कोरबा
एसईसीएल स्तरीय भूविस्थापितों का सम्मेलन आयोजित
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के 12 क्षेत्रों के प्रतिनिधि हुए शामिल

कोरबा/गेवरा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के अंतर्गत आने वाले छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के भूविस्थापितों की एसईसीएल स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरआत में महापुरुषों के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। स्कूली छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया और रुद्र दास ने स्वागत उद्बोधन किया, उसके बाद ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने कोयला खदानों के इतिहास और वर्तमान परिस्थिति पर विस्तार से रिपोर्ट प्रस्तुत किया और आयोजन के सबन्ध में बताया।

इस सम्मेलन में छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश स्थित कोयला परियोजनाओं में विभिन्न संगठनों के द्वारा चलाये जा आंदोलन का फेडरेशन बनाकर एक साथ मिलकर रोजगार उचित मुआवजा पुनर्वास और बुनियादी सुविधाओं जैसी जायज मांगों को लेकर चल रहे संघर्ष को और अधिक मजबूत बनाने पर विचार विमर्श किया गया और तय किया गया है कि :-

▪️सभी संगठनों को मिलाकर एक मोर्चा एसईसीएल स्तरीय भूविस्थापित फेडरेशन बनाई जाएगी ।
▪️26 जनवरी को ग्राम सभाओं में भूविस्थापित समस्याओं के समाधान के लिए प्रस्ताव कराये जाएंगे ।
▪️अपने अपने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों सांसद विधायक और पंचायत प्रतिनिधियों से हस्ताक्षर युक्त मांगपत्र के साथ सीएमडी को पत्र सौंपा जाएगा ।
▪️भूविस्थापित समस्याओं को लेकर चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा जिसमे बिलासपुर मुख्यालय कोल इंडिया कोलकाता और कोयला मंत्रालय नई दिल्ली में बड़े आंदोलन किया जाएगा ।

छत्तीसगढ़ के गेवरा, दीपका, कुसमुंडा, कोरबा, रायगढ़, बैकुंठपुर, विश्रामपुर, भटगांव, चिरमिरी और हसदेव क्षेत्रों के साथ-साथ मध्य प्रदेश के सोहागपुर और जमुना-कोतमा क्षेत्र के विभिन्न संगठन के नेतृत्व किसान नेता हाईकोर्ट अधिवक्ता समाज सेवी और प्रभावित ग्रामीण उपस्थित हुये ।

सपुरन कुलदीप, तिरिथ, केशव, सुरेश पटेल, रममेलाल धीवर -(मानिकपुर ) कोरबा क्षेत्र।
बसन्त कंवर, संतोष चौहान, रविन्द्र, जगत-दीपका क्षेत्र।
रुद्र दास महंत, विजयपाल सिंह तंवर, अनुसुइया राठौर, ललित महिलांगे -गेवरा क्षेत्र।
भरत पटेल, राजेश यादव -कुसमुंडा क्षेत्र।
भरत झारिया, नरिहर दास -रायगढ़ क्षेत्र।
मंगेलश्वर, अवदेश कुशवाहा -बैकुंठपुर क्षेत्र।
भागवेन्द्र तिवारी, रामबाई -जमुना कोतमा क्षेत्र
डॉ विनय शुक्ला, हर्षवर्धन – हसदेव क्षेत्र।
भागवत दुबे -चिरमिरी क्षेत्र।
रमेश सिंह (पूर्व SDM) जिला पंचायत अध्यक्ष प्रभाकर सिंह ,रोशन नापित, सत्यदेव साहू -सोहागपुर क्षेत्र।
अरुण कुमार, वीरेंद्र सिंह -विश्रामपुर क्षेत्र।
बुधवार सिंह, अमर साय -भटगांव क्षेत्र ने सम्बोधन दिया ।




कोरबा
कोरबा कार्बन फैक्ट्री में टैंक फटा:कर्मचारी बाल-बाल बचे, दमकल ने आग पर पाया काबू
कोरबा। कोरबा के इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एक कार्बन फैक्ट्री में सोमवार दोपहर एक टैंक फट गया। इस घटना से मौके पर हड़कंप मच गया, हालांकि प्लांट के अंदर काम कर रहे कर्मचारी बाल-बाल बच गए। एक बड़ी दुर्घटना टल गई।

यह फैक्ट्री कार्बन बनाने का काम करती है। इसमें बाहर से टैंकरों के माध्यम से तरल पदार्थ लाकर टैंकों में रखा जाता है, जहां कार्बन तैयार किया जाता है। टैंक फटने के समय फैक्ट्री में कई महिला और पुरुष कर्मचारी मौजूद थे। टैंक फटने के बाद गर्म हार्ड पीच फैक्ट्री के अंदर फैल गया, जो बेहद गर्म था और किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता था।

