देश
31 मई तक खाते में रखें 436 रुपए, वरना बंद हो सकता है बीमा कवर
नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्र सरकार की लोकप्रिय सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) ने 11 साल पूरे कर लिए हैं। यह योजना कम प्रीमियम में जीवन बीमा सुरक्षा प्रदान करती है और खासतौर पर निम्न एवं मध्यम आय वर्ग के लोगों को ध्यान में रखकर शुरू की गई थी। इस योजना का लाभ जारी रखने के लिए 31 मई तक अपने बैंक खाते में कम से कम 436 रुपए जरूर रखें।

क्या है प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना?
यह एक साल की टर्म इंश्योरेंस योजना है, जिसके तहत 18 से 50 वर्ष तक के बैंक खाताधारकों को 2 लाख रुपए का जीवन बीमा कवर मिलता है। बीमाधारक की किसी भी कारण से मृत्यु होने पर यह राशि नामांकित व्यक्ति को दी जाती है। योजना में पहले से मौजूद बीमारियों पर भी कोई प्रतिबंध नहीं है।
कितना देना होता है प्रीमियम?
इस योजना के लिए सालाना सिर्फ 436 रुपए प्रीमियम देना होता है। यह राशि सीधे बैंक या डाकघर खाते से ऑटो-डेबिट हो जाती है। योजना की अवधि हर साल 1 जून से 31 मई तक रहती है। ऐसे में लाभ जारी रखने के लिए खाताधारकों को 31 मई तक खाते में पर्याप्त बैलेंस रखना जरूरी है।
कौन ले सकता है लाभ?
- आयु 18 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए
- बैंक या डाकघर में बचत खाता होना जरूरी
- आधार आधारित केवाईसी आवश्यक
- योजना को हर साल रिन्यू करना होता है
यदि कोई व्यक्ति 50 वर्ष की उम्र से पहले योजना से जुड़ता है, तो उसका कवरेज 55 वर्ष तक जारी रह सकता है।
नामांकन प्रक्रिया आसान
योजना में शामिल होने के लिए किसी मेडिकल जांच की जरूरत नहीं है। आवेदन बैंक शाखा, डाकघर या ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकता है। जन-धन खाताधारक भी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
एलआईसी ने बताया अहम कदम
एलआईसी के सीईओ एवं एमडी आर. दुरईस्वामी ने कहा कि यह योजना देश में “सबके लिए बीमा” लक्ष्य को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने बताया कि 2015 में योजना शुरू होने के समय देश की केवल करीब 20 फीसदी आबादी के पास बीमा सुरक्षा थी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जन-धन योजना के बाद सरकार ने प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और अटल पेंशन योजना शुरू कीं। ये तीनों मिलकर “जन सुरक्षा त्रिमूर्ति” बनाती हैं, जो कम आय वाले परिवारों को जीवन बीमा, दुर्घटना सुरक्षा और रिटायरमेंट सुरक्षा प्रदान करती हैं।

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रियल्टी क्षेत्र की 28 सूचीबद्ध कंपनियों की बिक्री बुकिंग बीते वित्त वर्ष में 1.95 लाख करोड़ रुपए
नई दिल्ली, एजेंसी। भारत की 28 प्रमुख सूचीबद्ध रियल एस्टेट कंपनियों ने मजबूत आवासीय मांग के चलते पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 1.95 लाख करोड़ रुपए की बिक्री बुकिंग दर्ज की। बिक्री बुकिंग के मामले में गोदरेज प्रॉपर्टीज शीर्ष पर रही। निवेशक प्रस्तुतियों से संकलित आंकड़ों के अनुसार, इन 28 प्रमुख सूचीबद्ध रियल एस्टेट कंपनियों की संयुक्त बिक्री बुकिंग वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर लगभग 1.95 लाख करोड़ रुपए पहुंच गई, जो 2024-25 के 1.66 लाख करोड़ रुपए से 17 प्रतिशत अधिक है।

