छत्तीसगढ़
पुलिस होटल में घुसी…हाईकोर्ट ने 1 लाख का जुर्माना ठोका:आधार-कार्ड देकर ठहरे लोगों को रूम से निकाला, मालिक को पीटा, बिना FIR जेल भेजा
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3 weeks agoon
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Divya Akashबिलासपुर,एजेंसी। दुर्ग जिले के एक होटल में पुलिस ने जबरदस्ती घुसकर जांच की। पुलिस अधिकारी एक गुमशुदा लड़की की तलाश में पहुंचे थे। उन्होंने पहले मैनेजर से बदतमीजी की फिर होटल के कमरे में घुसकर वहां मौजूद महिला-पुरुष को बाहर निकाला। मना करने पर पुलिस ने होटल मालिक से मारपीट की और बिना FIR जेल भेज दिया।
जिसके बाद पीड़ित ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। दायर याचिका में बताया गया कि होटल में रुके लोगों ने वैध दस्तावेज आधार कार्ड दिए थे, तो पुलिस कार्रवाई से पहले अनुमति लेनी थी। लेकिन पुलिस ने जबरदस्ती कार्रवाई की।
हाईकोर्ट ने मालिक की गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए पुलिस पर 1 लाख का जुर्माना ठोका है। साथ ही सरकार को छूट दी है कि जांच के बाद दोषी पुलिस अधिकारियों के सैलरी से ये पैसे वसूल सकती है।
कारोबारी ने अपनी गिरफ्तारी को अवैध बताया
दरअसल, भिलाई के अवंतीबाई चौक निवासी आकाश कुमार साहू (30 साल) लॉ स्टूडेंट है। इसके साथ ही वे परिवार के भरण-पोषण और आजीविका के लिए कोहका में होटल संचालित करते हैं।
आकाश साहू ने अपने एडवोकेट के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने पुलिस की अवैध कार्रवाई और अपनी गिरफ्तारी को अवैध बताया।
याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता विधिवत पंजीकृत और लाइसेंस लेकर होटल चला रहा है। जिसके लिए सभी आवश्यक वैधानिक अनुमति ली है। यह होटल उसकी आय का एकमात्र जरिया है और यह उसकी आजीविका के मौलिक अधिकार का हिस्सा है।
होटल के कमरे में जबरदस्ती घुसी पुलिस
होटल संचालक ने आरोप लगाया कि 8 सितंबर 2025 को पुलिस अधिकारी और जवान उनके होटल में पहुंचे। इस दौरान होटल में ठहरे लोगों से पूछताछ करने का बहाना बनाया गया। इस दौरान रजिस्टर और पहचान दस्तावेजों की जांच की।
जिसके बाद बगैर महिला पुलिस बल के एक कमरे में जबरदस्ती घूस गए, जहां पुरूष और महिला ठहरे थे। उन्हें कमरे से बाहर लाया गया। इस दौरान मैनेजर के साथ दुर्व्यवहार किया गया।
साथ ही उन्हें बेवजह धमकी देकर चले गए। फिर कुछ समय बाद पुलिस अफसर और जवान फिर से होटल पहुंच गए।
इस दौरान होटल कर्मचारियों द्वारा सोने के आभूषणों की चोरी का झूठा आरोप लगाया। इस पर पुलिस अधिकारियों को कर्मचारियों ने होटल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की जानकारी दी और जांच करने कहा।
लेकिन, पुलिस अफसर जांच करने के बजाय कमरों की तलाशी लेने पहुंच गए। उन्होंने कथित तौर पर होटल मैनेजर की बेहरमी से पिटाई की। जिसके बाद होटल मालिक को बुलाया गया।
संचालक के साथ दुर्व्यवहार, बिना FIR गिरफ्तारी
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि जब वो होटल पहुंचा तो उसने पुलिस अफसरों को संस्थान के मालिक होने की जानकारी दी। इतना सुनते ही पुलिस अफसर भड़क गए और उसके साथ गाली-गलौज करते हुए दुर्व्यवहार कर अपमानित करने लगे।
उसके विरोध करने पर उसे जबरिया हिरासत में लेकर थाने ले जाया गया, जहां उसके साथ मारपीट कर अभद्रता की गई। फिर बाद में बिना किसी वैध कारण के गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
पुलिस का जवाब- गुमशुदा लड़की की तलाश में गए थे
वहीं, पुलिस अफसरों का कहना था कि 8 सितंबर 2025 को पुलिस एक गुमशुदा लड़की की तलाश में उनके होटल पहुंची थी। जिस पर कमरों की तलाशी ली गई। पुलिस ने दावा किया कि आकाश ने सरकारी काम में बाधा डाली।
पुलिस वाहन की चाबी छीन ली और ड्राइवर के साथ हाथापाई की, जिससे शांति भंग होने का खतरा पैदा हो गया था । इसी आधार पर पुलिस ने उन्हें बीएनएस की धारा 170 के तहत हिरासत में ले लिया और बाद में जेल भेज दिया।
हाईकोर्ट ने माना बिना FIR के भेजा जेल
इस मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी भी संज्ञेय अपराध के तहत कोई एफआईआर दर्ज नहीं थी। महज संदेह और कहासुनी के आधार पर जेल भेजना असंवैधानिक है।
