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कोरबा

अधूरी अनुमति, गलत तथ्य, जंगल मद की जमीन और 440 पेड़ों की अवैध कटाई के बीच बालको का जी-9 प्रोजेक्ट

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सम्मान की स्वर्ण आभा में दब गई मजदूरों की प्रताड़ना एवं शोषण की आवाज
अवैध प्रोजेक्ट जी – 9 को वैध दिखाने बालको ने श्रम मंत्री को बुलाया, सम्मान दिया और करा दिया भूमिपूजन

कोरबा/बालकोनगर। भाजपा का सुशासन आते ही शासन-प्रशासन को गुमराह कर कार्पोरेट जगत अवैध को वैध करने के लिए किस तरह जुट जाते हैं यह 17 नवंबर को उस समय दिख गया जब छोटे झाड़ – बड़े झाड़ के जंगल में लगे हजारों पेड़ों में से 440 पेड़ों को काटकर बालको 9 मंजिला इमारत खड़ी करने के लिए श्रम मंत्री से भूमि पूजन करा दिया। मुख्य अतिथि स्वर्ण आभा से चकाचौध श्रम मंत्री ने बालको में हो रही मजदूरों की प्रताड़ना एवं शोषण को नजर अंदाज कर भूमि पूजन कर दिया। जिस जनता ने आशीर्वाद देकर जिन्हें मंत्री बनाया वे बालको की स्वर्ण आभा के सामने शोषित श्रमवीरों को भी भुला दिया।
जी-9 टॉवर जैसी ईमारत खड़ी करने के लिए बालको ने अवैध को वैध दिखाने के लिए और प्रोजेक्ट में किसी तरह की अड़चन ना आए इस लिए शासन को अपने कब्जे में करने की कोशिश की और सफल भी रहा।
इस पूरे मामले में अधिवक्ता अब्दुल नफीस खान ने प्रशासन से जो शिकायत की थी, उसके अनुसार कोरबा जिले के पाड़ीमार बालको नगर में इंदिरा मार्केट के सामने बालको प्रबंधन द्वारा बनाए जा रहे बहुमंजिला जी-9 आवास निर्माण का सच जितना सामने आ रहा है, उतना ही यह पूरा मामला शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल भी खड़ा करता है। श्रम मंत्री ने कैसे भूमिपूजन के लिए पहुंचा, यह भी सवाल के घेरे में है, कहीं स्वर्णिम आभा में मंत्री इस अवैध निर्माण का भूमि पूजन तो नहीं करने गए। सवाल कई खड़े होते हैं, लेकिन सच्चाई यही है कि बालको प्रबंधन जहां खाली जगह दिखी, अपनी सोच कर फैंसिंग करा दी और बालको के आधिपत्य की जगह मानकर कुछ भी प्रोजेक्ट खड़ा कर रहा है।
स्टर लाईट ने भारत एल्युमिनियम का 51 प्रतिशत शेयर खरीदने के समय सिर्फ बालको प्रोजेक्ट में अपनी हिस्सेदारी खरीदा था, लेकिन वेदांता के आगमन के बाद लगता है कि सारी जमीन उसी की ही है। तात्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, कि 1000 एकड़ से भी अधिक जमीन पर वेदांता ने अवैध कब्जा किया है। मामला राष्ट्र स्तरीय सुर्खियों में था और कहा कि कांगे्रस सरकार आते ही हम सरकारी जमीन से कब्जा हटायेंगे, लेकिन सीएम बनते ही भूपेश की यह धमकी गिदड़ धमकी निकली और वे सीएम बनते ही बालको के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोला।
