देश
जहरीला पानी…इंदौर में 17वीं मौत, 20 नए मरीज मिले
एपिडेमिक कैसे फैला, एम्स-आईसीएमआर की टीम जांच कर रही, महामारी पर सरकार की हां-ना
इंदौर,एजेंसी। इंदौर के भागीरथपुरा में 17वीं मौत हुई है। दूषित पानी पीने से मरने वालों की संख्या रविवार तक 16 थी। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने भागीरथपुरा में महामारी फैलना स्वीकार किया है। वहीं, कलेक्टर शिवम वर्मा ने सोमवार को समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि एपिडेमिक (एक क्षेत्र में संक्रमण) कैसे फैला, इसकी जांच एम्स भोपाल और आईसीएमआर की टीम कर रही है।
सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने कहा- महामारी घोषित नहीं की गई है। सिर्फ डायरिया है, जिससे भागीरथपुरा को एपिडेमिक यानी संक्रमित माना है। प्रभावित क्षेत्र में 4 जनवरी को स्वास्थ्य विभाग ने 2354 घरों का सर्वे किया। 9416 लोगों की जांच की गई, जिनमें 20 नए मरीज मिले हैं। 429 पुराने मरीजों का फॉलोअप लिया गया।
शासन मंगलवार को हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में विस्तृत रिपोर्ट पेश करेगा।
धार से बेटे से मिलने आए थे रिटायर्ड पुलिसकर्मी
ओमप्रकाश शर्मा (69) मूलत: शिव विहार कॉलोनी धार के रहने वाले थे। वे रिटायर्ड पुलिसकर्मी थे। अपने बेटे से मिलने इंदौर आए थे। उन्हें 1 जनवरी को उल्टी-दस्त के कारण एक प्राइवेट हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था। जांच में उनकी किडनी का खराब होना पाया गया था।
हालत और बिगड़ने पर 2 जनवरी को आईसीयू में एडमिट किया गया। दो दिन बाद वेंटिलेटर पर लिया गया। रविवार दोपहर 1 बजे उनकी मौत हो गई। परिजन ने बताया कि वे सिर्फ ब्लड प्रेशर के मरीज थे। दूषित पानी से उनकी किडनी खराब हो गई थी। इसके बाद हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।
वहीं, बॉम्बे हॉस्पिटल में 11 मरीज आईसीयू में भर्ती थे, जिनमें से 4 मरीजों को वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। रविवार रात तक की स्थिति में 7 मरीजों का आईसीयू में इलाज चल रहा है। अब तक कुल 398 मरीज अस्पतालों में भर्ती किए गए, जिनमें से 256 को डिस्चार्ज किया जा चुका है। अलग-अलग अस्पतालों में 142 मरीजों का इलाज जारी है।
महामारी और संक्रमण में एरिया और मरीजों का अंतर…
बड़े क्षेत्र में बीमारी फैली, तो पैंडेमिक
एम्स भोपाल के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. केतन मेहरा ने बताया कि जब कोई बीमारी बहुत बड़े क्षेत्र में फैल जाए और कई देशों या पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले ले, तो पैंडेमिक कहा जाता है। इसमें बीमारी सिर्फ एक जगह तक सीमित नहीं रहती, बल्कि महाद्वीपों को पार कर जाती है। मरीजों की संख्या बहुत ज्यादा होती है और इसका असर स्वास्थ्य व्यवस्था, अर्थव्यवस्था और सामान्य जीवन पर पड़ता है। कोविड-19 इसका सबसे ताजा उदाहरण है।
एपिडेमिक यानी सीमित क्षेत्र में संक्रमण फैलना
जब कोई बीमारी किसी एक हिस्से में सामान्य से ज्यादा लोगों को प्रभावित करने लगे, तो उसे एपिडेमिक कहा जाता है। इसमें मरीजों की संख्या कम समय में बढ़ जाती है, लेकिन बीमारी का दायरा सीमित रहता है। उदाहरण के तौर पर किसी एक राज्य में डेंगू, मलेरिया या चिकनगुनिया का तेजी से फैलना एपिडेमिक माना जाता है। इसमें हालात गंभीर हो सकते हैं, लेकिन इसे स्थानीय स्तर पर नियंत्रित किया जा सकता है।
भागीरथपुरा में आउटब्रेक था, स्थिति नियंत्रण में
