छत्तीसगढ़
सहायक-शिक्षक भर्ती…डीएड कैंडिडेट्स ने की आत्मदाह की कोशिश:कई हॉस्पिटलाइज्ड, पुलिस के साथ झड़प, बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को पकड़कर सेंट्रल जेल लाया गया
रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के तहत रिक्त 1600 आदिवासी पदों पर तत्काल नियुक्ति की मांग तेज हो गई है। बुधवार को कैंडिडेट्स ने आत्मदाह करने की कोशिश की। इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ अभ्यर्थियों की झड़प भी हुई है।
आंदोलन के दौरान अब तक 200 से अधिक युवाओं की तबीयत बिगड़ चुकी है। जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। प्रदर्शन के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को पकड़कर सेंट्रल जेल लाया गया है।
इससे पहले पीड़ित अभ्यर्थियों ने राष्ट्रपति, राज्यपाल रामेन डेका, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को स्पीड पोस्ट के माध्यम से पत्र भेजकर हस्तक्षेप की गुहार लगाई थी। बता दें कि कोर्ट के आदेश के बावजूद नियुक्ति नहीं होने से आक्रोशित आदिवासी अभ्यर्थी और उनके परिजन 24 सितंबर से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं।

आंदोलन के दौरान अब तक 200 से अधिक युवाओं की तबीयत बिगड़ चुकी है।
2300 पदों में 1600 आदिवासी, फिर भी नियुक्ति नहीं
अभ्यर्थियों का कहना है कि, सहायक शिक्षक भर्ती 2023 में कुल 2300 पद थे। जिनमें से लगभग 1600 पद अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित थे। इसके बावजूद अभी तक इन पदों पर नियुक्ति नहीं की गई है। आदिवासी समाज का आरोप है कि, यह स्थिति तब है, जब राज्य में आदिवासी मुख्यमंत्री की सरकार है।
कोर्ट के आदेशों की अवहेलना का आरोप
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों के अनुसार, हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल 2024 और 26 सितंबर 2025, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 28 अगस्त 2024 को भर्ती से संबंधित स्पष्ट आदेश दिए थे। इसके बावजूद राज्य सरकार और शिक्षा विभाग आदेशों का पालन नहीं कर रहा है। जो न्यायालय की अवहेलना और संविधान के उल्लंघन के समान है।
अनशन के दौरान 200 से ज्यादा युवाओं की तबीयत बिगड़ी
आदिवासी अभ्यर्थियों का आमरण अनशन अब गंभीर मोड़ पर पहुंच चुका है। आंदोलन के दौरान अब तक 200 से अधिक युवाओं की तबीयत बिगड़ चुकी है। जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। कई अभ्यर्थियों की स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है।

हजारों की संख्या में लेटर स्पीड पोस्ट किए गए हैं।
सामाजिक-आर्थिक संकट का दावा
आदिवासी संगठनों का कहना है कि, वर्षों की पढ़ाई, प्रशिक्षण और पात्रता के बावजूद युवाओं को रोजगार से वंचित रखा जा रहा है। इससे आदिवासी परिवारों पर गंभीर सामाजिक और आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है।
ये हैं पीड़ितों की प्रमुख मांगें
- सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के तहत रिक्त 1600 आदिवासी पदों पर तत्काल नियुक्ति।
- हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पूर्ण और तत्काल पालन।
- आमरण अनशन पर बैठे अभ्यर्थियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार ले।
- नियुक्ति में देरी के लिए दोषी अधिकारियों पर जवाबदेही तय की जाए।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
आदिवासी संगठनों और अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि, यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक व उग्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

