कोरबा
अधूरी अनुमति, गलत तथ्य, जंगल मद की जमीन और 440 पेड़ों की अवैध कटाई के बीच बालको का जी-9 प्रोजेक्ट
सम्मान की स्वर्ण आभा में दब गई मजदूरों की प्रताड़ना एवं शोषण की आवाज
अवैध प्रोजेक्ट जी – 9 को वैध दिखाने बालको ने श्रम मंत्री को बुलाया, सम्मान दिया और करा दिया भूमिपूजन
कोरबा/बालकोनगर। भाजपा का सुशासन आते ही शासन-प्रशासन को गुमराह कर कार्पोरेट जगत अवैध को वैध करने के लिए किस तरह जुट जाते हैं यह 17 नवंबर को उस समय दिख गया जब छोटे झाड़ – बड़े झाड़ के जंगल में लगे हजारों पेड़ों में से 440 पेड़ों को काटकर बालको 9 मंजिला इमारत खड़ी करने के लिए श्रम मंत्री से भूमि पूजन करा दिया। मुख्य अतिथि स्वर्ण आभा से चकाचौध श्रम मंत्री ने बालको में हो रही मजदूरों की प्रताड़ना एवं शोषण को नजर अंदाज कर भूमि पूजन कर दिया। जिस जनता ने आशीर्वाद देकर जिन्हें मंत्री बनाया वे बालको की स्वर्ण आभा के सामने शोषित श्रमवीरों को भी भुला दिया।
जी-9 टॉवर जैसी ईमारत खड़ी करने के लिए बालको ने अवैध को वैध दिखाने के लिए और प्रोजेक्ट में किसी तरह की अड़चन ना आए इस लिए शासन को अपने कब्जे में करने की कोशिश की और सफल भी रहा।
इस पूरे मामले में अधिवक्ता अब्दुल नफीस खान ने प्रशासन से जो शिकायत की थी, उसके अनुसार कोरबा जिले के पाड़ीमार बालको नगर में इंदिरा मार्केट के सामने बालको प्रबंधन द्वारा बनाए जा रहे बहुमंजिला जी-9 आवास निर्माण का सच जितना सामने आ रहा है, उतना ही यह पूरा मामला शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल भी खड़ा करता है। श्रम मंत्री ने कैसे भूमिपूजन के लिए पहुंचा, यह भी सवाल के घेरे में है, कहीं स्वर्णिम आभा में मंत्री इस अवैध निर्माण का भूमि पूजन तो नहीं करने गए। सवाल कई खड़े होते हैं, लेकिन सच्चाई यही है कि बालको प्रबंधन जहां खाली जगह दिखी, अपनी सोच कर फैंसिंग करा दी और बालको के आधिपत्य की जगह मानकर कुछ भी प्रोजेक्ट खड़ा कर रहा है।
स्टर लाईट ने भारत एल्युमिनियम का 51 प्रतिशत शेयर खरीदने के समय सिर्फ बालको प्रोजेक्ट में अपनी हिस्सेदारी खरीदा था, लेकिन वेदांता के आगमन के बाद लगता है कि सारी जमीन उसी की ही है। तात्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, कि 1000 एकड़ से भी अधिक जमीन पर वेदांता ने अवैध कब्जा किया है। मामला राष्ट्र स्तरीय सुर्खियों में था और कहा कि कांगे्रस सरकार आते ही हम सरकारी जमीन से कब्जा हटायेंगे, लेकिन सीएम बनते ही भूपेश की यह धमकी गिदड़ धमकी निकली और वे सीएम बनते ही बालको के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोला।
अधिवक्ता अब्दुल नफीस खान ने प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में कहा है – सबसे पहले तो यह समझना जरूरी है कि किसी भी प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य की शुरुआत सम्पूर्ण अनुमति प्राप्त होने के बाद ही की जा सकती है, लेकिन लगता है बालको ने कानून और नियमों के पालन कराने वालों को ही अपनी जेब में रख लिया हो।
बिना अनुमति, बिना प्रक्रिया, सिर्फ आवेदन देकर ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया, और सबसे पहले इस बहुमंजिली जी – 9 आवास निर्माण में बाधा बने बड़े बड़े पेड़ों की हरित संहार का षडयंत्र रचा और छोटे-बड़े झाड़ के जंगल को पूरी तरह सफाया कर दिया और करीब 440 पेड़ों को जमींदोज करा कर कटे पेड़ों को रातोंरात गायब करा दिया।
