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मोदी ने नए प्रधानमंत्री ऑफिस सेवा तीर्थ का उद्घाटन किया:बिल्डिंग पर लिखा है- नागरिक देवो भव

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नई दिल्ली,एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘सेवा तीर्थ’ कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया। इसमें अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सचिवालय (NSCS) और कैबिनेट सचिवालय काम करेंगे। PMO आज से रायसीना हिल स्थित साउथ ब्लॉक से सेवा तीर्थ में शिफ्ट हो जाएगा।

उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री ने नए कॉम्प्लेक्स में लगी ‘सेवा तीर्थ’ की पट्टिका का अनावरण किया। परिसर की दीवार पर देवनागरी लिपि में ‘सेवा तीर्थ’ लिखा है। इसके नीचे ‘नागरिक देवो भव’ (नागरिक भगवान के समान हैं) का मंत्र भी लिखा गया है।

न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार, PM सेवा तीर्थ से एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। इसके अलावा, वे पुराने PM ऑफिस में केंद्रीय कैबिनेट की विशेष बैठक भी करेंगे। यह बैठक शुक्रवार शाम 4 बजे तय है।

यह ब्रिटिश काल की सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग में आखिरी कैबिनेट बैठक होगी। प्रधानमंत्री का ऑफिस 1947 से साउथ ब्लॉक में रहा है। ये इमारत करीब 78 सालों से देश की सत्ता का केंद्र रही है। 2014 से, मोदी सरकार ने ब्रिटिश शासकों के प्रतीकों से दूर जाने के लिए लगातार कदम उठाए हैं।

नए PMO के उद्घाटन की तस्वीरें…

सेवा तीर्थ कॉम्प्लेक्स की दीवार पर 'नागरिको देवो भव' लिखा है।

सेवा तीर्थ कॉम्प्लेक्स की दीवार पर ‘नागरिको देवो भव’ लिखा है।

PM मोदी ने नए ऑफिस में भगवान गणेश की प्रतिमा पर माला चढ़ाई।

PM मोदी ने नए ऑफिस में भगवान गणेश की प्रतिमा पर माला चढ़ाई।

PM ने X पर लिखा- सेवा तीर्थ कर्तव्य, करुणा और 'भारत सर्वोपरि' के सिद्धांत का प्रतीक है।

PM ने X पर लिखा- सेवा तीर्थ कर्तव्य, करुणा और ‘भारत सर्वोपरि’ के सिद्धांत का प्रतीक है।

PM ने नए ऑफिस में कई फाइलों पर साइन किए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए PMO कॉम्प्लेक्स ‘सेवा तीर्थ’ में महिलाओं, युवाओं और कमजोर वर्गों से जुड़े अहम फैसलों की फाइलों पर साइन किए। सरकार के अनुसार, इन फैसलों का उद्देश्य इन वर्गों को सीधा लाभ पहुंचाना है।

प्रधानमंत्री ने PM राहत योजना से जुड़ी फाइलों पर भी साइन किए। इस पहल के तहत, एक्सीडेंड पीड़ितों को ₹1.5 लाख तक का कैशलेस ट्रीटमेंट मिलेगा, जिससे उनके इलाज में देरी न हो। साथ ही लखपति दीदी योजना का लक्ष्य दोगुना कर 3 करोड़ से छह करोड़ करने का निर्णय लिया गया।

प्रधानमंत्री ने कृषि अवसंरचना कोष के आवंटन को 1 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2 लाख करोड़ रुपये करने की मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री ने 10,000 करोड़ रुपये के कोष के साथ स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 को मंजूरी दी है।

अधिकारियों के अनुसार, PM मोदी ने सेवा भावना को दर्शाने वाले फैसलों से जुड़ी फाइलों पर साइन किए हैं।

अधिकारियों के अनुसार, PM मोदी ने सेवा भावना को दर्शाने वाले फैसलों से जुड़ी फाइलों पर साइन किए हैं।

