कोरबा
आगामी जनगणना 2027 हेतु कोरबा में GOOGLE EARTH PRO आधारित भू-संदर्भण प्रशिक्षण आयोजित
कोरबा। आगामी जनगणना 2027 की तैयारी को तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाने तथा ग्रामों की भौगोलिक सीमा और स्थिति के सटीक भू-संदर्भण ( Geo-Referencing ) के लिए आज कलेक्टर सभा कक्ष, कोरबा में जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का आयोजन दोपहर 01ः00 बजे किया गया, जिसमें जनगणना कार्य निदेशालय, छत्तीसगढ़ द्वारा जिला कोरबा के लिए नियुक्त नोडल अधिकारी बैद्यनाथ कुमार ने GOOGLE EARTH PRO के उपयोग संबंधी विस्तृत तकनीकी जानकारी प्रदान की।

नोडल अधिकारी ने बताया कि आगामी जनगणना 2027 पूर्णतः डिजिटल मोड में संचालित की जाएगी। इसके प्रथम चरण का कार्य अप्रैल 2026 से सितंबर 2026 तक तथा द्वितीय चरण का कार्य फरवरी 2027 में संपादित किया जाएगा। डिजिटल जनगणना के लिए ग्रामों का सटीक भू-मानचित्रण अत्यंत आवश्यक है, जिसके लिए GOOGLE EARTH PRO का प्रयोग महत्वपूर्ण है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला जनगणना अधिकारी एवं अपर कलेक्टर ओंकार यादव, डिप्टी कलेक्टर एवं जनगणना नोडल अधिकारी तुलाराम भारद्वाज, सहायक नोडल अधिकारी एम. एस. कंवर, सीएमओ, तहसीलदार, जोन अधिकारी तथा तकनीकी प्रतिनिधि उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को प्रायोगिक अभ्यास सहित सभी आवश्यक तकनीकी जानकारी प्रदान की गई, जिससे आगामी जनगणना कार्य को अधिक प्रभावी, सटीक और गुणवत्तापूर्ण बनाया जा सके।
कोरबा
बिहान ने बदली तकदीर – संघर्ष से सफलता तक सावित्री बिस्वास की प्रेरक उड़ान
कोरबा। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित बिहान योजना ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसका परिणाम है कि अनेक महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार और समाज में नई पहचान स्थापित कर रही हैं।

