कोरबा
सुगम, पारदर्शी और सुव्यवस्थित धान खरीदी से किसान संतुष्ट
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4 days agoon
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Divya Akashखुशहाल कृषक श्री रामलाल खैरवार, सरकार की नीति ने दी नई उम्मीद
कोरबा। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत धान खरीदी का कार्य प्रदेशभर में सुचारू, पारदर्शी और किसान-केन्द्रित तरीके से संचालित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा लागू की गई व्यवस्था से किसानों को उनकी उपज का देश में सर्वाधिक समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्राप्त हो रहा है, जिससे अन्नदाताओं में संतोष और भरोसा दोनों दिखाई दे रहा है।
सभी धान उपार्जन केंद्रों पर टोकन आधारित खरीदी, डिजिटल तौल व्यवस्था, शीघ्र भुगतान और सुव्यवस्थित प्रबंधन के चलते किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ रहा है। बैठने, पीने का पानी, छाया, बारदाना और अन्य मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता से धान विक्रय की प्रक्रिया अत्यंत सहज और सम्मानजनक बन गई है।
भैंसमा उपार्जन केंद्र पर किसान रामलाल खैरवार की प्रेरक कहानी
कोरबा जिले के ग्राम डोंगदरहा निवासी रामलाल खैरवार इस खरीफ विपणन वर्ष में भी पूरे भरोसे के साथ अपना धान बेचने भैंसमा उपार्जन केंद्र पहुंचे हैं। यह उनका पहला अनुभव नहीं है, बल्कि पिछले वर्ष भी उन्होंने 167 क्विंटल धान का विक्रय किया था और इस वर्ष भी समय पर टोकन कटवाकर उतनी ही मात्रा में धान लेकर आए हैं।
श्री खैरवार बताते हैं कि पहले धान बेचने में कई तरह की परेशानियां आती थीं, लेकिन अब सरकार द्वारा की गई व्यवस्था से पूरी प्रक्रिया आसान और भरोसेमंद हो गई है। टोकन प्रणाली के कारण किसानों को अपनी बारी का इंतजार नहीं करना पड़ता, तौल मशीनों से सटीक वजन होता है और भुगतान सीधे खाते में समय पर मिल जाता है। इससे किसान मानसिक रूप से भी निश्चिंत रहते हैं। उन्होंने संतोष व्यक्त करते हुए कहा, “सरकार हम सभी किसानों को मेहनत का सही और पूरा मूल्य दे रही है, तौल में कोई गड़बड़ी नहीं होती और भुगतान भी समय पर मिल जाता है। उपार्जन केंद्र में सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं, इससे हमारा मनोबल बढ़ता है।
उच्चतम समर्थन मूल्य से किसानों की आर्थिक स्थिति हुई मजबूत
राज्य सरकार द्वारा घोषित उच्चतम समर्थन मूल्य से किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो रही है। इससे वे न केवल अपने घरेलू खर्च सहजता से पूरा कर पा रहे हैं, बल्कि खेती से जुड़ी अगली तैयारियों में भी अधिक निवेश कर पा रहे हैं। समय पर और सीधे खाते में भुगतान होने से आर्थिक सुरक्षा बढ़ी है। धान उपार्जन केंद्रों पर प्रशासनिक निगरानी और तकनीकी व्यवस्था के कारण बिचौलियों की भूमिका समाप्त होने से किसान सीधे सरकार से जुड़कर लाभ उठा रहे हैं।
किसानों की मेहनत को मिल रहा सम्मान
छत्तीसगढ़ सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसानों की समृद्धि ही प्रदेश की प्रगति का आधार है। इसी सोच के अनुरूप धान खरीदी व्यवस्था को सरल, भरोसेमंद और तकनीक आधारित बनाया गया है। आज श्री रामलाल खैरवार जैसे हजारों किसान यह अनुभव कर रहे हैं कि शासन उनके साथ खड़ा है। सरकार की इस पहल से छत्तीसगढ़ न केवल देश में धान उत्पादन में अग्रणी बना हुआ है, बल्कि किसानों के कल्याण के क्षेत्र में भी एक आदर्श राज्य के रूप में उभर रहा है। सरकार की जनहितकारी नीतियों से प्रदेश का हर अन्नदाता आर्थिक रूप से मजबूत, आत्मनिर्भर और खुशहाल बन रहा है।
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कोरबा
सरस्वती शिशु मंदिर सीएसईबी कोरबा पूर्व में मातृ संगोष्ठी एवं शिशु नगरी का भव्य आयोजन
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11 hours agoon
January 16, 2026By
Divya Akash220 मातृशक्तियों की सहभागिता, नन्हे भैया-बहनों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दिया पारिवारिक संस्कारों का संदेश
कोरबा। सरस्वती शिशु मंदिर सीएसईबी, कोरबा पूर्व में मातृ संगोष्ठी एवं शिशु नगरी का भव्य, सुव्यवस्थित एवं प्रेरणादायी आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्राचार्य राजकुमार देवांगन रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में दीपक सोनी (कोरबा विभाग समन्वयक) एवं संजय कुमार देवांगन (प्रधानाचार्य, पूर्व माध्यमिक) उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत विद्यालय परिवार द्वारा पारंपरिक रीति से किया गया।