हिरासत में दिया गया मानसिक तनाव और अपमान मानवीय गरिमा को नष्ट करता है, जो अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। कानून के मुताबिक गिरफ्तारी के समय आरोपी को लिखित में कारण बताना अनिवार्य है। बता दें कि आकाश ने गिरफ्तारी मेमो पर खुद लिखा था कि मुझे मामले की जानकारी नहीं है।
हाईकोर्ट ने कहा- एसडीएम ने नहीं निभाया अपना धर्म
हाईकोर्ट ने इस मामले में पुलिस के साथ ही एसडीएम यानी सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट की भूमिका पर भी नाराजगी जताई। कहा कि मजिस्ट्रेट को न्यायिक प्रहरी होना चाहिए था, लेकिन उन्होंने बिना दिमाग लगाए पुलिस की रिपोर्ट पर मुहर लगा दी और युवक को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
हाईकोर्ट ने रद्द की आपराधिक कार्रवाई
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ शुरू की गई सभी आपराधिक कार्रवाई और पुलिस के इस्तगासा को निरस्त कर दिया है। राज्य सरकार को आदेश दिया गया है कि 4 सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता को 1 लाख रुपए का भुगतान करे।
सरकार को यह छूट दी है कि वह यह राशि जांच के बाद दोषी पुलिस अधिकारियों के वेतन से वसूल सकती है। भुगतान में देरी होने पर राशि पर 9% वार्षिक ब्याज देना होगा।
‘जनता के विश्वास की नींव कमजोर होती है’
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई के बाद कहा कि पुलिस अधिकारियों के अवैध कार्य, गैर कानूनी रिमांड और पुलिस अत्याचार से आपराधिक न्याय प्रणाली में जनता के विश्वास की नींव को कमजोर करते हैं।
ऐसी हर घटना कानून लागू करने वाली मशीनरी की विश्वसनीयता को कमजोर करती है। साथ ही संवैधानिक शासन में नागरिकों के विश्वास को हिला देती है। इसलिए, राज्य सरकार को पुलिस कर्मियों को मानवाधिकारों के बारे में संवेदनशील बनाने के लिए गंभीर कदम उठाने चाहिए।
हाईकोर्ट ने गृह विभाग के सचिव को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि पुलिस बल को मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं रिपीट न हो।
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कोरबा
एक हाथ में लाश,दूसरे में सिगरेट और गुनगुनाता रहा गाना:न्यूज एंकर मर्डर-केस में चश्मदीद ने खोले राज,वारदात के पांच साल बाद मिली थी लाश
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13 hours agoon
February 11, 2026By
Divya Akashकोरबा। गोद में शव…हाथ में सिगरेट…और होंठों पर वही गीत, जो कभी सलमा सुल्ताना का पसंदीदा था-“तुझसे नाराज नहीं जिंदगी, हैरान हूं मैं…”। कोरबा के विशेष सत्र न्यायालय में चल रही सुनवाई के दौरान चश्मदीद गवाह डिंपल सिंह (काल्पनिक नाम) ने जो बयान दिया, उसने अदालत कक्ष को सन्न कर दिया।
गवाह के मुताबिक, साल 2018 में सलमा सुल्तान की गला घोंटकर हत्या करने के बाद जिम ट्रेनर मधुर साहू ने शव को बाएं हाथ से गोद में लिया हुआ था। दाएं हाथ से वह सिगरेट के कश ले रहा था और वही गीत गा रहा था। यह वही गाना था, जिसे सलमा बेहद पसंद करती थी।
2018 में हुई सलमा सुल्तान की हत्या की सुनवाई कोरबा के विशेष सत्र न्यायालय में चल रही है। पुलिस ने घटनास्थल पर मौजूद चश्मदीद गवाह डिंपल को सोमवार को पेश किया। डिंपल ने बताया कि वह प्रोटीन वर्ल्ड जिम में कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत थी, जहां मधुर साहू ट्रेनर था।
गवाह ने कोर्ट में यह भी स्वीकार किया कि मधुर ने उसे भी अपने प्रेमजाल में फंसा लिया था। हालांकि, जब उसने कंप्यूटर में मधुर की अन्य लड़कियों के साथ आपत्तिजनक तस्वीरें देखीं, तो उसने उससे रिश्ता खत्म करने की कोशिश की। इस पर मधुर ने उसे आपत्तिजनक तस्वीरें वायरल करने की धमकी दी और अपनी इच्छा के अनुसार काम करवाता रहा।
बाद में डिंपल को पता चला कि मधुर साहू के सलमा सुल्ताना सहित कई दूसरी लड़कियों से भी संबंध थे। गवाह ने बताया कि सलमा सुल्ताना और मधुर शारदा विहार स्थित घर में लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे थे। सलमा को भी मधुर की इन गतिविधियों पर शक था, जिसके कारण दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था।

