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जहरीला पानी…इंदौर में 17वीं मौत, 20 नए मरीज मिले

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एपिडेमिक कैसे फैला, एम्स-आईसीएमआर की टीम जांच कर रही, महामारी पर सरकार की हां-ना

इंदौर,एजेंसी। इंदौर के भागीरथपुरा में 17वीं मौत हुई है। दूषित पानी पीने से मरने वालों की संख्या रविवार तक 16 थी। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने भागीरथपुरा में महामारी फैलना स्वीकार किया है। वहीं, कलेक्टर शिवम वर्मा ने सोमवार को समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि एपिडेमिक (एक क्षेत्र में संक्रमण) कैसे फैला, इसकी जांच एम्स भोपाल और आईसीएमआर की टीम कर रही है।

सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने कहा- महामारी घोषित नहीं की गई है। सिर्फ डायरिया है, जिससे भागीरथपुरा को एपिडेमिक यानी संक्रमित माना है। प्रभावित क्षेत्र में 4 जनवरी को स्वास्थ्य विभाग ने 2354 घरों का सर्वे किया। 9416 लोगों की जांच की गई, जिनमें 20 नए मरीज मिले हैं। 429 पुराने मरीजों का फॉलोअप लिया गया।

शासन मंगलवार को हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में विस्तृत रिपोर्ट पेश करेगा।

धार से बेटे से मिलने आए थे रिटायर्ड पुलिसकर्मी

ओमप्रकाश शर्मा (69) मूलत: शिव विहार कॉलोनी धार के रहने वाले थे। वे रिटायर्ड पुलिसकर्मी थे। अपने बेटे से मिलने इंदौर आए थे। उन्हें 1 जनवरी को उल्टी-दस्त के कारण एक प्राइवेट हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था। जांच में उनकी किडनी का खराब होना पाया गया था।

हालत और बिगड़ने पर 2 जनवरी को आईसीयू में एडमिट किया गया। दो दिन बाद वेंटिलेटर पर लिया गया। रविवार दोपहर 1 बजे उनकी मौत हो गई। परिजन ने बताया कि वे सिर्फ ब्लड प्रेशर के मरीज थे। दूषित पानी से उनकी किडनी खराब हो गई थी। इसके बाद हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।

वहीं, बॉम्बे हॉस्पिटल में 11 मरीज आईसीयू में भर्ती थे, जिनमें से 4 मरीजों को वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। रविवार रात तक की स्थिति में 7 मरीजों का आईसीयू में इलाज चल रहा है। अब तक कुल 398 मरीज अस्पतालों में भर्ती किए गए, जिनमें से 256 को डिस्चार्ज किया जा चुका है। अलग-अलग अस्पतालों में 142 मरीजों का इलाज जारी है।

महामारी और संक्रमण में एरिया और मरीजों का अंतर…

बड़े क्षेत्र में बीमारी फैली, तो पैंडेमिक

एम्स भोपाल के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. केतन मेहरा ने बताया कि जब कोई बीमारी बहुत बड़े क्षेत्र में फैल जाए और कई देशों या पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले ले, तो पैंडेमिक कहा जाता है। इसमें बीमारी सिर्फ एक जगह तक सीमित नहीं रहती, बल्कि महाद्वीपों को पार कर जाती है। मरीजों की संख्या बहुत ज्यादा होती है और इसका असर स्वास्थ्य व्यवस्था, अर्थव्यवस्था और सामान्य जीवन पर पड़ता है। कोविड-19 इसका सबसे ताजा उदाहरण है।

एपिडेमिक यानी सीमित क्षेत्र में संक्रमण फैलना

जब कोई बीमारी किसी एक हिस्से में सामान्य से ज्यादा लोगों को प्रभावित करने लगे, तो उसे एपिडेमिक कहा जाता है। इसमें मरीजों की संख्या कम समय में बढ़ जाती है, लेकिन बीमारी का दायरा सीमित रहता है। उदाहरण के तौर पर किसी एक राज्य में डेंगू, मलेरिया या चिकनगुनिया का तेजी से फैलना एपिडेमिक माना जाता है। इसमें हालात गंभीर हो सकते हैं, लेकिन इसे स्थानीय स्तर पर नियंत्रित किया जा सकता है।

भागीरथपुरा में आउटब्रेक था, स्थिति नियंत्रण में

भोपाल के स्टेट सर्विलांस अधिकारी डॉ. अश्विन भागवत ने कहा- किसी क्षेत्र में बीमारी से मरीजों की संख्या सामान्य से ज्यादा बढ़ती है तो उसे आउटब्रेक कहा जाता है। भागीरथपुरा में आउटब्रेक था, लेकिन अब तेजी से मरीजों की संख्या घटी है। इसके साथ ही डिजिटल सर्वे भी किया जा रहा है। स्थिति पहले से काफी नियंत्रित है।