बालको द्वारा नजूल विभाग, नगर तथा ग्राम निवेश, नगर निगम और एसडीएम कोरबा को प्रेषित अनुमति के आवेदन में जिस खसरा नंबर 191/1 का उल्लेख किया गया, वह जमीन राजस्व अभिलेखों में ‘छोटे झाड़ के जंगल मद के नाम से दर्ज है। यह अपने आप में सबसे बड़ा धोखा है।
अधिवक्ता ने उठाए कई गंभीर सवाल
जब समग्र अनुमति मिली ही नहीं…
जब जमीन जंगल मद श्रेणी की है…
जब पेड़ों को स्थानांतरित किया ही नहीं गया…
जब अनुमति झूठ पर आधारित है…
तो मंत्री जी अवैध निर्माण का भूमिपूजन किस अधिकार से कर सकते हैं?
क्या बालको की राजनीतिक पकड़ इतनी मजबूत है कि कानून भी हाथ जोड़कर खड़ा रहता है?
यहाँ कानून का मजाक उड़ाया गया, प्रशासन को धोखा दिया गया। जंगल मद भूमि को साधारण बताकर खेल खेला गया।
और आखिर में राजनीतिक संरक्षण लेकर भूमिपूजन भी करवा दिया गया।
यह पूरा प्रकरण एक संदेश देता है-
नियम और कानून आम जनता के लिए बने हंै, बालको और नेताओं के लिए नहीं।
यह विडंबना नहीं, व्यवस्था पर कलंक है।
क्या बालको जैसा कारपोरेट 440 पेड़ों की बलि देकर आलीशान आवासीय भवन खड़ा कर देगा?
क्या यही सुशासन है?
क्या यही पर्यावरण संरक्षण है?
क्या यही जनसेवा है?
यह पूरा घटनाक्रम इस ओर संकेत करता है कि बालको प्रबंधन को शासन-प्रशासन का पूर्ण संरक्षण प्राप्त है।
केंद्र की मोदी सरकार जहां एक ओर ‘मां के नाम एक पेड़Ó जैसी योजना चला रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश सरकार के मंत्री, पूरे दल-बल के साथ, लगभग 440 पेड़ों की हरित संहार वाली भूमि का भूमिपूजन कर सुर्खियाँ बटोरते नजर आए।
प्रशासनिक मौन स्वयं में बड़ा प्रश्न?
स्थानीय लोगों द्वारा अनेकों शिकायतें , वन विभाग और जिला प्रशासन को दी गईं, जिसमें स्पष्ट किया गया कि पेड़ों की कटाई अथवा हटाने की कोई वैध अनुमति उपलब्ध नहीं है।
इसके बावजूद प्रशासन की मौजूदगी में भूमिपूजन का होना, लोगों के बीच यह धारणा मजबूत करता है कि इस पूरे मामले में कहीं न कहीं कोई बड़ा षड्यंत्र चल रहा है।
अधिवक्ता ने कहा – पिछले 5 महीने से मैंने अपने स्तर पर इन पेड़ो को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सरकार जब खुद पेड़ों की बलि देने को आतुर हो, तब एक आम नागरिक की लड़ाई कितनी कठिन हो जाती है, मुझे इस बात का हमेशा अफसोस रहेगा कि मैं उन 440 पेड़ों को नहीं बचा पाया। अभी भी मेरी कोशिश जारी है।
अब एक आखिरी रास्ता
अधिवक्ता ने कहा अब शासन प्रशासन से न्याय की उम्मीद नहीं और मेरे पास एक ही रास्ता बचा है न्यायालय का। मुझे पूरा भरोसा है न्याय होगा। उन्होंने आम जनता से अपील करते हुए कहा है कि जिस तरह बालको श्रमिकों के शोषण और प्रताड़ना की नींव पर जी-9 खड़ा करने वाला है, 440 पेड़ों की बलि देकर चकाचौंध दुनिया में कदम रख रहा है, अगर आपका दिल भी इन पेड़ों की तरह हरा है, तो इस सत्य को, इस अन्याय को, इस छल को सार्वजनिक करें और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं। जनता की एकजुट आवाज़ ही असली ताकत है।
बालको विस्तार परियोजना की जनसुनवाई तक प्रशासन, पे्रस, प्रतिनिधियों का तलवा … वाले अब फोन तक नहीं उठाते और उनकी हिटलरशाही बढ़ती जा रही है।
यह किसकी मजबूरी है? कानून की या अधिकारी की?