अधिवक्ता अब्दुल नफीस खान ने प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में कहा है – सबसे पहले तो यह समझना जरूरी है कि किसी भी प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य की शुरुआत सम्पूर्ण अनुमति प्राप्त होने के बाद ही की जा सकती है, लेकिन लगता है बालको ने कानून और नियमों के पालन कराने वालों को ही अपनी जेब में रख लिया हो।
बिना अनुमति, बिना प्रक्रिया, सिर्फ आवेदन देकर ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया, और सबसे पहले इस बहुमंजिली जी – 9 आवास निर्माण में बाधा बने बड़े बड़े पेड़ों की हरित संहार का षडयंत्र रचा और छोटे-बड़े झाड़ के जंगल को पूरी तरह सफाया कर दिया और करीब 440 पेड़ों को जमींदोज करा कर कटे पेड़ों को रातोंरात गायब करा दिया।
बालको द्वारा नजूल विभाग, नगर तथा ग्राम निवेश, नगर निगम और एसडीएम कोरबा को प्रेषित अनुमति के आवेदन में जिस खसरा नंबर 191/1 का उल्लेख किया गया, वह जमीन राजस्व अभिलेखों में ‘छोटे झाड़ के जंगल मद के नाम से दर्ज है। यह अपने आप में सबसे बड़ा धोखा है।
अधिवक्ता ने उठाए कई गंभीर सवाल
जब समग्र अनुमति मिली ही नहीं…
जब जमीन जंगल मद श्रेणी की है…
जब पेड़ों को स्थानांतरित किया ही नहीं गया…
जब अनुमति झूठ पर आधारित है…
तो मंत्री जी अवैध निर्माण का भूमिपूजन किस अधिकार से कर सकते हैं?
क्या बालको की राजनीतिक पकड़ इतनी मजबूत है कि कानून भी हाथ जोड़कर खड़ा रहता है?
यहाँ कानून का मजाक उड़ाया गया, प्रशासन को धोखा दिया गया। जंगल मद भूमि को साधारण बताकर खेल खेला गया।
और आखिर में राजनीतिक संरक्षण लेकर भूमिपूजन भी करवा दिया गया।
यह पूरा प्रकरण एक संदेश देता है-
नियम और कानून आम जनता के लिए बने हंै, बालको और नेताओं के लिए नहीं।
यह विडंबना नहीं, व्यवस्था पर कलंक है।
क्या बालको जैसा कारपोरेट 440 पेड़ों की बलि देकर आलीशान आवासीय भवन खड़ा कर देगा?
क्या यही सुशासन है?
क्या यही पर्यावरण संरक्षण है?
क्या यही जनसेवा है?
यह पूरा घटनाक्रम इस ओर संकेत करता है कि बालको प्रबंधन को शासन-प्रशासन का पूर्ण संरक्षण प्राप्त है।
केंद्र की मोदी सरकार जहां एक ओर ‘मां के नाम एक पेड़Ó जैसी योजना चला रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश सरकार के मंत्री, पूरे दल-बल के साथ, लगभग 440 पेड़ों की हरित संहार वाली भूमि का भूमिपूजन कर सुर्खियाँ बटोरते नजर आए।
प्रशासनिक मौन स्वयं में बड़ा प्रश्न?
स्थानीय लोगों द्वारा अनेकों शिकायतें , वन विभाग और जिला प्रशासन को दी गईं, जिसमें स्पष्ट किया गया कि पेड़ों की कटाई अथवा हटाने की कोई वैध अनुमति उपलब्ध नहीं है।
इसके बावजूद प्रशासन की मौजूदगी में भूमिपूजन का होना, लोगों के बीच यह धारणा मजबूत करता है कि इस पूरे मामले में कहीं न कहीं कोई बड़ा षड्यंत्र चल रहा है।
अधिवक्ता ने कहा – पिछले 5 महीने से मैंने अपने स्तर पर इन पेड़ो को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सरकार जब खुद पेड़ों की बलि देने को आतुर हो, तब एक आम नागरिक की लड़ाई कितनी कठिन हो जाती है, मुझे इस बात का हमेशा अफसोस रहेगा कि मैं उन 440 पेड़ों को नहीं बचा पाया। अभी भी मेरी कोशिश जारी है।