स्वास्थ्यकमियों के अवकाश निरस्त नहीं, यथावत रहेंगे

सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने पहले आदेश जारी किया था कि एकेडमिक को देखते हुए इस मामले में जुटे स्वास्थ्यकर्मियों के अवकाश निरस्त किए गए हैं। अब उन्होंने कहा है कि यह महामारी नहीं बल्कि आउटब्रेक है। अब संशोधित आदेश जारी किया गया है। इसमें छुट्टियां कैंसिल नहीं की गई हैं बल्कि जो अवकाश है, वह यथावत रहेंगे।

पाइपलाइन की मरम्मत का काम तेजी से जारी

भागीरथपुरा इलाके में पाइपलाइन की मरम्मत का कार्य तेजी से चल रहा है। बोरिंग में भी लीकेज की जांच की जा रही है। स्थानीय रहवासी ललित ने बताया कि फिलहाल पीने के पानी की आपूर्ति टैंकरों के माध्यम से की जा रही है। साफ पानी की मांग को देखते हुए अब गलियों में बिसलरी से भरी गाड़ियां भी घूमने लगी हैं।

भागीरथपुरा में पाइप लाइन की मरम्मत का काम चल रहा है।

भागीरथपुरा में पाइप लाइन की मरम्मत का काम चल रहा है।

कलेक्टर बोले- कोलकाता से आए वैज्ञानिक लेंगे सैंपल

इधर, इंदौर के स्मार्ट सिटी कार्यालय में रविवार को कलेक्टर शिवम वर्मा की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें कलेक्टर ने भागीरथपुरा क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि भागीरथपुरा क्षेत्र में कोलकाता, दिल्ली और भोपाल से आए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीमें कार्य कर रही हैं।

कोलकाता से आए वैज्ञानिक डॉ. प्रमित घोष और वैज्ञानिक डॉ. गौतम चौधरी सैंपल लेकर वैज्ञानिक तरीके से जांच करेंगे। इसके लिए टीम भागीरथपुरा क्षेत्र से पानी के रैंडम सैंपल एकत्रित करेगी।

महापौर बोले- पूरा प्रशासन लगातार प्रभावित क्षेत्र में

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा- फिलहाल सभी की प्राथमिकता एक ही है कि पूरी ताकत के साथ मिलकर लोगों की सेवा की जाए। पूरा प्रशासन लगातार प्रभावित क्षेत्र में मौजूद है और जैसे ही किसी मरीज की सूचना मिलती है, उसे तुरंत इलाज दिलाने और अस्पताल में भर्ती कराने की व्यवस्था की जा रही है।

महापौर ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी जल लाइनों का सर्वे कराने और जहां से भी शिकायतें मिलें, उन्हें 48 घंटे के भीतर दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन इन्हीं निर्देशों पर काम कर रहा है।

भागीरथपुरा में आज से घर-घर डिजिटल सर्वे शुरू किया गया है। ऐप पर जानकारी फीड की जा रही है कि घर में कौन सा पानी आ रहा है? RO का पानी है या बोरिंग का? नर्मदा का या टैंकर का? परिवार में से तो कोई प्रभावित नहीं हुआ है? यह सब जानकारी ऐप में फीड की जा रही है।

पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय, स्थानीय पार्षद कमल वाघेला के साथ भागीरथपुरा पहुंचे। पाइपलाइन का काम देखा। वे मृतक गीता बाई के घर भी गए।

पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय, स्थानीय पार्षद कमल वाघेला के साथ भागीरथपुरा पहुंचे। पाइपलाइन का काम देखा। वे मृतक गीता बाई के घर भी गए।

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बुनियादी उद्योगों का उत्पादन मार्च में 0.4% घटा, पांच माह की पहली गिरावट

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नई दिल्ली,एजेंसी। कोयला, कच्चे तेल, उर्वरक और बिजली के उत्पादन में गिरावट के कारण मार्च में आठ बुनियादी उद्योगों के उत्पादन में 0.4 प्रतिशत की गिरावट आई है। पांच माह में बुनियादी उद्योगों का उत्पादन पहली बार घटा है। फरवरी, 2026 में, आठ प्रमुख बुनियादी उद्योगों का उत्पादन 2.8 प्रतिशत बढ़ा था। 

वित्त वर्ष 2025-26 में बुनियादी उद्योगों की उत्पादन वृद्धि दर घटकर 2.6 प्रतिशत रह गई। वित्त वर्ष 2024-25 में बुनियादी उद्योगों का उत्पादन 4.5 प्रतिशत बढ़ा था।  

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बिंदी-तिलक विवाद में Lenskart को झटका, डूबे 4500 करोड़!

