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Bank Holidays in May: शुक्रवार यानि 1 मई को बैंक रहेंगे बंद, चेक करें मई में छुट्टियों की लिस्ट

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मुंबई, एजेंसी। अगर इस हफ्ते आपको बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम निपटाना है, तो पहले छुट्टियों का शेड्यूल जरूर देख लें। अप्रैल के आखिरी और मई की शुरुआत वाले सप्ताह में कई राज्यों में बैंक बंद रहने वाले हैं, जिससे कामकाज प्रभावित हो सकता है।

इस हफ्ते कब-कब बंद रहेंगे बैंक

1 मई (शुक्रवार) को Maharashtra Day और International Labour Day के मौके पर महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में बैंक बंद रहेंगे। कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी इस दिन बैंक अवकाश रहेगा। हालांकि, सभी राज्यों में यह छुट्टी लागू नहीं होगी और कुछ जगहों पर बैंक सामान्य रूप से खुले रह सकते हैं। इसके बाद 3 मई को रविवार होने के कारण पूरे देश में साप्ताहिक अवकाश रहेगा।

2 मई को खुला रहेगा बैंक

आरबीआई के नियमों के मुताबिक, बैंक केवल दूसरे और चौथे शनिवार को बंद रहते हैं। चूंकि 2 मई महीने का पहला शनिवार है, इसलिए इस दिन देशभर की शाखाओं में कामकाज सामान्य रूप से जारी रहेगा।  

मई महीने में छुट्टियों की लिस्ट

9 मई: रवींद्रनाथ टैगोर जयंती और दूसरा शनिवार (अवकाश)
23 मई: चौथा शनिवार (अवकाश)
27-28 मई: बकरीद (ईद-उल-अजहा) की संभावित छुट्टियां
इसके अलावा 10, 17, 24 और 31 मई को रविवार होने के कारण देशव्यापी अवकाश रहेगा।

डिजिटल सेवाएं रहेंगी जारी

बैंक शाखाएं बंद रहने के बावजूद, ऑनलाइन बैंकिंग सेवाएं जैसे नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और UPI बिना रुकावट के काम करती रहेंगी। नकद निकासी के लिए ATM भी उपलब्ध रहेंगे लेकिन चेक क्लियरिंग और डिमांड ड्राफ्ट जैसी सेवाओं के लिए आपको अगला कार्यदिवस इंतजार करना पड़ सकता है।

छुट्टियों की जानकारी कहां देखें

बैंक छुट्टियां अलग-अलग राज्यों में स्थानीय त्योहारों और सरकारी फैसलों पर निर्भर करती हैं। सटीक जानकारी के लिए Reserve Bank of India की आधिकारिक वेबसाइट या अपने बैंक से संपर्क करना बेहतर रहेगा।

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छत्तीसगढ़

अनिल अग्रवाल ने सिंहितराई पावर प्लांट हादसे पर दुख जताया, सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई

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सक्ती/सिंघीतराई। वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने सिंहितराई पावर प्लांट हादसे पर सोशल मीडिया (एक्स) पर 27 अप्रैल 2026 को अपनी दूसरी पोस्ट में इस साल की शुरुआत में अपने बेटे के निधन और हाल ही में हुए बॉयलर हादसे, जिसमें 25 लोगों की जान गई, के बाद गहरे व्यक्तिगत और पेशेवर दुख के दौर पर बात की। सोमवार को अपनी पोस्ट में, अग्रवाल ने पिछले कुछ महीनों को अपने जीवन के सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण समयों में से एक बताया और दोनों घटनाओं से जुड़े अपार दुख को व्यक्त किया।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एथेना प्लांट कड़े सुरक्षा और सेफ्टी प्रोटोकॉल के तहत संचालित हो रहा था। इसके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी एनजीएसएल को सौंपी गई थी, जो भारत की विश्वसनीय महारत्न कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड और जनरल इलेक्ट्रिक के बीच साझेदारी है। यह काम अनुभवी टीमों, स्थापित प्रणालियों और उद्योग मानकों के सुरक्षा उपायों के साथ किया जा रहा था। इन सभी उपायों के बावजूद, उन्होंने कहा कि यह दुखद घटना हो गई, जो इस तरह की घटनाओं की अनिश्चितता को दर्शाती है।
उन्होंने आगे वेदांता की इस प्रतिबद्धता को दोहराया कि कंपनी प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी रहेगी और अपने सभी कार्यों में सुरक्षा, देखभाल और जिम्मेदारी पर लगातार ध्यान बनाए रखेगी।
उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा:
““सुना था वक्त अक्सर इम्तिहान लेता है, पिछले कुछ महीनों से मैं यह अनुभव भी कर रहा हूँ।
साल की शुरुआत में ही, मैंने पहले अपने नौजवान बेटे को खो दिया और फिर इस महीने, 14 अप्रैल को सिंहितराई पावर प्लांट में हुए अफसोसजनक हादसे ने मुझसे 25 बेशकीमती साथी छीन लिए। मैं ऐसी असामयिक मृत्यु का दर्द भली भाँति जानता हूँ।
दोनों ही हादसे, इतने अननेचुरल से, पीड़ा से भरे लगते हैं, जिसकी कोई कल्पना नहीं कर सकता।
मुझे दुख और हैरत होती है सोचकर कि हमारे इस एथेना प्लांट में हमने सर्वोच्च सावधानी बरती, इस प्लांट की पूरी जिम्मेदारी भी हमने हिंदुस्तान की सबसे भरोसेमंद महारत्न कंपनी एनटीपीसी-जीई की पार्टनरशिप एनजीएसएल को सौंपी। कॉन्टैक्टर्स और एम्पलॉइज भी उनके थे। एक्सपरटाईज भी उनका था। और इसी भरोसे पे निश्चिंत होकर हमने इस प्लांट का रखरखाव और ऑपरेशन्स, आउटसोर्स किया था। फिर भी यह दुर्भाग्यपूर्ण हादसा हो गया।
यह वैसा ही है जैसे अक्सर वाहन मालिक, अपना वाहन किसी भरोसेमंद ड्राइवर को दे देते हैं। और उम्मीद करते हैं कि वाहन चालक और वाहन, नियमों के साथ चलकर सलामत रहेंगे।
वेदांता के हर कांट्रैक्ट में सेफ्टी पर सबसे ज़्यादा फोकस रहता है। और एनटीपीसी और जीई की भी यही पॉलिसी रही है। उसके बाद भी इतनी बड़ी दुर्घटना हो जाए तो दिल टूट जाता है।
मेरे बेटे अग्निवेश सहित, जो 25 प्रियजन हमने खोए हैं, उन सभी जनों को मैं, वेदांता परिवार और अपनी ओर से श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।

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US पैसिफिक एयर फोर्सेज कमांडर ने किया भारत दौरा, कहा- भारत और अमेरिका में रक्षा साझेदारी हुई मजबूत

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नई दिल्ली,एजेंसी। अमेरिकी  वायु सेना के जनरल केविन बी. श्नाइडर हाल ही में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मज़बूत करने के लिए भारत आए थे। यह यात्रा 19 से 25 अप्रैल के बीच हुई, जिसके दौरान उन्होंने भारतीय रक्षा अधिकारियों के साथ कई अहम बैठकें कीं। इस दौरान, जनरल श्नाइडर ने भारतीय वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाक़ात की और दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को और बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। इन चर्चाओं का मुख्य मकसद दोनों सेनाओं के बीच आपसी तालमेल (interoperability) को बेहतर बनाना और भविष्य के संयुक्त अभियानों के लिए तैयारी सुनिश्चित करना था।