भोपाल के स्टेट सर्विलांस अधिकारी डॉ. अश्विन भागवत ने कहा- किसी क्षेत्र में बीमारी से मरीजों की संख्या सामान्य से ज्यादा बढ़ती है तो उसे आउटब्रेक कहा जाता है। भागीरथपुरा में आउटब्रेक था, लेकिन अब तेजी से मरीजों की संख्या घटी है। इसके साथ ही डिजिटल सर्वे भी किया जा रहा है। स्थिति पहले से काफी नियंत्रित है।
स्वास्थ्यकमियों के अवकाश निरस्त नहीं, यथावत रहेंगे
सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने पहले आदेश जारी किया था कि एकेडमिक को देखते हुए इस मामले में जुटे स्वास्थ्यकर्मियों के अवकाश निरस्त किए गए हैं। अब उन्होंने कहा है कि यह महामारी नहीं बल्कि आउटब्रेक है। अब संशोधित आदेश जारी किया गया है। इसमें छुट्टियां कैंसिल नहीं की गई हैं बल्कि जो अवकाश है, वह यथावत रहेंगे।
पाइपलाइन की मरम्मत का काम तेजी से जारी
भागीरथपुरा इलाके में पाइपलाइन की मरम्मत का कार्य तेजी से चल रहा है। बोरिंग में भी लीकेज की जांच की जा रही है। स्थानीय रहवासी ललित ने बताया कि फिलहाल पीने के पानी की आपूर्ति टैंकरों के माध्यम से की जा रही है। साफ पानी की मांग को देखते हुए अब गलियों में बिसलरी से भरी गाड़ियां भी घूमने लगी हैं।

भागीरथपुरा में पाइप लाइन की मरम्मत का काम चल रहा है।
कलेक्टर बोले- कोलकाता से आए वैज्ञानिक लेंगे सैंपल
इधर, इंदौर के स्मार्ट सिटी कार्यालय में रविवार को कलेक्टर शिवम वर्मा की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें कलेक्टर ने भागीरथपुरा क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि भागीरथपुरा क्षेत्र में कोलकाता, दिल्ली और भोपाल से आए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीमें कार्य कर रही हैं।
कोलकाता से आए वैज्ञानिक डॉ. प्रमित घोष और वैज्ञानिक डॉ. गौतम चौधरी सैंपल लेकर वैज्ञानिक तरीके से जांच करेंगे। इसके लिए टीम भागीरथपुरा क्षेत्र से पानी के रैंडम सैंपल एकत्रित करेगी।
महापौर बोले- पूरा प्रशासन लगातार प्रभावित क्षेत्र में
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा- फिलहाल सभी की प्राथमिकता एक ही है कि पूरी ताकत के साथ मिलकर लोगों की सेवा की जाए। पूरा प्रशासन लगातार प्रभावित क्षेत्र में मौजूद है और जैसे ही किसी मरीज की सूचना मिलती है, उसे तुरंत इलाज दिलाने और अस्पताल में भर्ती कराने की व्यवस्था की जा रही है।
महापौर ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी जल लाइनों का सर्वे कराने और जहां से भी शिकायतें मिलें, उन्हें 48 घंटे के भीतर दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन इन्हीं निर्देशों पर काम कर रहा है।
भागीरथपुरा में आज से घर-घर डिजिटल सर्वे शुरू किया गया है। ऐप पर जानकारी फीड की जा रही है कि घर में कौन सा पानी आ रहा है? RO का पानी है या बोरिंग का? नर्मदा का या टैंकर का? परिवार में से तो कोई प्रभावित नहीं हुआ है? यह सब जानकारी ऐप में फीड की जा रही है।

पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय, स्थानीय पार्षद कमल वाघेला के साथ भागीरथपुरा पहुंचे। पाइपलाइन का काम देखा। वे मृतक गीता बाई के घर भी गए।
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के जंगलों से मिलेगी राजस्थान को बिजली:90 लाख टन कोयले की कमी दूर होगी, ये जयपुर को डेढ़ साल रोशन करने जितना