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मुंबई, एजेंसी। देश की बड़ी आईवियर ​कंपनी में से एक Lenskart को बिंदी, तिलक से जुड़ा विवाद काफी महंगा पड़ गया। सोमवार को कंपनी के शेयर में बड़ी गिरावट आई है, जिससे इसकी मार्केट वैल्यूएशन में करीब 4,500 करोड़ रुपए की कमी आ गई।

विवाद की वजह कंपनी की एक पुरानी इंटरनल ग्रूमिंग पॉलिसी बनी, जो हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुई। इस पॉलिसी में कथित तौर पर कर्मचारियों को बिंदी, तिलक जैसे कुछ धार्मिक प्रतीकों को पहनने से रोकने की बात कही गई थी। इसके बाद ऑनलाइन विरोध तेज हो गया और कंपनी के बहिष्कार की मांग भी उठने लगी।

शेयर में गिरावट

BSE पर कारोबार के दौरान कंपनी का शेयर करीब 5% तक गिरकर 508.70 रुपए के स्तर तक पहुंच गया। हालांकि बाद में इसमें कुछ रिकवरी आई और यह 533.70 रुपए के आसपास बंद हुआ।

गिरावट के दौरान कंपनी की वैल्यूएशन घटकर लगभग 88,331 करोड़ रुपए रह गई, जो पहले करीब 92,872 करोड़ रुपए थी यानी एक ही सत्र में करीब 4,540 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। बाद में आंशिक सुधार के साथ वैल्यूएशन में कुछ बढ़त भी दर्ज की गई।

कंपनि ने दी थी सफाई

इस विवाद पर कंपनी के फाउंडर Peyush Bansal ने सफाई देते हुए कहा कि वायरल डॉक्यूमेंट पुराना है और मौजूदा पॉलिसी को नहीं दर्शाता। उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपनी में किसी भी धार्मिक पहनावे या प्रतीकों पर कोई प्रतिबंध नहीं है और इस गलतफहमी के लिए माफी भी मांगी।

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बंगाल की पहचान बचाने की लड़ाई है यह विधानसभा चुनाव, PM मोदी का बड़ा दावा

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झाड़ग्राम, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को राज्य की पहचान बचाने की लड़ाई बताते हुए राज्य की ममता बनर्जी सरकार पर मूल निवासियों के बजाय ‘घुसपैठियों’ के पक्ष में राजनीति करने का आरोप रविवार को लगाया। मोदी ने आदिवासी बहुल झाड़ग्राम जिले में एक रैली को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ”घुसपैठियों के लिए घुसपैठियों की सरकार’ बनाना चाहती है और मतदाताओं से इसे सत्ता से हटाने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, ”यह चुनाव इस भूमि की समृद्ध विरासत को बचाने के लिए है। यह बंगाल की पहचान को बचाने के लिए है। आज बंगाल को अपनी पहचान खोने का डर है।” उन्होंने आरोप लगाया, “तृणमूल जिस रास्ते पर चल रही है वह बहुत खतरनाक है। तृणमूल कांग्रेस ‘घुसपैठियों के लिए घुसपैठियों की और सरकार बनाना चाहती है। एक ऐसी सरकार जो बंगाल की जनता के धर्म, भाषा और रीति-रिवाजों की रक्षा करने के बजाय केवल घुसपैठियों के धर्म, भाषा और रीति-रिवाजों की रक्षा करेगी।”

मोदी ने दावा किया कि ऐसी सरकार के लिए सबसे बड़ी बाधा पश्चिम बंगाल के आम लोग होंगे। उन्होंने कहा, ”तृणमूल कांग्रेस की घुसपैठियों वाली सरकार के लिए, अगर कोई शत्रु है, तो वे यहीं बैठे भाई-बहन होंगे, जो घुसपैठियों के शत्रु होंगे।” प्रधानमंत्री ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ असंतोष राज्य के सभी समुदायों और क्षेत्रों में फैल गया है। उन्होंने कहा, “इसलिए, बंगाल के हर समुदाय, हर वर्ग, हर क्षेत्र ने इस बार ठान लिया है और तृणमूल कांग्रेस सरकार को सत्ता से हटाने का संकल्प लिया है।”

मोदी ने तृणमूल कांग्रेस पर जनता की समस्याओं को नजरअंदाज करने और भ्रष्टाचार व जबरन वसूली की व्यवस्था चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया, “अगर किसी को घर बनाना है, तो उसे तृणमूल कांग्रेस के सिंडिकेट पर निर्भर रहना पड़ता है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद और विधायक आपकी समस्याओं की परवाह नहीं करते। वे अपनी जेबें भरने में व्यस्त हैं।”

प्रधानमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस नेता राज्य के कई हिस्सों में आदिवासियों की जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया, “आदिवासियों की हजारों एकड़ जमीन पर तृणमूल कांग्रेस के गुंडों ने कब्जा कर लिया है।” पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान होगा। झाड़ग्राम में 23 अप्रैल को मतदान होगा।

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