सेवा तीर्थ कॉम्पलेक्स में कुल 3 इमारतें

सेवा तीर्थ कॉम्पलेक्स में कुल 3 इमारतें हैं- सेवा तीर्थ-1, सेवा तीर्थ-2 और सेवा तीर्थ-3। सेवा तीर्थ-1 में PMO है। सेवा तीर्थ-2 में कैबिनेट सचिवालय और सेवा तीर्थ-3 में NSCS और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का ऑफिस है। ये सभी ऑफिस पहले अलग-अलग जगहों पर थे।

कैबिनेट सचिवालय सितंबर 2025 में ही सेवा तीर्थ-2 में शिफ्ट हो चुका है। आज PMO के साथ NSCS और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का ऑफिस भी यहां शिफ्ट हो गया है। PM आज कर्तव्य भवन-1 और 2 का उद्घाटन भी करने वाले हैं। यहां मंत्रालयों के नए ऑफिस होंगे। पहले नॉर्थ ब्लॉक मंत्रालयों का ठिकाना था।

PMO और मंत्रालयों का पता 13 फरवरी को बदला है। 1931 में इसी दिन नई दिल्ली का भारत की आधुनिक राजधानी के रूप में उद्घाटन हुआ था।

1189 करोड़ की लागत से बना सेवा तीर्थ

सेवा तीर्थ का मतलब है ‘सेवा का स्थान’। पहले इसका नाम ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ रखा गया था, लेकिन 2 दिसंबर 2025 में इसका नाम बदलकर सेवा तीर्थ रखा गया। यह नई दिल्ली में दारा शिकोह रोड पर एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव में स्थित है।

यह करीब 2.26 लाख वर्ग फीट (करीब 5 एकड़) में बना है। इसे एल एंड टी कंपनी ने 1189 करोड़ में बनाया है। नए PMO के पास ही प्रधानमंत्री का नया आवास भी बन रहा है। इसके तैयार होने के बाद प्रधानमंत्री 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित मौजूदा आवास से नए आवास में शिफ्ट हो जाएंगे। हालांकि, अभी इसकी तारीख सामने नहीं आई है।

कर्तव्य भवन-1 और 2 में वित्त-रक्षा सहित कई मंत्रालय

वहीं कर्तव्य भवन-1 और 2 में वित्त मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, विधि एवं न्याय मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय और जनजातीय कार्य मंत्रालय सहित कई प्रमुख मंत्रालयों को जगह दी गई है।

इससे पहले गृह मंत्रालय लुटियंस दिल्ली के रायसीना हिल्स स्थित नॉर्थ ब्लॉक परिसर से जनपथ में बनी कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (CCS) बिल्डिंग में शिफ्ट हो चुका है। गृह मंत्रालय को नए कॉम्प्लेक्स में 347 कमरे आवंटित किए गए हैं। करीब 90 सालों से देश का गृह मंत्रालय नॉर्थ ब्लॉक से ही संचालित हो रहा था।

सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का हिस्सा

सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन-1, 2 का निर्माण सेंट्रल विस्टा रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत किया गया है। इसी प्रोजेक्ट के तहत नया संसद भवन और कर्तव्य पथ बनाए गए हैं। कर्तव्य पथ के दोनों तरफ के इलाके को सेंट्रल विस्टा कहते हैं। सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत राष्ट्रपति भवन से लेकर इंडिया गेट तक कई इमारतों का री-डेवलपमेंट और कंस्ट्रक्शन शामिल है।

कर्तव्य भवन-1 और 2 में डिजिटल और पर्यावरण-अनुकूल सुविधाएं

कर्तव्य भवन-1 और 2 बिल्डिंग में डिजिटल तकनीकों से लैस ऑफिस, जनता से सीधे संपर्क के लिए पब्लिक एरिया और सेंट्रलाइज्ड रिसेप्शन की व्यवस्था है। सरकार का कहना है कि इससे मंत्रालयों के बीच तालमेल, कामकाज की स्पीड और लोगों की भागीदारी बेहतर होगी।

