रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के नाबालिग ISIS के टारगेट में हैं। ATS ने रायपुर और भिलाई से 2 नाबालिगों को पकड़ा है, जो ISIS हैंडलर्स के सीधे संपर्क में थे। दोनों ही 10वीं-11वीं क्लास के स्टूडेंट हैं। नाबालिगों को हिंसा का ग्लैमर दिखाकर ब्रेनवॉश किया जा रहा था।
ATS ने जब चैट, लॉग और कंटेंट की परतें खोलनी शुरू कीं, तब तस्वीर और डरावनी निकली। गेमिंग चैट से लेकर इंस्टाग्राम के सीक्रेट ग्रुप तक, नाबालिगों को ‘डिजिटल मॉड्यूल’ में शामिल करने के लिए ट्रेनिंग दी जा रही थी।
इनमें डार्क वेब, TOR, फर्जी IP, VPN–हर वो तकनीकी हथियार सिखाए जा रहे थे, जो आतंकियों को अपनी डिजिटल पहचान छिपाने में मदद करता है। सबसे खतरनाक मोड़ तब आया, जब हैंडलर्स ने इन नाबालिगों से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़े मैप की क्लिपिंग मांगी। दोनों ने वह भेज भी दी। नाबालिग हथियार उठाने तक को तैयार थे।
ATS की ह्यूमन-सर्विलांस और साइबर ट्रैकिंग ने इस नेटवर्क की परतें खोलीं। ATS ने मामले में UAPA-1967 के तहत FIR दर्ज की है। दोनों नाबालिग ATS के कब्जे में हैं। इनमें एक के पिता CRPF जवान हैं, जबकि दूसरे के पिता ऑटो चलाते हैं। वहीं भिलाई के 4 नाबालिगों से पूछताछ भी की जा रही है।
सोशल मीडिया पर एक शिकायत से ATS की नजर में कैसे आए नाबालिग? पाकिस्तानी हैंडलर्स ने कैसे नाबालिगों का ब्रेनवॉश किया, क्या है आतंकियों की डिजिटल रणनीति ?
कैसे शुरू हुई ये पूरी कहानी?
ATS के अधिकारियों के अनुसार यह पूरा मामला एक ऑब्जेक्शनल सोशल मीडिया कंटेंट को लेकर की गई शिकायत के बाद सामने आया। मॉनिटरिंग के दौरान एक ऐसा ग्रुप दिखा जो इंस्टाग्राम पर ISIS के फर्जी नाम से चलाए जा रहे नेटवर्क से जुड़ा हुआ था।
साइबर टीम ने जब चैट, ग्रुप लिंक और कंटेंट को खंगाला, तब पता चला कि 2 भारतीय नाबालिग लगातार उसी प्रतिबंधित ग्रुप में एक्टिव हैं, जहां पाकिस्तानी हैंडलर्स कट्टरपंथी कंटेंट डाल रहे थे। ATS ने तब रायपुर और भिलाई से पकड़े गए 2 नाबालिगों को लगभग डेढ़ साल तक ह्यूमन सर्विलांस और साइबर ट्रैकिंग के जरिए चुपचाप मॉनिटर किया।
जांच में यह भी सामने आया कि पाकिस्तानी हैंडलर्स सोशल मीडिया पर एक ही ग्रुप को लंबे समय तक एक्टिव नहीं रखते थे। जैसे ही किसी ग्रुप पर ज्यादा ट्रैफिक बढ़ता या सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी की आशंका होती, वे उस ग्रुप को बंद कर देते थे।
इस जल्दबाजी में ग्रुप को बंद करने से पता चला कि हैंडलर्स भारतीय डिजिटल निगरानी तंत्र को लेकर लगातार सतर्क थे। कई नाबालिगों के बयान में भी यह बात सामने आई कि उन्हें बिना कोई कारण बताए अचानक नोटिफिकेशन मिलते थे कि ‘ये ग्रुप archived हो गया है, या ग्रुप अब उपलब्ध नहीं है।
आतंकी संगठन ISIS छत्तीसगढ़ में अपना नेटवर्क बनाने की कोशिश कर रहा है। (फाइल फोटो)
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एयर स्ट्राइक मैप की क्लिपिंग मांगी गई
पाकिस्तानी हैंडलर्स ने दोनों नाबालिगों से सबसे ज्यादा संपर्क उस दौर में बढ़ाया, जब भारत और पाकिस्तान के बीच मीडिया ब्लैकआउट लागू था। यह वही समय था जब देश में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चल रहा था। भारत ने पाकिस्तानी न्यूज चैनलों को बैन किया था और पाकिस्तान ने भी भारतीय खबरों को ब्लॉक कर दिया था।
ATS सूत्रों के अनुसार इसी इन्फॉर्मेशन गैप का फायदा उठाते हुए पाकिस्तानी हैंडलर ने इंस्टाग्राम के सीक्रेट ग्रुप में नाबालिगों को एक्टिव किया। उसने दोनों से एयर स्ट्राइक मैप की क्लिपिंग मांगी, ताकि पाकिस्तान को भारत की सैन्य मूवमेंट की जानकारी मिल सके। दोनों नाबालिगों ने भारतीय न्यूज चैनलों पर चल रहे स्ट्राइक मैप्स को रिकॉर्ड किया और हैंडलर्स को भेज दिया।