मुंबई की कंपनी गोदरेज प्रॉपर्टीज ने वित्त वर्ष 2025-26 में सबसे अधिक बिक्री बुकिंग दर्ज कर सूचीबद्ध रियल एस्टेट कंपनियों में शीर्ष स्थान बरकरार रखा। इस सूची में बेंगलुरु की प्रेस्टीज एस्टेट्स प्रोजेक्ट्स लिमिटेड दूसरे स्थान पर रही, जबकि मुंबई की लोढ़ा डेवलपर्स तीसरे स्थान पर रही। बाजार पूंजीकरण के लिहाज से भारत की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ लिमिटेड चौथे स्थान पर रही, जबकि सिग्नेचर ग्लोबल पांचवें स्थान पर रही। इन 28 कंपनियों में केवल छह कंपनियों की बिक्री बुकिंग में गिरावट दर्ज की गई।
रियल एस्टेट सलाहकारों के अनुसार, मूल्य वृद्धि और लक्जरी आवासीय परियोजनाओं की पेशकश के कारण मूल्य के लिहाज से आवासीय बिक्री में बढ़ोतरी दर्ज की गई। आंकड़ों के अनुसार, गोदरेज प्रॉपर्टीज की बिक्री बुकिंग वित्त वर्ष 2024-26 में बढ़कर 34,171 करोड़ रुपए हो गई, जो 2024-25 में 29,444 करोड़ रुपए थी। प्रेस्टीज एस्टेट्स की बिक्री बुकिंग 17,023 करोड़ रुपए से बढ़कर 30,024 करोड़ रुपए पहुंच गई। लोढ़ा डेवलपर्स ने 20,530 करोड़ रुपए की बिक्री बुकिंग दर्ज की, जो 2024-25 में 17,630 करोड़ रुपए थी। डीएलएफ की 2025-26 में बिक्री बुकिंग 21,223 करोड़ रुपए से घटकर 20,143 करोड़ रुपए रही।
सिग्नेचर ग्लोबल की 2025-26 में बिक्री बुकिंग 10,290 करोड़ रुपए से घटकर 8,250 करोड़ रुपए पर आ गई। शीर्ष पांच कंपनियों का योगदान कुल बिक्री बुकिंग में लगभग 60 प्रतिशत रहा। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के प्राथमिक आवास बाजार में सूचीबद्ध रियल एस्टेट डेवलपर्स की हिस्सेदारी बढ़ रही है, क्योंकि खरीदार मजबूत वित्तीय स्थिति वाली कंपनियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
अन्य सूचीबद्ध कंपनियों में आदित्य बिड़ला रियल एस्टेट लिमिटेड की बिक्री 8,136 करोड़ रुपए, सोभा लिमिटेड की 8,135 करोड़ रुपए, ब्रिगेड एंटरप्राइजेज की 7,424 करोड़ रुपए और पुर्वांकरा लिमिटेड की 7,407 करोड़ रुपए रही। ओबेरॉय रियल्टी ने 2025-26 में 5,447 करोड़ रुपए की बिक्री दर्ज की, मैक्स एस्टेट्स ने 5,305 करोड़ रुपए और कल्पतरु लिमिटेड ने 5,280 करोड़ रुपए की बिक्री बुकिंग दर्ज की।
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बिल्डर ने पूरा पैसा लेकर दूसरे को बेच दिया फ्लैट, कोर्ट ने ठोका 1.05 करोड़ का जुर्माना
मुंबई, एजेंसी। मुंबई में एक कपल को करीब 10 सालों से कानूनी लड़ाई के बाद न्याय मिला है। फ्लैट की पूरी कीमत चुकाने के बावजूद बिल्डर ने वही आवास किसी अन्य खरीदार को बेच दिया था। अब उपभोक्ता आयोग ने बिल्डर को खरीदारों की रकम ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है।