अब एक आखिरी रास्ता
अधिवक्ता ने कहा अब शासन प्रशासन से न्याय की उम्मीद नहीं और मेरे पास एक ही रास्ता बचा है न्यायालय का। मुझे पूरा भरोसा है न्याय होगा। उन्होंने आम जनता से अपील करते हुए कहा है कि जिस तरह बालको श्रमिकों के शोषण और प्रताड़ना की नींव पर जी-9 खड़ा करने वाला है, 440 पेड़ों की बलि देकर चकाचौंध दुनिया में कदम रख रहा है, अगर आपका दिल भी इन पेड़ों की तरह हरा है, तो इस सत्य को, इस अन्याय को, इस छल को सार्वजनिक करें और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं। जनता की एकजुट आवाज़ ही असली ताकत है।
बालको विस्तार परियोजना की जनसुनवाई तक प्रशासन, पे्रस, प्रतिनिधियों का तलवा … वाले अब फोन तक नहीं उठाते और उनकी हिटलरशाही बढ़ती जा रही है।
यह किसकी मजबूरी है? कानून की या अधिकारी की?
इस मामले की सबसे दुर्भाग्यपूर्ण दृश्य दिनांक 17/11/2025 को देखने को मिला जब कोरबा विधायक और प्रदेश सरकार के मंत्री लखनलाल देवांगन द्वारा बालको वेदांता के इस आवासी जी – 9 आवासीय प्रोजेक्ट के अवैध निर्माण का विधिवत भूमिपूजन कर दिया गया।
बालको प्रबंधन ने अपने इस अवैध प्रोजेक्ट के सुरक्षा कवच के रूप में लोगों को दिखाने के लिए मंत्री के कर कमलों से भव्य भूमिपूजन करवा दिया गया।
इस भूमि पूजन में मंत्री जी के साथ बालको के सीईओ, नगर निगम कोरबा के महापौर,स्थानीय बीजेपी नेता और उक्त आवास निर्माण से संबंधित ठेकदार भी मौजूद रहे।
दस्तावेज बताते हैं कि, अभी तक सम्पूर्ण अनुमति नहीं
बालको प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज़ों, और संबंधित विभाग से प्राप्त दस्तावेजों के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि जी – 9 आवास निर्माण को अब तक समग्र निर्माण अनुमति प्राप्त नहीं हुई है।
जो अनुमति ली भी गई है, वह भी प्रबंधन ने अधूरी, भ्रामक और गलत जानकारी प्रस्तुत कर हासिल की है, जो अपने आप में गंभीर जांच का विषय है।
स्थानीय निवासी 440 पेड़ों और उनके रहने वाले जीव जंतुओं को बचाने बालको प्रबंधन के इस आवासीय प्रोजेक्ट निर्माण कार्य का लगातार विरोध कर रहे हैं। यहां तक कि नगर निगम के एमआईसी मेम्बर हितानंद अग्रवाल, बीजेपी बालको मंडल अध्यक्ष द्वारा भी इसका विरोध शुरुआत से ही किया जा रहा था और भूमिपूजन के एक दिन पहले तक विरोध जारी रहा।
लेकिन कार्यक्रम वाले दिन मंडल अध्यक्ष मंत्री के साथ भूमि पूजन में शामिल रहे, आखिर यह चमत्कारिक ‘रवैये में परिवर्तन किस दबाव या समझौते का परिणाम है।
जंगल मद की भूमि पर बिना विशेष अनुमति किसी भी प्रकार का निर्माण संभव नहीं
पर बालको प्रबंधन ने इसे साधारण भूमि की तरह दिखाकर प्रशासन को गलत जानकारी देते हुए या प्रशासन के कुछ अधिकारियों को अपने प्रभाव में लेकर एक सोची समझी साजिश के तहत उक्त निर्माण स्थल पर मात्र 172 पेड़ों की गिनती बताई गई, जो पूरी तरह झूठ है।
