कोरबा
निशुल्क बालिका शिक्षा के लिए कृत संकल्पित है सीपीएस पाली -डॉ. गजेंद्र तिवारी
नई पहल: कल्पना फाउंडेशन बालिका शिक्षा को दे रहा बढ़ावा, हर साल आधारभूत कक्षाओं में बालिकाओं का निशुल्क प्रवेश
पाली। छत्तीसगढ़ पब्लिक हायर सेकेंडरी स्कूल पाली अपनी सर्वाेत्कृष्ट शिक्षा प्रणाली के कारण पाली क्षेत्र में ही नहीं बल्कि पूरे कोरबा जिले में अपनी ख्याति हासिल कर रहा है। यहां बालिका शिक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है। यहां के प्राचार्य एवं डायरेक्टर डॉ. गजेन्द्र तिवारी की धर्मपत्नी श्रीमती कल्पना तिवारी का देहावसान दो वर्ष पूर्व अल्पायु में हो गया था । श्रीमती कल्पना तिवारी बालिका शिक्षा के लिए अपने पति को हमेशा समझाईश देती रहीं कि गरीब बालिकाओं को निशुल्क या कम फीस में पढ़ाएं। आज यद्यपि श्रीमती तिवारी इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी बातों को प्रेरणा समझकर उनके पति डॉ. गजेन्द्र तिवारी ने कल्पना फाउंडेशन की स्थापना की और उनके सपने को पूर्ण करने स्वयं के द्वारा संचालित छत्तीसगढ़ पब्लिक हायर सेकेंडरी स्कूल पाली में आधारभूत कक्षाओं में निशुल्क प्रवेश देकर बालिकाओं को आगे बढ़ा रहे हैं। शिक्षाविद एवं कल्पना फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ. गजेंद्र तिवारी ने बताया कि मातृ शक्ति के विकास और मजबूत सामाजिक बुनियाद के लिए कल्पना मेमोरियल फाउंडेशन द्वारा नि:शुल्क बालिका प्रोत्साहन योजना प्रारंभ की है। इस वर्ष पहली से 12वीं तक की छात्राओं का नि:शुल्क शिक्षा प्रदान किया जाएगा। गत वर्ष आधारभूत कक्षाओं जैसे पहली, छठवीं, नवमी एवं ग्यारहवीं के छात्राओं को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान किया जा रहा है, इसके तहत अभी वर्तमान में 53 छात्राएं अध्यनरत हैं। इस योजना को विस्तार देते हुए डॉ. तिवारी ने फैसला किया है कि इस वर्ष सत्र 2024- 25 से कक्षा पहली से 12वीं तक की छात्राओं का निशुल्क शिक्षा प्रदान किया जाएगा। डा. गजेंद्र तिवारी ने बताया कि देश के स्वर्णिम भविष्य के लिए भारत में लड़कियों की शिक्षा आवश्यक है क्योंकि महिलाएं अपने बच्चों की पहली शिक्षक हैं, जो देश का भविष्य हैं। अशिक्षित महिलाएं परिवार के बेहतर प्रबंधन में योगदान नहीं दे सकती और बच्चों की उचित देखभाल करने में सक्षम साबित नहीं होंती। इस प्रकार भविष्य की पीढ़ी कमजोर हो सकती हैं। लड़कियों के शिक्षित होने में कई फायदे हैं । एक सुशिक्षित और सुशोभित लड़की देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं । एक शिक्षित लड़की विभिन्न क्षेत्रों में पुरुषों के काम और बोझ को साझा कर सकती हैं । एक शिक्षित लड़की की अगर कम उम्र में शादी नहीं की गई तो वह लेखक ,शिक्षक, वकील, डॉक्टर और वैज्ञानिक के रूप में देश की सेवा कर सकती हैं। इसके अलावा वह अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी बहुत अच्छी तरह से प्रदर्शन कर सकती हैं ।
कल्पना मेमोरियल फाउंडेशन निशुल्क बालिका शिक्षा के लिए कृत संकल्पित
डॉक्टर तिवारी का मानना है कि महंगाई के इस युग में लड़कियों के लिए शिक्षा वरदान है। आज के समय में एक माध्यम वर्गीय परिवार की जरूरत को पूरा करना वास्तव में कठिन है। शादी के बाद अगर एक शिक्षित लड़की काम करती है तो वह अपने पति के साथ परिवार के खर्चों को पूरा करने में मदद कर सकती है। भगवान न करे , लेकिन अगर किसी महिला के पति की आकस्मिक मृत्यु हो जाती है तो वह शिक्षा के जरिये अपने पैर पर खड़ा हो सकती है और परिवार टूटने से बच सकता है। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। चाहे वह लड़का हो या लड़की सभी के लिए शिक्षा बेहद जरूरी है, लेकिन हमारे समाज में अभी भी शिक्षा को लेकर लैंगिक भेदभाव किया जाता है। जहां लड़कों की शिक्षा को तवज्जो दी जाती है, वहीं लड़कियों को शिक्षा से वंचित कर दिया जाता है। कल्पना फाउंडेशन ने यह बीड़ा उठाया है कि समाज में ऐसी छात्राएं शिक्षा से वंचित न रहें। इस हेतु कल्पना फाउंडेशन द्वारा नि:शुल्क बालिका शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। निशुल्क छात्राएं संस्था में अध्ययनरत हैं। शिक्षा महिलाओं की सोच के दायरे को भी आगे बढ़ाती है, जिससे वह अपने बच्चों की परवरिश अच्छे से कर सकती है। इससे वह यह भी तय कर सकती है कि उसके और उसके परिवार के लिए क्या सबसे अच्छा है । शिक्षा एक लड़की को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने में मदद करती है , ताकि वह अपने अधिकारों और महिलाओं की सशक्तिकरण को पहचान सके। जिससे उसे लिंग असमानता की समस्या से लडऩे में मदद मिले। डा. तिवारी का मानना है कि लड़कों की तरह लड़कियों को भी विभिन्न प्रकार की शिक्षा देना जरूरी है। उनकी शिक्षा इस तरह से होनी चाहिए कि वह अपने कर्तव्यों को उचित तरीके से पूरा करने में सक्षम हो सके। शिक्षा के द्वारा वह जीवन के सभी क्षेत्रों में पूरी तरह परिपक्व हो जाती है। एक शिक्षित महिला अपने कर्तव्य और अधिकारों के बारे में अच्छी तरह जानती है। वह देश के विकास के लिए पुरुषों के समान अपना योगदान दे सकती है। अत: यह कहा जा सकता है कि बालिका शिक्षा को अब अनुपयोगी नहीं समझा जा सकता। यह माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वह सुनिश्चित करें कि उनकी कन्याएं भी अनिवार्य रूप से विद्यालय जाएं। वह न सिर्फ उन्हें अपनी गृहस्थी चलाने में बल्कि राष्ट्र को भी मजबूत बनाने में मदद करेगी। डा. गजेंद्र तिवारी ने बताया कि सत्र 2024- 25 के लिए कक्षा पहली से 12वीं तक की छात्राओं को नि:शुल्क प्रवेश दिया जाएगा, जिसके तहत प्रवेश की प्रक्रिया या नामांकन 1 मार्च से प्रारंभ हो रही है। समाज के सभी वर्ग के लोगों से आग्रह किया जाता है , कि वह अपने आसपास सभी छात्राओं को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान करने के लिए पाली ब्लॉक में स्थित छत्तीसगढ़ पब्लिक हायर सेकेंडरी स्कूल पाली में निशुल्क प्रवेश दिलाने प्रेरित करें ।
कोरबा
धीरेंद्र शास्त्री बोले-जब तक जिएंगे, हिंदुओं को कटने-बंटने-मिटने नहीं देंगे:मुस्लिम परिवार समेत 583 लोगों की घर वापसी, पंडाल में झूपने लगे महिलाएं-पुरुष
कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा में 583 लोगों की ‘घर वापसी’ हुई। इनमें एक मुस्लिम परिवार भी शामिल है, जिन्होंने सनातन धर्म अपनाया है। वहीं, दरबार में महिलाएं और पुरुष झूमते नजर आए।

पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने धर्मांतरण कराने वालों को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि, जब तक जिएंगे, हिंदुओं को न कटने देंगे, न बंटने देंगे और न मिटने देंगे। उन्होंने यह भी बताया कि लालच में आकर जिन लोगों ने हिंदू धर्म छोड़कर दूसरा मजहब अपनाया था, उनमें से सैकड़ों लोग अब ‘घर वापसी’ कर रहे हैं।

धीरेंद्र शास्त्री बोले-जब तक जिएंगे, हिंदुओं को कटने-बंटने-मिटने नहीं देंगे।

मुस्लिम परिवार समेत 583 लोगों की घर वापसी।

दावा है कि दरबार में भूत-प्रेत बाधा से पीड़ित लोगों का इलाज किया गया।
कथा के चौथे दिन लगा दिव्य दरबार
दरअसल, कोरबा के ढपढप में 5 दिवसीय हनुमंत कथा का आयोजन किया गया है। आज चौथे दिन पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के दिव्य दरबार में जनसैलाब उमड़ पड़ा। चौथे दिन 2 लाख से ज्यादा लोग पहुंचे थे।
दावा है कि दरबार में भूत-प्रेत बाधा से पीड़ित लोगों का विशेष इलाज किया गया। पर्चा लिखकर लोगों की समस्याओं का समाधान किया। पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने मंत्रोच्चार शुरू करते ही, दरबार में मौजूद कई महिला-पुरुष असामान्य व्यवहार करने लगे। कुछ लोग जमीन पर लोटते और झूमते हुए दिखाई दिए।
जरूरतमंदों को दो रुपए – धीरेंद्र शास्त्री
दरबार के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक गरीब बुजुर्ग की मदद के लिए यजमानों और जनप्रतिनिधियों से आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि, लोग नाचने वाली स्त्रियों पर तो पैसे लुटाते हैं, लेकिन जरूरतमंदों की मदद के लिए भी आगे आना चाहिए।

