छत्तीसगढ़
ऑपरेशन सिंदूर का मैप ISIS को भेजा:हथियार उठाने को भी तैयार थे, पाकिस्तानी हैंडलर्स ने किया ब्रेनवॉश, दोनों 10वीं-11वीं के स्टूडेंट, पिता CRPF जवान
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2 months agoon
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Divya Akashरायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के नाबालिग ISIS के टारगेट में हैं। ATS ने रायपुर और भिलाई से 2 नाबालिगों को पकड़ा है, जो ISIS हैंडलर्स के सीधे संपर्क में थे। दोनों ही 10वीं-11वीं क्लास के स्टूडेंट हैं। नाबालिगों को हिंसा का ग्लैमर दिखाकर ब्रेनवॉश किया जा रहा था।
ATS ने जब चैट, लॉग और कंटेंट की परतें खोलनी शुरू कीं, तब तस्वीर और डरावनी निकली। गेमिंग चैट से लेकर इंस्टाग्राम के सीक्रेट ग्रुप तक, नाबालिगों को ‘डिजिटल मॉड्यूल’ में शामिल करने के लिए ट्रेनिंग दी जा रही थी।
इनमें डार्क वेब, TOR, फर्जी IP, VPN–हर वो तकनीकी हथियार सिखाए जा रहे थे, जो आतंकियों को अपनी डिजिटल पहचान छिपाने में मदद करता है। सबसे खतरनाक मोड़ तब आया, जब हैंडलर्स ने इन नाबालिगों से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़े मैप की क्लिपिंग मांगी। दोनों ने वह भेज भी दी। नाबालिग हथियार उठाने तक को तैयार थे।
ATS की ह्यूमन-सर्विलांस और साइबर ट्रैकिंग ने इस नेटवर्क की परतें खोलीं। ATS ने मामले में UAPA-1967 के तहत FIR दर्ज की है। दोनों नाबालिग ATS के कब्जे में हैं। इनमें एक के पिता CRPF जवान हैं, जबकि दूसरे के पिता ऑटो चलाते हैं। वहीं भिलाई के 4 नाबालिगों से पूछताछ भी की जा रही है।
सोशल मीडिया पर एक शिकायत से ATS की नजर में कैसे आए नाबालिग? पाकिस्तानी हैंडलर्स ने कैसे नाबालिगों का ब्रेनवॉश किया, क्या है आतंकियों की डिजिटल रणनीति ?
कैसे शुरू हुई ये पूरी कहानी?
ATS के अधिकारियों के अनुसार यह पूरा मामला एक ऑब्जेक्शनल सोशल मीडिया कंटेंट को लेकर की गई शिकायत के बाद सामने आया। मॉनिटरिंग के दौरान एक ऐसा ग्रुप दिखा जो इंस्टाग्राम पर ISIS के फर्जी नाम से चलाए जा रहे नेटवर्क से जुड़ा हुआ था।
साइबर टीम ने जब चैट, ग्रुप लिंक और कंटेंट को खंगाला, तब पता चला कि 2 भारतीय नाबालिग लगातार उसी प्रतिबंधित ग्रुप में एक्टिव हैं, जहां पाकिस्तानी हैंडलर्स कट्टरपंथी कंटेंट डाल रहे थे। ATS ने तब रायपुर और भिलाई से पकड़े गए 2 नाबालिगों को लगभग डेढ़ साल तक ह्यूमन सर्विलांस और साइबर ट्रैकिंग के जरिए चुपचाप मॉनिटर किया।
जांच में यह भी सामने आया कि पाकिस्तानी हैंडलर्स सोशल मीडिया पर एक ही ग्रुप को लंबे समय तक एक्टिव नहीं रखते थे। जैसे ही किसी ग्रुप पर ज्यादा ट्रैफिक बढ़ता या सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी की आशंका होती, वे उस ग्रुप को बंद कर देते थे।
इस जल्दबाजी में ग्रुप को बंद करने से पता चला कि हैंडलर्स भारतीय डिजिटल निगरानी तंत्र को लेकर लगातार सतर्क थे। कई नाबालिगों के बयान में भी यह बात सामने आई कि उन्हें बिना कोई कारण बताए अचानक नोटिफिकेशन मिलते थे कि ‘ये ग्रुप archived हो गया है, या ग्रुप अब उपलब्ध नहीं है।

आतंकी संगठन ISIS छत्तीसगढ़ में अपना नेटवर्क बनाने की कोशिश कर रहा है। (फाइल फोटो)
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एयर स्ट्राइक मैप की क्लिपिंग मांगी गई
पाकिस्तानी हैंडलर्स ने दोनों नाबालिगों से सबसे ज्यादा संपर्क उस दौर में बढ़ाया, जब भारत और पाकिस्तान के बीच मीडिया ब्लैकआउट लागू था। यह वही समय था जब देश में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चल रहा था। भारत ने पाकिस्तानी न्यूज चैनलों को बैन किया था और पाकिस्तान ने भी भारतीय खबरों को ब्लॉक कर दिया था।