वास्तविकता में मौके पर धार्मिक मान्यता वाले पेड़ बरगद,पीपल, आम, सेमर पलाश सहित अन्य प्रजातियों के लगभग 440 बड़े, दशकों पुराने पेड़ खड़े थे, जिसकी गिनती मेरे द्वारा स्वयं की गई थी, और हमारे वार्ड के बीजेपी पार्षद रजत खूंटे द्वारा भी गिनती करके, पेड़ो पर नंबर चस्पा किया था।
पेड़ों की गिनती में इतने बड़े अंतर को गलती नहीं कही जा सकती। यह साफ-साफ जानबूझकर की गई फर्जी गिनती है ताकि पेड़-कटाई और निर्माण की राह आसान हो सके। अधिवक्ता श्री खान ने बताया कि मेरे द्वारा जिलाधीश को संबंधित दस्तावेजों और निर्माण स्थल के फोटोग्राफ्स सहित गत 05/6/2025, 09/06/2025, 16/06/2025 को लगातार शिकायत की गई। तब जाकर एसडीएम कोरबा द्वारा इस आधार पर कि निर्माण स्थल पर खसरा नंबर 199/1 बड़े झाड़ के जंगल और घास भूमि है। निर्माण स्थल से पेड़ों को स्थानांतरित करने की अनुमति दिनांक 3/6/2025 को लिखित आदेश जारी करते हुए निरस्त तो कर दी गई, लेकिन प्रशासन केवल कागज़ पर ही सख्त दिखा। जमीन पर स्थिति वही रही। ना पेड़ स्थानांतरित हुए, ना निर्माण रुका और ना झूठे तथ्यों पर दी गई अन्य अनुमतियों की समीक्षा हुई। बल्कि उसी अधिकारी ने जिसने उक्त स्थल से पेड़ों को स्थानांतरित करने की अनुमति दिनांक 2/5/2025 को दी थी, फिर दिनांक 3/6/2025 को उक्त अनुमति रद्द कर दी। उसी ने फिर से पेड़ों को स्थानांतरित करने/ काटने का बालको का नया आवेदन भी स्वीकार कर लिया।
एक तरफ भाजपा का विरोध, दूसरी ओर मंत्री का खुला समर्थन !
एक तरफ भाजपा बालको मण्डल और निगम में एमआईसी मेम्बर तथा वरिष्ठ भाजपा नेता हितानंद अग्रवाल बालको के खिलाफ मोर्चा खोलकर बैठे हैं और मजदूरों की प्रताड़ना एवं शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं, दूसरी ओर श्रम मंत्री स्वर्ण आभा के चकाचौंध में श्रमवीरों का शोषण एवं प्रताड़ना की उपेक्षा कर भूमिपूजन में शामिल हुए। स्वयं को भूमि पुत्र बताकर चुनाव जीतने वाले श्रम मंत्री अब भू-माफिया (वेदांता प्रबंधन) का खुलेआम समर्थन करते हुए जी-9 के भूमिपूजन में पहुंचे। उद्बोधन में श्रम मंत्री ने क्या कहा, यह हम नहीं जानते, लेकिन बालको ने जो प्रेस नोट भेजा उसमें श्रम मंत्री ने बालको की प्रशंसा में कसीदे गढ़े।
स्थल का वास्तविक सच इससे भी अधिक भयावह है
यहाँ केवल 440 पेड़ नहीं थे बल्कि सैकड़ों जीव-जंतुओं का प्राकृतिक आवास भी था, जो इस अवैध आवासीय प्रोजेक्ट में पूरी तरह तहस नहस कर दिए गए।
जहाँ कभी कोयल की मधुर आवाज सुनाई देती थी, वहाँ अब बड़ी-बड़ी मशीनों की कर्कश आवाजें गूंज रही हैं।
घने जंगल की अनुभूति देने वाला क्षेत्र अब महज कुछ गिनती के पेड़ों तक सिमट गया है। छोटे-छोटे पौधे, जो एक-दो साल में विशाल पेड़ बनने वाले थे, उन्हें भी बुलडोज़रों ने निर्ममता से रौंद दिया।
जमीन का प्राकृतिक स्वरूप, जैव विविधता और वन्यजीवों का बसेरा सब कुछ इस एक परियोजना की भेंट चढ़ गया।