क्या है मामला?
मामला मुंबई का था जहां पर एक कपल ने बिल्डर के जरिए फ्लैट खरीदा था। मोहम्मद जलील हार्नेकर और उनकी पत्नी असगर शबनम ने 2013 में 660 वर्ग फुट का फ्लैट बुक कराया था। शुरुआत में उन्होंने डोंगरी की एक आवासीय परियोजना में निवेश किया था लेकिन परियोजना ठप पड़ने के बाद बिल्डर ने उनकी बुकिंग को मजगांव स्थित ‘बे व्यू’ परियोजना में स्थानांतरित कर दिया। फ्लैट की कीमत 90 लाख रुपए तय की गई, जिसे दंपति ने 2018 तक पूरी तरह चुका दिया।
इसके बावजूद उन्हें न तो फ्लैट का कब्जा मिला और न ही बिक्री समझौते का पंजीकरण कराया गया। बाद में जांच में पता चला कि बिल्डर ने वही फ्लैट किसी दूसरे खरीदार को बेच दिया था। दंपति ने जब अपनी रकम वापस मांगी तो बिल्डर ने 1.25 करोड़ रुपए के चेक जारी किए लेकिन खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण सभी चेक बाउंस हो गए। इसके बाद पीड़ितों ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
क्या कहा आयोग ने?
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने बिल्डर के आचरण को गंभीर लापरवाही और अनुचित व्यापारिक व्यवहार माना। आयोग ने आदेश दिया कि बिल्डर दंपति को 1.05 करोड़ रुपए की राशि 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाए। इसके अलावा मानसिक उत्पीड़न के लिए 50,000 रुपए और मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में 25,000 रुपए का भुगतान भी करना होगा।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि 60 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया गया, तो ब्याज दर बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी जाएगी। करीब 10 वर्षों तक न्याय की प्रतीक्षा करने वाले इस दंपति के लिए आयोग का फैसला बड़ी राहत लेकर आया है और यह रियल एस्टेट क्षेत्र में खरीदारों के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश भी माना जा रहा है।
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भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2026-27 में सुस्त पड़कर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान: एसएंडपी
नई दिल्ली, एजेंसी। ऊर्जा की कमी, सामान्य से कम मानसून और वैश्विक वृद्धि में सुस्ती के कारण चालू वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर घटकर 6.6 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने बुधवार को यह अनुमान जताया। भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2025-26 में 7.7 प्रतिशत और 2024-25 में 7.1 प्रतिशत रही थी।

एसएंडपी ने एक रिपोर्ट में कहा, ”ऊर्जा की कमी, औसत से कम मानसून का अनुमान और वैश्विक वृद्धि में सुस्ती के बीच, हमारा अनुमान है कि मार्च, 2027 में खत्म होने वाले वित्त वर्ष में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर घटकर 6.6 प्रतिशत रह जाएगी। वित्त वर्ष 2025-26 में यह 7.7 प्रतिशत थी।” एसएंडपी का वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वृद्धि का अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक के 6.6 प्रतिशत के अनुमान के अनुरूप है। अल नीनो के कारण मानसूनी बारिश प्रभावित हुई है। 22 जून तक बारिश की कमी बढ़कर 43 प्रतिशत हो गई है। कम बारिश की स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने राज्यों के लिए योजनाएं बनाई हैं। इसके तहत कम बारिश वाले हालात के हिसाब से वैकल्पिक फसलों की सिफारिश की गई है।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 88 प्रतिशत आयात करता है और वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी से उसका आयात बिल बढ़ा है और कुल मिलाकर महंगाई बढ़ी है। एसएंडपी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इस क्षेत्र का परिदृश्य मजबूत वैश्विक गतिविधियों, ऊर्जा बाजार में दबाव और एआई-संचालित प्रौद्योगिकी के निर्यात में उछाल से तय हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में संघर्ष से पैदा हुए ऊर्जा संकट का असर दिख रहा है। उद्योग को कच्चे माल की लागत और आपूर्तिकर्ता के डिलिवरी समय में काफी बढ़ोतरी का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही, खाद की ऊंची कीमतें खाद्य उत्पादन पर असर डालती हैं और खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ाती हैं।
एसएंडपी ने कहा कि बढ़ती महंगाई लोगों की खरीद क्षमता को कम कर रही है। इससे वृद्धि पर असर पड़ रहा है। एसएंडपी ने कहा कि उर्वरक कीमतों में तेज बढ़ोतरी खाद्य उत्पादन पर असर डाल सकती है और खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ा सकती है। एसएंडपी ने कहा कि भारत में तीसरी तिमाही में उपभोक्ता महंगाई 0.5 से 0.6 प्रतिशत अधिक होगी और चालू वित्त वर्ष में यह बढ़कर 5.1 प्रतिशत हो जाएगी। इसका कारण विनिर्माता ऊर्जा की बढ़ी हुई लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल रहे हैं। साथ ही हाल ही में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, ”इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में नीतिगत दर रेपो में वृद्धि का अनुमान है।”
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