विदेश
रूस ने ‘शैडो फ्लीट’ पर कसा शिकंजा, मालवाहक जहाजों को लेकर लिया बड़ा फैसला
मास्को, एजेंसी। रूस (Russia) ने अपने मालवाहक जहाजों की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। रूस ने घोषणा की है कि वह अपने जहाजों को अब नौसेना की सुरक्षा प्रदान करेगा, क्योंकि हाल के दिनों में पश्चिमी देशों की नौसेनाओं द्वारा रूसी जहाजों को रोकने और जांच करने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। यह निर्णय रूस के मैरीटाइम बोर्ड की बैठक में लिया गया, जहां अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर रूसी जहाजों की जब्ती या रोकथाम से निपटने के लिए नए दिशा-निर्देश तैयार किए गए। ये नियम मुख्य रूप से Black Sea, Sea of Azov और Baltic Sea क्षेत्रों में लागू होंगे।

रूस के सुरक्षा परिषद से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी Nikolai Patrushev ने कहा कि रूस के साथ काम करने वाले जहाज मालिकों को नौसेना के साथ समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, जहाजों की निगरानी और समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सैन्य उपस्थिति बढ़ाई जा रही है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब यूरोपीय देश रूस के तथाकथित “शैडो फ्लीट” को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। इस फ्लीट का इस्तेमाल रूस द्वारा भारत और चीन जैसे देशों तक तेल और गैस पहुंचाने के लिए किया जाता है, खासकर तब जब उस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगे हुए हैं।
दूसरी ओर, कीर स्टार्मर (Keir Starmer) ने ब्रिटिश सेना को उन रूसी जहाजों को रोकने और तलाशी लेने की अनुमति दी है, जिन्हें प्रतिबंधों का उल्लंघन कर तेल निर्यात करने वाला माना जाता है। इस फैसले से समुद्र में रूस और पश्चिमी देशों के बीच टकराव का खतरा और बढ़ गया है। हाल ही में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं तब और बढ़ गईं, जब Bosphorus Strait के पास एक तेल टैंकर ड्रोन हमले में क्षतिग्रस्त हो गया। यह जहाज रूस के नोवोरोसिस्क बंदरगाह से Istanbul की ओर जा रहा था।
देश
Goldman Sachs की चेतावनीः युद्ध खत्म हो भी जाए…लेकिन लंबे समय तक बना रहेगा असर
मुंबई, एजेंसी। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष को लेकर गोल्डमैन सैक्स के पूर्व सीईओ और सीनियर चेयरमैन लॉयड ब्लैंकफेन ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और बाजारों के लिए गंभीर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि भले ही यह संघर्ष तुरंत समाप्त हो जाए लेकिन इसका आर्थिक असर लंबे समय तक बना रहेगा और निवेशकों को इसके लिए तैयार रहना चाहिए।
इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान, असर रहेगा कायम
सीईओ ने कहा कि इस संघर्ष से क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर को व्यापक नुकसान पहुंचा है, जिसकी भरपाई में समय लगेगा। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि यह मान लेना गलत होगा कि हालात जल्द सामान्य हो जाएंगे।

निवेशकों को सलाह
ब्लैंकफेन ने निवेशकों को किसी भी एक दिशा में बड़ा दांव लगाने से बचने की सलाह दी। उनका कहना है कि यह अनुमान लगाना जोखिम भरा है कि संकट जल्दी खत्म होगा या लंबे समय तक चलेगा। ऐसे में निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में लचीलापन बनाए रखना चाहिए और बदलती परिस्थितियों के अनुसार रणनीति तैयार करनी चाहिए।
क्रूड सप्लाई प्रभावित, कीमतों में उछाल
मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष का असर तेल बाजार पर भी साफ दिख रहा है। Strait of Hormuz से कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं। यह स्थिति भारत जैसे देशों के लिए चिंता का विषय है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर करते हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ी अनिश्चितता
उन्होंने कहा कि पहले वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत मिल रहे थे लेकिन अब ऊर्जा कीमतों में उछाल और युद्ध की वजह से अनिश्चितता बढ़ गई है। इससे ग्रोथ और ब्याज दरों के अनुमान पर भी असर पड़ा है।

विदेश
काला सागर में तुर्किये के तेल टैंकर पर ड्रोन हमला, सीधा इंजन रूम पर साधा निशाना
तेल अवीव, एजेंसी। काला सागर क्षेत्र में एक बड़ा समुद्री सुरक्षा हादसा सामने आया है। Turkey का एक तेल टैंकर Bosphorus Strait के पास ड्रोन हमले का शिकार हो गया। यह हमला उस समय हुआ जब जहाज रूस से कच्चा तेल लेकर आगे बढ़ रहा था। अधिकारियों के मुताबिक, “अल्तुरा” नाम का यह टैंकर करीब 1,40,000 टन कच्चा तेल लेकर जा रहा था और बॉस्फोरस जलडमरूमध्य से लगभग 14 समुद्री मील दूर था। ड्रोन हमले में जहाज के ब्रिज और इंजन रूम को नुकसान पहुंचा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि हमला बेहद सटीक तरीके से किया गया। Abdulkadir Uraloğlu ने पुष्टि की कि यह हमला नौसैनिक ड्रोन के जरिए किया गया। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इसके पीछे किसका हाथ हो सकता है।

