विदेश
अमेरिका NATO से अलग हो सकता है:ट्रम्प बोले- इसने जरूरत के वक्त मदद नहीं की, ये कागजी शेर, पुतिन भी यही मानते हैं
तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी,एजेंसी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि वे NATO से बाहर निकलने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। उन्होंने NATO को कागजी शेर बताया।
एक इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा कि वे पहले से ही NATO से ज्यादा प्रभावित नहीं थे और उन्हें लगता है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी यही मानते हैं।
ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका हमेशा अपने साथियों के लिए खड़ा रहा है, लेकिन इस बार कोई भी अमेरिका के साथ नहीं आया। उन्होंने यूक्रेन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां अमेरिका ने मदद की थी, लेकिन अब वही समर्थन अमेरिका को नहीं मिल रहा।
यह बयान तब आया है जब NATO देशों ने ईरान जंग में अमेरिका का साथ देने से इनकार कर दिया। अमेरिका चाहता था कि NATO देश होर्मुज स्ट्रेट खुलवाने के लिए अपने वॉरशिप भेजें, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

जंग से मिडिल ईस्ट को 18 लाख करोड़ का नुकसान
यूनाइटेड नेशन डेवलपमेंट प्रोग्राम (UNDP) ने कहा है कि मध्य पूर्व में चल रहा युद्ध पूरे इलाके की अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। उनकी रिपोर्ट के मुताबिक यह संघर्ष अब सिर्फ कुछ देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए बड़ा संकट बन गया है।
- रीजन की GDP 3.7% से 6% तक घट सकती है
- करीब 18 लाख करोड़ का नुकसान हो सकता है
- होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही 70% से ज्यादा घट गई
- तेल की कीमत करीब 120 डॉलर प्रति बैरल हो गई है
- 16 लाख से लेकर 36 लाख नौकरियों पर संकट
ईरान जंग से जुड़ी तस्वीरें…

अमेरिका ने सोमवार को ईरान के इस्फहान में हवाई हमले किए।

लेबनान की राजधानी बेरुत में मंगलवार को इजराइली एयरस्ट्राइक में एक इमारत पूरी तरह तबाह हो गई।