क्या है पूरा मामला
25 साल की सलमा सुल्ताना कुसमुंडा के एसईसीएल कॉलोनी में रहती थी। वो धीरे-धीरे न्यूज के फील्ड में अपने पांव जमाने की कोशिश कर रही थी। उसका करियर तो परवान चढ़ ही रहा था, साथ ही जिम ट्रेनर मधुर साहू के साथ उसकी नजदीकियां भी। इसके बाद अचानक 2018 से वो लापता हो गई। यहां तक कि 20 जनवरी 2019 को जब उसके पिता की मौत हुई, तो उसमें भी वो शामिल नहीं हुई।

प्रेमी जिम ट्रेनर मधुर साहू और उसके दो सहयोगी गिरफ्तार किए गए हैं।
युवती लापता, परिजनों ने जिम ट्रेनर पर जताया संदेह
युवती की स्कूटी स्टेशन पर मिली थी, वहीं उसका मोबाइल स्विच ऑफ था। उससे संपर्क करने की हर कोशिश नाकाम हो गई। इसके बाद परिजनों को किसी अनहोनी की आशंका हुई और उन्होंने थाने में गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया। परिजन ने पुलिस अधिकारियों से खोजबीन की गुहार लगाते हुए जिम संचालक मधुर साहू पर संदेह जताया था, लेकिन पूछताछ में मधुर साहू पुलिस को गुमराह कर देता था।

पुलिस ने कोहड़िया मार्ग पर फोरलेन के आसपास खुदाई शुरू की थी।
पार्टनर ने खोला हत्याकांड का राज
कई साल तक सलमा का किसी को पता नहीं चला तो मधुर साहू का एक राजदार भी ओवर कॉन्फिडेंस में आ गया था। उसने नशे में मधुर के पार्टनर के सामने सलमा हत्याकांड का राज खोल दिया था। मधुर और उसके पार्टनर का भी लेनदेन को लेकर विवाद चल रहा था।
लेनदेन को लेकर हुए विवाद के बाद पार्टनर ने मधुर को सबक सिखाने के लिए पुलिस के पास पहुंचकर हत्याकांड का राज खोल दिया। पुलिस के एक अधिकारी के मुताबिक तब एक बैंक से सलमा के नाम से लोन होने और अब तक उसकी किस्त जमा होने का पता चला।

खुदाई में सैटेलाइट इमेज, स्क्रीनिंग मशीन, थर्मल इमेजिंग और ग्राउंड पेनेट्रेशन रडार मशीन का भी सहारा लिया।
पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई तो मधुर फरार हो गया। पुलिस ने उसके दोस्तों और परिचितों से बयान लिया। 5 साल पहले का सीडीआर एनालिसिस किया, जिसमें अक्टूबर 2018 में शारदा विहार के एक मकान में मधुर साहू और सहयोगी ट्रेनर कौशल श्रीवास ने सलमा का गला घोंटकर हत्या करने और लाश को अतुल शर्मा की मदद से कोहड़िया पुल के आसपास दफनाने का पता चला।
इसके बाद पुलिस ने कोहड़िया मार्ग पर फोरलेन के आसपास खुदाई शुरू की थी।