राहत की बात यह रही कि जहाज पर सवार सभी 27 चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं और किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। घटना के बाद तकनीकी टीमों को मौके पर भेजा गया है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह टैंकर यूरोपीय यूनियन के प्रतिबंधों के तहत आने वाले तथाकथित “शैडो फ्लीट” का हिस्सा रहा है, जिसका इस्तेमाल रूस से तेल निर्यात के लिए किया जाता है। इससे इस हमले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।यह जहाज Novorossiysk Port से रवाना हुआ था और अब इस घटना ने काला सागर क्षेत्र में पहले से चल रहे तनाव को और बढ़ा दिया है।
विदेश
युद्ध और खतरनाक मोड़ परः होर्मुज पर ईरान के सख्त बयान पर भड़के ट्रंप, क्षेत्र में सैन्य बलों की तैनाती कर दी तेज
वाशिंगठन, एजेंसी। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध अब और गंभीर होता जा रहा है। Iran द्वारा Strait of Hormuz पर अपना नियंत्रण मजबूत करने के फैसले के बाद United States ने भी अपना रुख और कड़ा कर लिया है। कूटनीतिक प्रयास फिलहाल विफल होते नजर आ रहे हैं और दोनों देशों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। ईरान ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर अपने नियंत्रण को औपचारिक रूप देने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। वहीं, अमेरिका ने क्षेत्र में अपने सैन्य बलों की तैनाती तेज कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना का जहाज USS Tripoli लगभग 2,500 सैनिकों के साथ पश्चिम एशिया की ओर बढ़ रहा है। इसके अलावा 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के करीब 1,000 सैनिक भी तैनात किए जा रहे हैं।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इजराइल में ईरानी मिसाइल हमलों की चेतावनी के लिए सायरन बजाए गए, जबकि Abu Dhabi में मिसाइल के मलबे से दो लोगों की मौत और तीन घायल होने की खबर है। इस बीच, विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान होर्मुज में “टोल नाका सिस्टम” लागू कर रहा है, जहां कुछ जहाजों से सुरक्षित गुजरने के लिए शुल्क लिया जा रहा है। ईरानी संसद भी इस प्रक्रिया को औपचारिक रूप देने पर काम कर रही है, जिसमें जहाजों से भुगतान लेने की व्यवस्था शामिल है।
अमेरिका की रणनीति अब और आक्रामक होती दिख रही है। माना जा रहा है कि उसका ध्यान Kharg Island जैसे महत्वपूर्ण तेल टर्मिनलों या जलडमरूमध्य के आसपास के रणनीतिक ठिकानों पर नियंत्रण हासिल करने पर हो सकता है। Brad Cooper ने दावा किया है कि अमेरिका अब तक ईरान के खिलाफ 10,000 से अधिक लक्ष्यों पर हमले कर चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की हवाई रक्षा प्रणाली को काफी हद तक नष्ट कर दिया गया है और उसकी नौसेना के 92% बड़े पोत तबाह हो चुके हैं। इस बढ़ते संघर्ष का असर वैश्विक बाजार पर भी साफ दिख रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत 104 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जो युद्ध शुरू होने के बाद से 40% से ज्यादा की वृद्धि है।
-
कोरबा2 years agoकटघोरा विधायक पुरूषोत्तम कंवर के गुर्गों द्वारा दिव्य आकाश कर्मियों पर हमला की कोशिश
-
Uncategorized6 months agoसुमेधा पुल पर लुट कांड सहित तीन अलग अलग जगह पर लुटकांड करने वाले आरोपी पुलिस के गिरफ्त में,,,दो आरोपी नाबालिक,,,देखे पूरी खबर
-
कोरबा2 years agoग्राम पंचायत पोड़ी के पूर्व सरपंच सचिव पर गबन के आधार पर अधिरोपित राशि 3341972/- रुपये शीघ्र वसूल हो- कय्युम बेग
-
कोरबा2 years agoकुसमुंडा खदान में डंपर पलट कर लगी आग, सरकारी गाड़ी में कोयला और डीजल चोर सवार थे, जलने से दोनों गंभीर
-
कोरबा2 years agoश्रीमती स्वाति दुबे का निधन
-
छत्तीसगढ़2 years agoबिलासपुर में अपोलो अस्पताल के 4 सीनियर डॉक्टर अरेस्ट
-
कोरबा2 years agoकटघोरा जनपद की 25 करोड़ की जमीन उनके करीबी कांग्रेसियों की 25 लाख में कैसे हो गई?
-
कोरबा2 years agoदर्री में 1320 मेगावाट विद्युत परियोजना के लिए नई सरकार गठन के बाद होगी पर्यावरणीय जनसुनवाई
