देश
नीतीश का इस्तीफा, कल 10वीं बार लेंगे शपथ:गांधी मैदान में समारोह, 2 मंच, 150 मेहमान, PM मोदी समेत 11 राज्यों के CM शामिल होंगे
पटना,एजेंसी। नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। कल गुरुवार को वे 10वीं बार CM पद की शपथ लेंगे। शपथ समारोह गुरुवार सुबह 11.30 बजे गांधी मैदान में होगा।
समारोह के लिए 2 मंच बनाए गए हैं। इसमें PM मोदी समेत 11 राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे। साथ ही 150 मेहमानों को भी निमंत्रण भेजा गया।
इससे पहले बिहार विधानमंडल के सेंट्रल हॉल में नीतीश कुमार को NDA विधायक दल का नेता चुना गया। वहीं, सुबह 11 बजे पटना के बीजेपी ऑफिस में विधायक दल की बैठक हुई। इसमें सम्राट चौधरी को विधायक दल का नेता चुना गया है।
विजय सिन्हा को विधानमंडल का उपनेता चुना गया है। मतलब सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा दोनों डिप्टी CM होंगे। जानकारी के मुताबिक, नीतीश के साथ-साथ सम्राट और विजय सिन्हा भी डिप्टी CM की शपथ ले सकते हैं।
इधर, बीजेपी के विधायक दल की बैठक से पहले JDU के विधायक दल की बैठक हुई जिसमें नीतीश कुमार को नेता चुना गया।
आज दिनभर क्या हुआ, तस्वीरों में देखिए

जदयू विधायक दल की बैठक में नीतीश कुमार को नेता चुना गया।

BJP विधायक दल की बैठक में सम्राट चौधरी को नेता चुना गया है।

बिहार विधानमंडल के सेंट्रल हॉल में नीतीश कुमार को सर्वसम्मति से NDA विधायक दल का नेता चुना गया।

राज्यपाल को इस्तीफा देने पहुंचे नीतीश। सम्राट चौधरी समेत NDA के बड़े नेता मौजूद रहे
विधायक दल के नेता के चुनाव से पहले केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर दी गई थी। बीजेपी के संसदीय बोर्ड ने उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाया गया, जबकि केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और पूर्व केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति को सह-पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी मिली। सभी मंगलवार रात ही पटना पहुंच गए थे।

चिराग ने 2 मंत्री और डिप्टी CM की डिमांड रखी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज पटना पहुंचेंगे। नीतीश कुमार से मुलाकात के बाद वे बीजेपी नेताओं के साथ बैठक करेंगे। इस बैठक में मंत्रियों की लिस्ट फाइनल होगी।
इधर, सूत्रों के अनुसार चिराग पासवान ने NDA में 2 मंत्री पद और डिप्टी CM पद की डिमांड रखी है। चिराग अपने बहनोई अरुण भारती का नाम बढ़ा सकते हैं। इस बार विधानसभा चुनाव में LJP(R) ने 19 सीटें जीती हैं।
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नीतीश CM पद छोड़कर राज्यसभा जा सकते हैं:बेटे निशांत के नाम की भी चर्चा, JDU की लिस्ट कुछ देर बाद जारी होगी
पटना,एजेंसी। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपना पद छोड़कर राज्यसभा जा सकते हैं। बुधवार शाम इसे लेकर सीएम आवास पर अहम बैठक हुई। इसमें संजय झा और विजय चौधरी मौजूद रहे। बताया जा रहा कि पार्टी के बड़े नेता नहीं चाहते हैं कि नीतीश दिल्ली जाएं।
इसी दौरान जदयू ने सोशल मीडिया X पर पोस्ट कर लिखा- नीतीश कुमार जी बिहार के सर्वस्वीकार्य नेता हैं। उनकी लोकप्रियता आज हर क्षेत्र में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। लोगों का यह स्नेह और अपार समर्थन ही उनकी वास्तविक पहचान है।
वहीं, उनके बेटे निशांत कुमार के नाम की भी चर्चा हो रही है। पार्टी ने अभी तक इन चर्चाओं का खंडन नहीं किया है। बताया जा रहा है कि जेडीयू आज शाम 6 बजे तक अपने दोनों राज्यसभा उम्मीदवारों के नाम घोषित कर सकती है।