हैंडलर्स के साथ इस तरह की चैट होती थी। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
इंस्टाग्राम, गेमिंग और वॉयलेंस कंटेंट-ब्रेनवॉश का पूरा प्रोसेस
पाकिस्तान-आधारित ISIS मॉड्यूल सोशल मीडिया पर ऐसे यूजर्स को टारगेट करता है, जिनका डिजिटल बिहेवियर वायलेंस, धार्मिक बहस या आक्रामक कंटेंट की ओर झुकाव दिखाता है। इंस्टाग्राम का ऐल्गोरिद्म खुद ऐसे यूजर्स को हिंसा, हथियार, धार्मिक विवाद और “कनफ्लिक्ट-बेस्ड” वीडियो सजेस्ट करता है।
एक नाबालिग गेमिंग ग्रुप में ज्यादा एक्टिव था, दूसरा इंस्टाग्राम पर धार्मिक बहस और आक्रामक वीडियोज देखता था। दोनों को पहले हल्के धार्मिक और मोटिवेशनल कंटेंट भेजे गए, फिर धीरे-धीरे हिंसक वीडियो, कट्टरपंथी मैसेज और जिहादी ऑडियो क्लिप्स तक ले जाया गया।
बातचीत बढ़ते ही हैंडलर्स ने इन्हें अलग-अलग ग्रुप में शिफ्ट किया, नए फेक अकाउंट्स से जोड़ते रहे और लगातार ऐसे कंटेंट दिखाते रहे, जिससे वे मानसिक रूप से ब्रेनवॉश होकर किसी भी निर्देश का पालन करने को तैयार हो जाएं।
पाकिस्तानी हैंडलर्स ने ग्रुप बनाने का टास्क दिया गया था
नाबालिगों की चैट हिस्ट्री की जांच में पता चला कि पाकिस्तानी हैंडलर उन्हें लगातार छोटे-छोटे टास्क दे रहे थे। इनमें सोशल मीडिया पर एक नया ग्रुप बनाना। वीडियो और फाइलें शेयर करना। अन्य यूजर्स को जोड़ने का टास्क भी शामिल है।
हैंडलर बच्चों को यह समझाता था कि यह एक सीक्रेट ऑनलाइन मिशन है। इसमें उनकी भूमिका अहम है। जांच एजेंसियों के अनुसार बच्चों को ऐसे डिजिटल टास्क देकर धीरे-धीरे उन्हें संवेदनशील जानकारी साझा करने और नेटवर्क फैलाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था।
हैंडलर्स और नाबालिगों के बीच भड़काऊ चैट्स की प्रतीकात्मक तस्वीर।
ग्रुप में भड़काऊ पोस्ट और क्लिप
ATS अधिकारियों के मुताबिक जिस इंस्टाग्राम ग्रुप में दोनों नाबालिगों को जोड़ा गया था। वहां रोजाना ऐसा कंटेंट शेयर होता था, जो सीधे दिमाग को हिंसा की ओर धकेल देता था। ग्रुप में भेजे जाने वाले वीडियोज में लड़ाई, ब्लास्ट, हथियार चलाने के सीन और उग्र भिड़ंत के क्लिप शामिल थे।
साथ ही ऐसे ऑडियो मैसेज भी डाले जाते थे, जिनमें धार्मिक उन्माद पैदा करने वाली बातें, जिहादी भाषण और कट्टरपंथी नारे सुनाए जाते थे। ग्रुप हैंडलर समय-समय पर भड़काऊ पोस्ट और ऐसे क्लिप भी भेजते थे, जिनमें आतंकवादी संगठनों की तारीफ या उनके ‘हीरोइक मिशन’ को ग्लोरिफाई किया जाता था।
ATS एसपी राजश्री मिश्रा ने बताया कि कंटेंट का पैटर्न इस तरह रखा जाता था कि किशोरों में सिस्टम, समाज और दूसरे समुदाय के प्रति नफरत गहराती जाए। कई बार हैंडलर उनकी तारीफ करते कि तुम असली मुजाहिद हो, सच्चे जांबाज हो ताकि उनका झुकाव पूरी तरह उनकी तरफ हो जाए।
इस तरह लगातार मिल रही डिजिटल फीड ने दोनों किशोरों को धीरे-धीरे आम स्टूडेंट से ऐसी सोच की तरफ धकेल दिया, जहां हिंसा उन्हें सही और जिहादी आइडियोलॉजी उन्हें जायज लगने लगी। यही था इस पूरे साइकोलॉजिकल ब्रेनवॉश का असली मकसद।
पाकिस्तानी हैंडलर्स गेमिंग के जरिए भी करते हैं संपर्क
ATS एसपी राजश्री मिश्रा ने बताया कि पाकिस्तानी हैंडलर्स सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं थे, बल्कि गेमिंग चैट के जरिए भी कई नाबालिगों तक पहुंचते हैं। कई ऑनलाइन शूटिंग और मिशन-बेस्ड गेम्स में ‘प्राइवेट चैट रूम’ होते हैं, जहां खिलाड़ियों के बीच टेक्स्ट, वॉयस और ग्रुप चैट आसानी से की जा सकती है।
हैंडलर्स ने इसी सुविधा का फायदा उठाया और गेम खेलते समय नाबालिगों को अपनी ओर आकर्षित किया। गेम का माहौल पहले से ही लड़ाई, हथियार और सैन्य मिशन जैसा होता है, इसलिए हिंसा से जुड़ी बातें खिलाड़ियों को ज्यादा नॉर्मल लगती हैं।
ATS ने परिजन को दिखाए बातचीत के सबूत