ATS सूत्रों के अनुसार इसी इन्फॉर्मेशन गैप का फायदा उठाते हुए पाकिस्तानी हैंडलर ने इंस्टाग्राम के सीक्रेट ग्रुप में नाबालिगों को एक्टिव किया। उसने दोनों से एयर स्ट्राइक मैप की क्लिपिंग मांगी, ताकि पाकिस्तान को भारत की सैन्य मूवमेंट की जानकारी मिल सके। दोनों नाबालिगों ने भारतीय न्यूज चैनलों पर चल रहे स्ट्राइक मैप्स को रिकॉर्ड किया और हैंडलर्स को भेज दिया।

हैंडलर्स के साथ इस तरह की चैट होती थी। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
इंस्टाग्राम, गेमिंग और वॉयलेंस कंटेंट-ब्रेनवॉश का पूरा प्रोसेस
पाकिस्तान-आधारित ISIS मॉड्यूल सोशल मीडिया पर ऐसे यूजर्स को टारगेट करता है, जिनका डिजिटल बिहेवियर वायलेंस, धार्मिक बहस या आक्रामक कंटेंट की ओर झुकाव दिखाता है। इंस्टाग्राम का ऐल्गोरिद्म खुद ऐसे यूजर्स को हिंसा, हथियार, धार्मिक विवाद और “कनफ्लिक्ट-बेस्ड” वीडियो सजेस्ट करता है।
एक नाबालिग गेमिंग ग्रुप में ज्यादा एक्टिव था, दूसरा इंस्टाग्राम पर धार्मिक बहस और आक्रामक वीडियोज देखता था। दोनों को पहले हल्के धार्मिक और मोटिवेशनल कंटेंट भेजे गए, फिर धीरे-धीरे हिंसक वीडियो, कट्टरपंथी मैसेज और जिहादी ऑडियो क्लिप्स तक ले जाया गया।
बातचीत बढ़ते ही हैंडलर्स ने इन्हें अलग-अलग ग्रुप में शिफ्ट किया, नए फेक अकाउंट्स से जोड़ते रहे और लगातार ऐसे कंटेंट दिखाते रहे, जिससे वे मानसिक रूप से ब्रेनवॉश होकर किसी भी निर्देश का पालन करने को तैयार हो जाएं।
पाकिस्तानी हैंडलर्स ने ग्रुप बनाने का टास्क दिया गया था
नाबालिगों की चैट हिस्ट्री की जांच में पता चला कि पाकिस्तानी हैंडलर उन्हें लगातार छोटे-छोटे टास्क दे रहे थे। इनमें सोशल मीडिया पर एक नया ग्रुप बनाना। वीडियो और फाइलें शेयर करना। अन्य यूजर्स को जोड़ने का टास्क भी शामिल है।
हैंडलर बच्चों को यह समझाता था कि यह एक सीक्रेट ऑनलाइन मिशन है। इसमें उनकी भूमिका अहम है। जांच एजेंसियों के अनुसार बच्चों को ऐसे डिजिटल टास्क देकर धीरे-धीरे उन्हें संवेदनशील जानकारी साझा करने और नेटवर्क फैलाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था।

हैंडलर्स और नाबालिगों के बीच भड़काऊ चैट्स की प्रतीकात्मक तस्वीर।
ग्रुप में भड़काऊ पोस्ट और क्लिप
ATS अधिकारियों के मुताबिक जिस इंस्टाग्राम ग्रुप में दोनों नाबालिगों को जोड़ा गया था। वहां रोजाना ऐसा कंटेंट शेयर होता था, जो सीधे दिमाग को हिंसा की ओर धकेल देता था। ग्रुप में भेजे जाने वाले वीडियोज में लड़ाई, ब्लास्ट, हथियार चलाने के सीन और उग्र भिड़ंत के क्लिप शामिल थे।
साथ ही ऐसे ऑडियो मैसेज भी डाले जाते थे, जिनमें धार्मिक उन्माद पैदा करने वाली बातें, जिहादी भाषण और कट्टरपंथी नारे सुनाए जाते थे। ग्रुप हैंडलर समय-समय पर भड़काऊ पोस्ट और ऐसे क्लिप भी भेजते थे, जिनमें आतंकवादी संगठनों की तारीफ या उनके ‘हीरोइक मिशन’ को ग्लोरिफाई किया जाता था।
ATS एसपी राजश्री मिश्रा ने बताया कि कंटेंट का पैटर्न इस तरह रखा जाता था कि किशोरों में सिस्टम, समाज और दूसरे समुदाय के प्रति नफरत गहराती जाए। कई बार हैंडलर उनकी तारीफ करते कि तुम असली मुजाहिद हो, सच्चे जांबाज हो ताकि उनका झुकाव पूरी तरह उनकी तरफ हो जाए।
इस तरह लगातार मिल रही डिजिटल फीड ने दोनों किशोरों को धीरे-धीरे आम स्टूडेंट से ऐसी सोच की तरफ धकेल दिया, जहां हिंसा उन्हें सही और जिहादी आइडियोलॉजी उन्हें जायज लगने लगी। यही था इस पूरे साइकोलॉजिकल ब्रेनवॉश का असली मकसद।
पाकिस्तानी हैंडलर्स गेमिंग के जरिए भी करते हैं संपर्क
ATS एसपी राजश्री मिश्रा ने बताया कि पाकिस्तानी हैंडलर्स सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं थे, बल्कि गेमिंग चैट के जरिए भी कई नाबालिगों तक पहुंचते हैं। कई ऑनलाइन शूटिंग और मिशन-बेस्ड गेम्स में ‘प्राइवेट चैट रूम’ होते हैं, जहां खिलाड़ियों के बीच टेक्स्ट, वॉयस और ग्रुप चैट आसानी से की जा सकती है।
हैंडलर्स ने इसी सुविधा का फायदा उठाया और गेम खेलते समय नाबालिगों को अपनी ओर आकर्षित किया। गेम का माहौल पहले से ही लड़ाई, हथियार और सैन्य मिशन जैसा होता है, इसलिए हिंसा से जुड़ी बातें खिलाड़ियों को ज्यादा नॉर्मल लगती हैं।