कोरबा
प्रगति नगर दीक्षा महिला समिति ने शुरू की प्याऊ सेवा
कोरबा/गेवरा/दीपका। भीषण गर्मी के बीच सामाजिक सरोकार निभाते हुए दीक्षा महिला समिति दीपका इकाई ने प्रगतिनगर में दो प्याऊ जल सेवा केंद्र की शुरुआत की है। भारतीय स्टेट बैंक परिसर व व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स परिसर में आम लोगों एवं राहगीरों के लिए इस सेवा का शुभारंभ किया गया, जिससे क्षेत्रवासियों को गर्मी में राहत मिलेगी।

समिति की यह पहल एसईसीएल के श्रद्धा महिला मंडल के सामाजिक कार्यों से प्रेरित होकर की गई है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग बैंकिंग एवं अन्य कार्यों के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में गर्मी के मौसम में शुद्ध पेयजल की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था लोगों के लिए काफी उपयोगी साबित होगी। समिति ने भीषण गर्मी को देखते हुए पेड़ों पर मिट्टी के बर्तनों में पक्षियों के लिए पानी और दाने की व्यवस्था की है।
वहीं पशुओं के लिए भी एक स्थान पर जल की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। कार्यक्रम के दौरान लोगों को गुड़-चना, फल, जलजीरा, आम पना, गुलाब शरबत, लस्सी और नींबू पानी का वितरण किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे और समिति के इस प्रयास की सराहना की। समिति की अध्यक्ष रंभा मिश्रा ने कहा कि भीषण गर्मी में राहगीरों को पानी के लिए भटकना न पड़े, इसी उद्देश्य से स्वच्छ, ठंडा और निर्मल पेयजल की व्यवस्था की गई है।

कोरबा
सेवानिवृत्त बिजली कर्मियों की ग्रेच्युटी में 20 लाख की धोखाधड़ी:कोरबा में संविदा कर्मी पर केस दर्ज, ब्लैंक चेक का मिसयूज कर रकम हड़पी
कोरबा। कोरबा में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की ग्रेच्युटी राशि में बड़े गबन का मामला सामने आया है। तुलसी नगर सब स्टेशन कार्यालय में कार्यरत संविदा कर्मी हरीश कुमार पर 20 लाख रुपए से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप है।
आरोप है कि हरीश कुमार ने कार्यपालन अभियंता (ईई-डी) से ब्लैंक चेक पर हस्ताक्षर करवाए। इसके बाद उसने चेक में अपना खाता नंबर भरकर राशि अपने खाते में जमा करा ली। इस तरह सेवानिवृत्त कर्मचारियों को मिलने वाली ग्रेच्युटी की रकम सीधे आरोपी के खाते में चली जाती थी।

प्रारंभिक जांच में अब तक छह सेवानिवृत्त कर्मचारियों से कुल 20 लाख 58 हजार 788 रुपए के गबन की पुष्टि हुई है। यह मामला तब सामने आया जब एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के खाते में ग्रेच्युटी की राशि जमा नहीं हुई और उसने कार्यालय में शिकायत की।
राशि ट्रांसफर और केस दर्ज
जांच में पता चला कि संबंधित राशि संविदा कर्मी के खाते में ट्रांसफर हो गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे कोतवाली थाना भेजा गया। पुलिस ने आरोपी हरीश कुमार के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
विभागीय कार्रवाई की तैयारी
विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है, जिसमें निलंबन के साथ बर्खास्तगी की तैयारी की जा रही है। इधर, संविदा कर्मी हरीश कुमार ने अपने बचाव में दावा किया है कि उसने यह कार्य कार्यपालन अभियंता (ईई-डी) के निर्देश पर किया था।
आरोपी का बचाव पक्ष
उसने इस संबंध में कंपनी के मुख्यालय रायपुर को पत्र भेजकर अपनी बात रखी है। विभागीय अधिकारी पूरे मामले की गहनता से जांच कर रहे हैं, ताकि गड़बड़ी में शामिल अन्य लोगों का पता लगाया जा सके।
बैंक लेनदेन और दस्तावेजों की जांच
पुलिस भी बैंक लेनदेन और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है। सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि तुलसी नगर स्थित विद्युत विभाग से 20 लाख रुपये के गबन की शिकायत मिली है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