पिछले कुछ सालों में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंध तेज़ी से मज़बूत हुए हैं। अब दोनों देश न सिर्फ हवाई क्षेत्र में, बल्कि जमीन, समुद्र, अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्रों में भी अपना सहयोग बढ़ा रहे हैं। इससे दोनों देशों की सैन्य क्षमताओं और तालमेल में काफ़ी सुधार हो रहा है। इस यात्रा के दौरान लॉजिस्टिक्स,खास तौर पर सैन्य संसाधनों के आदान-प्रदान पर भी विशेष जोर दिया गया। एक मजबूत लॉजिस्टिक्स प्रणाली दोनों देशों को किसी भी आपात स्थिति या संकट के दौरान तेज़ी से प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाती है। यह मानवीय सहायता प्रदान करने और आपदा प्रबंधन प्रयासों में भी फायदेमंद साबित होगा।

जनरल श्नाइडर ने भारत भर में विभिन्न सैन्य और प्रशिक्षण केंद्रों का भी दौरा किया। यह इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने नई तकनीकों और आधुनिक सैन्य क्षमताओं को विकसित करने के महत्व पर भी जोर दिया। अपनी यात्रा के दौरान, उन्होंने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी और उन्हें ‘गार्ड ऑफ़ ऑनर’ दिया गया। इसके अलावा, उन्होंने भारतीय वायु सेना के प्रमुख, एपी सिंह से भी मुलाक़ात की। कुल मिलाकर, यह यात्रा इस बात का संकेत है कि भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और भी मजबूत होने की संभावना है। 

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हथियारों की दौड़ तेज: भारत का रक्षा बजट 92 अरब डॉलर पार, वर्ल्ड रैकिंग में 5वें नंबर पर पंहुचा देश

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नई दिल्ली,एजेंसी। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और युद्धों के बीच दुनिया में सैन्य खर्च लगातार बढ़ रहा है। Stockholm International Peace Research Institute की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में दुनिया का कुल सैन्य खर्च बढ़कर 2887 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो लगातार 11वें साल वृद्धि को दर्शाता है।
इस रिपोर्ट के मुताबिक, India ने भी अपने रक्षा बजट में बड़ा इजाफा किया है। भारत का सैन्य खर्च 8.9% बढ़कर 92.1 अरब डॉलर हो गया है, जिससे वह दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश बन गया है। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए की गई है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष ने इस खर्च को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। इस संघर्ष में लड़ाकू विमान, ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ था, जिसके बाद भारत ने अपनी सैन्य तैयारियों को और मजबूत करने पर जोर दिया।वहीं Pakistan ने भी अपने सैन्य खर्च में 11% की बढ़ोतरी की है, जो 11.9 अरब डॉलर तक पहुंच गया। पाकिस्तान ने यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से चीन से नए हथियारों और सैन्य उपकरणों की खरीद के कारण की है।दूसरी तरफ China ने अपने रक्षा बजट में 7.4% की वृद्धि की, जो अब 336 अरब डॉलर हो गया है। यह लगातार 31वां साल है जब चीन ने अपने सैन्य खर्च में इजाफा किया है, जिससे उसकी सैन्य ताकत लगातार बढ़ रही है। वैश्विक स्तर पर सबसे ज्यादा सैन्य खर्च करने वाले देशों में United States पहले स्थान पर है, हालांकि उसका खर्च 2025 में 7.5% घटकर 954 अरब डॉलर रह गया।

इसके पीछे मुख्य कारण यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य सहायता में कमी बताया गया है। यूरोप और एशिया में सैन्य खर्च तेजी से बढ़ा है। यूरोप में 14% की वृद्धि देखी गई, जबकि एशिया और ओशिनिया में 8.1% की बढ़ोतरी हुई। इसका कारण रूस-यूक्रेन युद्ध और अन्य क्षेत्रीय तनाव हैं, जिनके चलते देशों ने अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने पर जोर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में वैश्विक GDP का 2.5% हिस्सा सैन्य खर्च पर खर्च किया गया, जो 2009 के बाद सबसे ज्यादा है। इससे साफ है कि दुनिया में बढ़ती अस्थिरता और सुरक्षा चिंताओं के कारण हथियारों की दौड़ लगातार तेज होती जा रही है। कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट दिखाती है कि वैश्विक स्तर पर शांति की बजाय सैन्य ताकत को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे आने वाले समय में तनाव और बढ़ सकता है।

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