इस मामले की सबसे दुर्भाग्यपूर्ण दृश्य दिनांक 17/11/2025 को देखने को मिला जब कोरबा विधायक और प्रदेश सरकार के मंत्री लखनलाल देवांगन द्वारा बालको वेदांता के इस आवासी जी – 9 आवासीय प्रोजेक्ट के अवैध निर्माण का विधिवत भूमिपूजन कर दिया गया।
बालको प्रबंधन ने अपने इस अवैध प्रोजेक्ट के सुरक्षा कवच के रूप में लोगों को दिखाने के लिए मंत्री के कर कमलों से भव्य भूमिपूजन करवा दिया गया।
इस भूमि पूजन में मंत्री जी के साथ बालको के सीईओ, नगर निगम कोरबा के महापौर,स्थानीय बीजेपी नेता और उक्त आवास निर्माण से संबंधित ठेकदार भी मौजूद रहे।
दस्तावेज बताते हैं कि, अभी तक सम्पूर्ण अनुमति नहीं
बालको प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज़ों, और संबंधित विभाग से प्राप्त दस्तावेजों के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि जी – 9 आवास निर्माण को अब तक समग्र निर्माण अनुमति प्राप्त नहीं हुई है।
जो अनुमति ली भी गई है, वह भी प्रबंधन ने अधूरी, भ्रामक और गलत जानकारी प्रस्तुत कर हासिल की है, जो अपने आप में गंभीर जांच का विषय है।
स्थानीय निवासी 440 पेड़ों और उनके रहने वाले जीव जंतुओं को बचाने बालको प्रबंधन के इस आवासीय प्रोजेक्ट निर्माण कार्य का लगातार विरोध कर रहे हैं। यहां तक कि नगर निगम के एमआईसी मेम्बर हितानंद अग्रवाल, बीजेपी बालको मंडल अध्यक्ष द्वारा भी इसका विरोध शुरुआत से ही किया जा रहा था और भूमिपूजन के एक दिन पहले तक विरोध जारी रहा।
लेकिन कार्यक्रम वाले दिन मंडल अध्यक्ष मंत्री के साथ भूमि पूजन में शामिल रहे, आखिर यह चमत्कारिक ‘रवैये में परिवर्तन किस दबाव या समझौते का परिणाम है।
जंगल मद की भूमि पर बिना विशेष अनुमति किसी भी प्रकार का निर्माण संभव नहीं
पर बालको प्रबंधन ने इसे साधारण भूमि की तरह दिखाकर प्रशासन को गलत जानकारी देते हुए या प्रशासन के कुछ अधिकारियों को अपने प्रभाव में लेकर एक सोची समझी साजिश के तहत उक्त निर्माण स्थल पर मात्र 172 पेड़ों की गिनती बताई गई, जो पूरी तरह झूठ है।
वास्तविकता में मौके पर धार्मिक मान्यता वाले पेड़ बरगद,पीपल, आम, सेमर पलाश सहित अन्य प्रजातियों के लगभग 440 बड़े, दशकों पुराने पेड़ खड़े थे, जिसकी गिनती मेरे द्वारा स्वयं की गई थी, और हमारे वार्ड के बीजेपी पार्षद रजत खूंटे द्वारा भी गिनती करके, पेड़ो पर नंबर चस्पा किया था।
पेड़ों की गिनती में इतने बड़े अंतर को गलती नहीं कही जा सकती। यह साफ-साफ जानबूझकर की गई फर्जी गिनती है ताकि पेड़-कटाई और निर्माण की राह आसान हो सके। अधिवक्ता श्री खान ने बताया कि मेरे द्वारा जिलाधीश को संबंधित दस्तावेजों और निर्माण स्थल के फोटोग्राफ्स सहित गत 05/6/2025, 09/06/2025, 16/06/2025 को लगातार शिकायत की गई। तब जाकर एसडीएम कोरबा द्वारा इस आधार पर कि निर्माण स्थल पर खसरा नंबर 199/1 बड़े झाड़ के जंगल और घास भूमि है। निर्माण स्थल से पेड़ों को स्थानांतरित करने की अनुमति दिनांक 3/6/2025 को लिखित आदेश