छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के 18 जिलों में शीतलहर का अलर्ट
हिमालय की हवाएं बढ़ा रही कंपकंपी, अंबिकापुर में 3.5°C पारा, अगले 2 दिन और गिरेगा तापमान
रायपुर,एजेंसी। हिमालय से आ रहीं ठंडी हवाओं से छत्तीसगढ़ में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। कई शहरों में तापमान सामान्य से कम चला गया है। सरगुजा संभाग में ठंड का असर ज्यादा है। बलरामपुर के रामानुजगंज में पैरावट पर ओस की बूंदें जमकर बर्फ बनने लगी है। यहां रात का तापमान 1 से 2 डिग्री के आसपास बना हुआ है।
मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले 2 दिनों में प्रदेश के उत्तरी और मध्य हिस्से में ठंड और बढ़ेगी। विभाग ने 18 जिलों में कोल्ड वेव का अलर्ट जारी किया है। बता दें कि पिछले 28 दिनों में राज्य में ठंड से 3 मौत हो चुकी है।
वहीं पिछले 24 घंटे की बात करें तो प्रदेश में सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान 28.4°C दुर्ग में दर्ज किया गया। सबसे कम न्यूनतम तापमान 3.5°C अंबिकापुर में रिकॉर्ड किया गया।
सिनोप्टिक सिस्टम के चलते बढ़ेगी ठंड
पश्चिमी विक्षोभ हिमालय और उत्तर भारत से ठंडी हवाओं को नीचे की ओर धकेलता है। वहीं तेज जेट स्ट्रीम इन हवाओं को तेजी से मध्य भारत की तरफ आगे बढ़ा देती है, नतीजा यह होता है कि उत्तर भारत की ठंड छत्तीसगढ़ तक पहुंचने लगती है।
इसी वजह से रात का तापमान तेजी से गिरता है। सुबह-शाम ठंड ज्यादा महसूस होती है, कुछ इलाकों में शीतलहर की स्थिति बन जाती है। उदाहरण के साथ समझाया जाए तो मान लीजिए जैसे फ्रिज का दरवाजा खुला रह जाए और पंखा चलने लगे तो ठंडी हवा दूर तक फैल जाती है।
यहां पश्चिमी विक्षोभ फ्रिज है और जेट स्ट्रीम पंखा, जो ठंडी हवा को छत्तीसगढ़ तक पहुंचा रहा है।
यात्री प्रतीक्षालय में ठंड से मौत
7 जनवरी को कोरबा के सरई सिंगार निवासी हरप्रसाद भैना (55) की मौत ठंड लगने से हो गई। उनकी लाश कसईपाली के यात्री प्रतीक्षालय में मिली। हरप्रसाद मंगलवार को रलिया गांव में छठी कार्यक्रम में शामिल होने के बाद पैदल घर लौट रहे थे।
रात की ठंड में थकान के कारण वे प्रतीक्षालय में सो गए थे। बुधवार सुबह लोगों ने उनकी लाश देखी। शव की स्थिति और मौके की परिस्थिति देखकर उनकी ठंड से मौत होने की आशंका जताई जा रही है।

कोरबा के सरईसिंगार निवासी हरप्रसाद भैना (55) की ठंड से जान चली गई। यात्री प्रतिक्षालय में उनकी लाश मिली है।