जयपुर/सरगुजा, एजेंसी। राजस्थान में बिजली की बढ़ती मांग और कोयले की कमी के बीच राज्य सरकार को बड़ी राहत मिली है। राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RVUNL) को छत्तीसगढ़ (सरगुजा) के हसदेव-अरण्य क्षेत्र में स्थित केंते एक्सटेंशन ओपन कास्ट कोल ब्लॉक के लिए केंद्र सरकार से वन भूमि उपयोग की सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है।

इससे राजस्थान के छबड़ा (बारां) और सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट्स के लिए कोयले की आपूर्ति बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की वन सलाहकार समिति की सिफारिश के बाद यह मंजूरी दी गई है।
परियोजना के तहत करीब 1743 हेक्टेयर वन भूमि को खनन (माइनिंग) के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। आसान भाषा में समझें तो यह क्षेत्र 80 से 200 बड़े क्रिकेट स्टेडियमों के बराबर माना जा सकता है।
इस कोयला खदान से अगले 33 से 36 साल तक करीब 90 लाख टन कोयला निकाला जा सकेगा। इसे छह चरणों में विकसित किया जाएगा।
जयपुर की 14-17 महीने की बिजली जरूरत के बराबर है यह कोयला
केंते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक से निकलने वाला कोयला राजस्थान के अपने बिजली संयंत्रों (पावर प्लांट) में इस्तेमाल किया जाएगा। इससे छबड़ा और सूरतगढ़ जैसे बड़े थर्मल पावर प्लांटों को कोयले की बेहतर और नियमित आपूर्ति मिल सकेगी।
आसान भाषा में समझें तो यह मात्रा जयपुर शहर की करीब 14 से 17 महीने की औसत बिजली जरूरत के बराबर मानी जा सकती है। हालांकि, इस कोयले से बनने वाली बिजली सीधे सिर्फ जयपुर को नहीं मिलेगी। यह बिजली राजस्थान के पूरे पावर ग्रिड का हिस्सा होगी।
यदि कोयले की सप्लाई लगातार बनी रहती है, तो बिजलीघर पूरी क्षमता से काम कर सकेंगे और बिजली उत्पादन में स्थिरता आएगी। इसका फायदा आम उपभोक्ताओं को भी मिल सकता है।

छत्तीसगढ़ का हसदेव-अरण्य क्षेत्र, जहां कोल ब्लॉक के लिए मंजूरी मिली है।
हर साल 24.05 मिलियन टन कोयले की आवश्यकता
राजस्थान में बिजली उत्पादन का बड़ा हिस्सा कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट पर निर्भर है। खासतौर पर छबड़ा और सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट राज्य की बिजली व्यवस्था के महत्वपूर्ण केंद्र हैं।
इन बिजली संयंत्रों को पूरी क्षमता से चलाने के लिए हर साल करीब 24.05 मिलियन टन कोयले की आवश्यकता होती है। मौजूदा कोयला स्रोतों से इतनी आपूर्ति नहीं हो पा रही थी। इसके कारण हर साल करीब 90 लाख टन कोयले की कमी बनी हुई थी।
इसी कमी को पूरा करने और भविष्य में बिजली उत्पादन को सुरक्षित रखने के लिए राजस्थान को नए कोयला ब्लॉक की जरूरत पड़ी। केंते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक शुरू होने के बाद राज्य के बिजलीघरों को लंबे समय तक कोयले की नियमित आपूर्ति मिल सकेगी। इससे दूसरे राज्यों या खुले बाजार से महंगा कोयला खरीदने पर निर्भरता भी कम होगी और बिजली उत्पादन अधिक स्थिर हो सकेगा।
जंगल पर बड़ा असर पड़ेगा
केंते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक छत्तीसगढ़ के हसदेव-अरण्य क्षेत्र में स्थित है। यह क्षेत्र घने साल जंगलों और जैव विविधता के लिए जाना जाता है। परियोजना के लिए कुल 1742.60 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग खनन के लिए किया जाएगा। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार इस परियोजना से जंगल पर बड़ा असर पड़ेगा। हजारों पेड़ काटे जाएंगे।
हाथियों और वन्यजीवों के क्षेत्र में होगा खनन