भास्कर के सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर का राज्यसभा जाना लगभग तय माना जा रहा है। उन्होंने नामांकन से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं।
निशांत कुमार और अपने नाम को लेकर नीतीश कुमार अभी विचार कर रहे हैं। इसी बीच दिल्ली से पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा भी आज पटना पहुंच गए हैं।
सियासी हालातों को देखते हुए ये 3 सिचुएशन बन रही है
- पहली-: नीतीश राज्यसभा जा सकते हैं। उनके बेटे को डिप्टी CM बनाया जा सकता है। CM की कुर्सी पर बीजेपी अपना दावा ठोक सकती है।
- दूसरी- निशांत को राज्यसभा भेजकर पॉलिटिकल एंट्री करवाई जा सकती है।
- तीसरी: रामनाथ ठाकुर के बाद दूसरे नाम पर सहमति नहीं बन पा रही है, इसलिए इस तरह के नाम सामने आ रहे हैं।

अपने पिता नीतीश कुमार को प्रसाद खिलाते हुए निशांत कुमार।
चिराग बोले- नीतीश कहीं नहीं जा रहे
बिहार में मुख्यमंत्री बदले जाने को लेकर चिराग पासवान ने कहा, ‘ऐसी कोई चर्चा नहीं है। ऐसी कोई स्थिति उत्पन्न नहीं होने वाली है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अनुभवी नेतृत्व में हमारी सरकार बिहार में चल रही है।
उन्होंने कहा- 200 से अधिक सीटों के साथ हम लोग बिहार में सरकार चला रहे हैं। हम लोग बिहार में मुख्यमंत्री बदलने जा रहे हैं ऐसी कोई चर्चा नहीं है। हमारे मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के डबल इंजन वाली सरकार ऐसी ही बिहार में चलती रहेगी।’
अगर निशांत राज्यसभा जाते हैं तो इसके 2 बड़े मायने
1. नीतीश रिटायर होने वाले हैं
नीतीश कुमार 76वें साल में प्रवेश कर गए हैं। उनके साथ स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें है। ऐसे में समय-समय पर पार्टी के अंदर और बाहर उनके उत्तराधिकारी की मांग होती रहती है। JDU कार्यालय के बाहर भी कई मौकों पर नीतीश के बाद निशांत का नारा लिखा पोस्टर लग चुका है।
- नीतीश कुमार परिवारवाद के खिलाफ रहे हैं। उनकी पूरी राजनीति इसी के इर्दगिर्द रही है। 2025 विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने परिवारवाद को लेकर लालू-राबड़ी परिवार हर तंज कसा था। ऐसे में अगर निशांत कुमार राज्यसभा में आते हैं तो ज्यादा संभावना है कि नीतीश कुमार रिटायर होने वाले हैं।
- सूत्र बताते हैं कि नीतीश कुमार बेटे के राजनीति में आने के खिलाफ हैं। लेकिन बदले हालात में अगर वह मान जाते हैं तो इसका मतलब है कि वह खुद कुछ समय बाद राजनीति से हट जाएंगे। वे अपनी पूरी राजनीतिक पूंजी अंतिम समय में खत्म करना नहीं चाहेंगे।
- एक्सपर्ट केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया सीमांचल दौरे को बिहार में सत्ता परिवर्तन की आहट के तौर पर देख रहे हैं। राजनीतिक जानकारों की मानें तो नीतीश कुमार बंगाल चुनाव के बाद पद छोड़ते हैं तो बिहार में भाजपा अपना CM बना सकती है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत का अध्यात्म में मन लगता है। वह राजनीति से अब तक दूरी बनाकर रखे हुए हैं। फोटो 20 नवंबर के शपथ ग्रहण समारोह के तुरंत बाद की है।
2. JDU का भविष्य तय
निशांत कुमार के राज्यसभा जाते ही JDU का भविष्य तय हो जाएगा। मतलब कि पार्टी नीतीश के बाद भी चलती रहेगी, खत्म नहीं होगी। फिलहाल पार्टी में कोई बड़ा नेता नहीं है।
- फिलहाल नीतीश के आसपास 4 बड़े नेता ललन सिंह, संजय झा, विजय चौधरी और अशोक चौधरी हैं। चारों नेता नीतीश कुमार के आधार वोट बैंक कुर्मी-कोईरी और EBC के समीकरण पर फिट नहीं हैं।