बिल्डिंग्स को 4-स्टार GRIHA मानकों के अनुसार डिजाइन किया गया है। इनमें रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम, वाटर कन्जर्वेशन सिस्टम, वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम और एनर्जी एफिशिएंट कंस्ट्रक्शन टेक्निक्स का इस्तेमाल किया गया है।

इनसे पर्यावरण पर असर कम पड़ेगा और कामकाज की क्वालिटी बढ़ेगी। इन कैंपस में स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल सिस्टम, सर्विलांस नेटवर्क और एडवांस एमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम जैसी सुरक्षा सुविधाएं भी शामिल हैं। इससे अधिकारियों और विजिटर्स के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित मौहाल रहेगा।

6 अगस्त 2025 : PM ने कर्तव्य भवन-3 का उद्घाटन किया था

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 अगस्त 2025 को कर्तव्य पथ पर कर्तव्य भवन-3 बिल्डिंग का उद्घाटन किया था। इसमें गृह, विदेश, ग्रामीण विकास, एमएसएमई, पेट्रोलियम और प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के ऑफिस हैं।

कर्तव्य भवन-3 कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (CCS) की पहली बिल्डिंग है। CCS में कुल 10 ऑफिस बिल्डिंग और एक कन्वेंशन सेंटर शामिल है।

नॉर्थ-साउथ ब्लॉक बनेंगे नेशनल म्यूजियम

सरकार की योजना है कि नॉर्थ-साउथ ब्लॉक की ऐतिहासिक इमारतों को ‘युगे-युगेन भारत नेशनल म्यूजियम’ में बदला जाएगा। इसे विश्वस्तरीय म्यूजियम के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां भारत की सभ्यता को दिखाया जाएगा।

इसमें करीब 25 से 30 हजार कलाकृतियां प्रदर्शित की जाएंगी। यह दुनिया के सबसे बड़े म्यूजियम में से एक होने की संभावना है।

सरकार का दावा- पुरानी बिल्डिंग्स में मेंटेनेंस खर्च ज्यादा

सरकार के मुताबिक, कई दशकों से केंद्र सरकार के कई प्रमुख मंत्रालय और ऑफिस सेंट्रल विस्टा एरिया में अलग-अलग और पुराने बिल्डिंग में काम कर रहे थे। इससे कामकाज में तालमेल की दिक्कतें, संचालन में देरी, रखरखाव का बढ़ता खर्च और कर्मचारियों के लिए बेहतर कार्य वातावरण की कमी जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं।

इसलिए नए बिल्डिंग कॉम्पलेक्स के जरिए इन सभी दिक्कतों को दूर करने की कोशिश की गई है। अब प्रशासनिक कार्यों को एक ही जगह आधुनिक और भविष्य के अनुरूप सुविधाओं के साथ संचालित किया जाएगा।

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माल्या बोले- ब्रिटेन छोड़ने पर रोक, भारत कैसे लौटूं:सोचता हूं कॉकरोच बन जाऊं, 10 साल से लंदन में, बैंकों के करीब रू.9,000 करोड़ के कर्जदार

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लंदन/नई दिल्ली, एजेंसी। लंदन में रह रहे कारोबारी विजय माल्या ने बुधवार देर रात फिर भारत सरकार पर अन्याय करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में चल रही कानूनी प्रक्रिया के कारण वे भारत नहीं लौट पा रहे हैं।

माल्या ने दावा किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में माना है कि उनकी रू.14,000 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति से बैंकों को वसूली हुई है। यह रकम उन बैंकों को लौटाई गई, जिनका पैसा किंगफिशर एयरलाइंस के कर्ज के रूप में बकाया था।

