बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कोरबा कलेक्टर रहीं और सस्पेंड आईएएस रानू साहू के रिश्तेदारों की संपत्ति अटैच करने के खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल ने अपने फैसले में कहा कि अपराध से पहले खरीदी गई संपत्ति भी अटैच की जा सकती हैं।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में सीधे सबूत होना जरूरी नहीं है। परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर भी कार्रवाई की जा सकती है। दरअसल कोल लेवी वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग केस में रानू साहू आरोपी हैं। जांच के दौरान ED को पता चला कि रानू साहू ने अवैध लेन-देन कर अपने रिश्तेदारों के नाम पर संपत्ति अर्जित की है।
जांच के बाद ED ने रानू साहू के रिश्तेदार तुषार साहू, पंकज कुमार साहू, पीयूष कुमार साहू, पूनम साहू, अरुण कुमार साहू, लक्ष्मी साहू, सहलिनी साहू और रेवती साहू की करोड़ों की संपत्तियों को अटैच किया है। जिसके खिलाफ रिश्तेदारों ने हाईकोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर की थी। साथ ही अटैच संपत्तियों को मुक्त कराने की मांग की थी।
ED की कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने लगाई मुहर
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि संबंधित संपत्तियां रानू साहू के कलेक्टर बनने से पहले खरीदी गई थी, इसलिए उन्हें अटैच करना गलत है। साथ ही यह भी दलील दी गई कि एफआईआर में उनका नाम शामिल नहीं है और अपीलेट ट्रिब्यूनल की ओर से अपील खारिज करना भी अनुचित है। हालांकि हाईकोर्ट ने इन सभी तर्कों को स्वीकार नहीं किया।
हाईकोर्ट बोला- मनी लांड्रिंग केस में संपत्ति अटैच करने का है अधिकार
डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अपराध से पहले खरीदी गई संपत्ति भी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत स्वतः सुरक्षित नहीं मानी जा सकती। कानून के तहत जुर्म से हुई कमाई की परिभाषा केवल अवैध संपत्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी समतुल्य कीमत की संपत्ति भी इसमें शामिल होती है।
ऐसी स्थिति में अगर वास्तविक अवैध कमाई का पता नहीं चल पाता, तो एजेंसियां बराबर मूल्य की अन्य संपत्तियों को भी अटैच कर सकती हैं। भले ही वे पहले कानूनी रूप से खरीदी गई हो।
डिवीजन बेंच ने कहा कि अपराध से पहले खरीदी गई संपत्ति भी अटैच की जा सकती है।
सीधे सबूत जरूरी नहीं, परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर्याप्त
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों में सीधे साक्ष्य मिलना अक्सर कठिन होता है, क्योंकि लेन-देन कठिन और इनडायरेक्ट तरीके से किए जाते हैं। फाइनेंशियल एनालिसिस, संपत्ति खरीद की टाइमलाइन और वैध आय के अभाव जैसे परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर भी यह माना जा सकता है कि संपत्ति और अपराध से हुई कमाई के बीच शुरुआत से संबंध है।
इन सभी तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने ED की कार्रवाई को सही ठहराते हुए रानू साहू के रिश्तेदारों की ओर से दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दी है।
रायपुर, एजेंसी। बीजेपी की नई प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी अपने पहले छत्तीसगढ़ दौरे में ही सरकार और संगठन के कामकाज की समीक्षा करेंगी। उनके साथ प्रदेश सह-प्रभारी सिद्धार्थ शंभू भी छत्तीसगढ़ आएंगे।
25 और 26 अक्टूबर को होने वाली बैठकों में मंत्रियों के विभागीय कामकाज के साथ संगठन का जमीनी फीडबैक भी अहम रहेगा। पार्टी का फोकस 2023 के विधानसभा चुनाव में हारी हुई 36 सीटों पर रहेगा।
इन क्षेत्रों में संगठन की स्थिति, बूथ समितियों की सक्रियता और पन्ना प्रमुखों की भूमिका की समीक्षा की जाएगी। इसके जरिए यह समझने की कोशिश होगी कि पिछली बार इन सीटों पर पार्टी कहां कमजोर रही और आगामी चुनाव से पहले किन स्तरों पर सुधार की जरूरत है।
स्मृति ईरानी सांसदों, विधायकों और मंत्रियों से अलग-अलग चर्चा करेंगी। इसके अलावा संगठन के पदाधिकारियों और जिला स्तर के नेताओं से भी बातचीत होगी। ऐसे में मंत्रियों की ओर से विभागीय उपलब्धियों और योजनाओं का ब्योरा दिए जाने के साथ जिलों में कामकाज को लेकर संगठन से मिलने वाला फीडबैक भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
इससे सरकार की योजनाओं और संगठन की जमीनी स्थिति के बीच तालमेल को समझने का अवसर मिलेगा।
विभागों में कितना काम, कितने लक्ष्य पूरे?
