विदेश
इजराइल का US-ईरान शांति समझौते को मानने से इनकार:नेतन्याहू के मंत्री बोले- लेबनान से पीछे नहीं हटेंगे, हम अमेरिका के गुलाम नहीं
तेहरान/तेल अवीव/वाशिंगठन, एजेंसी। इजराइल ने अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले शांति समझौते को मानने से इनकार कर दिया है। रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने भी कहा है कि, उनकी सेना दक्षिणी लेबनान से पीछे नहीं हटेगी। लेबनान, सीरिया और गाजा में बनाए गए सिक्योरिटी जोन में इजराइली सेना अनिश्चितकाल तक तैनात रहेगी।
वहीं, इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्वीर ने पीस डील पर नाराजगी जताते हुए कहा, “हम अमेरिका के गुलाम नहीं है। इजराइल एक आजाद देश हैं और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का यह समझौता इजराइल पर लागू नहीं होता।”

इधर, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बताया कि अमेरिका-ईरान 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में पीस डील पर दस्तखत करेंगे। अगर ऐसा होता है तो 47 साल में तेहरान और वॉशिंगटन के बीच यह पहली हाई लेवल बैठक होगी।
ईरान ने दस्तखत करने से पहले 3 शर्तें रखीं
ईरान-अमेरिका के बीच हुए समझौते का पूरा दस्तावेज अभी जारी नहीं किया गया है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा है कि MoU पर हस्ताक्षर होने के बाद शुरू होने वाली 60 दिन की अमेरिका-ईरान की बातचीत इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका पहले अपने तीन वादे पूरे करता है या नहीं।
गरीबाबादी के मुताबिक अमेरिका को तीन कदम उठाने होंगे- 1. नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करना, 2. युद्ध और सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोकना, 3. ईरान के फ्रीज्ड फंड जारी करना।
शहबाज ने समझौते का सबसे पहले ऐलान किया: पाकिस्तानी PM ने सबसे पहले सीजफायर समझौते का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तुरंत और हमेशा के लिए रोकने पर सहमति जताई है।
- ट्रम्प ने लेबनान पर इजराइल के हमले की आलोचना की: ट्रम्प ने लेबनान के बेरूत पर हुए इजराइली हमले की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यह हमला ऐसे समय हुआ, जब अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौता बेहद करीब है।
- इजराइली हमलों के कारण पीस डील टली: ट्रम्प ने कहा था कि लेबनान पर इजराइली हमलों की वजह से ईरान के साथ पीस डील की साइनिंग कुछ घंटों के लिए टल गई।
- भारतीय जहाज के सभी 14 क्रू मेंबर सुरक्षित: ओमान के तट के पास संकट में फंसे भारतीय ध्वज वाले जहाज MSV विराट-1 के सभी 14 भारतीय क्रू मेंबरों को सुरक्षित बचा लिया गया है। मस्कट में भारतीय दूतावास ने रविवार को बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा हो गया है।
- अमेरिका से डील का ईरान में विरोध तेज: अमेरिका के साथ संभावित समझौते को लेकर ईरान में विरोध तेज हो गया है। कट्टरपंथी गुटों, रूढ़िवादी नेताओं और सरकारी मीडिया के कुछ वर्गों का कहना है कि यह समझौता ईरान के लिए झुकने जैसा कदम होगा और इससे युद्ध के दौरान हासिल फायदे कमजोर पड़ जाएंगे।
विदेश
आसमान से अमेरिकी सेना का विमान धड़ाम; जंगल में भड़की भीषण आग, मौत को मात देकर बचा पायलट
वाशिंगठन, एजेंसी। अमेरिका के वॉशिंगटन राज्य में एक बड़ा सैन्य विमान हादसा सामने आया है। नियमित प्रशिक्षण उड़ान के दौरान अमेरिकी मरीन कॉर्प्स का एक F/A-18 हॉर्नेट लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। राहत की बात यह रही कि पायलट समय रहते विमान से बाहर निकलने में सफल रहा और उसे केवल मामूली चोटें आईं। रिपोर्ट के अनुसार, यह F/A-18 हॉर्नेट विमान कैलिफोर्निया स्थित Marine Corps Air Station Miramar से संबद्ध था और नियमित प्रशिक्षण मिशन पर था। इसी दौरान विमान वॉशिंगटन राज्य के रिमरॉक झील क्षेत्र के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान Marine Aircraft Group 11 के अधीन संचालित किया जा रहा था।