- RCP सिंह थे, लेकिन अभी वह पार्टी से बाहर हैं। फिलहाल नीतीश कुमार के कुर्मी समाज से मनीष वर्मा करीबी हैं, लेकिन उनके नाम पर सहमति नहीं है। यही कारण है कि पार्टी के अंदर से JDU के नए नेतृत्व को लेकर निशांत की डिमांड उठती रहती है।
- पार्टी के एक बड़े गुट की डिमांड है कि निशांत कुमार को राजनीति में आना चाहिए। उनको नीतीश कुमार की राजनीति को आगे बढ़ाना चाहिए।
- बताया जाता है कि निशांत के आते ही नीतीश के बाद कौन के सवाल का जवाब मिल जाएगा। और निशांत की पैरोकारी कर रहा गुट पावर सेंटर बना रहेगा।
- बताया जाता है कि अगर निशांत की जगह दूसरा नेता उत्तराधिकारी बना तो एक गुट की ताकत घट सकती है। निशांत मिलनसार हैं और वह खुद इतने परिपक्व नहीं हैं कि किसी को नाराज करके पार्टी चला सके।
2 पॉइंट में नीतीश ने निशांत को कैसे JDU की मजबूरी बनाया
1. सेकेंड लाइन नेताओं को किया किनारे
2003 में बनी JDU बीते 23 साल से नीतीश की छांव में ही चल रही है। नीतीश कुमार ही चेहरा हैं। दूसरे नंबर पर जरूर कुछ नेता पहुंचे, लेकिन वे लंबे समय तक टिक नहीं पाए या टिकने नहीं दिया गया।
- इनमें सबसे बड़ा नाम RCP सिंह यानी रामचंद्र प्रसाद सिंह का है। UP कैडर के IAS अफसर रहे RCP 2010 में नौकरी छोड़कर JDU में आए। उन्हें नीतीश कुमार का आंख-कान-नाक कहा जाता था। 2020 में JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। हालांकि, 2 साल बाद ही दोनों के रिश्ते में दरार पड़ गई और RCP ने JDU छोड़ दिया। वे भाजपा में शामिल हुए और फिर जनसुराज का हिस्सा बन गए।
- 2015 में नीतीश के साथ मिलकर महागठबंधन की सरकार बनवाने में अहम भूमिका निभाने वाले प्रशांत किशोर भी नीतीश के काफी करीब रहे। अक्सर वे नीतीश के साथ दिखते थे। तब चर्चा थी कि नीतीश के बाद प्रशांत किशोर ही JDU का चेहरा हैं। हालांकि, बाद में वह भी अलग हो गए।
- कोईरी समुदाय से आने वाले उपेंद्र कुशवाहा भी नीतीश के करीबी रह चुके हैं। हालांकि, बाद में उन्होंने अलग होकर खुद की पार्टी बना ली। कोईरी समुदाय नीतीश का कोर वोटर माना जाता है।
- पिछले साल पूर्व IAS अफसर मनीष वर्मा का नाम भी नीतीश के उत्तराधिकारी के तौर पर उभरा। नालंदा के रहने वाले मनीष वर्मा उसी कुर्मी समाज से आते हैं, जिससे नीतीश आते हैं।
- मनीष वर्मा ने जैसे अपना कार्यक्रम राज्यभर में शुरू किया। बीच में रोक दिया गया। फिलहाल वह नीतीश कुमार के साथ दिखते तो हैं, लेकिन पार्टी के अहम निर्णयों से दूर है।
2. प्रशांत के नाम से भाजपा निशांत पर मानी
पिछले 30 सालों की बिहार की राजनीति को देखें तो यहां हमेशा तीसरी धुरी रही है। तीसरी धुरी का नेतृत्व नीतीश कुमार करते हैं।
- 16% से ज्यादा वोट बैंक हमेशा नीतीश कुमार के साथ रहा है। उनके वोटरों पर उनके पाला बदलने का कोई फर्क नहीं पड़ता। फिलहाल बिहार में JDU के 85 विधायक और 12 सांसद हैं।
- भाजपा को पता है कि नीतीश कुमार के बाद JDU बिखरी तो सत्ता का समीकरण बिगड़ सकता है। उनका वोट बैंक भाजपा में ही शिफ्ट होगा, इसकी गारंटी नहीं है।
- चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर भी बिहार में फिर से एक्टिव होने वाले हैं। उन्होंने अपने पहले चुनाव में 3.3% वोट हासिल किया है।
- एक्सपर्ट मानते हैं कि अगर नीतीश कुमार के बाद JDU बिखरती है तो ज्यादा फायदा प्रशांत किशोर को हो सकता है। ऐसे में भाजपा की मजबूरी है कि JDU बची रहे। वह कतई नहीं चाहेगी कि बिहार में JDU के अलावा तीसरा प्लेयर कोई और बने।
देश