सरगुजा में सुबह घना कोहरा छाया रहा। दिन में लाइट जलाकर वाहन चलाने पड़े।

सरगुजा में सुबह और शाम के वक्त अलाव का सहारा लेना पड़ रहा है।

मैनपाट में पौधों में ओस की बूंदें जमकर बर्फ बन गई थी।

सरगुजा संभाग में भी खुले मैदान में घास पर लगी ओस की बूंदें जमकर बर्फ बन गईं।

मैनपाट में सुबह ओस की बूंदें जमकर बर्फ बन गई।

सरगुजा के पाट से लेकर मैदानी इलाकों में भी जमकर पाले पड़े।

पेंड्रा के कई इलाकों में कोहरा छाए रहने से विजिबिलिटी भी कम हो गई है।
4 जिलों में प्राइमरी स्कूल बंद
सरगुजा संभाग में कड़ाके की ठंड को देखते हुए चार जिलों में प्राइमरी स्कूल 10 जनवरी तक बंद कर दिए गए हैं। सरगुजा और बलरामपुर जिलों के बाद मंगलवार देर शाम कोरिया और सूरजपुर जिलों में भी प्राइमरी स्कूलों को 10 जनवरी तक बंद करने का आदेश जारी हो गया है। वहीं गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में भी प्राइमरी स्कूल 10 जनवरी तक बंद रहेंगे। हालांकि मिडिल, हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों का संचालन जारी रहेगा।
ठंड के कारण दो पालियों में संचालित होने वाली कक्षाओं का समय बदल दिया गया है। अब दो पालियों में चलने वाले स्कूल सुबह 8.30 बजे के बजाय 9.30 बजे से 12.30 बजे तक संचालित होंगे। वहीं दूसरी पाली की कक्षाएं दोपहर 12.30 बजे से शाम 4.00 बजे तक लगेंगी। यह आदेश सभी शासकीय, अर्धशासकीय और अनुदान प्राप्त स्कूलों पर लागू होगा।
अंबिकापुर में ठंड से दूसरी मौत
अंबिकापुर से लगे श्रीगढ़ में नए साल की रात एक बुजुर्ग की ठंड से मौत हो गई थी। उनका शव पैरावट में अकड़ा हुआ मिला। कम कपड़ों में खुले में सो जाने के कारण वह हाइपोथर्मिया की चपेट में आ गए।
अंबिकापुर में यह ठंड से मौत का दूसरा मामला है। इससे पहले, 11 दिसंबर की रात अंबिकापुर बस स्टैंड में खुले में सोए एक व्यक्ति की भी ठंड से मौत हो गई थी।
बच्चों पर पड़ रहा ठंड का असर
कड़ाके की ठंड का असर बच्चों की सेहत पर भी पड़ रहा है। बीते एक महीने में रायपुर के अंबेडकर समेत निजी अस्पतालों में हाइपोथर्मिया के 400 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में जल्दी ठंडा होता है।
नवजातों की मांसपेशियां कम विकसित होती हैं, जिससे वे ठंड सहन नहीं कर पाते। वहीं, सीजेरियन डिलीवरी से जन्मे शिशुओं में हाइपोथर्मिया का खतरा और बढ़ जाता है।
कोरबा
दीपका में 30 अप्रैल को 20वीं राष्ट्रीय संगोष्ठी
देशभर के विद्वानों का होगा संगम-डॉ गजेंद्र
कोरबा। शासकीय महाविद्यालय दीपका, जिला कोरबा (छत्तीसगढ़) एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर के बौद्धिक आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है। महाविद्यालय एवं अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद बिलासपुर के संयुक्त तत्वावधान में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा की कसौटी पर विकलांग-विमर्श का पुनर्मूल्यांकनÓ विषय पर 20वीं एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 30 अप्रैल 2026, गुरुवार को किया जाएगा।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रात: 9:30 बजे महाविद्यालय परिसर में होगा। इस संगोष्ठी में देशभर से विद्वान, शिक्षाविद, शोधार्थी एवं विषय विशेषज्ञ सहभागी बनेंगे, जिससे विचारों का एक व्यापक और सार्थक आदान-प्रदान संभव होगा।

इस गरिमामयी आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्य एवं उद्योग, श्रम, आबकारी एवं सार्वजनिक उपक्रम विभाग के मंत्री लखनलाल देवांगन उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व अध्यक्ष (राज्यमंत्री दर्जा) छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग एवं कुलपति, थावे विद्यापीठ, गोपालगंज (बिहार) डॉ. विनय कुमार पाठक करेंगे।
संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व न्यायाधीश उच्च न्यायालय न्यायमूर्ति चंद्रभूषण बाजपेयी, अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री मदनमोहन अग्रवाल, तथा गेवरा प्रोजेक्ट के जनरल मैनेजर अरुण त्यागी अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम को समृद्ध करेंगे। इसके साथ ही कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल समारोह भूषण विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
इस अवसर पर ‘विकलांग-विमर्श : विविध संदर्भÓ शीर्षक पुस्तक का विमोचन भी किया जाएगा, जिसके संपादन का कार्य डॉ. पायल लिल्हारे (निवाड़ी, मध्यप्रदेश) द्वारा किया गया है। यह पुस्तक विकलांग-विमर्श के विभिन्न आयामों को उजागर करते हुए समकालीन संदर्भों में महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. ममता ठाकुर ने बताया कि यह संगोष्ठी भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में विकलांग-विमर्श के पुनर्मूल्यांकन का एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जो समाज में समावेशी दृष्टिकोण को सुदृढ़ करेगा। वहीं 20वी राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक डॉ. गजेंद्र तिवारी ने सभी शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं जागरूक नागरिकों से इस आयोजन में अधिकाधिक संख्या में सहभागिता कर इसे सफल बनाने का आह्वान किया है।
यह संगोष्ठी न केवल अकादमिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगी, बल्कि सामाजिक समरसता एवं समावेशिता के नए आयाम स्थापित करने में भी सहायक सिद्ध होगी।

