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छत्तीसगढ़

विधानसभावार मतदान केन्द्रों की संख्या 1006

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विधानसभा निर्वाचन 2023

आरजेएन में 840, केसीजी में 97 एमएमएसी में 69 मतदान केन्द्र

राजनांदगांव। विधानसभावार कुल मतदान केन्द्रों की संख्या 1006 है, जिसमें राजनांदगांव जिला अंतर्गत 840 मतदान केन्द्र एवं खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई जिला अंतर्गत 97 मतदान केन्द्र तथा मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी अंतर्गत 69 मतदान केन्द्र है। विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 74-डोंगरगढ़़ (अनुसूचित जाति) अंतर्गत कुल मतदान केन्द्रों की संख्या 270 है। इसके अंतर्गत खैरागढ़ तहसील (जिला खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई) में मतदान केन्द्रों की संख्या 97, डोंगरगढ़ तहसील में मतदान केन्द्रों की संख्या 80, घुमका तहसील में मतदान केन्द्रों की संख्या 62 एवं राजनांदगांव तहसील में मतदान केन्द्रों की संख्या 31 है। इस तरह डोंगरगढ़ विधानसभा क्षेत्र के 173 मतदान केन्द्र राजनांदगांव जिला अंतर्गत आते है। विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 75-राजनांदगांव अंतर्गत कुल मतदान केन्द्रों की संख्या 223 है। विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 76-डोंगरगांव अंतर्गत कुल मतदान केन्द्रों की संख्या 252 है। इसके अंतर्गत डोंगरगांव तहसील में मतदान केन्द्रों की संख्या 132, डोंगरगढ़ तहसील में मतदान केन्द्रों की संख्या 54 एवं लाल बहादुर नगर तहसील में मतदान केन्द्रों की संख्या 66 है। विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 77-खुज्जी अंतर्गत कुल मतदान केन्द्रों की संख्या 261 है। इसके अंतर्गत छुरिया तहसील में मतदान केन्द्रों की संख्या 106, कुमरदा तहसील में मतदान केन्द्रों की संख्या 86 एवं अम्बागढ़ चौकी तहसील (जिला मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी) में मतदान केन्द्रों की संख्या 69 है। इस तरह खुज्जी विधानसभा क्षेत्र के 192 मतदान केन्द्र राजनांदगांव जिला में है।

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छत्तीसगढ़

बैज बोले-‘कम उपयोग’ की सलाह जख्म पर नमक छिड़कने जैसा:पीएम की अपील पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने बोला हमला,कहा-सरकार जिम्मेदारी से बच रही है

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रायपुर, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील को लेकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पत्रकार वार्ता में कहा कि देश पहले से महंगाई, पेट्रोल-डीजल संकट और बेरोजगारी से जूझ रहा है, ऐसे समय में प्रधानमंत्री लोगों को कम इस्तेमाल की सलाह देकर अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं।

बैज ने कहा कि प्रधानमंत्री ने किसानों से उर्वरक कम इस्तेमाल करने, महिलाओं से तेल और गैस बचाने, कर्मचारियों से ‘वर्क फ्रॉम होम’ करने, लोगों से सोना और विदेश यात्रा कम करने की अपील की है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार संकट का समाधान निकालने के बजाय जनता को “कम खर्च करो” का संदेश दे रही है।

“खाद नहीं, सलाह मिल रही”

कांग्रेस ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन के लिए करीब 15 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की जरूरत है, लेकिन अभी तक सिर्फ 51 हजार मीट्रिक टन खाद ही समितियों तक पहुंच पाई है। बैज ने कहा कि किसान पहले से खाद संकट और बढ़ती लागत से परेशान हैं, ऐसे में उर्वरक कम इस्तेमाल करने की सलाह उनकी उत्पादन क्षमता पर असर डालेगी।

उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा करने वाली सरकार अब उत्पादन घटाने जैसी बातें कर रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील को लेकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील को लेकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है।

“वर्क फ्रॉम होम की सलाह मैदान में काम करने वालों को कैसे लागू होगी?”