मंत्रियों से उनके विभागों की उपलब्धियों का ब्योरा लिए जाने पर सबसे अहम सवाल योजनाओं की घोषणा और उनके वास्तविक क्रियान्वयन के बीच का अंतर होगा। विभाग ने अब तक कौन-कौन से लक्ष्य पूरे किए, कितने काम लंबित हैं और किन परियोजनाओं में देरी हो रही है, इसकी जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है।
साथ ही मोदी की गारंटी के कितने काम हुए और इसके लिए विभागीय योजनाओं की प्रगति, स्वीकृत और पूर्ण परियोजनाओं, बजट के उपयोग और लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचने की स्थिति का विवरण मांगा जा सकता है। जिन योजनाओं में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है, उनमें देरी के कारण और उन्हें पूरा करने की समय सीमा भी तय की जा सकती है।
इसके अलावा विभाग से जुड़े विवाद, लंबित मामले, जनता की शिकायतें और प्रशासनिक स्तर पर आ रही अड़चनें भी कामकाज की तस्वीर समझने में अहम होंगी। इससे उपलब्धियों के साथ उन क्षेत्रों की पहचान भी की जा सकती है, जहां सुधार की जरूरत है।
प्रभार वाले जिलों का भी देना पड़ सकता है हिसाब
मंत्रियों को जिलों की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। ऐसे में उनके कामकाज का आकलन केवल विभागीय प्रदर्शन से नहीं, बल्कि प्रभार वाले जिलों में उनकी सक्रियता से भी जुड़ सकता है।
उनसे जानकारी ली जा सकती है कि मंत्री नियमित रूप से जिलों में जा रहे हैं या नहीं, मासिक बैठकें हो रही हैं या नहीं और कार्यकर्ताओं तथा जनता की समस्याओं पर कितना ध्यान दिया जा रहा है। जिलाध्यक्षों, जिला प्रभारियों, विधायकों और सांसदों से भी फीडबैक लिया गया था।
बैठक में मंत्रियों से उनके प्रभार वाले जिलों में की गई बैठकों, उठाए गए मुद्दों और समस्याओं के समाधान की जानकारी मांगी जा सकती है। मसलन, पिछले कुछ महीनों में कितने दौरे किए, जिला संगठन के साथ कितनी बैठकें हुईं, कार्यकर्ताओं की शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई और प्रशासनिक समस्याओं को दूर करने के लिए क्या पहल की गई।
मंत्री की रिपोर्ट और संगठन का फीडबैक
मंत्री अपने कामकाज का ब्योरा देंगे, लेकिन जिला स्तर पर संगठन की स्थिति की जानकारी जिलाध्यक्षों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के पास भी होती है। ऐसे में दोनों स्तरों से मिली जानकारी को साथ रखकर देखने से सरकार और संगठन के बीच तालमेल की स्थिति समझी जा सकती है।
यदि किसी मंत्री की ओर से जिले में नियमित बैठकों और समस्याओं के समाधान का दावा किया जाता है, तो स्थानीय संगठन से मिलने वाला फीडबैक उस तस्वीर को और स्पष्ट कर सकता है। कार्यकर्ताओं की नाराजगी, प्रशासनिक अधिकारियों से समन्वय की समस्या और जनता से जुड़े लंबित मुद्दे भी इस आकलन के महत्वपूर्ण पहलू हो सकते हैं।
सरकारी योजनाओं के प्रचार का भी हिसाब
सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाना केवल प्रशासनिक काम नहीं, बल्कि संगठनात्मक जनसंपर्क से भी जुड़ा है। ऐसे में नेताओं की सोशल मीडिया गतिविधियां और सरकारी योजनाओं के प्रचार में उनकी भूमिका भी समीक्षा का हिस्सा हो सकती है।
बीजेपी नेताओं के सोशल मीडिया पोस्ट और केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के प्रचार को लेकर जानकारी मांगने की बात भी कही जा रही है।
2028 से पहले संगठन को सक्रिय रखने की तैयारी
स्मृति ईरानी के दो दिवसीय दौरे में सांसदों, विधायकों, मंत्रियों और संगठन के पदाधिकारियों से बातचीत प्रस्तावित है। इन बैठकों के जरिए पार्टी सरकार के कामकाज और संगठन की गतिविधियों की स्थिति समझ सकती है। साथ ही आगामी चुनाव को देखते हुए संगठनात्मक प्राथमिकताओं पर चर्चा भी हो सकती है।
दौरे के बाद यह स्पष्ट होगा कि पार्टी किन क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने पर जोर देती है और क्या बूथ स्तर तक कामकाज की समीक्षा के लिए कोई समयसीमा या नई जिम्मेदारी तय की जाती है।
36 सीटों पर संगठन की स्थिति समझने की चुनौती
2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 90 में से 54 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। बाकी 36 सीटों पर पार्टी को हार मिली थी। आगामी विधानसभा चुनाव 2028 में होना है। ऐसे में जिन क्षेत्रों में पिछली बार पार्टी को सफलता नहीं मिली, वहां संगठन की स्थिति और चुनावी चुनौतियों को समझना महत्वपूर्ण होगा।
इन सीटों पर हार के कारण हर जगह एक जैसे नहीं थे। कहीं स्थानीय मुद्दे महत्वपूर्ण थे, तो कहीं उम्मीदवार, संगठन की सक्रियता या बूथ स्तर पर कमजोरियां प्रभावी रही।
विधानसभा क्षेत्रवार समीक्षा से इन अलग-अलग परिस्थितियों को समझने में मदद मिल सकती है। लिहाजा ये माना जा रहा है कि इन 36 सीटों की समीक्षा बैठक में की जा सकती है।
बूथ और पन्ना प्रमुखों के पुर्नगठन का प्लान तैयार होगा
चुनाव में बूथ स्तर का संगठन पार्टी की रणनीति को मतदाताओं तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बूथ समितियां स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने, मतदाताओं से संपर्क बनाने और पार्टी के कार्यक्रमों को जमीन पर लागू करने का काम करती हैं। वहीं पन्ना प्रमुखों की जिम्मेदारी मतदाता सूची के निर्धारित हिस्से में मतदाताओं से संपर्क बनाए रखने की होती है।
इसलिए प्रदेश प्रभारी बूथ समिति के पुर्नगठन के लिए एक्शन प्लान तैयार करके देंगी। इसके लिए बूथ पर विशेष सदस्यों का गठन किया जा सकता है।
समीक्षा के बाद तय हो सकती हैं प्राथमिकताएं
स्मृति ईरानी के दौरे में सांसदों, विधायकों, मंत्रियों और संगठन के पदाधिकारियों से अलग-अलग चर्चा की योजना है। ऐसे में बैठकों से सरकार के कामकाज, संगठन की सक्रियता और आगामी चुनाव की तैयारियों को लेकर पार्टी की प्राथमिकताओं के संकेत मिल सकते हैं।