छत्तीसगढ़
कोंडागांव : वन मंत्री केदार कश्यप ने दहिकोंगा तेंदूपत्ता फड़ का किया निरीक्षण
वन मंत्री ने संग्राहकों से किया सीधा संवाद

कोंडागांव। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने आज रविवार को कोंडागांव जिले के दहिकोंगा स्थित तेंदूपत्ता फड़ का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने तेंदूपत्ता की गुणवत्ता देखी और संग्राहकों को हो रहे ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था की जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान मंत्री श्री कश्यप ने दो संग्राहकों के मोबाइल में स्वयं ऑनलाइन एंट्री कर भुगतान प्रक्रिया को पूरा कराया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार तेंदूपत्ता संग्राहकों को पारदर्शी और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा दे रही है।
वन मंत्री ने संग्राहकों से सीधे संवाद कर उन्हें “तेंदूपत्ता तिहार” की बधाई और शुभकामनाएं दीं तथा शासन की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़े श्रमिकों की आय बढ़ाने और उनकी सुविधाओं में सुधार के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
इस अवसर पर कोंडागांव के वन मंडलाधिकारी चूड़ामणि सिंह, संयुक्त वन मंडलाधिकारी डॉ. आशीष कोटरिवार, परिक्षेत्र अधिकारी कोंडागांव, परिक्षेत्र अधिकारी दहिकोंगा सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़
जनगणना में लगे शिक्षकों के लिए दुर्घटना बीमा की मांग:छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन बोला: चुनाव ड्यूटी जैसी सुरक्षा मिले, 1 करोड़ का बीमा हो
रायपुर,एजेंसी। जनगणना कार्य में लगाए जाने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए 1 करोड़ रुपए के दुर्घटना बीमा की मांग उठी है। छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, जनगणना आयुक्त और स्कूल शिक्षा विभाग को पत्र सौंपकर निर्वाचन ड्यूटी की तर्ज पर बीमा सुरक्षा देने की मांग की है।
ड्यूटी के दौरान दुर्घटना, गंभीर बीमारी या असामयिक मृत्यु की स्थिति में कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा जरूरी है।

चुनाव ड्यूटी जैसी सुरक्षा की मांग
संगठन का कहना है कि जब जिम्मेदारी राष्ट्रीय स्तर की है और जोखिम भी चुनावी ड्यूटी जैसा है, तो सुरक्षा मानकों में भेदभाव नहीं होना चाहिए। इसलिए जनगणना कार्य में तैनात हर शिक्षक और कर्मचारी को 1 करोड़ रुपए का बीमा कवर दिया जाए।
तीन प्रमुख तर्क रखे
एसोसिएशन ने शासन के सामने तीन प्रमुख बिंदु रखे—
- समान जोखिम, समान सुरक्षा: जनगणना ड्यूटी में भी चुनाव जैसी चुनौतियां और खतरे हैं।
- आर्थिक संबल: हादसे या मृत्यु की स्थिति में परिवार को सहायता मिले।
- मानसिक निश्चिंतता: बीमा सुरक्षा से कर्मचारी निर्भीक होकर काम कर सकेंगे।

एसोसिएशन की ओर से लिखा गया लेटर।
हाल की घटनाओं का दिया हवाला
एसोसिएशन ने जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों की मौत की घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों ने बीमा सुरक्षा की जरूरत को और गंभीर बना दिया है।
टीचर्स एसोसिएशन ने मांग की है कि जनगणना अधिसूचना जारी होने के साथ ही बीमा संबंधी दिशा-निर्देश भी जारी किए जाएं, ताकि जमीनी स्तर पर काम कर रहे हजारों शिक्षकों को सुरक्षा मिल सके।
प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा के साथ प्रदेश संयोजक सुधीर प्रधान सहित संगठन के अन्य पदाधिकारियों ने भी इस मांग का समर्थन किया है।
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