सोना आज ₹6149 सस्ता, ₹1.61 लाख पर आया:34 दिन में 14 हजार गिरा, चांदी एक दिन में 23 हजार रुपए सस्ती हुई
नई दिल्ली,एजेंसी। सोने और चांदी के दामों में आज 4 मार्च को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 6,149 रुपए घटकर ₹1.61 लाख पर आ गया है। इससे पहले सोमवार को इसकी कीमत 1.67 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम थी।
वहीं, एक किलो चांदी 23,417 रुपए गिरकर रू.2.66 लाख पर आ गई है। इससे पहले सोमवार को इसकी कीमत 2.89 लाख रुपए प्रति किलो थी। सोना चांदी के दाम में ये गिरावट प्रॉफिट बुकिंग की वजह से आई है। मंगलवार को होली पर्व के कारण बाजार बंद था।
- ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी: सोना एक शहर से दूसरे शहर ले जाने में ईंधन और भारी सुरक्षा का खर्च आता है। आयात केंद्रों से दूरी बढ़ने पर ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ जाती है, जिससे स्थानीय दाम बढ़ जाते हैं।
- खरीदारी की मात्रा : दक्षिण भारत जैसे इलाकों में खपत ज्यादा (करीब 40%) होने के कारण ज्वेलर्स भारी मात्रा में सोना खरीदते हैं। बल्क खरीदारी पर मिलने वाली छूट का फायदा ग्राहकों को कम दाम के रूप में मिलता है।
- लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन: हर राज्य और शहर के अपने ज्वेलरी एसोसिएशन (जैसे तमिलनाडु में मद्रास ज्वेलर्स एसोसिएशन) होते हैं। ये संगठन स्थानीय मांग और सप्लाई के आधार पर अपने इलाके के लिए सोने का रेट तय करते हैं।
- पुराना स्टॉक और खरीद मूल्य: ज्वेलर्स ने अपना स्टॉक किस रेट पर खरीदा है, यह भी मायने रखता है। जिन ज्वेलर्स के पास पुराने और सस्ते रेट पर खरीदा हुआ स्टॉक होता है, वे ग्राहकों से कम कीमत वसूल सकते हैं।
₹3.86 लाख के ऑल टाइम हाई पर पहुंच चुकी है चांदी
इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 31 दिसंबर 2026 को सोने की दाम 1.33 लाख रुपए थे, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपए के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गए थे। तब से अब तक सोना 14,799 रुपए सस्ता हो चुका है।
वहीं, चांदी के कीमत 31 दिसंबर 2026 को 2.30 लाख रुपए थी, जो 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपए के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई थी। तब से अब तक 34 दिन में चांदी 1.19 लाख रुपए सस्ती हो गई है।
एक्सपर्ट्स: सोना 1.72 लाख और चांदी 3.30 लाख जा सकती है
LKP सिक्योरिटीज के वीपी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के अनुसार, “आने वाला हफ्ता अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के लिहाज से काफी अहम है। वहां के मैन्युफैक्चरिंग और बेरोजगारी के आंकड़े आने वाले हैं, जिससे फेडरल रिजर्व की पॉलिसी का अंदाजा लगेगा। तकनीकी तौर पर जब तक सोना रू.1,64,000 के ऊपर है, तब तक इसमें मजबूती बनी रहेगी। ऊपर की तरफ रू.1,72,000 का स्तर पार होने पर यह और ऊपर जा सकता है।”
वहीं, एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि “सोना अभी कंसोलिडेशन (स्थिरता) के दौर में है, लेकिन इसका ट्रेंड पॉजिटिव है। अगर चांदी रू.2.50 लाख से रू.2.70 लाख के बीच टिकी रहती है, तो यह दोबारा रू.3.20 लाख से रू.3.30 लाख तक जा सकती है।”
अमेरिका-ईरान तनाव पर निर्भर रहेगा बाजार
जानकारों का मानना है कि सोने-चांदी की अगली चाल इन दो बातों पर निर्भर करेगी:
- मिडल ईस्ट संकट: अगर ईरान और इजराइल, अमेरिका के बीच तनाव और बढ़ता है या कच्चे तेल की कीमतें फिर से उछलती हैं, तो सोने-चांदी में दोबारा तेजी आ सकती है।