जारी करते हुए निरस्त तो कर दी गई, लेकिन प्रशासन केवल कागज़ पर ही सख्त दिखा। जमीन पर स्थिति वही रही। ना पेड़ स्थानांतरित हुए, ना निर्माण रुका और ना झूठे तथ्यों पर दी गई अन्य अनुमतियों की समीक्षा हुई। बल्कि उसी अधिकारी ने जिसने उक्त स्थल से पेड़ों को स्थानांतरित करने की अनुमति दिनांक 2/5/2025 को दी थी, फिर दिनांक 3/6/2025 को उक्त अनुमति रद्द कर दी। उसी ने फिर से पेड़ों को स्थानांतरित करने/ काटने का बालको का नया आवेदन भी स्वीकार कर लिया।
एक तरफ भाजपा का विरोध, दूसरी ओर मंत्री का खुला समर्थन !
एक तरफ भाजपा बालको मण्डल और निगम में एमआईसी मेम्बर तथा वरिष्ठ भाजपा नेता हितानंद अग्रवाल बालको के खिलाफ मोर्चा खोलकर बैठे हैं और मजदूरों की प्रताड़ना एवं शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं, दूसरी ओर श्रम मंत्री स्वर्ण आभा के चकाचौंध में श्रमवीरों का शोषण एवं प्रताड़ना की उपेक्षा कर भूमिपूजन में शामिल हुए। स्वयं को भूमि पुत्र बताकर चुनाव जीतने वाले श्रम मंत्री अब भू-माफिया (वेदांता प्रबंधन) का खुलेआम समर्थन करते हुए जी-9 के भूमिपूजन में पहुंचे। उद्बोधन में श्रम मंत्री ने क्या कहा, यह हम नहीं जानते, लेकिन बालको ने जो प्रेस नोट भेजा उसमें श्रम मंत्री ने बालको की प्रशंसा में कसीदे गढ़े।
स्थल का वास्तविक सच इससे भी अधिक भयावह है
यहाँ केवल 440 पेड़ नहीं थे बल्कि सैकड़ों जीव-जंतुओं का प्राकृतिक आवास भी था, जो इस अवैध आवासीय प्रोजेक्ट में पूरी तरह तहस नहस कर दिए गए।
जहाँ कभी कोयल की मधुर आवाज सुनाई देती थी, वहाँ अब बड़ी-बड़ी मशीनों की कर्कश आवाजें गूंज रही हैं।
घने जंगल की अनुभूति देने वाला क्षेत्र अब महज कुछ गिनती के पेड़ों तक सिमट गया है। छोटे-छोटे पौधे, जो एक-दो साल में विशाल पेड़ बनने वाले थे, उन्हें भी बुलडोज़रों ने निर्ममता से रौंद दिया।
जमीन का प्राकृतिक स्वरूप, जैव विविधता और वन्यजीवों का बसेरा सब कुछ इस एक परियोजना की भेंट चढ़ गया।
कोरबा
भाजयुमो: गौकरण व रिपक महामंत्री बने

कोरबा/गेवरा-दीपका। भाजपा युवा मोर्चा दीपका मंडल में नई कार्यकारिणी का विस्तार किया गया है। मंडल अध्यक्ष सत्यम यादव ने कार्यकारिणी की घोषणा की। इसमें गौकरण कंवर व रिपक कुमार को महामंत्री और विकास साहू को कोषाध्यक्ष बनाया है। उपाध्यक्ष अजूबा राज, प्रकाश गोंडारे और विरेंद्र यादव को नियुक्त किया है। वहीं महामंत्री पद पर रिपक कुमार और गौकरण कंवर को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा मंत्री पद पर अतुल सिंह, मोनू बंसल को शामिल है।
कोरबा
प्रेसवार्ता:कांग्रेस महिला आरक्षण का विरोधी नहीं, 2023 के ड्राफ्ट को लागू करे भाजपा, देश को कर रही गुमराह-जयसिंह अग्रवाल
मंत्री लखनलाल देवांगन पर फिर हमला, कहा-झोपड़ी में रहने की कहता है बात, उसके घर में भाई-भतीजा एवं ओएसडी का चेम्बर, जहां होती है अवैध वसूली