ATS ने जब दोनों बच्चों की चैट, ग्रुप स्क्रीनशॉट, फर्जी आईडी, हिंसक कंटेंट और हैंडलर्स के साथ हुई बातचीत के सबूत परिवारों को दिखाए। परिजन ने अधिकारियों से कहा कि उन्हें अंदाजा तक नहीं था कि उनके बच्चे फोन में किस तरह की दुनिया में फंस चुके हैं।
ATS के अधिकारियों ने बताया कि दोनों नाबालिग हैं, इसलिए पूरी जांच जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के नियमों के मुताबिक चल रही है। पूछताछ भी परिवार की मौजूदगी में ही की जा रही है, ताकि किसी तरह का मानसिक दबाव न बने।
इसके साथ ही दोनों को साइकोलॉजिकल काउंसलिंग भी दी जा रही है, ताकि वे इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सही स्थिति में रहें। परिजन ने जांच में पूरा सहयोग देने की बात कही है। हर स्टेप पर मौजूद रहकर ATS की प्रक्रिया में साथ दे रहे हैं।
कई दूसरी ID भी ATS के रडार पर
ATS के अधिकारियों ने बताया कि जिन इंस्टाग्राम ग्रुप्स का उपयोग किया गया, उनमें कई और ID भी एक्टिव थे। ATS अब उनके डिजिटल लोकेशन और IP लॉग्स की जांच कर रही है। फिलहाल, मामला UAPA के तहत दर्ज है और विस्तृत जांच जारी है।
कोरबा निवासी 02 लोगों के विरुद्ध म्यूल अकाउंट के मामले में पुलिस की कार्रवाई
कोरबा पुलिस की अपील—अपना बैंक खाता, एटीएम, सिम एवं मोबाइल नंबर किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग हेतु न दें
कोरबा। पुलिस अधीक्षक जिला कोरबा सिद्धार्थ तिवारी के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटेल एवं साइबर नोडल अधिकारी नितेश ठाकुर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कटघोरा के मार्गदर्शन में साइबर थाना प्रभारी ललित कुमार चंद्रा के नेतृत्व में म्यूल अकाउंट के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है।
भारत सरकार के गृह मंत्रालय से म्यूल अकाउंट (Mule Account) के संबंध में प्राप्त निर्देशों के पालन में साइबर पुलिस थाना कोरबा द्वारा ऐसे बैंक खातों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है, जिनका उपयोग साइबर अपराधों में किए जाने की आशंका है।
इसी क्रम में साइबर पुलिस थाना कोरबा द्वारा अलग अलग बैंक खातों के संबंध में अपराध पंजीबद्ध कर धारा 317(2), 318(4) बीएनएस के तहत विवेचना में लिया गया। विवेचना के दौरान दो अलग अलग अपराधों में दो खाताधारकों को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की गई।
पूछताछ में खाता धारक महेंद्र कुमार धीवर निवासी मानस नगर, कोरबा एवं के प्रभाकर राव निवासी कृष्ण नगर कोरबा द्वारा अपने बैंक खातों को लाभ कमाने के उद्देश्य से अन्य व्यक्तियों को कमीशन के बदले उपयोग हेतु दिए जाने की बात सामने आई। बाद में उन्हें जानकारी हुई कि संबंधित बैंक खाते होल्ड हो गए हैं।
प्रकरण में उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर दोनों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की गई है। प्रकरण की विवेचना वर्तमान में जारी है।
म्यूल अकाउंट के विरुद्ध कोरबा पुलिस की कार्रवाई
साइबर अपराधियों द्वारा आम नागरिकों को कमीशन अथवा आसान कमाई का लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाकर अथवा पहले से संचालित बैंक खातों का उपयोग साइबर अपराध से प्राप्त राशि के लेन-देन के लिए किया जाता है। ऐसे बैंक खातों को म्यूल अकाउंट (Mule Account) कहा जाता है।
साइबर अपराध में प्रयुक्त ऐसे खातों की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए उपलब्ध कराने वाले खाताधारक भी साइबर अपराध की विवेचना एवं कानूनी कार्रवाई की चपेट में आ सकते हैं।
कोरबा पुलिस की आम नागरिकों से अपील
साइबर अपराधी लोगों को कमीशन अथवा अन्य प्रकार के लाभ का लालच देकर उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड, मोबाइल नंबर अथवा सिम का उपयोग साइबर अपराधों में कर सकते हैं। अतः नागरिक निम्न सावधानियां बरतें—