मुख्य आरोपी मधुर साहू ने बताया कि पैसों के लेनदेन और चरित्र शंका में एंकर की हत्या की गई।
साल 2023 में सैटेलाइट इमेज, स्क्रीनिंग मशीन, थर्मल इमेजिंग और ग्राउंड पेनेट्रेशन रडार मशीन का सहारा लिया। इसके बाद सड़क को खोदकर सलमा का कंकाल बरामद किया गया। डीएनए जांच से पुष्टि हुई कि यह कंकाल सलमा का ही था। इसके बाद पुलिस ने मधुर साहू और उसके साथियों को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी मधुर ने बताया कि पैसों के लेनदेन और चरित्र शंका में एंकर की हत्या की गई। आरोपी के पास से हार्ड डिस्क और लैपटॉप जब्त किया गया है। इसकी जांच में कुछ ऑडियो क्लिप के बारे में पता चला। जिस वाहन का इस्तेमाल लाश को दफनाने में किया गया था, उसे भी जब्त किया जा चुका है।

स्थानीय केबल चैनल में एंकर थी सलमा सुल्ताना। 2018 में हुई थी लापता।
सलमा ने यूनियन बैंक से लिया था लोन
मार्च 2023 में राज्य स्तरीय ऑपरेशन मुस्कान में गुम इंसान महिलाओं और बच्चों का पता लगाने के लिए अभियान चलाया जा रहा था। इसी कड़ी में थाना कुसमुंडा के गुम इंसान सलमा सुल्ताना की केस डायरी की भी बारीकी से जांच की गई। परिजनों का बयान लेने पर पता चला कि यूनियन बैंक से सुल्ताना ने लोन लिया था। इस संबंध में यूनियन बैंक से पुलिस ने जानकारी ली, तो पता चला कि लोन की EMI समय पर भरी जा रही है।
यह पैसा EMI के तौर पर गंगाश्री जिम का मालिक और इंस्ट्रक्टर मधुर साहू भर रहा था। पुलिस ने जांच तेज की, तो मधुर साहू फरार हो गया। इसके बाद सलमा के दोस्तों और परिचितों का बयान भी लिया गया। साथ ही उसके 5 साल पहले का सीडीआर एनालिसिस भी किया गया।

गंगाश्री जिम का मालिक और इंस्ट्रक्टर है मधुर साहू।
पूछताछ में 2 महिलाओं औ 3 पुरुषों के बयान में विरोधाभाष मिलने पर पुलिस ने इन्हें हिरासत में ले लिया। सबसे कड़ाई से पूछताछ करने पर हत्याकांड का राज खुल गया। 21 अक्टूबर 2018 एलजी 17 शारदा विहार में मधुर साहू और कौशल श्रीवास के द्वारा सलमा सुल्ताना की गला घोंटकर हत्या करने का पता चला।

कोरबा
आबकारी एक्ट में युवक गया जेल,कुछ घंटे बाद मां की मौत:पैरोल पर अंतिम संस्कार में शामिल हुआ बेटा
Published
13 hours agoon
February 11, 2026By
Divya Akashकोरबा। कोरबा में आबकारी एक्ट के तहत गिरफ्तार किए गए युवक अरुण उर्फ गोविंदा श्रीवास को जेल भेजे जाने के कुछ ही घंटों बाद उसकी मां सावित्री श्रीवास (45) की मौत हो गई। मां सावित्री श्रीवास सीतामणी वार्ड नंबर 10, शनि मंदिर के पास रहती थी और बताया जा रहा है कि वह पहले से बीमार थी। पुलिस ने मंगलवार शाम को गोविंदा को जेल भेजा था।
बुधवार सुबह घटना की जानकारी मिलने पर बस्ती के लोग और वार्ड पार्षद बड़ी संख्या में गोविंदा के घर पहुंचे। उन्होंने अरुण उर्फ गोविंदा श्रीवास को पैरोल पर रिहा करने और मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने देने की मांग की। इस मांग को लेकर वार्डवासी एसपी कार्यालय पहुंचे और पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई।

आरोपी पैरोल पर हुआ रिहा, मां की अंतिम यात्रा में हुआ शामिल
पुलिस अधीक्षक से गुहार के बाद कोर्ट से अरुण उर्फ गोविंदा को पैरोल पर रिहा किया गया। वह अपनी मां की अंतिम यात्रा में शामिल हुआ और मोती सागर स्थित मुक्तिधाम पहुंचा। इस दौरान मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद था।
इस मामले पर वार्ड के पूर्व पार्षद सुफल दास महंत ने घटना को दुखद बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य मार्ग पर खुलेआम शराब बेची जा रही है और गोविंदा के खिलाफ हुई कार्रवाई की जांच होनी चाहिए।

