Connect with us

छत्तीसगढ़

रायपुर : स्वाभिमान की नई पहचान : छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण का स्वर्णिम दौर

Published

on

•    डॉ. दानेश्वरी संभाकर, उप संचालक   

छत्तीसगढ़ में वर्ष 2026 को “महतारी गौरव वर्ष” के रूप में मनाते हुए महिलाओं के सम्मान, स्वाभिमान और आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा दी जा रही है। विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की योजनाएं अब जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणाम दे रही हैं, जिसका स्पष्ट प्रतिबिंब आंकड़ों में दिखाई देता है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि महतारी गौरव वर्ष महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने का व्यापक अभियान है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने बजट में महिलाओं और बच्चों के पोषण एवं स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आंगनबाड़ी संचालन के लिए 800 करोड़ रुपए, पूरक पोषण आहार के लिए 650 करोड़ रुपए तथा कुपोषण मुक्ति व पोषण अभियान के लिए 235 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है, जो आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ और सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण निवेश है।

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि राज्य में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महतारी वंदन योजना एक मील का पत्थर साबित हुई है। 10 मार्च 2024 को प्रारंभ इस योजना के तहत लगभग 70 लाख महिलाओं को प्रतिमाह 1 हजार रुपए की सहायता मिल रही है। अब तक 26 किस्तों के माध्यम से 16 हजार 881 करोड़ रुपए से अधिक राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में अंतरित की जा चुकी है, वहीं इस योजना के लिए 8 हजार 200 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए प्रस्तावित रानी दुर्गावती योजना के तहत 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर 1 लाख 50 हजार रुपए की सहायता दी जाएगी, जिसके लिए 15 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

राज्य में महिलाओं के लिए आधारभूत सुविधाओं का विस्तार भी तेजी से हो रहा है। महतारी सदनों के निर्माण के लिए 75 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिसके अंतर्गत अब तक 368 सदनों को स्वीकृति दी जा चुकी है और 137 का निर्माण पूर्ण हो चुका है। साथ ही 500 नए आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए 42 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं, जिससे ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में सेवाओं की पहुंच और मजबूत होगी।

मातृत्व सुरक्षा के क्षेत्र में प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के अंतर्गत 3 लाख 73 हजार से अधिक पंजीयन दर्ज किए गए हैं तथा 235 करोड़ रुपए से अधिक की राशि का भुगतान किया जा चुका है। वर्ष 2023-24 में जहां 1 लाख 75 हजार से अधिक पंजीकरण हुए, वहीं 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 2 लाख 19 हजार से अधिक हो गई। वर्ष 2025-26 में फरवरी तक 2 लाख 4 हजार से अधिक पंजीयन हो चुके हैं, जो निर्धारित लक्ष्य का 93 प्रतिशत से अधिक है।

पोषण अभियान में भी राज्य ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। पोषण माह 2024 के दौरान प्रति केंद्र प्रदर्शन में प्रदेश को प्रथम स्थान तथा कुल गतिविधियों में तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। वहीं न्योता भोज जैसे नवाचारों के तहत 9 हजार 700 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनसे 1 लाख 83 हजार से अधिक बच्चों को लाभ मिला।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्व-सहायता समूहों को रेडी-टू-ईट जैसे कार्यों से जोड़ा जा रहा है तथा लखपति दीदी योजना के माध्यम से उन्हें व्यवसायिक अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। उज्ज्वला योजना के तहत लगभग 38 लाख महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं, जिससे उन्हें स्वच्छ ईंधन की सुविधा मिली है। वहीं सखी वन स्टॉप सेंटरों की संख्या 27 से बढ़ाकर 34 कर दी गई है, जहां 14 हजार 300 से अधिक प्रकरणों में से 8 हजार 900 से अधिक का निराकरण किया जा चुका है।

स्पष्ट है कि “महतारी गौरव वर्ष” केवल एक प्रतीकात्मक पहल नहीं, बल्कि ठोस परिणाम देने वाला अभियान है। विष्णु देव साय और लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में महिलाएं अब विकास की धुरी बनकर उभर रही हैं और राज्य को नई दिशा दे रही हैं।

Continue Reading

छत्तीसगढ़

‘SIR से न सीएम योगी खुश, न अखिलेश’:ज्योतिबा फुले की जयंती मनाने लखनऊ पहुंचे भूपेश बघेल, बोले- उन्होंने महिला शिक्षा पर काम किया