अपना बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग हेतु न दें।
अपना एटीएम/डेबिट कार्ड, पासबुक, चेकबुक या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी किसी को न दें।
अपना मोबाइल नंबर अथवा सिम कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग करने के लिए न दें।
किसी व्यक्ति द्वारा कमीशन या आसान कमाई का लालच देकर बैंक खाता उपलब्ध कराने की बात कही जाए तो सतर्क रहें।
अपने बैंक खाते में होने वाले लेन-देन की नियमित रूप से जानकारी रखें।
किसी संदिग्ध लेन-देन की जानकारी मिलने पर तत्काल अपने बैंक एवं पुलिस को सूचित करें।
किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने खाते में राशि प्राप्त कर उसे दूसरे खाते में ट्रांसफर अथवा नकद निकालकर न दें।
कोरबा पुलिस नागरिकों से अपील करती है कि थोड़े से आर्थिक लाभ के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम, सिम अथवा मोबाइल नंबर किसी अन्य व्यक्ति को देकर स्वयं को साइबर अपराध की विवेचना एवं कानूनी कार्रवाई का हिस्सा न बनाएं।
SECL मानिकपुर जनसुनवाई रद्द करने की मांग:ग्रामीणों ने प्रक्रिया को फर्जी बताया,भू-विस्थापित बोले- पहले पुराने वादे पूरे करो,नहीं तो 3 हजार ग्रामीण करेंगे विरोध
कोरबा। SECL मानिकपुर ओपन कास्ट खदान विस्तार परियोजना को लेकर प्रभावित ग्रामीणों और प्रबंधन के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। भू-विस्थापित संगठन मानिकपुर ने 21 अगस्त को प्रस्तावित पर्यावरण जनसुनवाई को रद्द करने की मांग की है।
संगठन ने जनसुनवाई की प्रक्रिया को फर्जी बताते हुए चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो 8 प्रभावित गांवों के करीब 2 से 3 हजार महिला-पुरुष ग्रामीण मौके पर पहुंचकर इसका उग्र विरोध करेंगे।
200-250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने का आरोप
250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि दशकों पहले खदान के लिए अपनी उपजाऊ जमीन देने के बावजूद करीब 200 से 250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। वहीं, SECL द्वारा गोद लिए गए 7-8 गांवों में सड़क, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी खराब है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और SECL प्रबंधन खदान विस्तार और कॉर्पोरेट मुनाफे को प्राथमिकता दे रहा है, जबकि विस्थापित परिवारों की पुरानी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है।
युवाओं के लिए 400-500 स्थायी नौकरी की मांग
भू-विस्थापितों ने प्रभावित गांवों के युवाओं के लिए मौके पर ही 400 से 500 पदों पर नियमित और स्थायी भर्ती शुरू करने की मांग रखी है। इसके अलावा भिलाई खुर्द-1, 2 और 3 में बचे मकानों और जमीनों का दोबारा पारदर्शी तरीके से भौतिक सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन कराने की मांग की गई है।
रापाखरा और दादर खुर्द को लेकर भी मांग
ग्रामीणों ने रापाखरा के विस्थापितों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने और आने-जाने के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की मांग की है। वहीं, दादर खुर्द के तालाब को गांव की निस्तारी का प्रमुख स्रोत बताते हुए वहां ओबी डंपिंग पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।
ग्रामीणों को सूचना दिए बिना जनसुनवाई कराने का आरोप
ग्रामीण अमन पटेल ने आरोप लगाया कि SECL प्रबंधन 21 अगस्त को जनसुनवाई कराने जा रहा है, लेकिन प्रभावित गांवों को इसकी जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि करीब 15-20 दिन पहले अधिकारियों से चर्चा के दौरान कहा गया था कि जनसुनवाई की जानकारी मिलने पर ग्रामीणों को बताया जाएगा। इसके बावजूद अब पंचायत सचिव, सरपंच और अन्य क्षेत्रों को नोटिस भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पुराने मुआवजे, रोजगार, पुनर्वास और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े वादे पूरे नहीं होते, तब तक खदान विस्तार के लिए जनसुनवाई नहीं होने दी जाएगी।