बेरुत के दक्षिणी इलाके में मंगलवार को इजराइल के हवाई हमले के बाद उठता धुआं।
होर्मुज संकट पर ब्रिटेन की मेजबानी में 35 देशों की इमरजेंसी बैठक
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने घोषणा की है कि इस सप्ताह उनका देश 35 देशों की एक अहम बैठक की मेजबानी करेगा। इस बैठक का मकसद होर्मुज को फिर से खोलने पर चर्चा करना है।
इस बैठक में दुनिया के कई बड़े देश शामिल होंगे और इसका मकसद इस बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते की सुरक्षा और भविष्य को लेकर समाधान निकालना है।
कतर जैसे देश ने भी इस मुद्दे पर चर्चा में दिलचस्पी दिखाई है। भारत की इस बैठक में भागीदारी अभी तय नहीं हुई है, लेकिन संभावना जताई जा रही है कि भारत इसमें शामिल हो सकता है।
इसकी वजह यह है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस क्षेत्र पर काफी निर्भर है और यहां बड़ी संख्या में भारतीय भी रहते हैं।
इजराइल बोला- यह आखिरी युद्ध नहीं, देश को सर्तक रहना होगा
इजराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने कहा है कि यह जरूरी नहीं है कि यह इजराइल का आखिरी युद्ध हो।
उन्होंने कहा कि दुश्मन अभी भी हमला कर सकते हैं, इसलिए भविष्य में भी खतरा बना रहेगा और देश को सतर्क रहना होगा।
इजराइल का दावा- हिजबुल्लाह का बड़ा कमांडर मारा गया
इजराइल की सेना ने दावा किया है कि उसने उग्रवादी संगठन के एक बड़े कमांडर यूसुफ इस्माइल हाशेम को मार दिया है।
यह हमला बेरूत में हुआ था, हालांकि हिजबुल्लाह की तरफ से अभी तक इस पर कोई बयान नहीं आया है।
ईरान की चेतावनी- होर्मुज खुला रहेगा, लेकिन अमेरिका के लिए नहीं
ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट खुला रहेगा, लेकिन अमेरिका के लिए नहीं। अब 47 साल की मेहमाननवाजी खत्म हो चुकी है।
अजीजी ने कहा कि यह रास्ता सिर्फ उन देशों के लिए खुला रहेगा, जो ईरान के बनाए नए नियमों का पालन करेंगे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ट्रम्प ने “रेजीम चेंज” का सपना पूरा कर लिया है, लेकिन यह जमीन पर नहीं बल्कि समुद्र के नियमों में हुआ है।
ईरान ने 65 लोगों को किया गिरफ्तार, जासूसी का आरोप
ईरान की सुरक्षा एजेंसी इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि उसने 65 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन लोगों पर आरोप है कि वे दुश्मन देशों के लिए काम कर रहे थे या आतंकवादी संगठनों से जुड़े थे।
ईरान का कहना है कि हाल के महीनों में उसने कई लोगों को पकड़ा है, जो अमेरिका-इजराइल को जानकारी दे रहे थे और देश की सुरक्षा को नुकसान पहुंचा रहे थे।
ट्रम्प बोले- ईरान से डील की जरूरत नहीं, उनका एटमी प्रोग्राम डैमेज
डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए किसी समझौते (डील) की जरूरत नहीं है। अमेरिका यह युद्ध 2 से 3 हफ्तों में खत्म कर सकता है।
उन्होंने कहा- ईरान को कोई डील करने की जरूरत नहीं है। जब हमें लगेगा कि वे इतने कमजोर हो गए हैं कि कई सालों तक परमाणु हथियार नहीं बना सकते, तब हम वहां से निकल जाएंगे। डील हो या न हो, अब यह जरूरी नहीं है।
ट्रम्प ने यह भी कहा कि ईरान के पास जो यूरेनियम बचा है, उससे उन्हें कोई चिंता नहीं है, क्योंकि वह जमीन के अंदर है और आसानी से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अमेरिका पहले ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को काफी नुकसान पहुंचा चुका है।
ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिका जल्द ही ईरान से बाहर निकल जाएगा और इसके बाद तेल की कीमतें भी कम हो सकती हैं। इस युद्ध की वजह से थोड़ी परेशानी जरूर हो रही है, लेकिन इससे अमेरिका ज्यादा सुरक्षित हुआ है क्योंकि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं है।
होर्मुज स्ट्रेट के बारे में उन्होंने कहा कि अब इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिका नहीं लेगा। जो देश इस रास्ते से तेल ले जाते हैं, उन्हें खुद अपनी सुरक्षा करनी होगी।
ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के कई बड़े नेताओं को खत्म कर दिया है और वहां की स्थिति बदल दी है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनका मकसद सरकार बदलना नहीं था, बल्कि सिर्फ यह सुनिश्चित करना था कि ईरान परमाणु हथियार न बना सके।

देश
भारतीय कारोबारी पर अमेरिकी शिकंजा, नागरिकता रद्द करने की कार्रवाई शुरू
वॉशिंगटन, एजेंसी। अमेरिका ने गंभीर अपराधों और कथित आव्रजन धोखाधड़ी के मामलों में 17 लोगों की नागरिकता रद्द (डिनैचुरलाइजेशन) करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इनमें भारतीय मूल के नीरज शर्मा भी शामिल हैं, जिन पर फर्जी एच-1बी वीजा दस्तावेजों का उपयोग करने और नागरिकता प्रक्रिया के दौरान गलत जानकारी देने का आरोप लगाया गया है। अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, न्यूजर्सी स्थित प्लेसमेंट फर्म मैग्नाविजन एलएलसी के मालिक नीरज शर्मा ने कथित तौर पर 11 एच-1बी वीजा आवेदनों पर हस्ताक्षर किए थे। इन आवेदनों में दावा किया गया था कि संबंधित कर्मचारी एक वैश्विक वित्तीय संस्थान में काम करेंगे।