Published

on

लखनऊ/रायपुर,एजेंसी। लखनऊ में कांग्रेस आज (11 अप्रैल को) ज्योतिबा फुले की जयंती मना रही है। यहां छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी पहुंचे। उन्होंने SIR पर कहा कि इस प्रक्रिया से न सीएम योगी खुश हैं और न ही विपक्ष के नेता अखिलेश यादव। जब सरकार में बैठे लोग ही SIR से संतुष्ट नहीं हैं तो इसमें हम अपना क्या ही बताएं।

ज्योतिबा फुले के लिए कहा कि उन्होंने महिलाओं के लिए स्कूल खोले। महिलाओं की शिक्षा के क्षेत्र में काम किया। बता दें कि लखनऊ में ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती कांग्रेस वैज्ञानिक जाति जनगणना दिवस के रूप में मना रही है।

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के मार्स ऑडिटोरियम में कांग्रेस के नेताओं का जुटान हुआ है।

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के मार्स ऑडिटोरियम में कांग्रेस के नेताओं का जुटान हुआ है।

ऑडिटोरियम में कांग्रेस के नेता और पदाधिकारी बैठे हुए हैं।

ऑडिटोरियम में कांग्रेस के नेता और पदाधिकारी बैठे हुए हैं।

Continue Reading

छत्तीसगढ़

आज से 8 दिन नहीं चलेंगी 10 ट्रेनें:रेलवे ने पहले किया रीस्टोर, दूसरे दिन कैंसिल, रायगढ़-गेवरारोड, झारसुगुड़ा-गोंदिया के यात्रियों की बढ़ी परेशानी

Published

on

बिलासपुर,एजेंसी। बिलासपुर रेलवे जोन ने जिन ट्रेनों को पहले कैंसिल किया था, उन्हें भीषण गर्मी में यात्रियों को सुविधा देने के लिए एक दिन पहले ही रिस्टोर किया था। अब दूसरे ही दिन 10 ट्रेनों को फिर रद्द कर दिया गया है। अचानक ट्रेनें कैंसिल होने से यात्रियों की परेशानियां बढ़ गई है। रेलवे ने यात्रियों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की है।

रेलवे प्रशासन की तरफ से कहा गया कि, बिलासपुर-झारसुगड़ा के बीच चौथी रेलवे लाइन को अकलतरा रेलवे स्टेशन से जोड़ा जा रहा है। यह काम 11 से 18 अप्रैल तक किया जाएगा। इस वजह से बिलासपुर से रायगढ़ और गेवरा रोड, कोरबा से रायपुर तक चलने वाली 10 लोकल और मेमू पैसेंजर को शनिवार 11 से 18 अप्रैल तक रद्द किया गया है।

इस तरह कुल 14 ट्रेन प्रभावित रहेंगी। इसके अलावा गोंदिया-झारसुगड़ा-गोंदिया जेडी पैसेंजर को आधे रास्ते ही चलाया जाएगा। कोरबा और रायपुर के मध्य चलने वाली हसदेव एक्सप्रेस को कोरबा से बिलासपुर के बीच पैसेंजर बनाकर चलाया जाएगा।

बिलासपुर से रायगढ़ और गेवरा रोड, कोरबा से रायपुर तक चलने वाली 10 लोकल और मेमू पैसेंजर को शनिवार 11 से 18 अप्रैल तक रद्द किया गया है।

बिलासपुर से रायगढ़ और गेवरा रोड, कोरबा से रायपुर तक चलने वाली 10 लोकल और मेमू पैसेंजर को शनिवार 11 से 18 अप्रैल तक रद्द किया गया है।

एक दिन पहले रिशेड्यूल करने दी थी जानकारी

अकलतरा रेलवे स्टेशन को चौथी लाइन से जोड़ने के काम को रेलवे प्रशासन ने रिशेड्यूल कर एक दिन पहले जानकारी दी थी कि, यात्री सुविधाओं के चलते रद्द की गई ट्रेनों को दो दिन दिन के लिए बहाल कर दिया गया है। लेकिन, दूसरे ही दिन शुक्रवार को रेलवे ने फिर से आदेश जारी कर दिया।

इसमें बताया गया कि 11 से 18 अप्रैल तक ट्रेनों को कैंसिल करने का निर्णय लिया गया है। इससे पहले 3 से लेकर 10 अप्रैल तक इस काम को करने का निर्णय लिया गया था। जिसमें बाद में बदलाव कर सभी ट्रेनों को री-स्टोर कर दिया गया था।