कोरबा। पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा है कि केंद्र की भाजपा सरकार महिला आरक्षण के नाम पर देश के लोगों को गुमराह करने का प्रयास कर रही हैं। पांच राज्यों में चुनाव को देखते हुए लाभ लेने की सरकार की मंशा साफ हो गई है। सरकार चाहती तो वर्तमान की सीटों के आधार पर आरक्षण दे सकती थी, लेकिन परिसीमन को जोड़कर लटकाना चाहती है।

अग्रवाल सोमवार को कांग्रेस कार्यालय में महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन क्यों नहीं विषय पर चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण का विरोध नहीं है, बल्कि इसके अधूरे और भ्रामक स्वरूप के खिलाफ में है। महिला आरक्षण के नाम पर देश की महिलाओं के साथ छल किया जा रहा है। सरकार ने जो बिल लाया था, उसमें ओबीसी और वंचित वर्ग की महिलाओं की अनदेखी की गई है। जनगणना व परिसीमन की शर्त जोड़ने से कानून तुरंत लागू नहीं होगा और कई वर्षों तक लटक सकता है। सरकार ने कोई ठोस समय सीमा भी नहीं दी है, जिससे हमें संदेह पैदा होता है कि इसे जानबूझकर लंबित रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण के नाम पर राजनीतिक लाभ लेने भाजपा प्रयास कर रही है। वह अपनी पार्टी की छवि सुधारने और वोट बैंक साधने की रणनीति पर काम कर रही है। अग्रवाल ने कहा कि यदि यह कानून प्रभावी रूप से लागू नहीं होता तो जनता का लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास कम हो सकता है। कांग्रेस पार्टी हमेशा महिला आरक्षण के पक्ष में है, इसे मजबूत लोकतंत्र के लिए आवश्यक मानती है। अगर सरकार की मंशा है कि अभी इसे लागू किया जाए तो कांग्रेस तैयार है, पार्टी अपना रुख पहले ही बता चुकी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में महिला आरक्षण कानून पारित हो गया था, उसे 2024 से लागू करने में क्या बाधा थी, इसे परिसीमन से जोड़कर अनावश्यक रूप से टालना इस बात का संकेत है कि सरकार की प्राथमिकता किसके लिए अनुमान में नहीं है। कांग्रेस तत्काल की क्रियान्वयन करना नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी की महिला अध्यक्ष हो, देश की पहली महिला प्रधानमंत्री, महिला राष्ट्रपति, महिला मुख्यमंत्री, लोकसभा स्पीकर, सुप्रीम कोर्ट जज कांग्रेस के कार्यकाल में ही हुआ है। इस मौके पर शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश राठौर, नेता प्रतिपक्ष कृपाराम साहू, विकास सिंह, महिला कांग्रेस अध्यक्ष कुसुम द्विवेदी, संतोष राठौर, पालूराम साहू, आनंद पालीवाल, के डी महंत, विजय सिंह, राकेश पंकज समेत कांग्रेसी मौजूद रहे।
जयसिंह ने मंत्री पर फिर साधा निशाना: कोयला, रेत तस्करी की वसूली के लिए मंत्री के घर में अलग-अलग चेम्बर

ठेकेदारी मेरे जीवकोपार्जन का व्यवसाय, इसमें गलत क्या? स्वर्गीय तुलसी ठाकुर भी करते थे ठेकेदारी
महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस का पक्ष रखने सोमवार शाम 4.30 बजे अपने कार्यालय में पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल पे्रसवार्ता रखी थी, जिसमें उन्होंने बिल पास न होने पर भाजपा द्वारा देश को गुमराह करने का आरोप लगाया, वहीं उन्होंने एक बार फिर मंत्री देवांगन पर कड़ा प्रहार किया और कहा-झोपड़ी रहने की बात करने वाले मंत्री लखनलाल देवांगन का घर जा कर देखिए, झोपड़ी है या अंदर से कुछ और? उसके घर में भाई-भतीजा, ओएसडी का अलग-अलग चेम्बर बना है, जहां पर रेत, कोयला की अवैध वसूली होती है।
जयसिंह अग्रवाल ने आरोप लगाया कि रेत की कहां-कहां सप्लाई हो रही है, यह सब जनता जानती है और मैं खुलेआम फिर बोल रहा हूं कि बालको, अडाणी के सार्वजनिक प्रतिष्ठानों सहित कई जगहों पर मंत्री द्वारा रेत सप्लाई की जा रही है और पूरे जिले में रेत की अवैध तस्करी मंत्री के संरक्षण में हो रही है।
उन्होंने कहा कि ठेकेदारी मेरे परिवार के जीवकोपार्जन का साधन है। चुनाव लड़ने से पहले मैं भी ठेकेदारी करता था, लेकिन अब मेरे परिवार के लोग ठेकेदारी करते हैं, इसमें गलत क्या है? उन्होंने प्रशासन की प्रशंसा की और कहा कि प्रशासन अच्छा चल रहा है, लेकिन रेत और कोयला तस्करी के साथ-साथ कबाड़ भी खुलेआम चल रहा है।
जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि मैंने कभी न तो रेत तस्करी की, न कोयले का अवैध कारोबार किया, लेकिन अभी रेत और कोयला तस्करी किसके संरक्षण में चल रहा है। इसके पूर्व भी बालको में आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए जयसिंह अग्रवाल ने सार्वजनिक मंच से कहा था-यहां का मंत्री और विधायक बालको, अडाणी सहित अन्य सार्वजनिक प्रतिष्ठानों में रेत आपूर्ति करता है, वह भी अवैध?
अवैध रेत:दो धु्रवों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का बड़ा मुद्दा

जयसिंह अग्रवाल आए दिन मंत्री लखनलाल देवांगन पर हमलावर हो रहे हैं। बालको की एक सभा में पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने मंत्री लखनलाल देवांगन पर बालको में रेत कारोबार करने का आरोप लगाया था, उसके बाद पत्रकारों को जवाब देते हुए लखनलाल देवांगन ने कहा था-न मोर सो टेक्टर हावे, न ट्रक, मुड़ म रेत तस्करी करथों का? ठेकेदारी ओ करता है और आरोप मेरे ऊपर! इसके बाद सोमवार 20 अप्रैल को जयसिंह अग्रवाल ने फिर मंत्री पर हमला बोला और कहा कि रेत तस्करी कब और कैसे होती है, कौन करा रहा है, इसका सबूत मेरे पास है। झोपड़ी में रहता हूं, कह कर जनता को गुमराह करता है और उसके काले कारनामे चल रहे हैं। अवैध रेत की वसूली, अवैध कोयला की वसूली का अड्डा बन गया है मंत्री का गुप्त चेम्बर, जहां पर उसके भाई-भतीजे एवं ओएसडी अवैध वसूली कर रहे हैं और मंत्री अपने आपको ईमानदार जनप्रतिनिधि बताता है।
कोरबा
कोरबा में पहली बार होगा श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग दिव्य दर्शन एवं “सोमनाथ की अनकही कथा” का भव्य आयोजन