हसदेव-अरण्य क्षेत्र केवल जंगल नहीं बल्कि वन्यजीवों का महत्वपूर्ण इलाका है। केंते एक्सटेंशन क्षेत्र के आसपास हाथी, तेंदुआ, स्लॉथ भालू, चीतल, लकड़बग्घा, सियार और पैंगोलिन जैसी प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। यह क्षेत्र लेमरू हाथी रिजर्व के करीब 3.625 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यही वजह है कि परियोजना में वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए विशेष योजना लागू करने की शर्त रखी गई है।
राजस्थान की बिजली कंपनी पर आएगा आर्थिक भार
केंते एक्सटेंशन परियोजना से केवल कोयला नहीं मिलेगा, बल्कि इसके साथ कई आर्थिक जिम्मेदारियां भी RVUNL पर आएंगी। वन भूमि डायवर्जन के बदले कंपनी को नियमों के अनुसार नेट प्रेजेंट वैल्यू (NPV) का भुगतान करना होगा। यह राशि वन क्षेत्र की श्रेणी और सरकार द्वारा निर्धारित दरों के अनुसार तय होगी। इसके अलावा वन भूमि के बदले 636.557 हेक्टेयर क्षेत्र में जितने जंगल का उपयोग बदलेगा, उसकी भरपाई के लिए नए वन विकसित करने की जिम्मेदारी भी राजस्थान की कंपनी की होगी।
वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए परियोजना में करीब 16.73 करोड़ रुपए का Wildlife Mitigation Plan लागू करना होगा। खनन से मिट्टी के कटाव और जल स्रोतों पर असर कम करने के लिए करीब 15.01 करोड़ रुपए के Soil and Moisture Conservation Plan का भी प्रावधान किया गया है।
मंजूरी मिली है, लेकिन कई शर्तों के साथ
केंते एक्सटेंशन को मिली मंजूरी अभी अंतिम खनन अनुमति नहीं है। यह स्टेज-1 सैद्धांतिक वन मंजूरी है, जिसमें कई शर्तें तय की गई हैं। खनन को दो चरणों में करने की योजना है। पहले चरण में करीब 1001.95 हेक्टेयर वन भूमि पर खनन किया जाएगा।
यह अवधि अधिकतम 15 साल तक होगी। इसके बाद दूसरे चरण में शेष 740.65 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन तभी आगे बढ़ेगा, जब पहले चरण में पर्यावरणीय शर्तों, जैव विविधता प्रबंधन की स्थिति संतोषजनक होगी। RVUNL को प्रतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) की जमीन से जुड़े रिकॉर्ड, वन विभाग की औपचारिकताएं और अन्य पर्यावरणीय शर्तें तय समय में पूरी करनी होंगी।
कोयला निकालना ही नहीं, राजस्थान तक पहुंचाना भी चुनौती
खदान शुरू होने के बाद सिर्फ कोयला निकालना ही पर्याप्त नहीं होगा। उसे राजस्थान के बिजली संयंत्रों तक पहुंचाने के लिए परिवहन व्यवस्था, वॉशरी, रेलवे कनेक्टिविटी और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा। इस पूरी प्रक्रिया में पर्यावरणीय मंजूरियां और अतिरिक्त खर्च भी जुड़े होंगे।
देश
सरकार का बड़ा फैसला: 16 कॉम्बिनेशन दवाओं पर लगा तुरंत बैन
नई दिल्ली, एजेंसी। देश में लोगों की सेहत की सेफ्टी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया गया है। सरकार ने पूरे भारत में 16 फिक्स्ड-डोज़ कॉम्बिनेशन (FDC) दवाओं के बनाने, बेचने, बांटने और सप्लाई करने पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है।
यह कड़ा फैसला केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा ‘ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940’ की धारा 26A के तहत एक नोटिफिकेशन जारी करके लिया गया है। एक्सपर्ट्स की जांच में सामने आया है कि इन दवाओं को मिलाकर बेचना वैज्ञानिक और मेडिकल तौर पर सही नहीं था। यह कदम एक वैज्ञानिक समीक्षा के बाद उठाया गया है।

क्यों लगाया गया इन दवाओं पर बैन?
