छत्तीसगढ़
नक्सल मुठभेड़ में एसटीएफ जवान के भाई की मौत
बस्तर आईजी बोले- क्रॉस फायरिंग में गई जान, परिजनों ने कहा-पुलिस ने गोली मारी
जगदलपुर/बीजापुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा-बीजापुर बॉर्डर पर हुई नक्सल मुठभेड़ में एसटीएफ जवान के भाई की गोली लगने से मौत हो गई। मुठभेड़ के दिन ही युवक की बेटी का छठी कार्यक्रम था। अफसरों ने पहले नक्सली की मौत की खबर बताई थी, लेकिन फिर क्रॉस फायरिंग में मौत होने का दावा किया है।
वहीं दूसरी ओर युवक के परिजनों और ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस ने जान-बूझकर गोली मारी है। अब न्याय की मांग को लेकर 21 गांवों के ग्रामीण आंदोलन पर बैठ गए हैं। फिलहाल दावों की हकीकत जानने के लिए मीडिया इंद्रावती नदी पार कर मुठभेड़ स्थल पर पहुंची।
पत्नी बोली- सामान लेने गए थे, पर लाश आई
बोडग़ा गांव निवासी रमेश की पत्नी ने बताया कि उनकी शादी करीब डेढ़ साल पहले ही हुई थी। इसी साल जनवरी में बेटी का जन्म हुआ। अभी वह 12 दिन की है। बेटी के जन्म से रमेश बहुत खुश थे। 30 जनवरी को घर पर छठी का कार्यक्रम था। परिवार, समाज और गांव के लोग घर पहुंचे थे।
उसी दिन रमेश गांव से करीब 3 किमी दूर अपनी बुआ के घर टाडोपोटा गांव गए थे। वह छठी के कार्यक्रम के लिए सामान लेने गए थे, लेकिन कुछ देर बाद उनकी लाश लौटी। पत्नी ने कहा कि, लोगों ने उन्हें बताया कि, रमेश को पुलिस वालों ने गोली मारी है।
भाई ने कहा- हमें न्याय चाहिए
रमेश के बड़े भाई सुधराम ने कहा कि, घर में छठी के कार्यक्रम की खुशियां कुछ ही घंटे में गम में बदल गईं। उन्होंने भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके भाई को गोली मारी है। उन्होंने कहा कि, हमने शव का अंतिम संस्कार कर दिया है। हम तीन भाइयों में एक भाई पुलिस में है।
सुधराम ने बताया कि, हम खेती-किसानी कर गुजर-बसर करते हैं। रमेश सामान लेने के लिए इंद्रावती नदी के पास बुआ के घर गया था। जहां उसे गोली लगी है। भाई बेमौत मारा गया है। उसका कोई कसूर नहीं था। मेरे परिवार को न्याय चाहिए।
जहां मिली लाश, वहां बनाया स्मारक
दरअसल, इंद्रावती नदी किनारे जिस जगह पर रमेश को गोली लगी, और उसकी मौत हुई। वहीं पर रमेश की याद में ग्रामीणों ने स्मारक बना दिया है। सोमवार को सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। यहां श्रद्धांजलि सभा का भी आयोजन किया गया था।
आदिवासी समाज ने कहा- उच्च स्तरीय जांच हो
इस मामले को लेकर आदिवासी समाज भी सामने आया है। बीजापुर जिले के आदिवासी समाज के संरक्षक चंद्रयन सकनी ने कहा कि, हम मांग करते हैं कि, इस घटना की न्यायिक जांच होनी चाहिए। उच्च स्तरीय जांच हो।
21 गांव के लोग आंदोलन पर बैठे
रमेश की मौत की खबर फैलते ही इंद्रावती नदी पार के बीजापुर और नारायणपुर जिले के करीब 21 गांव के ग्रामीण पहुंच गए। इनमें ताकिलोड, पल्लेवाया, रेकावाया, डूंगा, धर्मा, बेलनार, गुंडेमा, पिड्याकोट समेत अन्य गांव के लोग शामिल हैं।
रमेश के परिवार को न्याय दिलाने और दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग को लेकर सभी आंदोलन पर बैठ गए हैं। इन गांव के सैकड़ों लोगों ने रैली निकाली और सभा की। ग्रामीणों ने कहा कि, जब तक मामले की जांच नहीं होती और कार्रवाई नहीं होगी, धरने पर बैठे रहेंगे।
लकड़ी की छोटी नाव से नदी पार कर पहुंची टीम
संभागीय मुख्यालय जगदलपुर से महज 140-50 किमी की दूरी पर इंद्रावती नदी पार बैल गांव के नजदीक टाडोपोटा-बोडग़ा गांव है। यही मुठभेड़ स्थल भी है। मीडिया की टीम दुर्गम रास्तों से होते हुए इंद्रावती नदी को लकड़ी की छोटी नाव के सहारे पार कर घटना स्थल पहुंची।
30 जनवरी को हुई थी मुठभेड़
दरअसल, 29 जनवरी की रात दंतेवाड़ा-बीजापुर जिले की पुलिस ने संयुक्त ऑपरेशन लॉन्च किया था। पुलिस के दावे के अनुसार 30 जनवरी की सुबह इंद्रावती नदी पार के गांव में पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ भी हुई थी। पुलिस अफसरों ने बताया था कि, यहां हार्डकोर नक्सली मौजूद थे।
इसी इलाके में नक्सलियों का सुरंग भी मिला था। मुठभेड़ के बाद पुलिस ने बताया था कि, एक नक्सली की मौत की खबर है। हालांकि, अगले दिन बस्तर आईजी सुंदरराज पी की तरफ से बयान आया था कि क्रॉस फायरिंग में एक ग्रामीण मारा गया है। जो एसटीएफ जवान का भाई है।