विजय माल्या पर किंगफिशर एयरलाइंस के लिए SBI समेत कई बैंकों से करीब रू.9,000 करोड़ का कर्ज लेने और उसे नहीं चुकाने का आरोप है।

बैंकों का कर्ज नहीं चुकाने और CBI-ED की जांच के बीच 2 मार्च 2016 यानी 10 साल 6 महीने पहले पहले वे माल्या भारत छोड़कर ब्रिटेन चले गए। बाद में उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया गया था।

माल्या का दावा- ED ने बैंकों को 14 हजार करोड़ लौटाए

माल्या ने बुधवार देर रात भी X पर कई पोस्ट किए। इनमें उन्होंने हाल के कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनों का जिक्र किया और कहा कि उनके साथ अब भी अन्याय हो रहा है।

विजय ने एक पोस्ट में यह भी कहा, “मेरे साथ हो रहे अन्याय को देखते हुए मुझे लगता है कि मुझे कॉकरोच बन जाना चाहिए। शायद कॉकरोच बनकर बेहतर जिंदगी जी सकूं। मैं भगोड़ा नहीं हूं। ब्रिटेन की कानूनी प्रक्रिया ने मुझे भारत लौटने से रोक रखा है।”

माल्या ने ED की ओर से बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल बताए गए हलफनामे का एक हिस्सा साझा किया। उन्होंने दावा किया कि उसमें उनसे 14,131.60 करोड़ रुपए की वसूली का जिक्र है।

उन्होंने लिखा, “बॉम्बे हाईकोर्ट में ED की ओर से दाखिल हलफनामा। पैराग्राफ 7 में तय कर्ज है और पैराग्राफ 17 में 2021 में वसूल किए गए 14,131.60 करोड़ रुपए दिखाए गए हैं।”

माल्या ने कहा, “पांच साल बाद भी मुझे ऐसा व्यक्ति बताया जा रहा है, जिसने बैंकों को धोखा दिया। मुझे गलत तरीके से भगोड़ा बताया गया है।” उन्होंने वसूली का लेखा-जोखा दिखाने वाली एक टेबल भी शेयर की।

उन्होंने लिखा, “जो लोग निष्पक्ष और सही हिसाब-किताब पर भरोसा करते हैं, वे यह तालिका देखें। क्या मीडिया की ओर से मुझे इस तरह निशाना बनाया जाना और किसी पत्रकार की स्क्रिप्ट की शुरुआत में ही मुझे धोखेबाज कहना सही है? यह पूछना शुरू क्यों नहीं किया जाता कि मुझे मेरा रिफंड कब मिलेगा।”

मार्च 2016 में देश छोड़कर गए थे, 2019 में भगोड़ा घोषित

माल्या मार्च 2016 में यूके चले गए थे। इसके बाद साल 2019 में अधिकारियों ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (FEOA) के तहत उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया था।

इस कानून के तहत प्राधिकारियों को संपत्तियों को जब्त करने का अधिकार मिला है। भारत सरकार लगातार यूके से उनके प्रत्यर्पण की कोशिश कर रही है।

क्या है भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम

भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (FEOA) कानून उन आर्थिक अपराधियों पर नकेल कसने के लिए बनाया गया है जो भारतीय अदालतों की कार्रवाई और गिरफ्तारी से बचने के लिए देश छोड़कर भाग जाते हैं।

इस कानून के तहत अदालतों को मामले की सुनवाई पूरी होने से पहले ही आरोपी की देश और विदेश में मौजूद संपत्तियों को अटैच यानी जब्त करने और उन्हें नीलाम/बेचकर बैंकों का बकाया वसूलने का अधिकार मिलता है।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने फरवरी में दी थी अंतिम मोहलत

इस साल फरवरी में बॉम्बे हाईकोर्ट ने विजय माल्या को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि जानबूझकर अदालती कार्यवाही से बचने वाला व्यक्ति न्यायसंगत राहत की मांग नहीं कर सकता।

