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बैंकिंग सेक्टर में हलचल, HDFC Bank ने लिया अहम फैसला

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मुंबई, एजेंसी। देश के प्रमुख निजी क्षेत्र के बैंक HDFC Bank ने कॉर्पोरेट गवर्नेंस को मजबूत करने की दिशा में एक अहम फैसला लिया है। बैंक के बोर्ड ने डॉ. (श्रीमती) सुनीता माहेश्वरी को एक बार फिर स्वतंत्र निदेशक (Independent Director) के रूप में नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है।

यह निर्णय गवर्नेंस, नॉमिनेशन एवं रेम्युनरेशन कमेटी की सिफारिश पर लिया गया। बैंक के अनुसार, डॉ. माहेश्वरी का नया कार्यकाल 30 मार्च 2026 से 29 मार्च 2029 तक यानी तीन वर्षों के लिए प्रस्तावित है।

हालांकि, यह पुनर्नियुक्ति अभी अंतिम नहीं है और इसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी आवश्यक होगी। बैंक जल्द ही इस प्रस्ताव को अनुमोदन के लिए शेयरधारकों के सामने रखेगा।

बैंक ने स्पष्ट किया है कि डॉ. सुनीता माहेश्वरी का किसी अन्य निदेशक या प्रमुख प्रबंधकीय कार्मिक (KMP) से कोई संबंध नहीं है, जिससे उनकी स्वतंत्रता और निष्पक्षता सुनिश्चित होती है। इसके अलावा  Securities and Exchange Board of India या किसी अन्य नियामक संस्था द्वारा भी उन्हें निदेशक पद संभालने से प्रतिबंधित नहीं किया गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम बैंक की पारदर्शिता और बेहतर कॉर्पोरेट गवर्नेंस को बढ़ावा देने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

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देश

Goldman Sachs की चेतावनीः युद्ध खत्म हो भी जाए…लेकिन लंबे समय तक बना रहेगा असर

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मुंबई, एजेंसी। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष को लेकर गोल्डमैन सैक्स के पूर्व सीईओ और सीनियर चेयरमैन लॉयड ब्लैंकफेन ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और बाजारों के लिए गंभीर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि भले ही यह संघर्ष तुरंत समाप्त हो जाए लेकिन इसका आर्थिक असर लंबे समय तक बना रहेगा और निवेशकों को इसके लिए तैयार रहना चाहिए।

इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान, असर रहेगा कायम

सीईओ ने कहा कि इस संघर्ष से क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर को व्यापक नुकसान पहुंचा है, जिसकी भरपाई में समय लगेगा। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि यह मान लेना गलत होगा कि हालात जल्द सामान्य हो जाएंगे।

निवेशकों को सलाह

ब्लैंकफेन ने निवेशकों को किसी भी एक दिशा में बड़ा दांव लगाने से बचने की सलाह दी। उनका कहना है कि यह अनुमान लगाना जोखिम भरा है कि संकट जल्दी खत्म होगा या लंबे समय तक चलेगा। ऐसे में निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में लचीलापन बनाए रखना चाहिए और बदलती परिस्थितियों के अनुसार रणनीति तैयार करनी चाहिए।

क्रूड सप्लाई प्रभावित, कीमतों में उछाल

मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष का असर तेल बाजार पर भी साफ दिख रहा है। Strait of Hormuz से कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं। यह स्थिति भारत जैसे देशों के लिए चिंता का विषय है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर करते हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ी अनिश्चितता

उन्होंने कहा कि पहले वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत मिल रहे थे लेकिन अब ऊर्जा कीमतों में उछाल और युद्ध की वजह से अनिश्चितता बढ़ गई है। इससे ग्रोथ और ब्याज दरों के अनुमान पर भी असर पड़ा है।

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क्रिप्टो मार्केट में बड़ी गिरावट, 70,000 डॉलर से फिसला Bitcoin, निवेशकों को बड़ा झटका

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मुंबई, एजेंसी। गुरुवार को वैश्विक क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बड़ी गिरावट आई, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। पिछले 24 घंटे में क्रिप्टो मार्केट कैप करीब 2% घटकर 2.40 ट्रिलियन डॉलर पर आ गया। इस गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति में लगभग 4.70 लाख करोड़ रुपए की कमी आई। बाजार में आई इस कमजोरी का असर लगभग सभी प्रमुख डिजिटल करेंसी पर देखने को मिला। एक Bitcoin की कीमत 70,000 डॉलर के नीचे आ गई।