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कोरबा

एसईसीएल मुख्यालय के 09 कर्मियों के सेवानिवृत्त पर भावभीनी विदाई दी गयी

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बिलासपुर/कोरबा। आज दिनाँक 30.09.2026 को एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर से सेवानिवृत्त हुए 09 कर्मियों को मुख्यालय बिलासपुर स्थित सीएमडी कक्ष में उन्हें शाल, श्रीफल, पुष्पहार से सम्मानित कर समस्त भुगतान का चेक प्रदान कर भावभीनी विदाई दी गयी।

मुख्यालय प्रशासनिक भवन के कान्फ्रेन्स हाल में मुख्य सतर्कता अधिकारी हिमांशु जैन एवं निदेशक (तकनीकी)–संचालन रमेश चंद्र महापात्र के मुख्य आतिथ्य, विभिन्न विभागाध्यक्षों, श्रमसंघ प्रतिनिधियों, अधिकारियों-कर्मचारियों की उपस्थिति में कैलाश चंद्र साहू , महाप्रबंधक (खनन), ओएसडी सीएमडी सचिवालय , अजय तिवारी, महाप्रबंधक (खनन), भूमिगत खदान विभाग, विश्वजीत मोइत्रा, उप महाप्रबंधक (उत्खनन) आंतरिक अंकेक्षण विभाग, राजेंद्र कुमार गुजर, सीनियर डीईओ, ए-1 वन विभाग, मुनिराम सतनामी, कार्यालय अधीक्षक निदेशक (मा. सं.) सचिवालय, शुभेंदु चटर्जी, वरिष्ठ तकनीकी निरीक्षक ए-1 गुणवत्ता नियंत्रण विभाग, मिनीश्वर प्रसाद जांगड़े, वरिष्ठ सुरक्षा निरीक्षक सुरक्षा विभाग, वृन्दावन, सहायक सुरक्षा उप निरीक्षक सुरक्षा विभाग तथा तपोधन मिश्रा, फोरमेन इंचार्ज, ग्रेड–ए-1 इंदिरा विहार सब-स्टेशन को सेवानिवृत्ति पर विदाई दी गयी।
इस अवसर पर शीर्ष प्रबंधन ने अपने-अपने उद्बोधन में कहा कि सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के योगदान एवं कार्यकौशल से ही कम्पनी सफलता के मुकाम पर पहुँची है। सेवानिवृत्त कर्मियों के योगदान को सदैव स्मरण किया जाएगा। अंत में उन्होंने सेवानिवृत्त कर्मियों के सपरिवार उज्ज्वल भविष्य की ईश्वर से कामना की।

सेवानिवृत्त अधिकारियों-कर्मचारियों ने कम्पनी के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि यहाँ के कर्मचारियों में कार्य के प्रति बहुत ही निष्ठा है। यहाँ के अधिकारी-कर्मचारी कंधे से कंधा मिलाकर साथ में कार्य करते हैं।

कार्यक्रम में सेवानिवृत्त कर्मियों का परिचय पढ़ते हुए सफलतापूर्वक उद्घोषणा का दायित्व प्रबंधक (राजभाषा) श्रीमती सविता निर्मलकर ने निभाया।

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कोरबा

विकसित भारत-जी राम जी के तहत विकसित ग्राम पंचायत प्लान तैयार करने जिला पंचायत में दिया गया प्रशिक्षण

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ग्रामीण बताएंगे गांव के विकास की राह

गाँव स्थानीय जरूरत और संसाधनों के आधार पर बनेगा प्लान

युक्तधारा से परिसंपत्तियों की मैपिंग और वाटर बजट से तय होंगी जल संरक्षण की प्राथमिकताएं

