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चांदी आज ₹15,370 बढ़कर ₹3.09 लाख के ऑलटाइम हाई पर:20 दिनों में कीमत ₹79 हजार बढ़ी, सोना ₹3,463 बढ़कर ₹1.47 लाख पर पहुंचा

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नई दिल्ली,एजेंसी। सोने-चांदी के दाम आज यानी 20 जनवरी को लगातार दूसरे दिन अपने ऑलटाइम हाई पर पहुंच गए हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार एक किलो चांदी आज पहली बार सर्राफा बाजार में 3 लाख के पार निकल गई है।

ये 15,370 रुपए बढ़कर 3,09,345 रुपए पर पहुंच गई है। इससे पहले कल ये 2,93,975 रुपए पर थी। MCX पर चांदी कल ही 3 लाख के पार निकल गई थी। चांदी इस साल सिर्फ 20 दिनों में ही 78,925 रुपए महंगी हो चुकी है।

सोना 3,463 रुपए बढ़कर 1,47,409 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। कल ये 1,43,946 रुपए पर था। सोना इस साल अब तक 14,214 रुपए महंगा हो चुका है।

2025 में सोना 75% और चांदी 167% महंगी हुई

  • पिछले साल यानी 2025 में सोने की कीमत 57,033 रुपए (75%) बढ़ी है। 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 76,162 रुपए का था, जो 31 दिसंबर 2025 को 1,33,195 रुपए हो गया।
  • चांदी का भाव भी इस दौरान 1,44,403 रुपए (167%) बढ़ा। 31 दिसंबर 2024 को एक किलो चांदी की कीमत 86,017 रुपए थी, जो इस साल के आखिरी दिन 2,30,420 रुपए प्रति किलो हो गई।

चांदी में तेजी के 3 प्रमुख कारण

  1. इंडस्ट्रियल डिमांड – सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स और EV में भारी इस्तेमाल, चांदी अब सिर्फ ज्वेलरी नहीं, जरूरी कच्चा माल बन गई है।
  2. ट्रंप का टैरिफ डर – अमेरिकी कंपनियां चांदी का भारी स्टॉक जमा कर रही हैं, ग्लोबल सप्लाई में कमी से कीमतें ऊपर चढ़ीं।
  3. मैन्युफैक्चरर होड़ में – प्रोडक्शन रुकने के डर से सभी पहले से खरीद रहे हैं, इसी वजह से आने वाले महीनों में भी तेजी बनी रहेगी।

इस साल ₹4 लाख तक जा सकती है चांदी

  • मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज: 2026 में चांदी ₹3.20 लाख प्रति किलो तक पहुंच सकती है। सोलर और EV डिमांड को देखते हुए हर गिरावट पर खरीदारी की सलाह है।
  • सैमको सिक्योरिटीज: टेक्निकल ब्रेकआउट और मजबूत वैश्विक संकेतों के आधार पर चांदी की कीमतें ₹3.94 लाख प्रति किलो के स्तर को भी छू सकती हैं।
  • नीलेश सुराना (कमोडिटी एक्सपर्ट): ग्रीन एनर्जी की बढ़ती मांग और अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती से चांदी $100 प्रति औंस (करीब ₹3.5-4 लाख) तक जा सकती है।
  • पोनमुडी आर (CEO, एनरिच मनी): चांदी में लंबी अवधि की तेजी का दौर अभी जारी रहेगा, इसलिए निवेशकों को कीमतों में आने वाली हर छोटी गिरावट का फायदा उठाना चाहिए।
  • रॉबर्ट कियोसाकी (ग्लोबल इन्वेस्टर): डॉलर की कमजोरी और महंगाई को देखते हुए चांदी साल 2026 में $200 प्रति औंस के चौंकाने वाले स्तर तक भी जा सकती है।