जांच एजेंसियों का आरोप है कि एच-1बी वीजा आवेदनों के समर्थन में जमा किए गए कुछ दस्तावेजों में संबंधित वित्तीय संस्थान के अधिकारियों के जाली हस्ताक्षर थे। अधिकारियों का कहना है कि इन दस्तावेजों के आधार पर वीजा प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई। न्याय विभाग के मुताबिक, नीरज शर्मा ( Neeraj Sharma) ने वर्ष 2017 में अमेरिकी नागरिकता के लिए आवेदन किया था। आरोप है कि नागरिकता साक्षात्कार के दौरान उन्होंने अपने कथित आपराधिक आचरण और गतिविधियों के बारे में सही जानकारी नहीं दी। शर्मा को दिसंबर 2017 में अमेरिकी नागरिकता प्रदान कर दी गई थी। बाद में उन्हें अप्रैल 2015 से अप्रैल 2017 के बीच वीजा धोखाधड़ी और आव्रजन नियमों के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में दोषी ठहराया गया। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि नागरिकता केवल उन्हीं लोगों को मिलनी चाहिए जो कानून का पालन करते हैं और आवेदन प्रक्रिया के दौरान पूरी ईमानदारी बरतते हैं।
Markwayne Mullin ने कहा कि अमेरिकी नागरिकता एक विशेषाधिकार है और यदि कोई व्यक्ति आव्रजन प्रक्रिया में झूठ बोलता है या महत्वपूर्ण जानकारी छिपाता है, तो उससे यह विशेषाधिकार वापस लिया जा सकता है। न्याय विभाग ने जिन अन्य 16 लोगों के खिलाफ नागरिकता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की है, उनमें विभिन्न गंभीर अपराधों के आरोपी या दोषी ठहराए गए व्यक्ति शामिल हैं। इनमें यौन अपराध, बाल शोषण और अश्लील सामग्री से जुड़े मामलों में दोषी पाए गए लोग भी शामिल हैं। गौरतलब है कि अमेरिकी आव्रजन और नागरिकता अधिनियम (Immigration and Nationality Act) के तहत यदि कोई व्यक्ति गैरकानूनी तरीके से, महत्वपूर्ण तथ्य छिपाकर या जानबूझकर गलत जानकारी देकर नागरिकता प्राप्त करता है, तो अदालत के आदेश के माध्यम से उसकी नागरिकता रद्द की जा सकती है। यह प्रक्रिया नागरिकता मिलने के कई वर्षों बाद भी शुरू की जा सकती है, यदि अधिकारियों को धोखाधड़ी या तथ्य छिपाने के प्रमाण मिलते हैं।
विदेश
उत्तर कोरिया से लौटे शी जिनपिंग, किम जोंग उन के साथ दोस्ती पर जोर, परमाणु मुद्दे पर साधी चुप्पी
प्योंगयांग/ बीजिंग, एजेंसी। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने उत्तर कोरिया की दो दिवसीय राजकीय यात्रा मंगलवार को संपन्न कर ली और बीजिंग लौट गए। सात वर्षों बाद हुई इस यात्रा को दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को पुनर्जीवित करने और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में अपनी भूमिका मजबूत करने के महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। प्योंगयांग में सोमवार को पहुंचने पर शी जिनपिंग का भव्य स्वागत किया गया। उत्तर कोरियाई नेता Kim Jong Un स्वयं उनके स्वागत और विभिन्न सार्वजनिक कार्यक्रमों में मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने शिखर वार्ता में द्विपक्षीय सहयोग को और विस्तार देने पर जोर दिया।