हादसे से ठीक पहले पायलट ने इजेक्शन सिस्टम का इस्तेमाल किया और सुरक्षित बाहर निकल गया। स्थानीय पुलिस और बचाव दल ने उसे खोजकर अस्पताल पहुंचाया, जहां उसकी जांच की गई। अधिकारियों के अनुसार उसकी चोटें गंभीर नहीं हैं। विमान के गिरते ही Okanogan-Wenatchee National Forest क्षेत्र में झाड़ियों और जंगल में आग लग गई। आग तेजी से फैलने लगी, जिसके बाद कई हेलीकॉप्टरों और दमकल टीमों को मौके पर भेजा गया। Naches Fire Department सहित कई स्थानीय एजेंसियां आग पर काबू पाने में जुट गईं। अमेरिकी मरीन कॉर्प्स ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि तकनीकी खराबी, मौसम या किसी अन्य वजह से यह हादसा हुआ।
यह घटना ऐसे समय हुई है जब अमेरिकी सैन्य विमानों से जुड़े कई हादसे सामने आ चुके हैं। अप्रैल में ईरान के ऊपर एक अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल विमान के मार गिराए जाने की खबरें भी सामने आई थीं। उस घटना में भी चालक दल सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहा था। हालांकि वॉशिंगटन में हुआ यह हादसा किसी सैन्य संघर्ष से जुड़ा नहीं है, बल्कि नियमित प्रशिक्षण उड़ान के दौरान हुई दुर्घटना माना जा रहा है। लगातार सामने आ रही विमान दुर्घटनाएं अमेरिकी सैन्य विमानों की सुरक्षा और परिचालन संबंधी चुनौतियों को लेकर सवाल खड़े कर रही हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस हादसे के पीछे वास्तविक कारण क्या था।
देश
अमेरिकी रियल एस्टेट कंपनी Opendoor का भारत से एग्जिट, 250 कर्मचारियों होंगे प्रभावित
मुंबई, एजेंसी। अमेरिका की डिजिटल रियल एस्टेट कंपनी ओपनडोर (Opendoor) भारत में अपना कामकाज बंद करने का ऐलान किया है। कंपनी के इस फैसले से भारतीय दफ्तरों में काम करने वाला करीब 250 कर्मचारियों की नौकरी चली जाएगी। कंपनी के सीईओ काज नेजैटियन ने अपने सोशल मीडिया पर और कर्मचारियों को भेजे गए संदेश में इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कंपनी अपनी बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन स्ट्रेटेजी के तहत ऑपरेशनल रोल्स को अमेरिका में अपने ग्राहकों के करीब ले जा रही है।

कर्मचारियों को भेजे गए ईमेल में कंपनी ने कहा, ”कंपनी बीते कुछ महीनों से अपने ऑपरेशनल रोल्स को वापस अमेरिका में शिफ्ट कर रही थी। इस नए कदम से ये प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और ओपनडोर का भारत में कामकाज बंद हो जाएगा।” नेजैटियन ने कर्मचारियों को भेजे गए इस ईमेल को भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया है।
AI और तकनीकी बदलाव बने वजह
कंपनी का कहना है कि ओपनडोर के अधिकांश ग्राहक अमेरिका में हैं इसलिए ग्राहक सहायता और परिचालन गतिविधियों को वहीं से संचालित करना अधिक प्रभावी रहेगा। कंपनी ने पहले कई मैनुअल वर्कफ्लो को मैनेज करने के लिए भारत में एक बड़ी टीम बनाई थी लेकिन टेक्नोलॉजी में सुधार और AI-इनेबल्ड टीमें आने से इन कामों को विदेश में रखने की जरूरत कम हो गई है।
सीईओ ने भारत में कर्मचारियों के योगदान की तारीफ की
काज नेजैटियन ने अपने नोट में लिखा, ”आज हमने भारत में अपने सहयोगियों को अलविदा कहना शुरू कर दिया, क्योंकि हम भारत में अपना कामकाज बंद कर रहे हैं।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ये फैसला भारत में काम करने वाली टीम के परफॉर्मेंस से जुड़ा नहीं था। उन्होंने भारत में कर्मचारियों के योगदान की तारीफ की और उन्हें टैलेंटेड प्रोफेशनल बताया, जो दूसरी कंपनियों के लिए भी बहुत काम के साबित होंगे।
देश
अमेरिका में मोदी की धूम: PM मोदी के रिकॉर्ड कार्यकाल की अमेरिकी नेताओं ने की जमकर तारीफ
वॉशिंगटन, एजेंसी। भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले चुने हुए प्रधानमंत्री बनने के मील के पत्थर को हासिल करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिकी सांसदों, बिजनेस लीडर्स और भारतीय समुदाय के प्रमुख सदस्यों ने तारीफ़ की है। उन्होंने भारत की वैश्विक स्थिति को बदलने और अमेरिका के साथ संबंधों को मजबूत करने का श्रेय मोदी के नेतृत्व को दिया।
अमेरिकी सीनेटर जॉन कॉर्निन ने बधाई देने की शुरुआत की और मोदी को पद पर 4,399 दिन पूरे करने पर बधाई दी।