गोल्ड में तेजी के 3 प्रमुख कारण

  1. डॉलर कमजोर – अमेरिका के ब्याज दर घटाने से डॉलर कमजोर हुआ और सोने की होल्डिंग कॉस्ट कम हुई, इससे लोग खरीदने लगे।
  2. जियोपॉलिटिकल – रूस-यूक्रेन जंग और दुनिया में तनाव बढ़ने से निवेशक सोने को सबसे सुरक्षित निवेश मानकर खरीद रहे हैं।
  3. रिजर्व बैंक – चीन जैसे देश अपने रिजर्व बैंक में सोना भर रहे हैं, ये सालभर में 900 टन से ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं, इसलिए दाम ऊपर जा रहे हैं।
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Rupee Fall: लगातार तीसरे दिन गिरा रुपया, डॉलर के मुकाबले आज इतनी आई गिरावट

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मुंबई, एजेंसी। रुपए में बुधवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट आई और यह 39 पैसे टूटकर 93.83 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा। अमेरिका-ईरान शांति वार्ता को लेकर अनिश्चितता से पश्चिम एशिया में संघर्ष कम होने की उम्मीदें कमजोर हुई हैं। इसके साथ कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई जिससे घरेलू मुद्रा पर दबाव बढ़ा। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि घरेलू शेयर बाजारों में गिरावट और विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी ने भी भारतीय मुद्रा पर दबाव डाला। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 93.69 प्रति डॉलर पर खुला। 

कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले 93.87 के निचले स्तर तक पहुंचा। अंत में घरेलू मुद्रा डॉलर के मुकाबले 93.83 (अस्थायी) पर रही जो पिछले बंद भाव से 39 पैसे की गिरावट है। रुपया मंगलवार को 28 पैसे की गिरावट के साथ 93.44 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी और अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर अनिश्चितता के कारण रुपये में गिरावट आई है। विदेशी पूंजी की निकासी के दबाव के कारण रुपए में नकारात्मक रुझान रहने का अनुमान है। 

चौधरी ने कहा, ”हालांकि, अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने से रुपए में तेज गिरावट को रोका जा सकता है। डॉलर के मुकाबले रुपए का हाजिर भाव 93.60 से 94.20 रुपए के दायरे में रहने का अनुमान है।” इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.07 प्रतिशत की गिरावट के साथ 98.15 पर रहा। घरेलू शेयर बाजारों में सेंसेक्स 756.84 अंक यानी 0.95 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,516.49 अंक पर जबकि निफ्टी 198.50 अंक यानी 0.81 प्रतिशत टूटकर 24,378.10 अंक पर बंद हुआ। 

अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 1.29 प्रतिशत की बढ़त के साथ 99.75 डॉलर प्रति बैरल रहा। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) मंगलवार को बिकवाल रहे थे और उन्होंने 1,918.99 करोड़ रुपए के शेयर बेचे।

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पश्चिम एशिया संकट से भारत का राजकोषीय घाटा लक्ष्य से जा सकता है ऊपर

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नई दिल्ली,एजेंसी। पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच सरकारी नीतियों से सार्वजनिक वित्त पर पड़ने वाले दबाव से भारत का राजकोषीय घाटा बजटीय लक्ष्य को पार कर सकता है और जीडीपी के 4.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। शोध फर्म बीएमआई ने बुधवार को एक रिपोर्ट में यह अनुमान जताया। सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.3 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य तय किया था। यह वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 4.4 प्रतिशत के संशोधित अनुमान से थोड़ा कम है। 

बीएमआई को उम्मीद है कि सरकार पश्चिम एशिया संघर्ष से उपजे व्यवधानों से निपटने के लिए महत्वपूर्ण साधनों को प्रमुख उद्योगों की ओर मोड़ने, व्यावसायिक लागतों को नियंत्रित करने और कंपनियों के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाने की नीतियां लागू करेगी। बीएमआई का अनुमान है कि सरकार सेमीकंडक्टर चिप्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले हीलियम और सल्फर जैसे दुर्लभ कच्चे माल के निर्यात पर प्रतिबंध भी लगा सकती है। सल्फर उर्वरक बनाने के लिए भी एक महत्वपूर्ण घटक है, इसलिए सरकार कृषि क्षेत्र में व्यवधानों को कम करने का प्रयास करेगी, जिसमें भारत के 43 प्रतिशत कार्यबल को रोजगार मिलता है। 

होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से प्रभावित व्यवसायों की लागत वृद्धि को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने एक लाख करोड़ रुपए का आर्थिक स्थिरीकरण कोष स्थापित किया है। बीएमआई का अनुमान है कि यह वित्त वर्ष 2026-27 में राजकोषीय व्यय में जीडीपी का 0.1 प्रतिशत योगदान देगा। होर्मुज जलडमरूमध्य पोत परिवहन का एक प्रमुख मार्ग है, जहां से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और कच्चा तेल गुजरता है। 

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LPG Crisis: मिडिल ईस्ट संकट के बीच PNG गैस पर नया अपडेट, गैस सेक्टर में बड़ा बदलाव शुरू

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मुंबई, एजेंसी। मिडिल ईस्ट के बढ़ते तनाव के बीच भारत के गैस सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। LPG की कमी का असर देखने के बाद लोगों का ध्यान PNG की ओर बढ़ रहा है। भारत में कई राज्यों में PNG की मांग तेजी से बढ़ रही है। हालात ऐसे हैं कि बड़ी संख्या में लोग अपने पुराने बंद पड़े PNG कनेक्शन दोबारा चालू करा रहे हैं और नए कनेक्शन भी तेजी से लिए जा रहे हैं।

16 अप्रैल तक देशभर में 4.7 लाख से ज्यादा बंद पड़े PNG कनेक्शन फिर से सक्रिय किए जा चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र से सामने आए हैं, जहां करीब 1.2 लाख कनेक्शन दोबारा शुरू किए गए। इसके बाद उत्तर प्रदेश में लगभग 1 लाख कनेक्शन Re-activate हुए। सिर्फ पुराने कनेक्शन ही नहीं, नए कनेक्शन लेने वालों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। कुल 5.2 लाख नए PNG कनेक्शन जारी किए गए हैं। इनमें भी महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश आगे हैं, जबकि गुजरात में करीब 76 हजार नए रजिस्ट्रेशन दर्ज किए गए हैं।

आंकड़ों की बात करें, तो जनवरी के अंत तक देश में 1.6 करोड़ से ज्यादा घरेलू PNG कनेक्शन मौजूद थे, जिनमें से 1 करोड़ से अधिक सक्रिय हैं। इसके अलावा कमर्शियल और इंडस्ट्रियल उपयोगकर्ता भी बड़ी संख्या में PNG अपना रहे हैं, जिससे इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

इतना ही नहीं  सरकार ने भी PNG नेटवर्क के विस्तार पर जोर बढ़ा दिया है। 110 इलाकों में तेजी से पाइप गैस कनेक्शन देने के निर्देश जारी किए गए हैं। इनमें उत्तर प्रदेश के 25 और महाराष्ट्र के 12 इलाके शामिल हैं। साथ ही PNG विस्तार अभियान को 30 जून तक बढ़ा दिया गया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक यह सुविधा पहुंच सके।

सरकार और गैस कंपनियां उन जिलों में भी काम तेज कर रही हैं, जहां अभी तक 10 हजार से कम कनेक्शन हैं। इसके लिए स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है और जमीन व मंजूरी से जुड़ी दिक्कतों को जल्दी सुलझाने की कोशिश की जा रही है। इस बदलाव के पीछे एक बड़ी रणनीति भी है। केंद्र सरकार ने राज्यों को कमर्शियल LPG का 10 प्रतिशत अतिरिक्त कोटा देने की पेशकश की है, ताकि वे PNG को अपनाने में सहयोग करें। फिलहाल 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह अतिरिक्त कोटा मिल रहा है।

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