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि देश में बड़ी आबादी फील्ड जॉब, छोटे कारोबार, ठेला-फेरी और दैनिक कामकाज पर निर्भर है। ऐसे लोगों के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ जैसी सलाह व्यवहारिक नहीं है।

उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का जिक्र करते हुए कहा कि पहले “आराम हराम है” का संदेश दिया जाता था, जबकि अब लोगों को घर बैठने की सलाह दी जा रही है।

रसोई से लेकर पेट्रोल तक महंगा

कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में 2013 और 2026 के दामों की तुलना करते हुए दावा किया कि आटा, दाल, तेल, दूध, गैस सिलेंडर और पेट्रोल-डीजल के दाम कई गुना बढ़ चुके हैं। बैज ने कहा कि रसोई का बजट पहले ही बिगड़ चुका है और महिलाएं हर जरूरी चीज में कटौती करने को मजबूर हैं।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पेट्रोलियम उत्पादों पर टैक्स बढ़ाकर केंद्र सरकार ने जनता से लाखों करोड़ रुपए वसूले हैं, लेकिन राहत देने के बजाय बचत की अपील की जा रही है।

आवश्यक सामाग्री के दाम मनमोहन सरकार की तुलना में मोदी राज में बेतहाशा बढ़ी

आवश्यक सामग्री2013 कीमत2026 कीमत
आटा (10 किलो)210 रुपए530 रुपए
चावल30-36 रुपए किलो50-65 रुपए किलो
फुल क्रीम दूध39 रुपए66 रुपए
देसी घी300 रुपए1080 रुपए
सरसों तेल52 रुपए260 रुपए
अरहर दाल70-80 रुपए160-170 रुपए
रसोई गैस410 रुपए1000 रुपए
पेट्रोल66 रुपए100 रुपए
डीजल52 रुपए95 रुपए
रिफाइंड तेल86 रुपए175 रुपए
फल्ली दाना60 रुपए135 रुपए
उड़द दाल64 रुपए120 रुपए
मूंग दाल62 रुपए130 रुपए
मसूर दाल47 रुपए90 रुपए
चना दाल40 रुपए90 रुपए
जीरा220 रुपए1450 रुपए
गेहूं22 रुपए36-40 रुपए

सोना मत खरीदो, लेकिन खुद विदेश यात्राओं पर खर्च-दीपक बैज

बैज ने प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार ने विदेश दौरों और विशेष विमान पर भारी खर्च किया है, जबकि आम लोगों को खर्च कम करने की सलाह दी जा रही है।

कांग्रेस ने कहा कि अगर डीजल-पेट्रोल बचाने की जरूरत है तो इसकी शुरुआत मंत्रियों और नेताओं के बड़े काफिलों से होनी चाहिए।

“मोदी सरकार संकट संभालने में विफल”

कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार महंगाई, बेरोजगारी और ईंधन संकट से निपटने में असफल रही है। पार्टी ने यह भी कहा कि पिछले 12 वर्षों में तेल भंडारण क्षमता बढ़ाने की दिशा में कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया, जिसका असर अब संकट के समय दिखाई दे रहा है।

प्रेस वार्ता में धनेन्द्र साहू, सत्यनारायण शर्मा, शिवकुमार डहरिया और सुशील आनंद शुक्ला समेत कई कांग्रेस नेता मौजूद रहे।

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छत्तीसगढ़

CGPSC घोटाला 2003- सुप्रीम कोर्ट ने अपनाया सुलह का रास्ता:दोनों पक्षों को लोक अदालत में बुलाया, याचिकाकर्ता बोलीं- हाईकोर्ट के फैसले पर हो अमल

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बिलासपुर, एजेंसी। CGPSC-2003 के बहुचर्चित गड़बड़ी का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस केस में सुलह कराने के लिए समझौते का रास्ता अपनाया है। मामले में याचिकाकर्ता वर्षा डोंगरे और चयनित उम्मीदवारों को सुप्रीम कोर्ट में आयोजित समाधान समारोह (विशेष लोक अदालत) में बुलाया गया है।

हालांकि, वर्षा डोंगरे का कहना है कि इस मामले में समझौते की कोई गुंजाइश नहीं है। उनका कहना है कि हाईकोर्ट पहले ही इस मामले में फैसला दे चुका है, इसलिए उसे लागू किया जाना चाहिए।

बतादें कि हाईकोर्ट ने 2017 में चयन सूची को रद्द करते हुए नए सिरे से मेरिट सूची बनाने और पदस्थापना का आदेश जारी किया था। इस पर अमल होने की स्थिति में आधा दर्जन डिप्टी कलेक्टर निचले पदों पर चले जाते, लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया। तब से यह मामला लंबित है और चयनित उम्मीदवारों के पक्ष में स्टे पर केस चल रहा है।

