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छत्तीसगढ़

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लोकतंत्र सेनानी महावीर प्रसाद जैन के निधन पर जताया शोक

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जशपुर के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता और लोकतंत्र सेनानी महावीर प्रसाद जैन के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महावीर प्रसाद जैन ने अपने जीवन को समाजसेवा, राष्ट्रहित और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए समर्पित किया।आपातकाल के कठिन दौर में उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए साहसपूर्वक संघर्ष किया और अपने सिद्धांतों पर अडिग रहे। उस समय उनके द्वारा किया गया त्याग और समर्पण लोकतांत्रिक चेतना के प्रति उनकी अटूट निष्ठा का परिचायक है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्री जैन का जीवन समाज के लिए प्रेरणादायी रहा है। उनका योगदान सदैव स्मरण किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने ईश्वर से प्रार्थना की है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोक संतप्त परिवार को इस दुःख की घड़ी में संबल प्रदान करें।

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कोरबा

वेदांता बालको के योगदान से छत्तीसगढ़ में ग्रामीण आय के स्रोतों में हो रही बढ़ोत्तरी

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बालकोनगर। छत्तीसगढ़ को ‘भारत का धान का कटोरा’ कहा जाता है। धान यहां की मुख्य फसल है। टाटा-कॉर्नेल इंस्टीट्यूट के रिसर्च से पता चलता है कि खरीफ के मौसम में लगभग 85% कृषि भूमि का उपयोग धान उगाने के लिए किया जाता है। अधिकांश किसान बारिश पर निर्भर रहते हैं। यहां सिंचाई की सुविधाएँ बहुत कम हैं इस वजह से ग्रामीण आय केवल एक ही फसल चक्र पर निर्भर करती है। इससे किसान मौसम में होने वाले बदलावों, बढ़ती लागत और अन्य फसलें उगाने के सीमित विकल्पों के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं। कई छोटे और सीमांत किसानों के लिए पूरे साल लगातार आय सुनिश्चित करने के लिए केवल खेती करना ही पर्याप्त नहीं है। इसलिए ध्यान केवल फसल उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि खेती के साथ-साथ आय के कई अन्य स्रोत निर्मित करने पर है।

यह वह बदलाव है जो वेदांता बालको के कामकाज वाले क्षेत्रों में हो रहा है। कोरबा, कवर्धा, रायगढ़, रायपुर और सरगुजा ज़िले के 123 गाँवों में बालको के योगदान से अब तक 2 लाख से ज़्यादा लोगों को फ़ायदा पहुँचा है। इसमें जो बात सबसे ज़्यादा ध्यान खींचती है, वह सिर्फ़ इन प्रयासों का स्तर ही नहीं, बल्कि उनके काम करने का तरीका भी है। यहां खेती-बाड़ी, कौशल विकास, महिलाओं द्वारा चलाए जाने वाले उद्यम और सामाजिक बुनियादी ढाँचा आदि ये सभी मिलकर ग्रामीण इलाकों में लोगों की आजीविका को और ज़्यादा स्थिर बनाने का काम कर रहे हैं।

पारिवारिक आय की स्थिरता के वाहक के रूप में महिलाओं की भूमिका

इस बदलाव के केंद्र में वे महिलाएँ हैं जो अब अपने परिवारों में सहायक कमाने वाली की भूमिका से मुख्य कमाने वाली की भूमिका की ओर बढ़ रही हैं। ‘प्रोजेक्ट उन्नति’ के तहत 561 से ज्यादा स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाया गया है, जिनमें 6,000 से ज्यादा महिलाएँ शामिल हैं। इसके कारण इस क्षेत्र में समुदाय द्वारा संचालित सबसे मज़बूत स्वयं सहायता समूहों के नेटवर्कों का निर्माण हुआ है।

‘पंचसूत्र’ सिद्धांतों पर आधारित और वित्तीय साक्षरता, सही बचत और ऋण प्रणालियों जैसे प्रशिक्षणों से समर्थित ये स्वयं सहायता समूह साधारण बचत समूहों से विकसित होकर आजीविका के सशक्त नेटवर्क बन गए हैं। आज 600 से ज्यादा महिलाएँ छोटे व्यवसायों के माध्यम से कमाई कर रही हैं और छत्तीसगढ़ के 45 से ज्यादा गाँवों में 2,200 से ज्यादा महिलाएँ नैनो-बिजनेस, स्वयं सहायता समूह ऋण और आजीविका के अन्य कार्यों जैसी आय-सृजन गतिविधियों में शामिल हैं। ये सभी मिलकर घरेलू आय को ज्यादा स्थिर बनाने, समुदायों को ज्यादा सशक्त बनाने तथा स्थानीय आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण वाहक बनने में सहायता कर रही हैं।