मंत्रोच्चार शुरू करते ही, दरबार में मौजूद कई महिला-पुरुष असामान्य व्यवहार करने लगे।
धीरेंद्र शास्त्री ने बुजुर्ग की आर्थिक मदद की
बुजुर्ग ने धीरेंद्र शास्त्री को बताया कि, वो पाली मुनगाडीह का रहने वाला है। अपने घर से पैदल सुबह निकला था। इस दरबार में शामिल हो गया। उसकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। जिस पर धीरेंद्र शास्त्री ने तत्काल 50 हजार दिए।
वहीं, सामने बैठे वीआईपी लोगों को आर्थिक मदद करने को कहा। जिसके बाद कुल 1 लाख 20 हजार रुपए बुजुर्ग को दिए गए। इसके बाद उन्होंने अपने टीम के वाहन से सुरक्षित घर तक छोड़ने को कहा।
धीरेंद्र शास्त्री बोले- हालेलुया वालों की ठठरी मारी जाएगी
इससे पहले कोरबा में ही बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने धर्मांतरण पर कहा था कि, यहां आसपास हालेलुया वाले भी रहते हैं, उनकी भी ठठरी मारी जाएगी। अब यह खेल नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि जो लोग राह भटक गए हैं, उनकी घर वापसी कराई जाएगी। इसके अलावा उन्होंने खुद को छत्तीसगढ़ का भांचा बताया।

कोरबा
श्री सिद्धेश्वर हनुमान मंदिर, आर.पी. नगर फेज-2 में हनुमान जन्मोत्सव पर विविध धार्मिक आयोजन
कोरबा। श्री सिद्धेश्वर हनुमान मंदिर, आर.पी. नगर फेज-2 में भगवान श्री हनुमान के पावन जन्मोत्सव के अवसर पर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

मंदिर समिति द्वारा दी जानकारी के अनुसार 1 अप्रैल को दोपहर 2:00 बजे से अखंड रामायण पाठ का शुभारंभ किया जाएगा, जो निरंतर चलता रहेगा।

2 अप्रैल को प्रातः 9:00 बजे से 12:00 बजे तक विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाएगा। इसके पश्चात दोपहर 12:00 बजे से 1:30 बजे तक हवन कार्यक्रम संपन्न होगा। हवन के उपरांत दोपहर 1:30 बजे से श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है।

मंदिर समिति ने क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त करें एवं कार्यक्रम को सफल बनाएं।

कोरबा
एसईसीएल मुख्यालय के 4 कर्मियों को सेवानिवृत्ति पर भावभीनी विदाई दी गयी
बिलासपुर/कोरबा। 31.03.2026 को एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर से सेवानिवृत्त होने वाले कर्मियों को 30 . 03.2026 को निदेशक (मानव संसाधन) बिरंची दास, निदेशक (वित्त) डी सुनील कुमार, निदेशक तकनीकी (योजना/परियोजना) रमेश चन्द्र महापात्र एवं विभिन्न विभागाध्यक्षों, श्रम संघ प्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति में मुख्यालय बिलासपुर स्थित सीएमडी कक्ष में शाल, श्रीफल, पुष्पहार से सम्मानित कर समस्त भुगतान का चेक प्रदान कर भावभीनी विदाई दी गयी।

सेवानिवृत्त होने वालों में सी.डी.एन सिंह महाप्रबंधक (वित्त) वित्त विभाग, जी श्यामला राव महाप्रबंधक (मा.सं) कल्याण विभाग, राम विनय कुमार, महाप्रबंधक (उत्खनन) उत्खनन विभाग, राज, सुरक्षा उप निरीक्षक- सुरक्षा विभाग शामिल रहे।
शीर्ष प्रबंधन ने अपने उद्बोधनों में कहा कि सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारी-कर्मचारी अपनी कार्यकुशलता और समर्पण से एसईसीएल को सफलता की नई ऊँचाइयों तक लेकर गए हैं। उनके योगदान को सदैव स्मरण किया जाएगा। प्रबंधन ने सभी के उज्ज्वल भविष्य और सुखद पारिवारिक जीवन की कामना की।
सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी कम्पनी के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि एसईसीएल में कार्य करना गौरव का विषय रहा। उन्होंने कहा कि यहाँ के अधिकारी और कर्मचारी कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करते हैं और किसी भी जिम्मेदारी को पूर्ण निष्ठा से निभाते हैं।
कार्यक्रम का चालन एवं सेवानिवृत्त कर्मियों का परिचय प्रबंधक (राजभाषा) श्रीमती सविता निर्मलकर ने सफलतापूर्वक किया।

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