क्या होती हैं FDC दवाएं? FDC (Fixed-Dose Combination) दवाएं वे होती हैं, जिनमें दो या दो से ज्यादा दवाओं के एक्टिव साल्ट (सामाग्री) को एक निश्चित मात्रा में मिलाकर एक ही दवा (जैसे एक टैबलेट या सिरप) के रूप में तैयार किया जाता है।
बैन की वजह: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ‘ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड’ ने एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई थी। जांच में पाया गया कि इन 16 कॉम्बिनेशन दवाओं को एक साथ मिलाकर देने का कोई मेडिकल आधार नहीं था। सरकार के मुताबिक, इन दवाओं के फायदे से ज्यादा इनके नुकसान या जोखिम होने की आशंका थी, इसलिए इन्हें ‘असुरक्षित और अतार्किक’ माना गया।
कौन-कौन सी दवाओं पर लगी है रोक?
बैन की गई दवाएं अलग-अलग बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होती थीं, जिनमें एंटीबायोटिक, दर्द निवारक, पेट दर्द और स्किनकेयर (त्वचा) की दवाएं शामिल हैं:
1. पेट दर्द, दर्द और ऐंठन की दवाएं:
एसिटाइल सैलिसिलिक एसिड + एथोहेप्टाज़ीन
डाइसाइक्लोमाइन + पैरासिटामोल + क्लिडिनियम ब्रोमाइड
डाइसाइक्लोमाइन + पैरासिटामोल + क्लिडिनियम ब्रोमाइड + क्लोरडायज़ेपॉक्साइड
पैरासिटामोल + लिग्नोकेन
2. डायबिटीज की दवा:
ग्लिक्लाज़ाइड + क्रोमियम पिकोलिनेट
3. एंटीबायोटिक दवाओं के कॉम्बिनेशन:
एमोक्सिसिलिन + सेराटियोपेप्टिडेज़
एमोक्सिसिलिन + सेराटियोपेप्टिडेज़ + लैक्टोबैसिलस स्पोरोजेन्स
एमोक्सिसिलिन + क्लोक्सासिलिन + लैक्टिक एसिड बैसिलस + सेराटियोपेप्टिडेज़
सेफैड्रोक्सिल + प्रोबेनेसिड
सेफुरोक्सिम + सेराटियोपेप्टिडेज़
4. स्किनकेयर और क्रीम :
ऐसी क्रीम या लोशन जिनमे एलोवेरा (Aloe extract) के साथ नीचे दिए गए तत्वों को मिलाया गया था, उन पर भी रोक लगा दी गई है जैसे कि… Vitamin E, Jojoba oil, Orange oil, Wheat germ oil, Tea tree oil, Allantoin, D-Panthenol का कॉम्बिनेशन।
देश
PM मोदी ने ओडिशा को दी बड़ी सौगात, ₹47,000 करोड़ के प्रोजेक्ट्स किए लॉन्च
मयूरभंज,एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को मयूरभंज में ‘विकास की धारा, पूरा ओडिशा’ (विकास रा धारा, ओडिशा सारा) नाम के एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित किया। यह कार्यक्रम ओडिशा में BJP सरकार के दो साल पूरे होने के मौके पर आयोजित किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के साथ शामिल हुए। इस मौके पर PM मोदी ने कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को उनके जन्मदिन पर बधाई देते हुए कहा, “ओडिशा की बेटी आज देश में इतने ऊंचे पद पर पहुंची हैं और हम सभी का मार्गदर्शन कर रही हैं। यह हम सभी के लिए बहुत गर्व की बात है। राष्ट्रपति का व्यक्तित्व, उनका उदार और दयालु स्वभाव, और देश व समाज की सेवा के प्रति उनका अटूट समर्पण – इन सबने न केवल मयूरभंज की, बल्कि पूरे ओडिशा राज्य की पहचान को मजबूत किया है।” PM ने आगे कहा, “आज एक बहुत शुभ क्षण है क्योंकि आज राष्ट्रपति जी का जन्मदिन है, और मुझे आज उनके गांव जाने और उन्हें शुभकामनाएं देने का मौका मिला। आज मैं राष्ट्रपति जी के साथ पहाड़पुर भी गया था।”प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि पहाड़पुर गांव का तेजी से विकास करके उसे “सोलर विलेज” बनाया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इलाके के हर घर में सौर ऊर्जा की सुविधा हो। इस पहल की तुलना कोणार्क सूर्य मंदिर की विरासत से करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि पहाड़पुर नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) के केंद्र के रूप में वैश्विक मानचित्र पर अपनी एक अलग पहचान बनाने जा रहा है।
