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Air India in Trouble: पाकिस्तान के कारण Air India को भारी नुकसान, अब कंपनी ने भारत सरकार से की ये डिमांड
मुंबई, एजेंसी। पाकिस्तान द्वारा भारतीय विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद किए जाने के बाद एयर इंडिया को लंबा चक्कर लगाकर उड़ान भरनी पड़ रही है। इससे कंपनी की फ्यूल कॉस्ट बढ़ गई है, उड़ानों का समय 3 घंटे तक बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को फिर से खड़ा करने की कंपनी की कोशिशों पर बड़ा असर पड़ रहा है।
एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि टाटा ग्रुप के स्वामित्व वाली एयर इंडिया ने भारत सरकार से चीन के शिनजियांग क्षेत्र में उड़ान की अनुमति दिलाने का आग्रह किया है। कंपनी चाहती है कि भारत, चीन को मनाए ताकि वह शिनजियांग के संवेदनशील सैन्य हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने की अनुमति दे दे। इससे अमेरिका, यूरोप और कनाडा जाने वाली उड़ानों का समय कम हो जाएगा।
भारत–चीन के बीच 5 साल बाद दोबारा शुरू हुई उड़ानें
जून 2020 में सीमा विवाद के बाद दोनों देशों के बीच डायरेक्ट फ्लाइट बंद हो गई थीं। हाल ही में उड़ानें फिर से शुरू हुई हैं। एयर इंडिया अब अपनी खोई हुई अंतरराष्ट्रीय पकड़ वापस पाने की कोशिश कर रही है लेकिन जून 2025 में गुजरात में लंदन-बाउंड बोइंग 787 हादसे के बाद इसकी मुश्किलें और बढ़ गई थीं। हादसे में 260 लोगों की मौत हुई थी, जिसके चलते कंपनी को सुरक्षा जांच के दौरान उड़ानें घटानी पड़ीं।
पाकिस्तान बैन का भारी असर: फ्यूल कॉस्ट 29% बढ़ी
पाकिस्तान ने अप्रैल में भारत के साथ बढ़ते कूटनीतिक तनाव के बाद अपना हवाई क्षेत्र भारतीय विमानों के लिए बंद कर दिया था। एयर इंडिया, जिसके पास भारत का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क है, को इसके कारण गंभीर नुकसान हो रहा है।
कंपनी के दस्तावेज के मुताबिक…
- फ्यूल कॉस्ट 29% तक बढ़ चुकी है,
- लंबी दूरी की कई उड़ानों का समय 3 घंटे तक बढ़ गया,
- मौजूदा रूट्स पर दबाव के कारण ऑपरेशंस प्रभावित हो रहे हैं।
यह जानकारी एयर इंडिया ने अक्टूबर के अंत में भारतीय अधिकारियों को भेजे गए दस्तावेज में दी है। इसमें यह भी बताया गया है कि भारत सरकार इस वैकल्पिक रूट पर विचार कर रही है। एयर इंडिया चाहती है कि शिनजियांग के होटन, काशगर और उरुमकी एयरपोर्ट पर आपातकालीन लैंडिंग की सुविधा भी मिले।
कंपनी पर वित्तीय दबाव: अतिरिक्त $455 मिलियन का बोझ
टाटा ग्रुप और सिंगापुर एयरलाइंस के संयुक्त स्वामित्व वाली एयर इंडिया ने अनुमान लगाया है कि पाकिस्तान एयरस्पेस बैन से उसके मुनाफे पर सालाना 455 मिलियन डॉलर का असर पड़ेगा। FY2024-25 में कंपनी का अनुमानित घाटा 439 मिलियन डॉलर था। यानी एयर इंडिया पर नुकसान का बोझ लगातार बढ़ रहा है। इस मुद्दे पर चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वे स्थिति से अनजान हैं। एयर इंडिया और भारत, चीन तथा पाकिस्तान के एविएशन अधिकारियों ने भी इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
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Citroen Cars Discount : कार खरीदने का शानदार मौका! Citroen ने इन गाड़ियों पर किया डिस्काउंट का ऐलान
मुंबई, एजेंसी। Citroen ने अपने ग्राहकों के लिए चुनिंगा गाड़ियों पर डिस्काउंट का ऐलान किया है। ये डिस्काउंट मॉडल के आधार पर दिए जाएंगे और ग्राहक इसका फायदा 30 जून तक उठा सकते हैं। डिटेल में जानते हैं इन डिस्काउंट के बारे में-

Citroen Basalt
Basalt कूप-SUV पर इस महीने 1.4 लाख रुपये तक का डिस्काउंट मिल रहा है। इसमें 82hp, 115Nm वाला 1.2-लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड (NA) पेट्रोल इंजन या 110hp, 190Nm वाला 1.2-लीटर टर्बोचार्ज्ड पेट्रोल इंजन मिलता है। NA इंजन के साथ 5-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन मिलता है, जबकि टर्बो-पेट्रोल इंजन 6-स्पीड मैनुअल या 6-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ आता है। ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ, टर्बो-पेट्रोल इंजन 205Nm का ज़्यादा टॉर्क देता है। मार्केट में इसकी कीमत 8.55 लाख रुपये से 13.75 लाख रुपये की के बीच है।