हसदेव पैसेंजर बनकर चलेगी

कोरबा-रायपुर-कोरबा ट्रेन नंबर 18250/18249 और 18252/18251 हसदेव एक्सप्रेस को 11 अप्रैल से 18 अप्रैल तक कोरबा-बिलासपुर-कोरबा के बीच पैसेंजर बनाकर चलाया जा रहा है। बिलासपुर से रायपुर के बीच यह ट्रेन पहले की तरह एक्सप्रेस बनकर चलेगी।

Continue Reading

छत्तीसगढ़

महानदी जल बंटवारा विवाद: ट्रिब्यूनल का कार्यकाल 9 महीने बढ़ा:छत्तीसगढ़-ओडिशा के बीच 44 साल पुराना मामला, 2027 में फैसले की उम्मीद

Published

on

रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच पिछले 44 साल से महानदी जल के बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा है। अब केंद्र सरकार ने महानदी जल विवाद ट्रिब्यून का कार्यकाल 9 महीने बढ़ाते हुए 13 जनवरी 2027 तक कर दिया है। अब सभी की नजरें 2027 की शुरुआत पर टिकी हैं, जब इस पर बहुप्रतीक्षित फैसला सामने आ सकता है।

दरअसल, इस विवाद की शुरुआत 1983 में हुई थी, जब छत्तीसगढ़ अलग राज्य नहीं था। यह मामला मध्य प्रदेश और ओडिशा के बीच था। समय के साथ कई नीतियां और समझौते बने, लेकिन उनका प्रभावी पालन नहीं हो सका।

विवाद 2016 में और बढ़ गया, जब ओडिशा सरकार ने केंद्र से हस्तक्षेप की मांग करते हुए अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम 1956 के तहत शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद 12 मार्च 2018 को केंद्र ने ट्रिब्यूनल का गठन किया।

बातचीत विफल, तब बना न्यायाधिकरण

केंद्र सरकार ने पहले बातचीत के जरिए समाधान निकालने के लिए एक नेगोशिएशन कमेटी बनाई थी, जिसने मई 2017 में रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में बताया गया कि, ओडिशा की भागीदारी नहीं होने के कारण सहमति नहीं बन सकी और विवाद बातचीत से सुलझना संभव नहीं है। इसके बाद ट्रिब्यूनल गठन का रास्ता साफ हुआ।

कामकाज में आई रुकावटें

ट्रिब्यूनल की प्रक्रिया कई बार बाधित हुई। कोरम की कमी, प्रशासनिक कारणों और पूर्व अध्यक्ष ए. एम. खानविलकर के इस्तीफे से काम प्रभावित हुआ। इसके अलावा कोविड-19 महामारी के चलते भी सुनवाई और जांच प्रक्रिया में देरी हुई, जिसके कारण समय-सीमा बार-बार बढ़ानी पड़ी।

ट्रिब्यूनल ने किया ग्राउंड सर्वे

इस विवाद की जांच के लिए ट्रिब्यूनल की टीम ने दो चरणों में रायपुर, बिलासपुर और कोरबा जिलों का दौरा किया था। इस दौरान महानदी और हसदेव नदी पर बनी जल परियोजनाओं का निरीक्षण किया गया। साथ ही छत्तीसगढ़ और ओडिशा के अधिकारियों से विस्तृत डेटा और तकनीकी जानकारी भी ली गई, ताकि वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके।

महानदी का पानी छत्तीसगढ़ राज्य के लिए बेहद उपयोगी है।

महानदी का पानी छत्तीसगढ़ राज्य के लिए बेहद उपयोगी है।

अर्थव्यवस्था और जीवन से जुड़ा मामला

महानदी दोनों राज्यों के लिए जीवनरेखा है। छत्तीसगढ़ में इसे ‘लाइफलाइन’ कहा जाता है। वहीं ओडिशा में सिंचाई, बिजली उत्पादन और उद्योग इसके पानी पर निर्भर हैं। ऐसे में ट्रिब्यूनल का फैसला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण होगा।

2027 में फैसले की उम्मीद

ट्रिब्यूनल को मिला 9 महीने का अतिरिक्त समय इस विवाद को अंतिम रूप देने की दिशा में अहम माना जा रहा है। अब सभी की नजरें 2027 की शुरुआत पर टिकी हैं, जब महानदी जल बंटवारे पर बहुप्रतीक्षित फैसला सामने आ सकता है।

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2020 Divya Akash | RNI- CHHHIN/2010/47078 | IN FRONT OF PRESS CLUB TILAK BHAVAN TP NAGAR KORBA 495677