कोरबा
पत्रकारबंधुओं की कलम, सबसे बड़ी ताकत – उद्योग मंत्री
उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन के मुख्य आतिथ्य एवं महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत की अध्यक्षता में पत्रकारों की कालोनी तिलक नगर में बाउण्ड्रीवाल निर्माण कार्य का किया गया भूमिपूजन
तिलक भवन में स्थापित एल.ई.डी. प्रोजेक्टर, स्मार्ट टी.व्ही., साउण्ड सिस्टम व स्क्रीन स्थापना आदि कार्यो का हुआ लोकार्पण

कोरबा। छत्तीसगढ़ के उद्योग, वाणिज्य, श्रम, सार्वजनिक उपक्रम व आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन ने आज कहा कि पत्रकारबंधु एक ऐसा दर्पण होते हैं, जो समाज को सच का आईना दिखाने का कार्य करते हैं। उन्होने कहा कि निष्पक्षता एवं पारदर्शिता पत्रकारिता का मूलमंत्र है, समाचार पत्रों में जो छपता है, मीडिया में जो दिखता है, आमजन मानस उसे ही सच मानकर चलता है, अतः यह आवश्यक है कि समाचारों में निष्पक्षता, पारदर्शिता व निर्भीकता होनी ही चाहिये। उन्होने कहा कि प्रेस क्लब कोरबा एक ऊर्जावान संस्था है, जो पत्रकारिता व पत्रकारबंधुओं के हितों की रक्षा के लिये निरंतर कार्य कर रही है।