- अमेरिकी डेटा: अगर अमेरिका के आर्थिक आंकड़े उम्मीद से बेहतर आते हैं, तो डॉलर मजबूत होगा और इससे सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान
1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है।
2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है।
देश
मिडिल ईस्ट में उबाल, दुनियाभर के बाजारों में भूचाल, कमजोर खुल सकते हैं सेंसेक्स-निफ्टी
मुंबई, एजेंसी। मिडिल ईस्ट में संकट गहराने व होर्मुज स्ट्रेड के रास्ते कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने तथा डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दिए गए बयान के बाद दुनियाभर के बाजार 3 मार्च को क्रैश हो गए। एशियाई बाजार 11 महीनों के अपने सबसे खराब दौर के ट्रेक पर नजर आ रहे हैं। साउथ कोरिया के बाजार में सबसे ज्यादा कमजोरी दिख रही है। छुट्टी से लौटने के बाद यह 5 फीसदी गिर गया और प्रोग्राम ट्रेडिंग के लिए कुछ समय के लिए सेल ऑर्डर रोक दिए गए। होली की छुट्टी के बाद बुधवार को घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रहने के संकेत हैं। फ्यूचर्स से जुड़े संकेतक GIFT Nifty में करीब 600 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई और यह 24,355 के आसपास लगभग 2.55% नीचे ट्रेड करता दिखा। इससे संकेत मिल रहे हैं कि BSE Sensex और NIFTY 50 दबाव में खुल सकते हैं।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े घटनाक्रमों ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। ऊर्जा आपूर्ति को लेकर आशंकाओं के चलते बाजार में सतर्कता बढ़ गई है। उल्लेखनिय है कि ट्रंप ने कहा कि यह वॉर करीब 1 महीने तक चल सकती है।
एशियाई बाजारों में भारी गिरावट
वैश्विक बाजारों में भी बिकवाली हावी रही। दक्षिण कोरिया का KOSPI 7% से ज्यादा टूट गया, जो 2024 के बाद की बड़ी गिरावट मानी जा रही है। टेक दिग्गज Samsung Electronics और SK Hynix में करीब 10% तक की कमजोरी आई।
जापान का Nikkei 225 3% से अधिक फिसला, जबकि हांगकांग का Hang Seng Index और चीन का SSE Composite Index भी 1% से ज्यादा नीचे रहे। यूरोप में Stoxx Europe 600 लगभग 2.5% गिरा, वहीं अमेरिकी फ्यूचर्स में भी 2% तक की कमजोरी दिखी।
कच्चे तेल में तेजी से बढ़ी चिंता
तनाव के बीच Brent Crude 85 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। आज इसमें 7% से अधिक की तेजी दर्ज हुई थी। Strait of Hormuz को लेकर बढ़ते जोखिम ने तेल और गैस आपूर्ति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तेल की बढ़ती कीमतें एशियाई कंपनियों की लागत बढ़ा सकती हैं, जिससे मुनाफे पर दबाव और महंगाई में तेजी की आशंका है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
सोमवार को भी दिखा भारी उतार-चढ़ाव
सोमवार को भी बाजार में तेज गिरावट देखी गई थी। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 2,700 अंकों से ज्यादा टूटा, हालांकि बाद में कुछ रिकवरी के साथ करीब 1,048 अंकों की गिरावट पर बंद हुआ। निफ्टी भी दिन में 575 अंक फिसलकर अंत में 312 अंक नीचे बंद हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता, बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। ऊंची ऊर्जा कीमतों से रुपये पर दबाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ सकती है। ऐसे में निवेशकों को घबराहट में फैसले लेने के बजाय संतुलित और लंबी अवधि की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।
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