टैंक फटने के बाद गर्म हार्ड पीच फैक्ट्री के अंदर फैल गया
गर्म पीच को पानी,फायर फोम की मदद से ठंडा किया गया
फैक्ट्री कर्मचारियों ने तत्काल दमकल विभाग को सूचना दी। सीएसईबी के दमकल वाहन मौके पर पहुंचे और गर्म पीच को पानी तथा फायर फोम की मदद से ठंडा किया। सीएसईबी के फायरमैन धर्मेंद्र कुमार पटेल ने बताया कि फायर टीम को इंडस्ट्रियल एरिया में टैंक फटने की सूचना मिली थी, जिसके बाद मौके पर पहुंचकर दो टैंकर पानी और फोम का छिड़काव कर स्थिति को नियंत्रित किया गया।

टैंक फटने से अस पास फिला मलबा और गर्म हार्ड पीच पर फोम का छिड़काव पर किया गया
फैक्ट्री में औद्योगिक नियमों का उल्लंघन:स्थानीय लोग
स्थानीय लोगों का आरोप है कि फैक्ट्री में औद्योगिक नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है और संबंधित अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। कहीं न कहीं लापरवाही के कारण ही यह घटना सामने आई है। फैक्ट्री के बाहर कोई बोर्ड भी नहीं लगा है, जिससे यह पता चल सके कि यहां क्या काम होता है।
इंडस्ट्रियल एरिया से निकलने वाले जहरीले केमिकल और धुएं से आसपास के लोग, खासकर पुलिस लाइन में रहने वाले परिवार, काफी परेशान हैं। इस संबंध में पर्यावरण विभाग से भी शिकायतें की जा चुकी हैं।
कोरबा
कोरबा में निर्माणाधीन मकान की दीवार गिरी:पड़ोस के घर में सो रहे पति-पत्नी और बच्चा मलबे में दबे, हालत गंभीर
कोरबा/कुसमुंडा। कोरबा में रविवार देर रात संतोष वर्मा के निर्माणाधीन मकान की तीसरी मंजिल की दीवार गिर गई। यह दीवार बगल में स्थित अजय धनवार के घर पर गिरी, जिससे अजय धनवार, उनकी पत्नी और उनका छोटा बच्चा मलबे में दब गए।

घटना कुसमुंडा थाना क्षेत्र के प्रेम नगर की है। हादसा तेज आंधी-तूफान और भारी बारिश के दौरान हुआ। मौसम खराब होते ही निर्माणाधीन मकान की ऊपरी दीवार कमजोर होकर सीधे अजय धनवार के घर की छत पर गिर गई।

छप्पर टूटा, घर में मचा हड़कंप
इससे छप्पर टूट गया और सैकड़ों ईंटें घर के अंदर जा गिरीं। घटना के बाद घर में चीख-पुकार मच गई। आवाज सुनकर पड़ोसी तुरंत मौके पर पहुंचे और मलबे में दबे तीनों लोगों को बाहर निकाला। गंभीर रूप से घायल तीनों को तत्काल मोहल्लेवासियों की मदद से कोरबा अस्पताल में भर्ती कराया गया।
घरेलू सामान को भारी नुकसान
हादसे में घर के अंदर रखा दोपहिया स्कूटर, बर्तन, बिस्तर और अन्य घरेलू सामान भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। मकान के भीतर अभी भी ईंटों का मलबा पड़ा हुआ है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों का ध्यान नहीं रखा गया था, जिसके कारण तेज हवा और बारिश में दीवार गिर गई।
लापरवाही के आरोप, पुलिस जांच में जुटी
लोगों ने निर्माणकर्ता की लापरवाही पर नाराजगी व्यक्त की है। पुलिस को घटना की सूचना दे दी गई है और घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है। यह घटना निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का एक गंभीर मामला बनकर सामने आई है।

कोरबा
राजस्व कार्यों में गंभीर लापरवाही और भू-अभिलेखों में हेराफेरी पर पटवारी निलंबित
कोरबा। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने शासकीय कार्यों के प्रति उदासीनता और घोर लापरवाही बरतने के कारण पटवारी दीपक कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। तहसीलदार भैंसमा द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन के आधार पर यह पाया गया कि श्री सिंह ने अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन करने में गंभीर अनियमितताएं की हैं, जो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 का उल्लंघन है।
जांच के दौरान ग्राम करूमौहा में राजस्व अभिलेखों के साथ बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की पुष्टि हुई है, जिसमें खसरा नंबर 176/1/ख/1 के वास्तविक रकबे 0.016 हेक्टेयर को नियम विरुद्ध तरीके से बढ़ाकर 1.600 हेक्टेयर दर्ज कर दिया गया था। इसी प्रकार एक अन्य मामले में खसरा नंबर 84/4 ख के रकबे को 0.710 हेक्टेयर से बढ़ाकर सीधे 71.000 हेक्टेयर कर दिया गया और बिना किसी वैध आदेश के इसे ऑनलाइन भुइयां पोर्टल पर दर्ज कर दिया गया।
इन गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत कार्रवाई करते हुए पटवारी को निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय तहसील कार्यालय पसान निर्धारित किया गया है और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।
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