साल 2003 में पीएससी द्वारा की गई गड़बड़ी दो साल तक छिपी रही।

साल 2003 में पीएससी द्वारा की गई गड़बड़ी दो साल तक छिपी रही।

जानिए CGPSC-2003 की गड़बड़ियां

साल 2003 में पीएससी द्वारा की गई गड़बड़ी दो साल तक छिपी रही। वर्ष 2005 में केंद्र सरकार ने सूचना का अधिकार कानून लागू किया। इसके बाद उम्मीदवार रविंद्र सिंह, वर्षा डोंगरे समेत अन्य ने आरटीआई के जरिए जानकारी मांगी। इसी आधार पर इन उम्मीदवारों ने वर्ष 2005 में गड़बड़ी को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

हाईकोर्ट के नोटिस के बाद पीएससी ने वर्ष 2005 में ही स्वीकार कर लिया था कि चयन में उनसे गलती हुई है। ऐसे में 2016 तक मामला लटका रहा और 11 साल बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के हक में फैसला सुनाया।

ऐसे हुआ मामला उजागर

वर्ष 2003 की परीक्षा का आरटीआई में मिले दस्तावेज में खुलासा हुआ कि एक पेज लिखने वाले उम्मीदवार को 60 में 55 अंक मिले हैं। उसी विषय में सभी जवाब लिखने वाले को 10 से 15 अंक मिले थे। स्केलिंग में भी नंबर बराबर होने के बाद भी एक ही विषय वालों के नंबर काफी बदल गए।

अपात्रों का चयन, हाईकोर्ट के फैसले से 147 अधिकारी सीधे प्रभावित

हाईकोर्ट ने फैसले में आदेश दिया कि वर्ष 2003 पीएससी मेंस के सभी वैकल्पिक विषयों की री-स्केलिंग की जाए। साथ ही मानव विज्ञान के पेपर की जांच मापदंड के आधार पर हो। इस फैसले के बाद चयनित 147 अधिकारी सीधे प्रभावित हो रहे थे।

हाईकोर्ट के फैसले को डिप्टी कलेक्टर पद्मिनी भोई, संजय चंदन त्रिपाठी समेत आधा दर्जन से अधिक अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी। प्रारंभिक सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी। मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है।

पीएससी के जानकारों का कहना है कि री-स्केलिंग के बाद कुछ उम्मीदवार नए सिरे से मेरिट सूची में शामिल होते और कुछ बाहर हो जाते।

मुंगेली और कबीरधाम में उपस्थित होने नोटिस

वर्तमान में यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस पुराने विवाद को आपसी सहमति से निपटाने के लिए इसे ”समाधान समारोह” में शामिल किया है।

वर्षा डोंगरे, छत्तीसगढ़ सरकार और प्रतिवादी निरुपमा लोनहरे सहित अन्य संबंधित पक्षों को मुंगेली और कबीरधाम के जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों में उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं।

हालांकि, वर्षा डोंगरे ने इस केस में सुलह की गुंजाइश से इनकार किया है। उनका कहना है कि हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला दे चुका है, अब फैसला सुप्रीम कोर्ट से ही होगा।

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खेल

रायपुर में कल RCB और KKR के बीच मुकाबला:बारिश की आशंका, पहले मैच में पिज्जा 300 में, पानी बोतल 150 में बिकी, फैंस भड़के

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रायपुर, एजेंसी। रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह स्टेडियम में 13 मई यानि कल RCB और KKR के बीच मुकाबला होगा। मौसम विभाग ने कल शाम बारिश की आंशका जताई है। वहीं, इस बार स्टेडियम का पूरा मैनेजमैंट RCB संभाल रही है। लोगों में मैच को लेकर उत्साह है, लेकिन व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं।

इससे पहले 10 मई को हुए मैच में दर्शकों फ्री वाई-फाई नहीं मिला। 20 रुपए की पानी की बोतल 150 रुपए में बेची गई। 60 का पिज्जा 300 में बेचा गया। खाने के कई आयटम्स महंगे दामों में बेचे गए। इसे लेकर सोशल मीडिया पर लोग अपना गुस्सा निकाल रहे हैं। हालांकि इस मामले में मैनेजमेंट की ओर कुछ नहीं कहा गया है।

20 रुपए की पानी की बोतल 150 रुपए में बेची गई।

20 रुपए की पानी की बोतल 150 रुपए में बेची गई।

सोशल मीडिया के जरिए लोगों ने अपना गुस्सा निकाला।

सोशल मीडिया के जरिए लोगों ने अपना गुस्सा निकाला।

केकेआर ने बहाया पसीना, आज दोनों टीम करेंगी प्रैक्टिस

मुकाबले से पहले KKR की टीम सोमवार शाम रायपुर पहुंची और स्टेडियम में प्रैक्टिस किया। इस दौरान KKR के बल्लेबाजों ने लंबे शॉट्स और डेथ ओवर्स की बल्लेबाजी पर खास फोकस किया।