यह बदलाव क्लीनला जैसे छोटे व्यवसायों में देखा जा सकता है जहाँ आठ महिलाओं का एक समूह घर की सफ़ाई के उत्पाद बनाता है। सही ट्रेनिंग, उत्पादन में मदद और अपने उत्पादों को बेचने में सहायता मिलने से अब हर महिला हर महीने लगभग रू.6,000 कमाती है। इससे पता चलता है कि मिलकर काम करने से आय का एक स्थिर ज़रिया बनाने में कैसे मदद मिल सकती है।

व्यक्तिगत स्तर पर भी इसका असर साफ़ दिखता है। कोरबा ज़िले की विजय लक्ष्मी सारथी ने निजी और आर्थिक मुश्किलों का सामना करने के बाद अपना खुद का बिज़नेस शुरू किया। ‘प्रोजेक्ट उन्नति’ के तहत मिली ट्रेनिंग और मदद से उन्होंने घर से ही खाने का बिज़नेस शुरू किया और अब हर महीने रू.12,000 से रू.15,000 कमाती हैं। उनकी कहानी एक बड़े बदलाव को दिखाती है जहाँ महिलाएँ न सिर्फ़ परिवार की आमदनी में हाथ बँटा रही हैं बल्कि खुद भी कमाने वाली बन रही हैं और अपने परिवारों और समुदायों को आर्थिक रूप से मज़बूत बनाने में मदद कर रही हैं।

कृषि के अलावा आय के दूसरे स्रोतों का सृजन

हालांकि खेती अभी भी बुनियादी आय का आधार बनी हुई है लेकिन आय के स्रोतों में विविधता लाने का सबसे बड़ा बदलाव खेती से बाहर के क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। वर्ष 2010 में शुरू किए गए वेदांता स्किल स्कूल के ज़रिए तीन केंद्रों में अब तक कुल 15,000 से ज़्यादा युवाओं को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। इनमें से हर साल 1,000 से ज़्यादा युवाओं को इंडस्ट्री की मांग के हिसाब से अलग-अलग ट्रेड में कुशल बनाया जाता है। यह प्रोग्राम ट्रेनिंग को सीधे रोज़गार से जोड़ता है और 11 राज्यों में फैली 70 से ज़्यादा संस्थाओं में प्लेसमेंट के अवसर उपलब्ध कराता है जहाँ सालाना सैलरी 3 लाख रुपये तक होती है।

कई परिवारों के लिए यह एक ढांचागत बदलाव को दर्शाता है जहाँ आय अब केवल ज़मीन या मौसमी चक्रों पर निर्भर नहीं रहती। इसके बजाय इसे औपचारिक रोज़गार से होने वाली स्थिर और साल भर की कमाई का सहारा मिलता है।

कोरबा के पोड़ीबहार के रहने वाले आर्यन दास महंत के लिए यह बदलाव उनकी ज़िंदगी बदलने वाला साबित हुआ है। रोज़ाना मज़दूरी करने वाले परिवार से आने के बाद उन्होंने वेदांता स्किल स्कूल में ‘फ़ूड एंड बेवरेज सर्विस स्टीवर्ड’ कोर्स में दाखिला लिया। बातचीत करने और मेहमानों को संभालने के हुनर सीखने के बाद उन्हें हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में नौकरी मिल गई। अब वे ‘होटल श्री महाराजा’ में ‘ट्रेनी कैप्टन’ के तौर पर काम कर रहे हैं और सालाना लगभग रू.2 लाख कमा रहे हैं। उनकी कहानी यह दिखाती है कि स्किल ट्रेनिंग न सिर्फ़ लोगों को नौकरी दिलाने में मदद करती है बल्कि उनके करियर को लंबे समय तक आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाती है।

इस प्रगति को उन शिक्षा कार्यक्रमों से भी समर्थन मिल रहा है जो ज़्यादा अवसर पैदा करते हैं। कोरबा और कवर्धा में दो कोचिंग सेंटर हर साल 300 से ज़्यादा छात्रों को सरकारी परीक्षाओं के लिए प्रशिक्षित करते हैं और अब तक 84 छात्रों का चयन भी हो चुका है। इसके साथ ही वेदांता लिमिटेड द्वारा अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के तहत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की साझेदारी में शुरू किए गए 110 ‘नंद घर’ प्री-स्कूल शिक्षा को बेहतर बनाने में मदद कर रहे हैं। ये केंद्र बाला पेंटिंग्स और डिजिटल उपकरणों जैसे इंटरैक्टिव सीखने के तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। ये केंद्र 7,000 से ज़्यादा माताओं और बच्चों तक पहुँच रहे हैं, जिससे शुरुआती शिक्षा और पोषण में सुधार हो रहा है। वहीं स्कूल सहायता कार्यक्रमों ने अब तक 4,000 से ज़्यादा छात्रों की मदद की है।