विकासखंड कोरबा के ग्राम पंचायत गुरमा की निवासी श्रीमती सावित्री बिस्वास ऐसी ही प्रेरणादायक महिलाओं में शामिल हैं, जिन्होंने संघर्षपूर्ण परिस्थितियों से निकलकर आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल कायम की है। सीमित आय और आजीविका के सीमित साधनों के बीच जीवनयापन कर रहीं सावित्री बिस्वास ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपने जीवन की दिशा बदल दी। बिहान योजना के माध्यम से उन्हें वित्तीय साक्षरता, उद्यम विकास, समूह प्रबंधन और आजीविका संवर्धन संबंधी प्रशिक्षण प्राप्त हुआ, जिससे उनमें आत्मविश्वास और व्यवसायिक समझ विकसित हुई।
जिला प्रशासन और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से उनके समूह को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया। रिवॉल्विंग फंड, सामुदायिक निवेश निधि और बैंक ऋण जैसी सुविधाओं का लाभ उठाते हुए उन्होंने लगभग 60 हजार रुपये की पूंजी से किराना और फैंसी स्टोर की शुरुआत की। व्यवसाय में सफलता मिलने पर उन्होंने एक लाख रुपये के निवेश से चप्पल दुकान शुरू की। बाद में सीएलएफ से दो लाख रुपये का ऋण लेकर कृषि सेवा केंद्र स्थापित किया तथा बैंक और सीएलएफ से लगभग छह लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर मेडिकल स्टोर एवं कृषि सेवा केंद्र का विस्तार किया।
आज सावित्री बिस्वास फैंसी स्टोर, कपड़ा दुकान, चप्पल दुकान, राशन दुकान, बर्तन दुकान, मेडिकल स्टोर और कृषि सेवा केंद्र सहित विभिन्न व्यवसायों का सफल संचालन कर रही हैं। उनके परिश्रम, दूरदर्शिता और वित्तीय प्रबंधन का परिणाम है कि उनकी वार्षिक आय लगभग 7 लाख 70 हजार रुपये तक पहुंच गई है। आर्थिक प्रगति का असर उनके परिवार के जीवन स्तर पर भी स्पष्ट दिखाई देता है। उनका एक पुत्र बी. फार्मेसी की पढ़ाई कर रहा है, पुत्री बीएससी नर्सिंग की शिक्षा प्राप्त कर रही है, जबकि छोटा पुत्र चॉइस सेंटर का संचालन कर आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रहा है।
सावित्री बिस्वास की सफलता अब केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है। वे गांव की अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूहों से जुड़ने, नियमित बचत करने और स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनकी प्रेरणा से अनेक महिलाएं किराना, कपड़ा, चप्पल व्यवसाय और होटल संचालन जैसे कार्यों से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत बना रही हैं।
सावित्री बिस्वास का मानना है कि यदि महिलाओं को अवसर, प्रशिक्षण और उचित मार्गदर्शन मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं। वे अपनी इस उपलब्धि का श्रेय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, राज्य सरकार तथा जिला प्रशासन कोरबा को देती हैं, जिनके सहयोग से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला। उनकी कहानी यह साबित करती है कि संकल्प, मेहनत और सही मार्गदर्शन के बल पर ग्रामीण महिलाएं न केवल अपने जीवन को बदल सकती हैं, बल्कि पूरे समाज में परिवर्तन की नई मिसाल भी स्थापित कर सकती हैं।
कोरबा
खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में कोरबा ने रचा नया कीर्तिमान, लगातार तीसरी बार राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त
कोरबा। खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा निर्धारित विभिन्न मानकों और दिशा-निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन करते हुए कोरबा जिले ने एक बार फिर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। जिले ने खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए लगातार तीसरी बार छत्तीसगढ़ राज्य के फूड सेफ्टी इंडेक्स में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि कोरबा ने रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव सहित प्रदेश के अन्य प्रमुख जिलों को पीछे छोड़ते हुए यह स्थान बरकरार रखा है। इतना ही नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर भी जिले ने अपनी रैंकिंग में सुधार करते हुए पिछले वर्ष के 118वें स्थान से आगे बढ़कर 112वें स्थान पर अपनी पहचान स्थापित की है।
जिले की इस सफलता के पीछे खाद्य प्रतिष्ठानों के नियमित निरीक्षण, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की सतत निगरानी, जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन, लाइसेंस एवं पंजीयन की प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाने तथा खाद्य सुरक्षा मानकों के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे अनेक महत्वपूर्ण प्रयास शामिल हैं। निर्धारित सभी मापदंडों का गंभीरता से अनुपालन सुनिश्चित करने के परिणामस्वरूप कोरबा ने यह गौरवपूर्ण उपलब्धि अर्जित की है।
इस उल्लेखनीय सफलता में कलेक्टर मार्गदर्षन में खाद्य सुरक्षा अधिकारी विकास भगत एवं संघर्ष कुमार मिश्रा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। दोनों अधिकारियों द्वारा खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में किए गए सतत प्रयासों, प्रभावी निरीक्षणों एवं जनजागरूकता गतिविधियों की व्यापक स्तर पर सराहना की जा रही है। उनके नेतृत्व और समर्पण ने जिले को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
जिले की इस उपलब्धि से न केवल खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिली है, बल्कि आम नागरिकों में सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थों के प्रति विश्वास भी बढ़ा है। कोरबा की यह सफलता अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा का विषय बनी हुई है।
कोरबा
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना बनी सहारा, श्रवण दास मानिकपुरी को मिली नई ऊर्जा
कोरबा/पाली। पाली विकासखंड के ग्राम पुलालीकला के किसान श्रवण दास मानिकपुरी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से लाभान्वित होकर बेहद प्रसन्न हैं। योजना की 23वीं किस्त की राशि उनके बैंक खाते में सफलतापूर्वक प्राप्त हुई है, जिससे उन्हें खेती-किसानी के कार्यों में आर्थिक सहयोग मिला है।

श्री मानिकपुरी बताते हैं कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण और लाभकारी योजना है। इस योजना के माध्यम से समय-समय पर मिलने वाली सहायता राशि से बीज, खाद तथा अन्य कृषि आवश्यकताओं की पूर्ति करने में सुविधा होती है। इससे खेती की लागत का कुछ भार कम होता है और किसानों को आत्मविश्वास के साथ खेती करने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा, मैं स्वयं को उन भाग्यशाली किसानों में शामिल मानता हूँ जिनके खाते में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की राशि नियमित रूप से प्राप्त होती है। यह सहायता हमारे लिए बहुत उपयोगी साबित हो रही है।
श्रवण दास मानिकपुरी ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लिए भारत सरकार एवं कृषि विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने और कृषि कार्यों को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना का लाभ सीधे किसानों के खाते में पहुंचने से पारदर्शिता भी सुनिश्चित हुई है और किसानों का विश्वास बढ़ा है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से लाभान्वित किसान आज अधिक आत्मनिर्भरता के साथ खेती कर रहे हैं तथा कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
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