कोर्ट ने माल्या से कहा था कि यह आखिरी मौका है, वे बताएं कि भारत लौटना चाहते हैं या नहीं। माल्या ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून और उन्हें भगोड़ा घोषित किए जाने को चुनौती दी है।

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भारत ने नेपाल के लिए 8वीं राहत खेप भेजी:35 टन राहत सामग्री काठमांडू पहुंची, बाढ़ में अब तक 1367 शव बरामद

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काठमांडू/नई दिल्ली, एजेंसी। नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद भारत ने 35 टन राहत और बचाव सामग्री की 8वीं खेप भेजी। भारतीय वायुसेना का विमान बुधवार को काठमांडू पहुंचा। इसके साथ भारत अब तक 130 टन से ज्यादा राहत सामग्री भेज चुका है।

खेप में टेंट, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप, दवाएं और रेस्क्यू उपकरण शामिल हैं। भारत ने राहत अभियान 26 अगस्त को शुरू किया था।

नेपाल पुलिस के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक 1367 शव बरामद हुए हैं। 102 शवों की पहचान हो चुकी है। पहचान के लिए DNA सैंपल जुटाए जा रहे हैं और भारत समेत कई देशों के फोरेंसिक विशेषज्ञ मदद कर रहे हैं।

नेपाल त्रासदी से जुड़ी तस्वीरें…

नेपाल के नुवाकोट जिले के देवीघाट में फ्लैश फ्लड और भूस्खलन के बाद कीचड़ से दबे मकान।

नेपाल के नुवाकोट जिले के देवीघाट में फ्लैश फ्लड और भूस्खलन के बाद कीचड़ से दबे मकान।

हादसे में जान गंवाने वाले रिश्तेदार की फोटो देखते परिजन। ये तस्वीरें मार्चुरी के बाहर लगाई गई हैं।

हादसे में जान गंवाने वाले रिश्तेदार की फोटो देखते परिजन। ये तस्वीरें मार्चुरी के बाहर लगाई गई हैं।

चिलिमे टनल में 105 मीटर तक पहुंची नेपाली-भारतीय सेना की टीम

रसुवा जिले के चिलिमे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में नेपाली और भारतीय सेना की टीम मिलकर सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है। टीम अब तक सर्विस टनल के अंदर करीब 105 मीटर तक पहुंच गई है।

प्रोजेक्ट तक जाने वाली सड़क से मलबा हटाने का काम भी चल रहा है। प्रभावित इलाके के दोनों तरफ आने-जाने के लिए रोप लाइन लगा दी गई है।

बाढ़ आने के दिन ही नेपाली सेना की टीम मौके पर पहुंच गई थी। टीम ने पहले इलाके का जायजा लिया और फिर टनल के मुहाने से मिट्टी और मलबा हटाकर अंदर गई। यहां से दो लोगों के शव बरामद किए गए।

रेस्क्यू ऑपरेशन को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए मौके पर मौजूद एक्सकेवेटर के साथ बॉबकैट एक्सकेवेटर भी लगातार मलबा हटाने और खुदाई में लगाया गया है।

नेपाल में रेस्क्यू से जुड़ी तस्वीरें…

नेपाल बाढ़ में AI से शवों की पहचान की कोशिश

नेपाल में भोटेकोशी नदी की बाढ़ के बाद लापता लोगों और अज्ञात शवों की पहचान के लिए FaceTagr AI तकनीक की मदद ली जा रही है। यह तस्वीरों और वीडियो में चेहरों का मिलान कर लापता लोगों से संभावित मैच तलाशती है।

FaceTagr हजारों रिकॉर्ड में से 5-10 संभावित मैच सामने लाता है। परिवार इन मैचों को देख सकते हैं, जबकि अंतिम पहचान नेपाल पुलिस या संबंधित सरकारी एजेंसियां करती हैं।