ये प्रयास शिक्षा से रोज़गार तक का एक स्पष्ट जरिया बनाते हैं जिससे लोगों को एक मज़बूत व्यवस्था के सहयोग से समय के साथ अलग-अलग तरीकों से कमाई करने में मदद मिलती है।

आजीविका को सहारा देने वाले इकोसिस्टम की मज़बूती

आय में स्थिर रूप से वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए लोगों को समय के साथ मज़बूत प्रणालियों के माध्यम से सहयोग देना महत्वपूर्ण है। वेदांता बालको इसी दृष्टिकोण का पालन करता है। यह न केवल रोज़गार उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित करता है बल्कि उन परिस्थितियों को भी बेहतर बनाने पर ज़ोर देता है जो लोगों को अपने रोज़गार को बनाए रखने में मदद करती हैं। बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बीमारियों की जल्दी पहचान और नियमित रूप से लोगों तक पहुँचने के प्रयास लोगों को अचानक उत्पन्न होने वाली वित्तीय समस्याओं से बचने में मदद करते हैं। इसके साथ ही बेहतर स्वच्छता और बुनियादी सेवाओं की उपलब्धता लोगों के लिए काम करना आसान बनाती है और उनकी कार्य-क्षमता में भी सुधार लाती है।

सड़कों, सार्वजनिक स्थानों और स्थानीय सुविधाओं जैसे सामुदायिक बुनियादी ढांचे में हो रहे सुधारों से लोगों के लिए यात्रा करना और बाज़ारों, प्रशिक्षण तथा रोज़गार से जुड़ना आसान हो रहा है। ये कोई अतिरिक्त प्रयास नहीं हैं बल्कि ऐसे महत्वपूर्ण फैक्टर हैं जो लोगों को अधिक स्थिर और भरोसेमंद आजीविका बनाने में मदद करते हैं।

इस इकोसिस्टम में शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण अवसरों को आय से जोड़ने में मदद करते हैं। वेदांता बालको प्रारंभिक शिक्षा, कोचिंग और व्यावसायिक प्रशिक्षण को एक साथ लाकर रोज़गार के स्पष्ट मार्ग तैयार करता है। कोचिंग कार्यक्रम इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दो केंद्रों के माध्यम से 300 से ज्यादा छात्रों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है और 206 अन्य छात्रों को सहायता प्रदान की जा रही है जिससे ज्यादा लोगों को सरकारी नौकरियों को पाने में मदद मिल रही है।

निर्भरता से विविधता तक

यह बदलाव अब इन क्षेत्रों में साफ़ तौर पर देखा जा सकता है। ग्रामीण परिवार अब केवल आय के एक ही स्रोत पर निर्भर नहीं हैं। वे खेती के साथ अन्य काम और व्यवसाय भी कर रहे हैं।

वेदांता बालको इसी बदलते दृष्टिकोण का पालन करता है। कौशल प्रशिक्षण, महिलाओं के नेतृत्व वाले व्यवसाय और शिक्षा कार्यक्रम मिलकर काम करते हैं ताकि ज्यादा स्थिर और नियमित आय के अवसर पैदा किए जा सकें। इसका उद्देश्य खेती की जगह लेना नहीं है बल्कि खेती के साथ आय के और अतिरिक्त स्रोत तैयार करना है। इससे ज्यादा संतुलित ग्रामीण अर्थव्यवस्था बनाने में मदद मिलती है जहाँ आय ज्यादा स्थिर होती है, अचानक आने वाली समस्याओं का बेहतर ढंग से सामना कर पाते हैं, और वे ज्यादा आत्मविश्वास के साथ अपने भविष्य की योजना बना सकते हैं।

यह बदलाव जमीनी स्तर पर भी दिखाई देता है। यह बदलाव सिर्फ़ ज़्यादा आमदनी का नहीं बल्कि ऐसी आजीविका पैदा करने की बात है जो ज़्यादा सुरक्षित, लचीली और भविष्य के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो।

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कोरबा

एसईसीएल मुख्यालय के 10 कर्मियों को भावभीनी विदाई दी गयी

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बिलासपुर/कोरबा। 30.04.2026 को एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर से सेवानिवृत्त होने वाले 10 कर्मियों को मुख्यालय बिलासपुर स्थित सीएमडी कक्ष में उन्हें शाल, श्रीफल, पुष्पहार से सम्मानित कर समस्त भुगतान का चेक प्रदान कर भावभीनी विदाई दी गयी।