Citroen Aircross
Citroen Aircross पर कंपनी इस महीने 1.4 लाख रुपये तक का डिस्काउंट दे रही है। अपने सेगमेंट में यह एकमात्र 7 सीटर एसयूवी है। इसकी कीमत 8.89 लाख रुपये से 13.99 लाख रुपये तक जाती है।
Citroen C3
Citroen C3 की खरीदी करने पर आप 1.1 लाख रुपए तक की बचत कर सकते हैं। इसकी कीमत 4.99 लाख रुपये से 9.60 लाख रुपये के बीच की है।
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Tata के iPhone प्लांट पर पर्यावरण नियमों के उल्लंघन का आरोप, बंद हो सकती है फैक्ट्री
मुंबई, एजेंसी। भारत में iPhone निर्माण से जुड़े एक प्रमुख संयंत्र को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। तमिलनाडु के होसुर स्थित टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के प्लांट पर आसपास की कृषि भूमि और भूजल को प्रदूषित करने के आरोप लगे हैं। मामले की जांच के बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कंपनी से जवाब मांगा है और संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिलने पर फैक्ट्री बंद करने तक की चेतावनी दी है।
यह प्लांट Apple के iPhone के लिए बैक पैनल और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जों का निर्माण करता है। पिछले कई महीनों से प्लांट के आसपास के किसानों ने शिकायत की थी कि फैक्ट्री से निकलने वाला अपशिष्ट जल के कारण उनकी खेती और जल स्रोत को प्रभावित कर रहा है। किसानों की शिकायत के बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जांच शुरू की और अब मामला गंभीर रूप ले चुका है।

जांच के दौरान बोर्ड ने नोटिस में कहा कि फैक्ट्री परिसर के एक तालाब से निकला पानी आसपास के कृषि क्षेत्रों तक पहुंचा, जिससे भूजल प्रदूषण की आशंका पैदा हुई। बोर्ड ने यह भी आरोप लगाया कि दिसंबर 2025 में जारी निर्देशों के बावजूद कंपनी ने जरूरी सुधारात्मक कदम नहीं उठाए। इसी वजह से मई में जारी नोटिस में पूछा गया कि आखिर क्यों न यूनिट की बिजली आपूर्ति काट दी जाए और संचालन बंद कर दिया जाए। यह चेतावनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है।
टाटा ने आरोपों को किया खारिज
वहीं, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि उसने एक मान्यता प्राप्त स्वतंत्र प्रयोगशाला द्वारा कराई गई जांच में संयंत्र को सभी पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप पाया गया है। कंपनी ने दावा किया है कि वह पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों को अपना जवाब सौंप चुकी है।
पर्यावरण और उद्योग के बीच संतुलन की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। एक तरफ भारत वैश्विक कंपनियों के लिए उत्पादन केंद्र बनने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय समुदायों और किसानों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब सभी की नजर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के बीच होने वाली आगे की कार्रवाई पर टिकी है।
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स्मार्टफोन की बिक्री में 35% की बड़ी गिरावट, कीमत बढ़ने से मांग पर दबाव
नई दिल्ली, एजेंसी। देश में स्मार्टफोन की बढ़ती कीमतों का असर अब बिक्री पर साफ दिखाई देने लगा है। रिटेलरों का कहना है कि मई में मोबाइल की बिक्री में सालाना आधार पर रिकॉर्ड 30-35 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसकी वजह यह है कि मेमरी चिप की बढ़ती लागत की भरपाई के लिए कंपनियां नवंबर 2025 से लगातार कीमतों में बढ़ोतरी कर रही हैं। अभी कुल बिक्री में से 60 प्रतिशत हिस्सा ऑफलाइन का है, जबकि 40 प्रतिशत बिक्री ऑफलाइन के जरिए होती है। कुल मिलाकर ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की बिक्री में भारी गिरावट आएगी।

काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार मई में शिपमेंट में सालाना आधार पर 15-20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। जून में भी इसी तरह की कमजोरी बने रहने की संभावना जताई गई है। साल 2026 की पहली तिमाही में मोबाइल शिपमेंट में गिरावट 3 प्रतिशत रही थी लेकिन दूसरी तिमाही में यह गिरावट 15 प्रतिशत से ज्यादा रहने का अनुमान है।
रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी और मई के बीच स्मार्टफोन की औसत कीमत में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह बढ़ोतरी पिछले साल हुई कीमतों में वृद्धि के अलावा है। रिटेलरों का कहना है कि कीमतें बढ़ने के बाद से कुछ मामलों में कुल असर 40-45 प्रतिशत तक रहा है।
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