इस गिरावट का सबसे ज्यादा असर काइट (Kite) क्रिप्टो पर पड़ा, जो 24 घंटे में करीब 10% तक टूट गई। कॉइनमार्केटकैप की टॉप-100 सूची में शामिल यह कॉइन दोपहर 2:30 बजे के आसपास 0.2097 डॉलर के आसपास ट्रेड करता दिखा।

प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी में गिरावट

बाजार की कमजोरी के बीच लगभग सभी बड़ी क्रिप्टोकरेंसी लाल निशान में रहीं। Bitcoin करीब 1.44% गिरकर 69,6 डॉलर के नीचे आ गया, जबकि Ethereum में 2.5% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई और इसकी कीमत 2,116 डॉलर के आसपास रही। BNB 2% से ज्यादा टूटकर 632 डॉलर पर पहुंच गया। XRP में करीब 3% और Solana में लगभग 4% की गिरावट आई। Dogecoin करीब 5% तक लुढ़क गया, जबकि Cardano और Shiba Inu में भी 4% से ज्यादा की गिरावट देखी गई।

कुछ कॉइन में दिखी तेजी

हालांकि व्यापक गिरावट के बीच कुछ क्रिप्टोकरेंसी ने मजबूती दिखाई। TRON में 2% से ज्यादा की तेजी आई, जबकि कैंटन कॉइन में 1% से अधिक उछाल दर्ज किया गया। मीमकोर में करीब 40% की बड़ी छलांग देखने को मिली और पाई नेटवर्क कॉइन में भी हल्की बढ़त दर्ज की गई।

गिरावट की बड़ी वजहें

विशेषज्ञों के अनुसार, क्रिप्टो बाजार में आई इस गिरावट के पीछे वैश्विक अनिश्चितता प्रमुख कारण रही। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, खासकर Iran और United States के बीच टकराव ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। इसके अलावा, अमेरिका में प्रस्तावित क्रिप्टो नियामक विधेयक को लेकर भी बाजार में असमंजस की स्थिति बनी हुई है, जिससे बिकवाली का दबाव बढ़ा।

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LIC को आयकर विभाग का बड़ा झटका, ₹7,000 करोड़ से ज्यादा की डिमांड

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मुंबई, एजेंसी। भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को आयकर विभाग की ओर से वित्त वर्ष 2021-22 के लिए बड़ा डिमांड ऑर्डर मिला है। इसमें टैक्स और ब्याज शामिल है। इस आदेश के तहत कंपनी से रू.6,146.71 करोड़ आयकर और रू.953.25 करोड़ ब्याज सहित कुल रू.7,099 करोड़ से अधिक की मांग की गई है। 

किन कारणों से बनी इतनी बड़ी डिमांड?

कंपनी के अनुसार, आयकर विभाग की असेसमेंट यूनिट ने आकलन के दौरान कुछ मदों को आय में शामिल किया और कई दावों को अस्वीकार कर दिया, जिससे टैक्स देनदारी बढ़ गई। इसमें अंतरिम बोनस को आय में जोड़ना, ‘जीवन सुरक्षा फंड’ से हुए नुकसान को शामिल करना, निगेटिव रिजर्व को आय मानना, धारा 80M के तहत क्लेम किए गए डिडक्शन को खारिज करना और TDS देरी से जमा करने पर ब्याज को अस्वीकार करना जैसे कारण शामिल हैं।

आदेश को चुनौती दे सकती है LIC

LIC ने संकेत दिया है कि वह इस डिमांड ऑर्डर को आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष चुनौती दे सकती है। कंपनी का कहना है कि इस आदेश का असर केवल बताई गई टैक्स और ब्याज राशि तक सीमित है और इसके नियमित कारोबार पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा। 

शेयर पर रहेगी नजर

बाजार की नजर अब कंपनी के शेयर पर बनी हुई है, जो 25 मार्च को बीएसई पर रू.780.60 पर बंद हुआ था, जबकि 26 मार्च को रामनवमी के कारण बाजार बंद रहा।

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