अपने संबोधन में अतिथियों ने मातृशक्ति की भूमिका को बाल संस्कार एवं राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रारंभिक शिक्षा में माता का योगदान सबसे निर्णायक होता है। इस अवसर पर विद्यालय के नन्हे भैया-बहनों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। बच्चों ने आकर्षक नृत्य, गीत एवं लघु प्रस्तुतियों के माध्यम से पारिवारिक वातावरण, नैतिक मूल्यों, अनुशासन एवं संस्कारों का संदेश दिया। बच्चों की सहज एवं भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित माताओं एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम में कुल 220 मातृशक्तियों की गरिमामयी सहभागिता रही, जिससे मातृसंगोष्ठी अत्यंत सफल रही। माताओं ने विद्यालय की शिक्षण पद्धति, संस्कार आधारित शिक्षा एवं गतिविधियों की सराहना की। शिशु नगरी कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालय की 12 शैक्षिक व्यवस्थाओं एवं सहयोगी संस्थाओं की जीवंत प्रदर्शनी लगाई गई। इन प्रदर्शनियों के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास, कौशल निर्माण, संस्कार शिक्षा एवं व्यवहारिक ज्ञान को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया। अभिभावक बंधुओं के सहयोग से आनंद मेले का भी आयोजन किया गया, जिसमें प्राथमिक विभाग के भैया-बहनों ने विभिन्न खेलों, गतिविधियों एवं मनोरंजन कार्यक्रमों में भाग लेकर भरपूर आनंद उठाया। आनंद मेला बच्चों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रधानाचार्य पंकज तिवारी ने सभी अतिथियों, मातृशक्तियों एवं अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से विद्यालय एवं परिवार के बीच सहयोग और विश्वास और अधिक मजबूत होता है। उप-प्रधानाचार्य श्रीमती सीमा त्रिपाठी सहित समस्त आचार्य परिवार ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
कोरबा
बॉयोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन कर संजय सुमन ने कमाए साल में 3.20 लाख
Published
11 hours agoon
January 16, 2026By
Divya Akashकोरबा। विकासखंड करतला के ग्राम बड़मार निवासी संजय सुमन ने मछली पालन को अपना मुख्य व्यवसाय बनाकर सफलता की नई मिसाल कायम की है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत नवीन बॉयोफ्लॉक तकनीक अपनाकर उन्होंने कम भूमि में अधिक उत्पादन कर उल्लेखनीय आय अर्जित की है।
संजय सुमन ने अपनी 25 डिसमिल भूमि पर बॉयोफ्लॉक तालाब का निर्माण कराया। इस तकनीक में तालाब में लाइनर बिछाकर पानी भरा जाता है और तेजी से बढ़ने वाली उन्नत प्रजाति की मछलियों का पालन किया जाता है। इसकी विशेषता है कि वर्ष में दो बार उत्पादन लेकर अधिक आय प्राप्त की जा सकती है।
सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत उन्हें 8.40 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। पिछले वर्ष संजय सुमन ने बॉयोफ्लॉक तालाब से 6 मैट्रिक टन मछली उत्पादन किया, जिसे बेचकर 07 लाख 20 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई। उत्पादन लागत निकालने के बाद उन्हें 03 लाख 20 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ।
सफलता से उत्साहित संजय सुमन इस वर्ष अपने कार्य का विस्तार कर उत्पादन एवं आय को दुगुना करने की योजना बना रहे हैं। बॉयोफ्लॉक तकनीक की खासियत यह है कि कम भूमि में अधिक उत्पादन संभव होता है, जिससे किसानों की आय में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
संजय सुमन की यह कहानी क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।
कोरबा
सुशासन सरकार की नीतियों से किसान हुआ आत्मनिर्भर और निश्चिंत
Published
11 hours agoon
January 16, 2026By
Divya Akashसुगम व्यवस्था और सर्वाधिक समर्थन मूल्य, किसानों की आर्थिक ढाल
कोरबा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार की सुशासन आधारित नीतियों का सकारात्मक प्रभाव अब प्रदेश के खेतों तक स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। शासन की पारदर्शी धान खरीदी व्यवस्था और सर्वाधिक समर्थन मूल्य से छोटे एवं बड़े सभी किसानों को समान रूप से उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल रहा है, जिससे किसानों का जीवन स्तर सुदृढ़ हो रहा है।
कोरबा जिले के ग्राम कल्दामार निवासी कृषक अरुण कुमार इसकी मिसाल हैं, उन्होंने उपार्जन केंद्र भैंसमा में इस वर्ष 190 क्विंटल धान का विक्रय बिना किसी असुविधा के किया। गत वर्ष भी उन्होंने लगभग 350 क्विंटल धान का सफलतापूर्वक विक्रय किया था। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती टिकैतिन बाई के नाम से टोकन कटवा कर धान विक्रय की प्रक्रिया पूर्ण की।
कृषक कुमार का कहना है कि शासन की पहल से उपार्जन केंद्रों में सभी आवश्यक सुविधाएं सुचारू रूप से उपलब्ध हैं। उच्च समर्थन मूल्य मिलने से अब किसानों को अगली फसल के लिए आर्थिक चिंता नहीं रहती और उन्हें उधार लेने की मजबूरी से भी मुक्ति मिली है। खेत से लेकर धान विक्रय तक की पूरी प्रक्रिया आज किसानों के लिए सहज, सुरक्षित और तनावमुक्त हो गई है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान व्यवस्था ने किसानों को आत्मनिर्भर बनाया है और वे अब समृद्धि की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। किसानों के हित में संचालित योजनाओं और प्रभावी नीतियों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार एवं मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

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