कोरबा, 30 सितम्बर 2026। गांव में क्या चाहिए और विकास की सबसे पहली जरूरत क्या है, अब इसका निर्धारण गांव के लोग, स्थानीय जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर करेंगे। विकसित भारत-जी राम जी के अंतर्गत विकसित ग्राम पंचायत प्लान (वीजीपीपी) तैयार करने के लिए बुधवार को जिला पंचायत के सभा कक्ष में जिला स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण की अध्यक्षता जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार सिंह ने की। इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्यगण एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत प्रतीक जैन सहित संबंधित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार सिंह ने कहा कि ग्रामों के समग्र एवं सतत विकास के लिए विकसित भारत-जी राम जी के तहत विकसित ग्राम पंचायत प्लान तैयार करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि योजनाओं में हुए बदलावों और नई व्यवस्थाओं से ग्राम विकास को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी को ग्राम पंचायत स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने तथा ग्रामीणों की सहभागिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत प्रतीक जैन ने कहा कि विकसित ग्राम पंचायत प्लान स्थानीय जरूरतों, उपलब्ध संसाधनों और ग्रामीणों की प्राथमिकताओं के आधार पर तैयार किया जाएगा। युक्तधारा पोर्टल के माध्यम से ग्राम पंचायत में उपलब्ध परिसंपत्तियों की मैपिंग की जाएगी, जबकि वाटर बजट के आधार पर जल संरक्षण एवं जल संवर्धन से जुड़े कार्यों की प्राथमिकताएं तय की जाएंगी।

उन्होंने कहा कि ग्राम सभा इस पूरी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार होगी। ग्रामीणों से प्राप्त सुझावों के आधार पर रोजगार, जल सुरक्षा, आजीविका, ग्रामीण अधोसंरचना और स्थायी परिसंपत्तियों से जुड़े कार्यों को एकीकृत योजना में शामिल किया जाएगा, ताकि विकास कार्यों का सीधा लाभ ग्रामीणों को मिले और गांव में स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण हो।

युक्तधारा बताएगा कहां है जरूरत और कहां बन सकता है काम

प्रशिक्षण में सहायक परियोजना अधिकारी संदीप डिक्सेना ने मैदानी अमले को विकसित ग्राम पंचायत प्लान तैयार करने की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। युक्तधारा पोर्टल के माध्यम से ग्राम पंचायत में उपलब्ध परिसंपत्तियों की मैपिंग, स्थानीय आवश्यकताओं की प्रविष्टि, विकासात्मक अंतराल की पहचान तथा संभावित कार्यस्थलों के चयन की ऑनलाइन प्रक्रिया समझाई गई।

प्रशिक्षण में बताया गया कि उपलब्ध संसाधनों और मौजूदा परिसंपत्तियों का आकलन कर विकास कार्यों की आवश्यकता एवं प्राथमिकता का बेहतर निर्धारण किया जा सकेगा। इससे ग्राम पंचायतों में उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करते हुए योजनाबद्ध तरीके से कार्यों का चयन किया जाएगा।

वाटर बजट से तय होगी गांव की जल जरूरत और संरक्षण की प्राथमिकता

प्रशिक्षण में वाटर बजट पर विशेष जोर दिया गया। ग्राम पंचायत में उपलब्ध जल संसाधनों तथा पानी की आवश्यकता का आकलन कर जल संरक्षण और जल संवर्धन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। इससे गांव की वर्तमान एवं भविष्य की जल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त कार्यों का चयन किया जा सकेगा।

अधिकारियों ने बताया कि सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन और ग्राम सभा के माध्यम से ग्रामीणों की जरूरतों एवं सुझावों को विकसित ग्राम पंचायत प्लान में शामिल किया जाएगा। इस प्रकार ग्रामीणों की भागीदारी, स्थानीय संसाधनों का आकलन और वैज्ञानिक तरीके से तैयार वाटर बजट ग्राम पंचायतों की विकास योजना का महत्वपूर्ण आधार बनेगा।

