सकती है। समय पर पुनर्भुगतान करने वाले हितग्राही ही अगले चरण के लिए पात्र बनते हैं। 

    पीएम स्वनिधि योजना का लाभ उन छोटे कारोबारियों को मिलता है जो सड़क किनारे या सार्वजनिक स्थानों पर वस्तुएं एवं सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। इनमें सब्जी एवं फल विक्रेता, चाय, नाश्ता एवं फास्ट फूड विक्रेता, पान दुकान संचालक, कपड़ा एवं रेडीमेड वस्त्र विक्रेता, जूता-चप्पल विक्रेता, किताब एवं स्टेशनरी विक्रेता, फूल एवं पूजा सामग्री विक्रेता, मोबाइल एक्सेसरीज विक्रेता, नाई, मोची, लॉन्ड्री जैसी सेवाएं देने वाले स्वरोजगारी, जैसे अनेक छोटे व्यवसाय शामिल हैं।
 
    छत्तीसगढ़ में योजना का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़ और धमतरी जैसे जिलों में हजारों पथ विक्रेताओं को ऋण सहायता प्रदान की गई है। राज्य स्तर पर 267.22 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि के विरुद्ध 256.94 करोड़ रुपये से अधिक का वितरण किया जा चुका है, जिससे 1.12 लाख से अधिक हितग्राही लाभान्वित हुए हैं। 

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कहना है कि पीएम स्वनिधि योजना केवल ऋण वितरण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह छोटे उद्यमियों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने का एक व्यापक अभियान है। इससे स्ट्रीट वेंडर्स की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, उनकी आय में वृद्धि हो रही है और वे अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण कर पा रहे हैं। आज छत्तीसगढ़ के शहरों और कस्बों में हजारों पथ विक्रेता इस योजना के सहारे अपने कारोबार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहे हैं। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना वास्तव में उन मेहनतकश हाथों को आर्थिक संबल देने का माध्यम बनी है, जो अपने परिश्रम से शहरों की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करते हैं।

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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के 250 MBBS सीटों पर लगा ब्रेक:5 नए सरकारी मेडिकल-कॉलेजों को NMC की मंजूरी नहीं, इंफ्रास्ट्रक्चर और फैकल्टी की कमी बनी बड़ी वजह

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रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित 5 नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों को नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) से मान्यता नहीं मिली है। आयोग ने सभी कॉलेजों के आवेदन रिजेक्ट कर दिए हैं। इससे इस साल एमबीबीएस की 250 नई सीटें शुरू नहीं हो पाएंगी।

ये मेडिकल कॉलेज कवर्धा, जांजगीर-चांपा, मनेंद्रगढ़, दंतेवाड़ा और कुनकुरी में प्रस्तावित हैं। हर कॉलेज में 50-50 एमबीबीएस सीटों का प्रस्ताव था।

छात्रों को मिलता बड़ा फायदा

अगर इन कॉलेजों को मंजूरी मिल जाती तो प्रदेश में एमबीबीएस की 250 सीटें बढ़ जातीं। इससे नीट यूजी में प्रवेश के लिए प्रतिस्पर्धा कुछ कम होती और कटऑफ पर भी असर पड़ सकता था।

फिलहाल छत्तीसगढ़ के 10 सरकारी और 5 निजी मेडिकल कॉलेजों में कुल 2330 एमबीबीएस सीटें हैं।

शिक्षा विभाग की तैयारी पर उठे सवाल

जानकारी के मुताबिक, नए मेडिकल कॉलेजों में जरूरी तैयारियां पूरी नहीं हो सकीं। कई जगह न पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर है, न फैकल्टी और न ही जरूरी मेडिकल सुविधाएं। इससे NMC के तय मानकों पर कॉलेज खरे नहीं उतर पाए।

बताया जा रहा है कि राज्य सरकार ने फिलहाल सिर्फ डीन और अस्पताल अधीक्षक की प्रभार नियुक्तियां की हैं। नियमित फैकल्टी की भर्ती नहीं हुई।

जिला अस्पतालों के कुछ डॉक्टरों को असिस्टेंट प्रोफेसर और जूनियर रेजिडेंट के तौर पर पदस्थ करने के आदेश जरूर दिए गए, लेकिन यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं मानी गई।

प्रमोशन नहीं होने से भी बढ़ी परेशानी

प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में काम कर रहे कई डॉक्टर लंबे समय से प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं। करीब 296 डॉक्टर प्रमोशन के पात्र बताए जा रहे हैं, जबकि 73 असिस्टेंट प्रोफेसरों का प्रोबेशन पीरियड भी पूरा नहीं किया गया है।

अगर समय पर प्रमोशन होते तो नए कॉलेजों के लिए प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर उपलब्ध हो सकते थे, जिससे मान्यता मिलने की संभावना बढ़ जाती।

अधिकारियों का ओवर कॉन्फिडेंस पड़ा भारी

चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भरोसा था कि सरकारी मेडिकल कॉलेज होने के कारण मान्यता मिल जाएगी। लेकिन NMC साल 2023 से तय पैरामीटर के आधार पर ही मंजूरी दे रहा है। इसी वजह से इस बार सभी कॉलेजों के आवेदन खारिज हो गए।

एफिलिएशन सर्टिफिकेट तक नहीं भेजा गया

जानकारी यह भी सामने आई है कि जिन पांच कॉलेजों के आवेदन रिजेक्ट हुए, उनमें से दो-तीन कॉलेजों ने हेल्थ साइंस यूनिवर्सिटी का एफिलिएशन सर्टिफिकेट तक आवेदन के साथ संलग्न नहीं किया। जबकि इस दस्तावेज के बिना मेडिकल कॉलेज शुरू नहीं किया जा सकता।

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