मंत्रियों के विभागीय प्रदर्शन, प्रभार वाले जिलों में सक्रियता, कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल और हारी हुई सीटों पर संगठन की स्थिति जैसे विषयों पर मिली जानकारी के आधार पर आगे के काम तय किए जा सकते हैं। लेकिन समीक्षा के बाद मंत्रिमंडल में बदलाव होगा या किसी नेता को नई जिम्मेदारी मिलेगी, इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
फिलहाल इस दौरे का महत्वपूर्ण पहलू यही रहेगा कि पार्टी सरकार और संगठन के कामकाज का आकलन किन आधारों पर करती है और सामने आने वाली कमियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
कोरबा। दो दिन पूर्व रजगामार में एक 07 वर्षीय मासूम के साथ दरिन्दगी और हत्या के बाद मासूम का शव मिलने के बाद जहां उनके परिजनों में अतिशोक की लहर है, वहीं पूरे कोरबा में आक्रोश शिखर पर है। कल 23 अक्टूबर को पुलिस अधिकारियों ने पत्रकार वार्ता लेकर मामले का खुलासा किया और दरिन्दा आरोपी अमित चौहान को देवमट्टी से गिरफ्तार कर लिया। आज कोरबा जिले के कई जगहों में मासूम को न्याय दिलाने और आरोपी को फांसी की सजा की मांग को लेकर कैण्डल मार्च निकाला और मासूम को हजारों-लाखों लोगों ने श्रद्धांजलि दी। आज संध्या 5.30 बजे तिलक भवन प्रेस क्लब कोरबा में प्रेस क्लब परिवार सहित सैकड़ों की संख्या में कोरबा के विभिन्न सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवी वर्ग, समाजसेवी, नारीशक्ति, राजनेता, अग्रवाल सभा, व्यापारी संगठन, अखबार वितरक संघ सहित आम से लेकर खास लोग इकट्ठे हुए और संध्या 5.45 बजे तिलक भवन से कैण्डल मार्च करते हुए टी पी नगर चौक पहुंचे और वहां हजारों कैण्डल जलाकर मासूम को विनम्र श्रद्धांजलि दी। घटना अमानवीयता की इंतहां-नौशाद खान
प्रेस क्लब कोरबा अध्यक्ष नौशाद खान ने कहा कि रजगामार में मासूम के साथ जो बर्बरता के साथ हत्या की गई, उसके विरोध में हमने कैण्डल मार्च निकाला, जिसमें कोरबा प्रेस परिवार के साथ कोरबा के हजारों लोग स्वस्फूर्त शामिल हुए और तिलक भवन से टी पी नगर चौक तक कैण्डल मार्च निकाला और टी पी नगर चौक में मासूम को विनम्र श्रद्धांजलि दी। श्री खान ने कहा- यह घटना इतना क्रूर है कि आरोपी को सजा-ए-मौत मिलनी चाहिए। रजगामार में मासूम के साथ बर्बरता एवं निर्मम हत्या की घटना अमानवीयता की इंतहां है और मासूम के साथ बर्बरता करने वाला दरिन्दा को फांसी से कम की सजा नहीं होनी चाहिए। इस तरह की घटना सनातन संस्कृति में क्षम्य नहीं- कविता सोनी
समाज सेविका कविता सोनी ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि इस तरह की घटना हमारी सनातन संस्कृति में क्षम्य नहीं है और आरोपी को फांसी पर लटका देना चाहिए। इस मामले में त्वरित न्याय और आरोपी को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। आरोपी को कड़ी सजा हो, इसके लिए पुलिस पुख्ता सबूत पेश करे-साहित्य जगत