विकसित ग्राम पंचायत प्लान के माध्यम से रोजगार सृजन, जल सुरक्षा, आजीविका संवर्धन, ग्रामीण अधोसंरचना एवं स्थायी परिसंपत्तियों को आपस में जोड़ते हुए कार्यों की प्राथमिकता तय की जाएगी। इससे ग्राम पंचायतों में जरूरत आधारित और परिणाममूलक विकास कार्यों को बढ़ावा मिलेगा।

प्रशिक्षण में जिला पंचायत सदस्य श्रीमती रेणुका राठिया एवं श्रीमती सुष्मिता अनंत, कार्यपालन अभियंता आरईएस श्रीमती यामिनी, कार्यक्रम अधिकारी, सहायक प्रोग्रामर, तकनीकी सहायक सहित संबंधित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

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तोते के पिंजरे में घुसा 5 फीट का नाग:कोरबा में एक तोते का शिकार कर चुका था, दूसरे की बचाई जान, सुरक्षित रेस्क्यू

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कोरबा । कोरबा के मिशन रोड में एक परिवार के लिए दिन की शुरुआत डर और दुख के साथ हुई। परिवार जब अपने पालतू तोतों को देखने पिंजरे के पास पहुंचा तो अंदर करीब 5 फीट लंबा नाग फन फैलाए बैठा था। पिंजरे में मौजूद दूसरा तोता जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा था।

पिंजरे में फन फैलाए बैठे नाग का रेस्क्यू - Dainik Bhaskar

पिंजरे में फन फैलाए बैठे नाग का रेस्क्यू

परिवार ने बताया कि उन्होंने दो तोतों को लंबे समय से बच्चे की तरह पाल रखा था। पिंजरे के अंदर देखने पर पता चला कि नाग एक तोते का शिकार कर चुका था। अपने पालतू को इस तरह खोने से परिवार भावुक हो गया, जबकि दूसरे तोते की जान भी खतरे में थी।

बाद में प्राकृतिक रहवास में छोड़ा गया

बाद में प्राकृतिक रहवास में छोड़ा गया

छोटे पिंजरे में फन फैलाए बैठा था नाग

परिवार ने तुरंत नोवा नेचर फाउंडेशन के वाइल्डलाइफ रेस्क्यू टीम प्रमुख जितेंद्र सारथी को सूचना दी। जानकारी मिलते ही उन्होंने टीम सदस्य बॉबी श्रीवास को मौके पर भेजा।

बॉबी ने मौके पर पहुंचकर सावधानी से रेस्क्यू शुरू किया। पिंजरा छोटा था और नाग फन फैलाए हुए था, ऐसे में सांप को बाहर निकालना चुनौतीपूर्ण था। इसके बावजूद टीम ने सुरक्षित तरीके से नाग को रेस्क्यू कर लिया।

शरीर पर मिले संघर्ष के निशान

रेस्क्यू के दौरान नाग के शरीर पर संघर्ष के निशान भी दिखाई दिए। इससे अंदाजा लगाया गया कि शिकार बना तोता अपनी जान बचाने के लिए काफी देर तक संघर्ष करता रहा होगा। नाग को सुरक्षित रेस्क्यू बैग में रखने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली। बाद में वन विभाग के नियमानुसार नाग को उसके प्राकृतिक रहवास क्षेत्र में सुरक्षित छोड़ दिया गया।

बोले- सांप का कोई दोष नहीं

नोवा नेचर फाउंडेशन के जितेंद्र सारथी ने कहा कि परिवार के लिए अपने पालतू तोते को खोना बेहद दुखद है। लेकिन प्रकृति के नजरिए से देखें तो यह फूड चेन और इकोसिस्टम का हिस्सा है। सांप अपना भोजन तलाशते हुए पिंजरे में घुसा था, इसलिए इसमें सांप का कोई दोष नहीं है।

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