FaceTagr से जुड़े समीर पंथी के मुताबिक, अब तक करीब 500 लापता लोगों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। सिस्टम ने करीब 90 शवों की पहचान में मदद की है। हालांकि, यह नेपाल पुलिस के कुल आधिकारिक पहचान आंकड़े से अलग है।

रेस्क्यू और फोरेंसिक मदद के लिए 54 विशेषज्ञ नेपाल भेजे

भारत ने राहत सामग्री के साथ 54 विशेषज्ञों को भी नेपाल भेजा है। इनमें टनल रेस्क्यू और फोरेंसिक विशेषज्ञ शामिल हैं।

विशेष रेस्क्यू टीम नेपाली सेना के साथ चिलिमे और लांगटांग में अभियान चला रही है, जबकि फोरेंसिक विशेषज्ञ काठमांडू की दो लैब में DNA जांच में मदद कर रहे हैं।

भारत ने इसके लिए DNA किट, रिऐजेंट और प्रोफाइलिंग उपकरण भी उपलब्ध कराए हैं।

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मुंबई-गोवा हाईवे में देरी पर गडकरी बोले- शर्म आती है:उद्धाटन में नहीं जाऊंगा, 2016 में कम्पलीट होना था, अब तक 94% काम हुआ

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पणजी, एजेंसी। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, ‘मुझे मुंबई-गोवा हाईवे के चौड़ीकरण में हो रही देरी को लेकर शर्मिंदगी महसूस होती है। ये काम 2016 तक पूरा होना था, लेकिन 15 साल में सिर्फ 94% ही पूरा हुआ है।’

गडकरी ने यह बात बुधवार को पणजी में छह लेन वाले एलिवेटेड रोड कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह में कही। उन्होंने कहा, ‘हाईवे का काम पूरा होने के बाद मैं इसके उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल नहीं होऊंगा। मैं ऐसे ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने का रिकॉर्ड बनाना चाहता हूं।’

गडकरी ने इस साल 22 जुलाई को राज्यसभा में बताया था कि पिछले 3 साल में नेशनल हाईवे निर्माण में खराब गुणवत्ता वाले काम के लिए 103 ठेकेदार और कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया गया और उन पर जुर्माना लगाया गया।

मुंबई-गोवा हाईवे: 15 साल से काम चल रहा, कई जगह गड्ढे

मुंबई-गोवा हाईवे का चौड़ीकरण का काम 2011 में शुरू हुआ था। इसके बाद भी यह अब तक पूरा नहीं हुआ है। 440 किलोमीटर लंबे इस हिस्से में काम पूरा होने के बावजूद कई जगह सड़क पर गड्ढे, पानी भरने, मरम्मत और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।

हाईवे पर मई में खारपाड़ा टोल प्लाजा पर टोल लेना शुरू किया गया था। इसके बावजूद परियोजना के कुछ हिस्सों में काम और सुधार जारी है। हाईवे पर बंदरों के लिए 2021 में बनाया गया एक ओवरपास भी ढह चुका है, जिससे सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं।

हाईवे का काम 2016 तक पूरा होना था

मुंबई-गोवा हाईवे का काम पहले 2016 तक पूरा किया जाना था। जमीन अधिग्रहण, निर्माण से पहले की मंजूरियों और ठेकेदारों से जुड़ी समस्याओं के कारण काम में लगातार देरी हुई।

2024 में केंद्र सरकार ने भी संसद में बताया था कि जमीन अधिग्रहण और कुछ ठेकेदारों की आर्थिक दिक्कतों के कारण परियोजना में देरी हुई।

यह हाईवे मुंबई को कोंकण के रास्ते गोवा से जोड़ता है। इसका महाराष्ट्र वाला हिस्सा करीब 460 किलोमीटर है। परियोजना का यह मार्ग पर्यटन और स्थानीय कारोबार के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

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