कैण्डल मार्च में साहित्य जगत के लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। कोरबा के साहित्यकार एवं कवि श्री चतुर्वेदी ने कहा कि आरोपी को कड़ी सजा हो, इसके लिए पुलिस पुख्ता सबूत पेश करे। साहित्यकार कृष्णकांत चंद्रा ने कहा कि मासूम के साथ अमानवीय कृत्य और हत्या सभ्य समाज के लिए कलंक है और इस तरह के कृत्य करने वाले राक्षस को ऐसी सजा मिले कि आरोपियों की रूह कांप जाए। भाजपा नेत्रियों रानी यादव सहित उपस्थित नेत्रियों एवं अन्य महिला संगठन ने भी आरोपी को त्वरित फॉस्टट्रैक कोर्ट में पेश कर पुलिस को अपना पक्ष ऐसा रखना चाहिए कि जज आरोपी को सीधा फांसी की सजा सुनाए। आरोपी की पैरवी नहीं करेगा अधिवक्ता संघ
कैण्डल मार्च में नगर निगम सभापति और अधिवक्ता संघ के सचिव नूतन सिंह सहित कई अधिवक्ता भी शामिल हुए। नूतन सिंह ने कहा कि बच्ची के साथ दरिन्दगी और हत्या मानवीय समाज के लिए जघन्य कांड है और ऐसे राक्षस रूपी आरोपी की पैरवी अधिवक्ता संघ नहीं करेगा। हम टीम बनाकर आरोपी को ऐसी सजा के लिए पैरवी करेंगे, कि सजा सुनकर आरोपी की रूह कांप जाए। फांसी से कम सजा स्वीकार्य नहीं- बजरंग अग्रवाल
कैण्डल मार्च में अग्रवाल सभा ने बड़ी संख्या में अपनी सहभागिता निभाई। अग्रवाल सभा के अध्यक्ष बजरंग अग्रवाल ने कहा कि कोरबा को झकझोर देने वाली घटना ने लोगों के दिलों में एक ऐसा आक्रोश पैदा कर दिया है कि आरोपी को फांसी से कम सजा नहीं मिलनी चाहिए और न्याय भी त्वरित हो। पोस्ट मार्टम रिपोर्ट आना बाकी
कल पुलिस ने मामले का खुलासा किया और बेलगरी नाला बस्ती निवासी आरोपी को घटना के 24 घंटे के अंदर देवमट्टी से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार संभवत: हत्या के पूर्व आरोपी द्वारा दरिन्दगी की गई होगी और उसके बाद हत्या कर लाश को झाड़ियों में फेंक दिया होगा। पुलिस को पोस्ट मार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।
मासूम के साथ दरिन्दगी सभ्य समाज पर कलंक
साधना न्यूज की कोरबा जिला हेड श्रीमती रेणु जायसवाल ने कहा कि मासूम के साथ दरिन्दगी और हत्या सभ्य समाज के लिए कलंक है। उन्होंने कहा कि पुलिस को भी चाहिए कि यदि कोई मासूम गुम होती है तो पुलिस को सक्रियता दिखानी चाहिए, ताकि इस तहर की घटना की पुनर्रावृत्ति न हो। राक्षस से भी बदतर आरोपी को सिर्फ फांसी की सजा हो। मुस्लिम यूथ कमेटी ने भी निकाला कैण्डल मार्च
मुस्लिम यूथ कमेटी ने भी घटना के विरोध में और आरोपी को फांसी की सजा देने की मांग को लेकर कैण्डल मार्च निकाला और टी पी नगर चौक में कैण्डल जलाकर मासूम को श्रद्धांजलि दी। यूथ कमेटी के अध्यक्ष ने कहा कि आरोपी को ऐसी कड़ी सजा मिले कि अन्य कोई इस तरह की घटना न घटे।
एचएमआईएस और पीपीओ/जीवन प्रमाण पत्र पोर्टल से स्वास्थ्य एवं पेंशन संबंधी सुविधाएं हो रहीं आसान
बिलासपुर/कोरबा। स्पेशल कैम्पेन 6 के उद्देश्यों को आगे बढ़ाते हुए साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) डिजिटल सेवाओं के माध्यम से प्रशासनिक दक्षता, पारदर्शिता और सेवा सुविधाओं की सुगमता को मजबूत कर रही है। कंपनी की हॉस्पिटल मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (एचएमआईएस) और पीपीओ/जीवन प्रमाण पत्र पोर्टल जैसी पहलें कर्मचारियों, पेंशनभोगियों एवं उनके परिजनों के लिए स्वास्थ्य और पेंशन संबंधी सेवाओं तक पहुंच आसान बना रही हैं।