कोरबा। समस्त शहरवासियों एवं श्रद्धालुजनों के लिए अत्यंत हर्ष और सौभाग्य का विषय है कि श्रीश्री रविशंकर के सान्निध्य में आगामी 24 अप्रैल 2026 को सायं 6 बजे से 9 बजे तक के घंटाघर ओपन थिएटर में भव्य श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग दिव्य दर्शन कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं को दिव्य शिवलिंग के दर्शन, भजन, ध्यान, सत्संग एवं आध्यात्मिक अनुभूति का अनुपम लाभ प्राप्त होगा।

यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास, ऊर्जा और सनातन संस्कृति से जुड़ने का एक अद्भुत अवसर है। कार्यक्रम में विशेष रूप से “सोमनाथ की अनकही कथा” का भी वाचन एवं प्रस्तुतीकरण किया जाएगा, जिसमें की गौरवगाथा, संघर्ष, पुनर्स्थापना और सनातन चेतना की प्रेरक यात्रा को जनमानस के समक्ष रखा जाएगा।

मान्यता है कि भारत के पवित्र पश्चिमी तट पर स्थित केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि अनादि काल से श्रद्धा, शक्ति और शिवत्व का प्रतीक रहा है। सदियों पूर्व यात्रियों, साधकों और संतों ने इस धाम की दिव्यता का वर्णन किया है। कहा जाता है कि यहाँ का वातावरण अलौकिक शांति, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहता था।
इतिहास साक्षी है कि अनेक बार आक्रमणों और विध्वंस के प्रयासों के बावजूद सोमनाथ की आस्था कभी पराजित नहीं हुई। मंदिर टूटता रहा, पर श्रद्धा नहीं टूटी। सनातन संस्कृति की यही जीवंतता आज भी समस्त भारतवर्ष को प्रेरित करती है। हर बार विनाश के बाद पुनर्निर्माण होना इस बात का प्रमाण है कि सत्य, श्रद्धा और चेतना को कोई समाप्त नहीं कर सकता।
कार्यक्रम में यह भी बताया जाएगा कि किस प्रकार युगों से करोड़ों भक्तों की प्रार्थनाएँ, तपस्या और शिवभक्ति इस ज्योतिर्लिंग से जुड़ी रही हैं। यह केवल पत्थर या प्रतीक नहीं, बल्कि अनंत श्रद्धा का केंद्र है। श्रद्धालु जब दर्शन करते हैं, तो वे केवल एक शिवलिंग नहीं, बल्कि सनातन इतिहास, लाखों भक्तों की भावनाओं और शिव चेतना के स्पंदन से जुड़ते हैं।
आयोजन समिति ने जानकारी दी है कि यह दिव्य शिवलिंग पहली बार की पावन धरती पर दर्शन हेतु लाया जा रहा है। इससे क्षेत्रवासियों में भारी उत्साह, श्रद्धा और आनंद का वातावरण है। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में डिजिटल प्रचार, जनसंपर्क, वाहन प्रचार, भजन आमंत्रण, पत्रक वितरण एवं अन्य माध्यमों से लोगों को आमंत्रित किया जा रहा है।
कार्यक्रम स्थल पर भव्य सज्जा, भक्तिमय वातावरण, शिव आराधना, ध्यान सत्र एवं सामूहिक प्रार्थना का आयोजन भी किया जाएगा। परिवार सहित बड़ी संख्या में उपस्थित होकर श्रद्धालु इस दुर्लभ अवसर का पुण्य लाभ ले सकते हैं।
आयोजन समिति ने समस्त नागरिकों, मातृशक्ति, युवाओं, वरिष्ठजनों एवं धर्मप्रेमी समाज से आग्रह किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाएं।
कार्यक्रम विवरण:
दिनांक: 24 अप्रैल 2026
समय: सायं 6:00 बजे से 9:00 बजे तक
स्थान: घंटाघर ओपन थिएटर, कोरबा
आयोजन: , कोरबा परिवार
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