ATS ने परिजन को दिखाए बातचीत के सबूत
ATS ने जब दोनों बच्चों की चैट, ग्रुप स्क्रीनशॉट, फर्जी आईडी, हिंसक कंटेंट और हैंडलर्स के साथ हुई बातचीत के सबूत परिवारों को दिखाए। परिजन ने अधिकारियों से कहा कि उन्हें अंदाजा तक नहीं था कि उनके बच्चे फोन में किस तरह की दुनिया में फंस चुके हैं।
ATS के अधिकारियों ने बताया कि दोनों नाबालिग हैं, इसलिए पूरी जांच जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के नियमों के मुताबिक चल रही है। पूछताछ भी परिवार की मौजूदगी में ही की जा रही है, ताकि किसी तरह का मानसिक दबाव न बने।
इसके साथ ही दोनों को साइकोलॉजिकल काउंसलिंग भी दी जा रही है, ताकि वे इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सही स्थिति में रहें। परिजन ने जांच में पूरा सहयोग देने की बात कही है। हर स्टेप पर मौजूद रहकर ATS की प्रक्रिया में साथ दे रहे हैं।
कई दूसरी ID भी ATS के रडार पर
ATS के अधिकारियों ने बताया कि जिन इंस्टाग्राम ग्रुप्स का उपयोग किया गया, उनमें कई और ID भी एक्टिव थे। ATS अब उनके डिजिटल लोकेशन और IP लॉग्स की जांच कर रही है। फिलहाल, मामला UAPA के तहत दर्ज है और विस्तृत जांच जारी है।
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कोरबा। सरस्वती शिशु मंदिर सीएसईबी, कोरबा पूर्व में मातृ संगोष्ठी एवं शिशु नगरी का भव्य, सुव्यवस्थित एवं प्रेरणादायी आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्राचार्य राजकुमार देवांगन रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में दीपक सोनी (कोरबा विभाग समन्वयक) एवं संजय कुमार देवांगन (प्रधानाचार्य, पूर्व माध्यमिक) उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत विद्यालय परिवार द्वारा पारंपरिक रीति से किया गया।

अपने संबोधन में अतिथियों ने मातृशक्ति की भूमिका को बाल संस्कार एवं राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रारंभिक शिक्षा में माता का योगदान सबसे निर्णायक होता है। इस अवसर पर विद्यालय के नन्हे भैया-बहनों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। बच्चों ने आकर्षक नृत्य, गीत एवं लघु प्रस्तुतियों के माध्यम से पारिवारिक वातावरण, नैतिक मूल्यों, अनुशासन एवं संस्कारों का संदेश दिया। बच्चों की सहज एवं भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित माताओं एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम में कुल 220 मातृशक्तियों की गरिमामयी सहभागिता रही, जिससे मातृसंगोष्ठी अत्यंत सफल रही। माताओं ने विद्यालय की शिक्षण पद्धति, संस्कार आधारित शिक्षा एवं गतिविधियों की सराहना की। शिशु नगरी कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालय की 12 शैक्षिक व्यवस्थाओं एवं सहयोगी संस्थाओं की जीवंत प्रदर्शनी लगाई गई। इन प्रदर्शनियों के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास, कौशल निर्माण, संस्कार शिक्षा एवं व्यवहारिक ज्ञान को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया। अभिभावक बंधुओं के सहयोग से आनंद मेले का भी आयोजन किया गया, जिसमें प्राथमिक विभाग के भैया-बहनों ने विभिन्न खेलों, गतिविधियों एवं मनोरंजन कार्यक्रमों में भाग लेकर भरपूर आनंद उठाया। आनंद मेला बच्चों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रधानाचार्य पंकज तिवारी ने सभी अतिथियों, मातृशक्तियों एवं अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से विद्यालय एवं परिवार के बीच सहयोग और विश्वास और अधिक मजबूत होता है। उप-प्रधानाचार्य श्रीमती सीमा त्रिपाठी सहित समस्त आचार्य परिवार ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
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