कॉर्निन ने कहा, “प्रधानमंत्री @narendramodi को भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले चुने हुए प्रधानमंत्री बनने पर बधाई – तीन लोकतांत्रिक जनादेशों के ज़रिए 1.4 अरब लोगों का भरोसा जीतकर 4,399 दिनों का नेतृत्व किया।” उन्होंने आगे कहा, “25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने से लेकर भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनाने तक, PM मोदी का कार्यकाल बदलाव लाने वाला रहा है। अमेरिका-भारत साझेदारी पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत हुई है।”
इंडियन अमेरिकन CEO काउंसिल के सह-संस्थापक और टेक्सास इकोनॉमिक डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के चेयरमैन अरुण अग्रवाल ने कहा कि यह मील का पत्थर पिछले बारह वर्षों में भारत में आए बदलाव पर विचार करने का मौका देता है। अग्रवाल ने इस मौके पर लिखे एक लेख में कहा, “2026 का भारत 2014 का भारत नहीं है।” उन्होंने कहा कि “इस बात से इनकार करना मुश्किल है कि आज भारत एक दशक पहले की तुलना में वैश्विक मंच पर ज़्यादा मज़बूती से खड़ा है, ज़्यादा मुखर है और ज़्यादा ध्यान आकर्षित करता है।” भारत को अब केवल संभावनाओं वाले देश के रूप में नहीं, बल्कि तेज़ी से उन संभावनाओं को हकीकत में बदलने वाले देश के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा, “कई दशकों तक, भारत को अक्सर भारी क्षमता वाले देश के रूप में वर्णित किया जाता था। आज, इसे तेज़ी से उस क्षमता को साकार करने वाले देश के रूप में देखा जा रहा है।”
उन्होंने कहा कि पिछले बारह वर्षों को संभवतः उस दौर के रूप में याद किया जाएगा जिसने “भारत के उत्थान को गति दी और भारत क्या हासिल कर सकता है, इस बारे में वैश्विक धारणा को बदल दिया।” पालो ऑल्टो नेटवर्क्स के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी निकेश अरोड़ा ने भी मोदी को इस उपलब्धि पर बधाई दी। अरोड़ा ने लिखा, “प्रधानमंत्री @narendramodi को भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले चुने हुए प्रधानमंत्री बनने पर बधाई – तीन लोकतांत्रिक जनादेशों के ज़रिए 1.4 अरब लोगों का भरोसा जीतकर 4,399 दिनों का नेतृत्व किया।” उन्होंने कहा, “25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने से लेकर भारत को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने तक, पीएम मोदी का कार्यकाल बदलाव लाने वाला रहा है। हम अमेरिका-भारत की लगातार जारी रहने वाली साझेदारी की उम्मीद करते हैं।”
अमेरिकी गायिका और भारत की समर्थक मैरी मिलबेन ने इस मौके को “एक महान देश की यात्रा में एक ऐतिहासिक, लोकतांत्रिक मील का पत्थर” बताया। उन्होंने कहा, “आज, मैं अपने दोस्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड बनाने पर दिल से बधाई देती हूं।” “आपकी मज़बूत लीडरशिप, 140 करोड़ भारतीयों की तरक्की, एकता और उम्मीदों के प्रति आपकी अटूट प्रतिबद्धता, और साथ ही एक मज़बूत भारत के लिए आपकी पक्की सोच ने बदलाव के एक दौर को आकार देने में मदद की है।” मिलबेन ने नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच रिश्तों को आगे बढ़ाने में मोदी की भूमिका की भी तारीफ़ की।
उन्होंने कहा, “मैं अमेरिका-भारत संबंधों को आगे बढ़ाने में आपकी लीडरशिप का सम्मान करती हूं। आपने कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों के कार्यकाल देखे हैं-कुछ के साथ आपके बहुत अच्छे संबंध रहे और दूसरों के प्रति आपने बहुत शालीनता दिखाई-फिर भी आप स्पष्ट कूटनीति अपनाने में कभी नहीं डगमगाए, जिससे भारतीय लोगों के हितों और हमारे दोनों देशों की भलाई को बढ़ावा मिला।”
इस उपलब्धि को आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बताते हुए उन्होंने आगे कहा, “अब, भारत के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेता के तौर पर, आपने पीढ़ियों को बड़े सपने देखने, कड़ी मेहनत करने और मातृभूमि की शान बढ़ाने में योगदान देने के लिए प्रेरित किया है।”
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