मुख्यालय प्रशासनिक भवन के कान्फ्रेन्स हाल में अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक हरीश दुहन के मुख्य आतिथ्य, निदेशक तकनीकी (संचालन) एन फ्रैंकलिन जयकुमार, निदेशक (एचआर) बिरंची दास, सीवीओ हिमांशु जैन एवं निदेशक तकनीकी (योजना/परियोजना) रमेश चन्द्र महापात्र, विभीन्न विभागाध्यक्षों, श्रमसंघ प्रतिनिधियों, अधिकारियों-कर्मचारियों की उपस्थिति में चन्द्रमोहन वर्मा महाप्रबंधक (सिविल) सीएसआर विभाग, एसके महापात्रा मुख्य प्रबंधक (खनन/मासंवि), संजय दास प्रबंधक (सर्वे) योजना परियोजना विभाग, श्याम बोरकर सहायक अभियंता नगर प्रशासन विभाग, पुरुषोत्तम लाल साहू असिस्टेंट सुपरवाईजर ई/टी विभाग, व्ही. नागेश फोरमेन इंचार्ज नगर प्रशासन विभाग, संतोष कुमार मेश्राम असिस्टेंट सुपरवाइजर नगर प्रशासन विभाग, दल बहादुर गुरुंग सिनीयर डुप्लीकेटिंग ऑपरेटर सीएमडी सचिवालय, बैकुंठ महानंदा सामान्य सहायक श्रेणी-4 वसंत विहार डिस्पेंसरी, भोला प्रसाद सुरक्षा प्रहरी को सेवानिवृत्ति पर विदाई दी गयी।
इस अवसर पर शीर्ष प्रबंधन ने अपने-अपने उद्बोधन में कहा कि सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारी-कर्मचारी के योगदान, कार्यकौशली से ही कम्पनी सफलता के मुकाम पर पहुँची है। सेवानिवृत्त कर्मियों के योगदान को सदैव स्मरण किया जाएगा। अंत में उन्होंने सेवानिवृत्त कर्मियों के सपरिवार उज्जवल भविष्य की ईश्वर से कामना की।
सेवानिवृत्त अधिकारियों-कर्मचारियों ने कम्पनी के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि यहां के कर्मचारियों में कार्य के प्रति बहुत ही निष्ठा है। यहाँ के अधिकारी-कर्मचारी कंधे से कंधा मिलाकर साथ में कार्य करते हैं एवं किसी कार्य को बोझ समझकर नहीं करते हैं।
कार्यक्रम में सेवानिवृत्त कर्मियों का परिचय पढ़ते हुए सफलतापूर्वक उद्घोषणा का दायित्व प्रबंधक (राजभाषा) श्रीमती सविता निर्मलकर ने निभाया।

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कोरबा

प्रयास आवासीय विद्यालयों में कक्षा 9वीं प्रवेश परीक्षा वर्ष 2026-27 हेतु तिथियों की घोषणा

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कोरबा। राज्य के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को कक्षा 9वीं से 12वीं तक उत्कृष्ट शिक्षा तथा मेडिकल, इंजीनियरिंग, सीए, सीएस, सीएमए, क्लैट एवं एनडीए जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की सघन तैयारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री बाल भविष्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत प्रयास आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं।
कार्यालय आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास, रायपुर द्वारा प्रयास आवासीय विद्यालयों में कक्षा 9वीं में प्रवेश हेतु वर्ष 2026-27 की प्रवेश परीक्षा की तिथि, समय एवं प्रवेश पत्र डाउनलोड करने की समय-सारणी जारी की गई है।
प्रवेश पत्र डाउनलोड करने की तिथि 01 मई 2026 से 10 मई 2026 प्रातः 9.30 बजे तक निर्धारित की गई है। प्रवेश पत्र ीजजचेरूध्ध्मासंअलंण्बहण्दपबण्पद⁠ पोर्टल से डाउनलोड किए जा सकेंगे। यदि विद्यार्थियों को प्रवेश पत्र डाउनलोड करने में किसी प्रकार की समस्या आती है, तो वे निकटस्थ एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, प्रयास आवासीय विद्यालय या जिला कार्यालय, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास, कोरबा से संपर्क कर सकते हैं। प्रवेश पत्र डाउनलोड करने हेतु आवेदन क्रमांक एवं मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से दर्ज करना होगा।
प्राक्चयन परीक्षा दिनांक 10 मई 2026, रविवार को प्रातः 10बजे से दोपहर 01 बजे तक आयोजित होगी। परीक्षा के दिन प्रातः 9.30 बजे से 10.00 बजे के बीच ओएमआर शीट भरने की प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी।
जिले में परीक्षा संचालन हेतु कुल तीन परीक्षा केंद्र-एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, छुरीकला, कटघोरा, शासकीय प्रयास आवासीय विद्यालय, डिंगापुर, कोरबा, एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, रामपुर, पोड़ीउपरोड़ा निर्धारित किए गए हैं।

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