PM मोदी ने कहा, “अब पहाड़पुर को तेजी से सोलर विलेज के तौर पर विकसित किया जाएगा। इसका मतलब है कि यहां हर घर तक सौर ऊर्जा पहुंचाई जाएगी। जिस तरह ओडिशा के कोणार्क सूर्य मंदिर की एक खास पहचान है, उसी तरह पहाड़पुर भी सोलर विलेज के तौर पर अपनी पहचान बनाएगा।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार ओडिशा के प्राकृतिक संसाधनों को आर्थिक “संभावनाओं” में बदलने पर ध्यान केंद्रित कर रही है और राज्य में बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास हो रहा है।
प्रधानमंत्री ने ‘उत्कर्ष ओडिशा’ अभियान जैसी पहलों की सफलता का भी जिक्र किया, जिसने राज्य में वैश्विक और घरेलू निवेशकों को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभाई है। पीएम मोदी ने कहा, “हमारी सरकार ओडिशा के संसाधनों को ओडिशा की संभावनाओं में बदल रही है। ओडिशा में बड़े निवेश आ रहे हैं, यहाँ नए उद्योग लगाए जा रहे हैं और इस मकसद से ‘उत्कर्ष ओडिशा’ जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं।”पीएम मोदी ने आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को भी दोहराया और कहा कि आदिवासी युवाओं को शिक्षा और रोज़गार के बेहतर मौकों से जोड़ा जा रहा है।
पीएम मोदी ने कहा, “आदिवासी समाज को आगे बढ़ाने के लिए हम आदिवासी युवाओं को शिक्षा और रोज़गार के मौकों से जोड़ रहे हैं। इन बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर सुविधाएँ मिलनी चाहिए… इसके लिए देश भर में लगभग 500 एकलव्य मॉडल स्कूल खोले गए हैं।”
इस इलाके के साथ अपने जुड़ाव का ज़िक्र करते हुए, पीएम मोदी ने लोगों की भारी मौजूदगी के लिए आभार जताया और कहा कि मयूरभंज के लोगों का प्यार उन्हें बार-बार यहाँ खींच लाता है।
पीएम मोदी ने कहा, “ओडिशा में बीजेपी सरकार के अब 2 साल पूरे हो गए हैं। इस मौके पर आप सभी के बीच आना, मयूरभंज आने का यह सौभाग्य और इतनी बड़ी संख्या में आपकी मौजूदगी—यह मौका मेरे लिए बहुत खास है। आपका प्यार मुझे बार-बार यहाँ खींच लाता है।” इस समय के सांस्कृतिक महत्व पर ज़ोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि ओडिशा अभी त्योहारों के माहौल में है और यहाँ बड़े पारंपरिक उत्सव चल रहे हैं। पीएम ने आगे कहा, “हमारा ओडिशा अभी त्योहारों की खुशी में डूबा हुआ है। पिछले हफ़्ते ही यहाँ ‘गण परदा’ त्योहार बहुत धूमधाम से मनाया गया। भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा की तैयारियाँ भी ज़ोरों पर हैं। मयूरभंज में बारीपदा रथ यात्रा को लेकर भी उत्साह का माहौल है। और इन सबके बीच, लोकतंत्र और विकास का उत्सव भी चल रहा है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओडिशा में लगभग 47,000 करोड़ रुपये की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया, जिनका मकसद राज्य के बुनियादी ढाँचे और सार्वजनिक सेवाओं को बदलना है। इससे पहले दिन में, एक अहम सांस्कृतिक पहल के तहत, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मयूरभंज ज़िले के पहाड़पुर गाँव का दौरा किया। दोनों नेताओं ने ‘संताली जाहिरा’ और ‘हो जाहिरा’ के पवित्र स्थलों पर पारंपरिक पूजा-अर्चना और अनुष्ठान किए और देश की समृद्धि के लिए आशीर्वाद माँगा।
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