उक्त बातें आज उद्योग मंत्री देवांगन ने कोरबा के तिलक भवन स्थित प्रेस क्लब में आयोजित भूमिपूजन लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान कही। नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा वार्ड क्र. 35 खरमोरा डाईट बिल्डिंग तिलक नगर पत्रकार कालोनी के समीप एन.टी.पी.सी. के सीएसआर मद से 15 लाख रूपये की लागत से बाउण्ड्रीवाल का निर्माण कार्य कराया जाना हैं, जिसका वर्चुअल भूमिपूजन आज उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन के मुख्य आतिथ्य एवं महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत की अध्यक्षता में तिलक भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उनके हाथों किया गया। इसी प्रकार वार्ड क्र. 24 तिलक भवन प्रेस क्लब में पार्षद पंकज देवांगन के पार्षद मद से एलईडी प्रोजेक्टर, स्मार्ट टी.व्ही., साउण्ड सिस्टम व स्क्रीन स्थापना आदि का कार्य कराया गया है, जिसका लोकार्पण भी आज उद्योग मंत्री श्री देवांगन के करकमलों से सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर उद्योग मंत्री श्री देवांगन ने दिये गये अपने उद्बोधन में आगे कहा कि मुझे प्रसन्नता है कि जब मैं कोरबा का महापौर था, उस समय प्रेस क्लब का निर्माण किया गया, उस समय भी और आज भी नगर निगम कोरबा द्वारा प्रेस क्लब के विकास व अन्य गतिविधियों के लिये लगातार सहयोग दिया जा रहा है, विकास कार्य कराये जा रहे हैं। उन्होने आगे कहा कि डाॅ.रमन सिंह 15 वर्षो तक छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रहे, उन्होने जब राज्य की कमान संभाली तब उस समय छत्तीसगढ़ की स्थिति काफी कमजोर थी, किन्तु उन्होने अपने 15 वर्षो के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ का ऐतिहासिक विकास किया तथा राज्य के विकास पुरूष की छबि अर्जित की, उनके कार्यकाल में दर्जनों जनकल्याणकारी योजनायें संचालित हुई, किन्तु इन योजनाओं को बीच में बंद कर दिया गया था, अब प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में सरकार ने पुनः इन योजनाओं को प्रारंभ कराया है। उन्होने कहा कि हमारी सरकार देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सबका साथ-सबका विकास की नीति पर कार्य कर रही है तथा समाज के गरीब, निर्धन, मजदूर, किसान, युवा, महिला व हर वर्ग के लिये कल्याणकारी योजनायें संचालित कर उनके जीवन स्तर को ऊपर उठाने का कार्य कर रही है। उद्योग मंत्री श्री देवांगन ने इस मौके पर पत्रकारबंधुओं को संबोधित करते हुये आगे कहा कि मुझे सदैव आप लोगों का स्नेह, आशीर्वाद व मार्गदर्शन मिलता आया है, मैं विश्वास रखता हूॅं कि आपका यह प्यार, स्नेह भविष्य में भी मुझे निरंतर प्राप्त होता रहेगा।
उद्योग मंत्री विकास हेतु लगातार कर रहे फंड की व्यवस्था-महापौर

इस अवसर पर महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत ने अपने उद्बोधन में कहा कि उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन कोरबा के सभी 67 वार्डो में विकास कार्य कराये जाने हेतु लगातार धनराशि की व्यवस्था करा रहे हैं, उनके प्रयासों से विगत 02 वर्षो के दौरान विभिन्न मदों के अंतर्गत 1000 करोड़ रूपये के विकास कार्यो व परियोजनाओं की स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। उन्होेने पत्रकारबंधुओं को संबोधित करते हुये कहा कि आप स्वयं देख रहें है कि विगत 02 वर्ष से कोरबा शहर व निगम क्षेत्र के सभी वार्डो में लगातार विकास कार्य हो रहे हैं, इस दौरान अनेक क्षेत्रों में निगम ने महत्वपूर्ण उपलब्धियाॅं भी अर्जित की हैं, जिससे आप सब भलीभांति परिचित हैं, आप सबका स्नेह, मार्गदर्शन व सुझाव शहर के विकास के लिये अनवरत रूप से प्राप्त होता रहेगा, यह मैं विश्वास रखती हूॅं।



छत्तीसगढ़
बीजापुर में 14 करोड़ का नक्सली डंप मिला:डेडलाइन के आखिरी दिन 34 नक्सलियों का सरेंडर, 7 किलो सोना, 3 करोड़ कैश बरामद
बीजापुर/दंतेवाड़ा/सुकमा/कांकेर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ में नक्सली खात्मे के डेडलाइन (31 मार्च) के आखिरी दिन 14 करोड़ का नक्सली डंप बरामद हुआ है। इसके साथ ही 4 जिलों में 34 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। बीजापुर में 25 नक्सलियों ने पुलिस को हथियार सौंपे। इनसे मिले इनपुट के बाद यहीं 14 करोड़ का डंप मिला। जिसमें 3 करोड़ कैश और 7 किलो गोल्ड शामिल है।

वहीं, दंतेवाड़ा में 5, सुकमा में 2 और कांकेर में 2 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया हैं। पुलिस ने दावा किया है कि, दंतेवाड़ा में अब एक भी नक्सली नहीं बचे हैं। जिले में सक्रिय अंतिम 5 नक्सलियों ने हथियार डाल दिए हैं। इन पर 9 लाख रुपए का इनाम घोषित था। वहीं, कांकेर में 14 नक्सली अब भी एक्टिव है।