छत्तीसगढ़
सुकमा : भटके कदमों को नई दिशा: सुकमा में पुनर्वास से विकास की कहानी लिख रही है सरकार
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पुनर्वास केंद्र का किया अवलोकन, पुनर्वासितों से किया आत्मीय संवाद
मोबाइल, आवास की चाबी और नियुक्ति पत्र का वितरण, ‘पुनर्वास से विकास तक’ कॉफी टेबल बुक का विमोचन


सुकमा। नक्सल आतंक से लंबे समय तक प्रभावित रहे सुकमा में अब शांति, विश्वास और विकास की नई तस्वीर उभर रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुकमा जिला मुख्यालय स्थित पुनर्वास केंद्र का दौरा कर वहां संचालित पुनर्वास एवं कौशल विकास गतिविधियों का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने पुनर्वासित लोगों से आत्मीय संवाद कर उनके अनुभव जाने और उन्हें मुख्यधारा से जुड़कर नया जीवन प्रारंभ करने के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार भटके हुए लोगों को मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें सम्मानजनक जीवन, रोजगार और आगे बढ़ने के समान अवसर देने के लिए दृढ़संकल्पित है। उन्होंने कहा कि पुनर्वासितों की आंखों में दिखता आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण है कि यदि सही अवसर और मार्गदर्शन मिले, तो हर भटका हुआ कदम नई दिशा और नया जीवन प्राप्त कर सकता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की प्रभावी नक्सल पुनर्वास नीति के चलते सुकमा सहित बस्तर क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। अब तक 2392 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय लिया है, जिनमें से 361 पुनर्वासितों ने नया जीवन प्रारंभ कर आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल पुनर्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि इन नागरिकों को सम्मानजनक जीवन, स्थायी रोजगार और समाज में बराबरी का अवसर प्रदान करना है। पुनर्वास केंद्र में राजमिस्त्री, कपड़ा सिलाई, कृषि उद्यमिता और वाहन चालक जैसे विभिन्न ट्रेडों में कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में अब तक 307 हितग्राहियों को प्रशिक्षण दिया गया है, वहीं मुख्यधारा में लौटे 313 युवाओं को प्रतिमाह 10 हजार रुपये का स्टाइपेंड भी प्रदान किया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा 107 पुनर्वासित हितग्राहियों को मोबाइल फोन वितरित किए गए हैं, जिससे वे डिजिटल और संचार माध्यमों से जुड़कर आधुनिक जीवनशैली की ओर अग्रसर हो सकें। विशेष रूप से 115 महिलाएं प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहयोग के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के आश्रितों को भी राहत प्रदान करते हुए अनुकंपा नियुक्ति के तहत पुलिस विभाग में 20 तथा जिला प्रशासन द्वारा 95 लोगों को शासकीय सेवा में रोजगार के अवसर दिए गए हैं।
कार्यक्रम के दौरान ग्राम ढोंडरा कोंटा निवासी मौसम संजना, नागारास जगरगुंडा निवासी भरत कुमार हेमला सहित अन्य हितग्राहियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त शिक्षा विभाग के अंतर्गत 10 नव नियुक्त शिक्षकों को भी नियुक्ति पत्र वितरित किए गए।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने पुनर्वासित हितग्राहियों को मोबाइल, राजमिस्त्री किट, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास की चाबियां तथा पूर्णता प्रमाण पत्र वितरित किए। इस अवसर पर 25 हितग्राहियों को आवास की चाबी सौंपकर उन्हें सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री ने नक्सल पुनर्वास की सफलता की प्रेरणादायक कहानियों को दर्शाती ‘बदलते सुकमा की बदलती तस्वीर: पुनर्वास से विकास तक’ कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। साथ ही, पुनर्वास केंद्र के कला केंद्र में कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन केवल भौतिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक बदलाव का भी प्रतीक है।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, सांसद बस्तर महेश कश्यप सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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