आरोपी के खिलाफ आबकारी एक्ट में हुई थी कार्रवाई
कोरबा सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि गोविंदा के खिलाफ आबकारी एक्ट की धारा 34/2 के तहत कार्रवाई की गई थी और उसे जेल भेजा गया था। परिजनों की पैरोल की मांग पर उसे जेल से लाकर मां के अंतिम संस्कार में शामिल कराया गया।
सीएसपी ने यह भी बताया कि सीतामणी में कुछ दिनों पहले हुई चाकूबाजी की घटना के बाद पुलिस नशे की प्रवृत्ति को कम करने के लिए अभियान चला रही है। इसी क्रम में उस दिन तीन लोगों को आबकारी एक्ट के तहत जेल भेजा गया था।

छत्तीसगढ़
गरियाबंद : दुर्लभ हॉर्नबिल संरक्षण की विशेष पहल :उदंती-सीतानदी में विकसित हो रहे प्राकृतिक उद्यान
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13 hours agoon
February 11, 2026By
Divya Akash
गरियाबंद। हॉर्नबिल दुनिया के सबसे आकर्षक और अनोखे पक्षियों में से एक हैं। इनका विशाल आकार, बड़ी चोंच, आकर्षक और रंगीन पंखुड़ियाँ और आमतौर पर शोरगुल भरा व्यवहार इन्हें हर जगह आसानी से पहचान दिलाते हैं। इनके घोंसला बनाने की विचित्र आदतें भी कई विशेषताओं में से एक हैं जो हॉर्नबिल को इतना दिलचस्प बनाती हैं। छत्तीसगढ के उदंती-सीतानदी में दुर्लभ मालाबार पाइड हॉर्नबिल पक्षियों के संरक्षण के लिए विशेष प्राकृतिक उद्यान विकसित किए जा रहे हैं, जिन्हें “हॉर्नबिल रेस्टोरेंट” के रूप में तैयार किया जाएगा।
हॉर्नबिल को जंगल का किसान मानते हुए उनके विलुप्त होने के जोखिम को कम करने के लिए आवश्यक हैं कि हॉर्नबिल प्रजातियों के लिए घोंसलों की निगरानी, कृत्रिम घोंसले लगाने, अनुसंधान और स्थानीय समुदाय की भागीदारी (घोंसला गोद लेने का कार्यक्रम) के माध्यम से संरक्षण कार्य किया जाए। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में एक नई पहल कर रहा है।
यह रेस्टोरेंट किसी प्रकार का कृत्रिम निर्माण नहीं होगा, बल्कि जंगल और आसपास के क्षेत्रों में फलदार वृक्षों का प्राकृतिक समूह विकसित किया जाएगा। इसके अंतर्गत पीपल, बरगद तथा फाइकस प्रजाति के पौधे लगाए जाएंगे, जिनके फल हॉर्नबिल पक्षियों का प्रमुख आहार हैं। इस पहल का उद्देश्य इन पक्षियों को पूरे वर्ष प्राकृतिक भोजन उपलब्ध कराना और उनके सुरक्षित आवास को बढ़ावा देना है। हॉर्नबिल को घोंसला बनाने के लिए जरूरी पेड़ों को लगाने और उनकी निगरानी करने के प्रयास।
उल्लेखनीय है कि सामान्यतः पश्चिमी घाट क्षेत्र में पाए जाने वाले ये पक्षी अब उदंती-सीतानदी की अनुकूल जलवायु और हरियाली के कारण यहां अधिक संख्या में दिखाई देने लगे हैं। पहले जहां इनका दर्शन कभी-कभार होता था, वहीं अब सप्ताह में दो से तीन बार इनकी उपस्थिति दर्ज की जा रही है। हॉर्नबिल पक्षियों को “फॉरेस्ट इंजीनियर” या जंगल का प्राकृतिक माली भी कहा जाता है, क्योंकि ये फल खाने के बाद बीजों को दूर-दूर तक फैलाते हैं, जिससे वनों का प्राकृतिक विस्तार होता है। समुद्र तल से लगभग 800 से 1000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित उदंती-सीतानदी का पहाड़ी क्षेत्र इन पक्षियों के लिए उपयुक्त आवास सिद्ध हो रहा है।
इन दुर्लभ पक्षियों की सुरक्षा और निगरानी के लिए विशेष ट्रैकिंग टीमें गठित की गई हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के साथ स्थानीय प्रशिक्षित युवाओं को भी इसमें शामिल किया गया है, जो घोंसलों की सुरक्षा और नियमित निगरानी का कार्य कर रहे हैं। साथ ही ड्रोन तकनीक के माध्यम से शिकार गतिविधियों और वनाग्नि पर भी नजर रखी जा रही है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ईको-टूरिज्म को भी बढ़ावा देगी, जिससे पर्यटक प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित दूरी से इन दुर्लभ पक्षियों को देख सकेंगे और क्षेत्र की जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।


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