चीनी और उत्तर कोरियाई सरकारी मीडिया के अनुसार, शी जिनपिंग ने व्यापार, कृषि, निर्माण, प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की चीन की इच्छा व्यक्त की। वहीं किम जोंग उन ने कहा कि चीन के साथ मित्रता को उत्तर कोरिया की “सर्वोच्च रणनीतिक प्राथमिकता” के रूप में बनाए रखा जाएगा। दोनों नेताओं ने 1950-53 के कोरियाई युद्ध में मारे गए चीनी सैनिकों की स्मृति में बने चीन-उत्तर कोरिया मैत्री स्मारक का भी दौरा किया और पारंपरिक मित्रता को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब उत्तर कोरिया के रूस के साथ संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं। यूक्रेन युद्ध के दौरान प्योंगयांग और मॉस्को की बढ़ती निकटता ने बीजिंग की चिंता बढ़ाई है। विश्लेषकों के अनुसार, शी जिनपिंग की यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य उत्तर कोरिया पर चीन के पारंपरिक प्रभाव को फिर से मजबूत करना और यह दिखाना था कि बीजिंग अब भी प्योंगयांग का सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है। सरकारी मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि किम जोंग उन ने ताइवान मुद्दे पर चीन की “एक-चीन नीति” का समर्थन दोहराया। दोनों देशों ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर आपसी समन्वय बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी जताई।
हालांकि दोनों देशों की सरकारी रिपोर्टों में उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार कार्यक्रम पर किसी विस्तृत चर्चा का उल्लेख नहीं किया गया। यह विषय क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक माना जाता है। यात्रा से पहले किम जोंग उन की बहन Kim Yo Jong ने स्पष्ट कहा था कि उत्तर कोरिया अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को छोड़ने वाला नहीं है और वह अपने परमाणु शस्त्रागार का विस्तार जारी रखेगा। दूसरी ओर चीन ने एक बार फिर कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु निरस्त्रीकरण के समर्थन की अपनी पुरानी नीति दोहराई। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Lin Jian ने कहा कि इस मुद्दे पर बीजिंग की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है।
यात्रा के अंतिम दिन किम जोंग उन और उनकी पत्नी स्वयं हवाई अड्डे तक शी जिनपिंग और उनकी पत्नी को विदा करने पहुंचे। उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया के अनुसार, उनके सम्मान में विशेष विदाई समारोह आयोजित किया गया। किम ने कहा कि शी जिनपिंग की यात्रा पूरी तरह सफल रही और इससे दुनिया को यह संदेश गया कि चीन और उत्तर कोरिया अपनी पारंपरिक मित्रता और रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
बिज़नस
मई में चीन का निर्यात 19.4 प्रतिशत उछला
हांगकांग, एजेंसी। चीन के निर्यात में मई महीने के दौरान सालाना आधार पर 19.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। प्रौद्योगिकी उत्पादों के मजबूत निर्यात और वैश्विक मांग में सुधार को इस बढ़त का प्रमुख कारण बताया गया है। चीन की सीमा-शुल्क एजेंसी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अप्रैल में चीन का निर्यात 14.1 प्रतिशत बढ़ा था। मई में चीन का आयात भी 27.4 प्रतिशत बढ़ा, जो अप्रैल के 25.3 प्रतिशत की तुलना में अधिक है।

आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका को होने वाले निर्यात में भी बड़ी तेजी देखी गई और यह मई में सालाना आधार पर 35 प्रतिशत से अधिक बढ़ गया। अप्रैल में यह वृद्धि केवल 11 प्रतिशत थी। विशेषज्ञों ने कहा कि वाहन, सेमीकंडक्टर और कृत्रिम मेधा (एआई) से जुड़े उत्पादों की मजबूत मांग ने चीन के निर्यात को समर्थन दिया है। वैश्विक एआई उछाल और हरित प्रौद्योगिकी की तरफ बढ़ते रुझान ने भी इस वृद्धि को बल दिया है।
डच बैंक आईएनजी के मुख्य अर्थशास्त्री लिन सॉन्ग ने कहा कि जहाज, सेमीकंडक्टर चिप्स, वाहन और बैटरियों की मजबूत मांग वैश्विक प्रौद्योगिकी उछाल का परिणाम है और इससे व्यापार मूल्य वृद्धि को समर्थन मिला है।
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