नक्सलियों के कब्जे से 3 करोड़ कैश और 7 किलो सोना बरामद।

बीजापुर में मिले 14 करोड़ के नक्सली डंप को अब तक का सबसे बड़ा डंप माना जा रहा है। इसमें गोल्ड और कैश शामिल है।

दंतेवाड़ा, सुकमा और कांकेर में नक्सलियों ने किया सरेंडर।

सुकमा में 2 महिला नक्सलियों ने डाले हथियार।
बीजापुर में 25 नक्सलियों का सरेंडर
बीजापुर में 25 नक्सलियों ने 93 हथियार के साथ सरेंडर किया है। इन पर 1.47 करोड़ का इनाम था। इनके कब्जे से मिली 14 करोड़ की डंप सामाग्री में 2.90 करोड़ कैश और 11.16 करोड़ का 7 किलो सोना शामिल है। नक्सल विरोधी अभियान के तहत अब तक सबसे बड़ा डंप इसे माना जा रहा है।
सुकमा में 2 महिला नक्सलियों ने डाले हथियार
सुकमा में 2 महिला नक्सलियों ने सरेंडर किया है। इन पर 8-8 लाख का इनाम था। वे माओवादी कैडर के रैंक कंपनी के सदस्य है, सुकमा के ही रहने वाली है। सरेंडर के बाद इनसे मिले इनपुट के बाद हथियारों और 10 लाख कैश का बड़ा डंप भी मिला है।
- जनिला उर्फ मड़कम हिंडमे (30), इनाम – 8 लाख
- सोनी उर्फ माड़वी कोसी (24) इनाम – 8 लाख

सुकमा में सरेंडर करने वाली महिला नक्सली अपने साथ 10 लाख कैश और भारी मात्रा में हथियार लाई थी।
कांकेर में 14 नक्सली सक्रिय
कांकेर जिले में पिछले 6 दिन में 11 नक्सली मुख्यधारा में लौट चुके हैं। जिले में अभी भी करीब 14 नक्सली सक्रिय हैं। इनमें डीवीसीएम स्तर के चंदर और रूपी शामिल है।
पुलिस आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों से जानकारी जुटाकर अब इलाके में छिपे बाकी नक्सलियों से संपर्क शुरू कर रही है। पुलिस उन्हें समझाकर मुख्यधारा में लाने की कोशिश कर रही है।
- पीपीसीएम (PPCM) शंकर
- पीएम (PM) हिड़मा डोडी

बस्तर पुलिस का दावा है कि अब दंतेवाड़ा जिला भी नक्सल मुक्त हो चुका है।
पुलिस का दावा- दंतेवाड़ा नक्सलवाद मुक्त
दंतेवाड़ा पुलिस लाइन कारली में मंगलवार (31 मार्च) को “पूना मारगेम-पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान के तहत सरेंडर कार्यक्रम हुआ। इसमें दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) से जुड़े 5 नक्सली मुख्यधारा में लौटे हैं। इनमें 4 महिला कैडर शामिल हैं।
पुलिस ने अलग-अलग ऑपरेशन के दौरान इंसास, SLR, कार्बाइन, लॉन्चर समेत कई हथियार भी बरामद किए हैं। एसपी गौरव राय ने दावा किया है कि अब दंतेवाड़ा जिला भी नक्सल मुक्त हो चुका है। यहां की आबो हवाओं में अब हिंसा नहीं बल्कि अमन, चैन और शांति महसूस की जा सकती है।