पारदर्शी, निष्पक्ष एवं समयबद्ध शिकायत निवारण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
बिलासपुर/कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने भूमि के बदले रोजगार से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा समिति का गठन किया है। समिति उपलब्ध अभिलेखों, दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के आधार पर प्रत्येक प्रकरण का परीक्षण कर अपनी अनुशंसाएं सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करेगी।
भूमि के बदले रोजगार की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से लागू की गई यह उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा व्यवस्था प्रत्येक पात्र हितग्राही के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
समिति के अध्यक्ष महाप्रबंधक (भू-राजस्व), एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर होंगे। समिति में महाप्रबंधक (योजना एवं परियोजना), महाप्रबंधक (मानव संसाधन/श्रमशक्ति), महाप्रबंधक (मानव संसाधन/औद्योगिक संबंध) तथा उप-महाप्रबंधक (विधि), एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर सदस्य होंगे।
गठित समिति आवश्यकता के अनुसार संबंधित अभिलेखों एवं दस्तावेजों की जांच करेगी, अधिकारियों से आवश्यक जानकारी प्राप्त करेगी तथा उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों का सत्यापन करते हुए प्रचलित नियमों एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप शिकायतों का परीक्षण करेगी। इससे प्रकरणों के त्वरित, निष्पक्ष एवं तार्किक निस्तारण में सहायता मिलेगी।
भूमि के बदले रोजगार से संबंधित अनियमितता, जाली अथवा कूटरचित दस्तावेजों के उपयोग, तथ्य छिपाकर रोजगार प्राप्त करने अथवा अन्य संबंधित मामलों के संबंध में कोई भी व्यक्ति आवश्यक दस्तावेजों एवं साक्ष्यों सहित समिति के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर सकता है।
एसईसीएल ने स्पष्ट किया है कि विधिवत दर्ज की गई शिकायत को वापस लेने का कोई प्रावधान नहीं है। अतः शिकायतकर्ताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे केवल प्रामाणिक तथ्यों एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही शिकायत दर्ज कराएं। कंपनी ने सभी संबंधित पक्षों एवं आम नागरिकों से अपील की है कि शिकायत केवल अधिकृत माध्यमों से ही प्रस्तुत करें तथा किसी भी प्रकार के बिचौलियों, अपुष्ट सूचनाओं अथवा भ्रामक दावों से सावधान रहें।
एसईसीएल ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जांच के दौरान कोई शिकायत जानबूझकर असत्य, दुर्भावनापूर्ण अथवा भ्रामक तथ्यों पर आधारित पाई जाती है, अथवा किसी व्यक्ति की छवि धूमिल करने या अनावश्यक उत्पीड़न के उद्देश्य से की गई प्रतीत होती है, तो संबंधित शिकायतकर्ता के विरुद्ध प्रचलित नियमों एवं लागू विधिक प्रावधानों के अनुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
एसईसीएल सुशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही एवं संस्थागत निष्पक्षता के उच्च मानकों के प्रति प्रतिबद्ध है। कंपनी का विश्वास है कि उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा व्यवस्था के माध्यम से भूमि के बदले रोजगार संबंधी शिकायतों के परीक्षण की प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष एवं विश्वसनीय बनेगी। साथ ही, वास्तविक एवं पात्र हितग्राहियों के हितों का प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित होने के साथ शिकायत निवारण तंत्र में जनविश्वास एवं संस्थागत जवाबदेही भी और सुदृढ़ होगी।