कोयला मंत्रालय के अंतर्गत एसईसीएल की ये पहलें कागजी कार्यवाही कम करने, अभिलेखों के व्यवस्थित प्रबंधन और सेवाओं के त्वरित निस्तारण के माध्यम से अभियान के सुशासन संबंधी उद्देश्यों को गति दे रही हैं।
एचएमआईएस से स्वास्थ्य सेवाओं का एकीकृत डिजिटल प्रबंधन
एसईसीएल का एचएमआईएस स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबंधन के लिए एक एकीकृत डिजिटल मंच उपलब्ध कराता है। इसमें मरीजों के पंजीयन, चिकित्सकीय परामर्श, उपचार और दवाओं से संबंधित जानकारी डिजिटल रूप में दर्ज की जाती है। इससे चिकित्सा अभिलेखों का व्यवस्थित संधारण होता है तथा मरीज के पिछले उपचार की जानकारी प्राप्त करना आसान बनता है।
इस प्रणाली में चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों के ऑनलाइन प्रसंस्करण की सुविधा भी उपलब्ध है। अमृत फार्मेसी के एकीकरण और दवा प्रबंधन से जुड़ी सुविधाएं प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने तथा स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने में सहायता कर रही हैं।
पेंशनभोगियों के लिए पीपीओ और जीवन प्रमाण पत्र की डिजिटल सुविधा
सेवानिवृत्त कर्मचारियों तथा दिवंगत कर्मचारियों के पात्र जीवनसाथियों की सुविधा के लिए एसईसीएल ने केंद्रीकृत पीपीओ/जीवन प्रमाण पत्र पोर्टल विकसित किया है। इसके माध्यम से पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ) ऑनलाइन प्राप्त और डाउनलोड किए जा सकते हैं। पोर्टल वार्षिक जीवन प्रमाण पत्र डिजिटल माध्यम से जमा करने की प्रक्रिया को भी सरल बनाता है।
इस व्यवस्था से भौतिक दस्तावेजों और मैनुअल प्रक्रियाओं पर निर्भरता कम होती है। पोर्टल से जुड़ा गवर्नेंस डैशबोर्ड एसईसीएल के विभिन्न क्षेत्रों में पीपीओ अपलोड और संबंधित अनुपालन की निगरानी में सहायता करता है। इससे कार्यों की प्रगति की समीक्षा तथा प्रशासनिक समन्वय अधिक प्रभावी होता है।
बेहतर अभिलेख प्रबंधन और त्वरित सेवाओं पर जोर
स्पेशल कैम्पेन 6 का क्रियान्वयन चरण 2 से 31 अक्टूबर 2026 तक संचालित किया जा रहा है। अभियान में स्वच्छता, ई-वेस्ट प्रबंधन, उपलब्ध स्थान के बेहतर उपयोग, अभिलेख प्रबंधन और लंबित मामलों के निपटारे पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
एसईसीएल की डिजिटल पहलें इन उद्देश्यों के अनुरूप कागजरहित कार्यप्रणाली, बेहतर रिकॉर्ड प्रबंधन और सेवाओं की आसान उपलब्धता को बढ़ावा दे रही हैं। एचएमआईएस और पीपीओ/जीवन प्रमाण पत्र पोर्टल के माध्यम से कंपनी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों एवं उनके परिवारों के लिए आवश्यक सेवाओं को अधिक सुलभ और सुविधाजनक बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।