अमित शाह बोले- बस्तर से नक्सलवाद लगभग खत्म
लोकसभा में सोमवार को नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया कि बस्तर से नक्सलवाद लगभग पूरी तरह खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि बस्तर के हर एक गांव में स्कूल खोलने के लिए अभियान चलाया गया।
हर गांव में राशन की दुकान, हर तहसील और पंचायत में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) स्थापित किए गए हैं। लोगों को आधार कार्ड और राशन कार्ड जारी किए गए हैं। उन्हें पांच किलोग्राम अनाज मिल रहा है।
शाह का दावा 31 मार्च की डेडलाइन और ‘नक्सल-मुक्त भारत’
नक्सलवाद पर संसद में चर्चा उस समय हुई, जब केंद्र सरकार द्वारा तय 31 मार्च 2026 की डेडलाइन खत्म होने में एक दिन बाकी था। गृह मंत्री अमित शाह ने अपने करीब डेढ़ घंटे के भाषण में कहा कि सरकार ने जो लक्ष्य तय किया था, उसे हासिल कर लिया गया है।
उन्होंने कहा कि अब पूरे विश्वास के साथ कहा जा सकता है कि देश से नक्सलवाद खत्म हो गया है। शाह के मुताबिक, नक्सली हिंसा में भारी गिरावट आई है और देश के अधिकांश हिस्सों में इसका प्रभाव समाप्त हो चुका है।
छत्तीसगढ़
प्रार्थना सभा के लिए अनुमति जरूरी नहीं:हाईकोर्ट बोला- घर में प्रेयर, मीटिंग करने वालों को परेशान न करें, पुलिस नोटिस रद्द
बिलासपुर/जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश में धर्मांतरण को लेकर विवाद के बीच अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की सिंगल बेंच ने आदेश में कहा कि किसी व्यक्ति को अपने निजी आवास में शांतिपूर्ण प्रार्थना सभा आयोजित करने का अधिकार है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रार्थना सभा के लिए पहले से परमिशन लेना जरूरी नहीं है। सिंगल बेंच ने इस आदेश में पुलिस की ओर से जारी नोटिस को रद्द कर दिया, जिसमें थाना प्रभारी याचिकाकर्ताओं को प्रार्थना सभा रोकने के लिए बार-बार नोटिस दे रहे थे।

हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को अनावश्यक परेशान नहीं किया जाए। यह मामला जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम गोधना से जुड़ा है।

निजी मकान में प्रार्थना सभा के लिए पहले से परमिशन लेना जरूरी नहीं है। (फाइल फोटो)
दरअसल, ग्राम गोधना में याचिकाकर्ताओं ने अपने आवास की पहली मंजिल पर हॉल बनाया है। इसके बाद से 2016 से यहां ईसाई धर्म के अनुयायियों के लिए प्रार्थना सभा आयोजित की जाती है। इन सभाओं में किसी प्रकार की अवैध गतिविधि या शांति भंग नहीं होती।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट को बताया कि इसके बावजूद नवागढ़ थाने के थाना प्रभारी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 94 के तहत बार-बार नोटिस जारी कर प्रार्थना सभा पर रोक लगाने का प्रयास कर रहे थे।
साथ ही ग्राम पंचायत गोधना ने पहले जारी ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ को दबाव में वापस ले लिया। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत पुलिस की नोटिस को चुनौती दी गई थी और 7 दिसंबर 2025 को प्रार्थना नहीं करने संबंधी आदेश को रद्द करने के साथ अपने धार्मिक अधिकारों की सुरक्षा की मांग की गई थी।

हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को अनावश्यक परेशान नहीं किया जाए। (फाइल फोटो)
शासन ने कहा- प्रार्थना सभा के लिए नहीं ली अनुमति
इस मामले में राज्य शासन ने दलील दी कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं और वे जेल भी जा चुके हैं। प्रार्थना सभा आयोजित करने के लिए सक्षम प्राधिकारी से कोई पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी, इसलिए पुलिस ने नोटिस जारी किए। राज्य ने जवाब दाखिल करने के लिए भी समय मांगा।
हाईकोर्ट बोला- मकान में प्रार्थना सभा के लिए अनुमति की जरूरत नहीं
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता अपने निजी मकान में 2016 से प्रार्थना सभा आयोजित कर रहे हैं और ऐसा करने पर कोई कानूनी प्रतिबंध नहीं है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर प्रार्थना सभा के दौरान शोर-शराबा, कानून-व्यवस्था की समस्या या किसी प्रकार का उल्लंघन होता है, तो संबंधित प्राधिकरण विधि के अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं, लेकिन केवल प्रार्थना सभा आयोजित करने के आधार पर हस्तक्षेप उचित नहीं है।
हाईकोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ताओं के नागरिक अधिकारों में हस्तक्षेप न करें और न ही जांच के नाम पर उन्हें परेशान करें। साथ ही 18 अक्टूबर 2025, 22 नवंबर 2025 और 1 फरवरी 2026 को जारी सभी नोटिस रद्द कर दिए हैं।

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