खिलाड़ियों ने बड़े हिट लगाने के साथ-साथ आखिरी ओवरों में तेजी से रन बनाने की रणनीति पर काम किया। दूसरी ओर गेंदबाजों ने यॉर्कर, स्लोअर वन और डेथ ओवर की लाइन-लेंथ पर अभ्यास किया।

प्रैक्टिस में नहीं दिखे कप्तान अजिंक्य रहाणे

टीम के ज्यादातर खिलाड़ी मैदान पर अभ्यास करते नजर आए, लेकिन कप्तान अजिंक्य रहाणे प्रैक्टिस सत्र में शामिल नहीं हुए। हालांकि टीम मैनेजमेंट की ओर से उनकी गैरमौजूदगी को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

खिलाड़ियों ने आखिरी ओवरों में तेजी से रन बनाने की रणनीति पर काम किया।

खिलाड़ियों ने आखिरी ओवरों में तेजी से रन बनाने की रणनीति पर काम किया।

रिंकू सिंह ने लगाए लंबे शॉट्स

प्रैक्टिस सेशन में रिंकू सिंह ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा। उन्होंने नेट्स में करीब 60 गेंदों का सामना किया और इनमें से 15 गेंदों को मैदान के बाहर पहुंचाया। रिंकू बड़े शॉट्स लगाने की लय में नजर आए और उन्होंने डेथ ओवर बल्लेबाजी पर विशेष अभ्यास किया।

सुनिल नरेन ने डेथ ओवर प्लान पर किया काम

KKR के अनुभवी ऑलराउंडर सुनिल नरेन ने लगभग 5 ओवर गेंदबाजी की। उन्होंने अपनी स्पिन और वैरिएशन पर काम किया। टीम मैनेजमेंट डेथ ओवरों में रन रोकने की रणनीति पर खास ध्यान देता नजर आया।

खिलाड़ियों को देखने पहुंचे फैंस, सुरक्षा रही कड़ी

स्टेडियम में खिलाड़ियों की एक झलक पाने के लिए बड़ी संख्या में फैंस पहुंचे। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और दर्शकों को सीमित एरिया से ही खिलाड़ियों को देखने की अनुमति दी गई। पुलिस और सुरक्षा बल पूरे प्रैक्टिस सेशन के दौरान तैनात रहे।

स्टेडियम में सुविधाओं की कमी पर उठे सवाल

10 मई को पहला मैच खत्म होने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आया। दर्शकों का आरोप है कि स्टेडियम परिसर में कहीं भी खाने-पीने की वस्तुओं की आधिकारिक रेट लिस्ट प्रदर्शित नहीं की गई थी।

इसका फायदा उठाकर अलग-अलग वेंडर्स अपनी मनमर्जी से कीमत वसूलते नजर आए। कई दर्शकों ने कहा कि पानी, कोल्ड ड्रिंक और स्नैक्स जैसी सामान्य चीजें भी बाजार कीमत से काफी महंगी बेची जा रही थीं।

नेटवर्क फेल होने से एंट्री गेट पर मचा हड़कंप

मैच शुरू होने से पहले ही मोबाइल नेटवर्क व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। आयोजकों की ओर से दावा किया गया था कि, भारी भीड़ को देखते हुए अस्थायी मोबाइल टावर लगाए गए हैं, लेकिन स्टेडियम के आसपास हजारों लोगों के मोबाइल में इंटरनेट और नेटवर्क बंद हो गया।

सबसे ज्यादा परेशानी ई-टिकट लेकर पहुंचे दर्शकों को हुई। कई लोगों के मोबाइल में QR कोड तक लोड नहीं हो पा रहे थे, जिसके चलते प्रवेश द्वारों पर लंबी कतारें लग गईं। कई जगह अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई और लोग बेहतर नेटवर्क की तलाश में स्टेडियम के बाहर इधर-उधर घूमते नजर आए।

सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे गंभीर सवाल

मैच के दौरान सुरक्षा इंतजाम भी सवालों के घेरे में रहे। बिना टिकट प्रवेश रोकने के लिए स्टेडियम के बाहर फेंसिंग और लोहे की जालियां लगाई गई थीं, लेकिन इसके बावजूद कई लोग जालियां पार कर स्टेडियम के भीतर पहुंच गए।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मैच शुरू होने के कुछ देर बाद ही कुछ युवक तारों और बैरिकेडिंग पर चढ़कर अंदर घुसने लगे। सुरक्षा कर्मियों की संख्या कम होने के कारण भीड़ को नियंत्रित करने में दिक्कतें आईं।

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