छत्तीसगढ़
LPG गैस घोटाला…पूर्व राज्यमंत्री का दामाद एजेंसी संचालक अरेस्ट:खाद्य अधिकारी-व्यापारी भी गिरफ्तार, ठाकुर पेट्रोकेमिकल ने 1.5 करोड़ की गैस निकालकर बेची थी
महासमुंद, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के महासमुंद में ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स कंपनी के मालिक ने 1.5 करोड़ रुपए की LPG गैस चुराई। दिसंबर 2025 में पुलिस ने 90 मीट्रिक टन LPG ले जा रही 6 गैस कैप्सूल गाड़ियों को जब्त किया था। लीगल डॉक्यूमेंट नहीं होने के कारण सभी गाड़ियां थाने में खड़ी कर दी गई।
अब पुलिस ने तीनों मुख्य आरोपियों अजय यादव ( जिला खाद्य अधिकारी), मनीष चौधरी (व्यापारी) और पंकज चंद्राकर (एजेंसी संचालक) को गिरफ्तार कर लिया है। पंकज पूर्व राज्य मंत्री पूनम चंद्राकर के बड़े भाई धन्नजय चंद्राकर का दामाद है। ठाकुर पेट्रोकेमिकल के मालिक संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर फरार हैं। जिनकी तलाश की जा रही है।

महासमुंद जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव।
प्लानिंग के साथ 6 गैस कैप्सूल किए ‘हैंडओवर’
पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि, खाद्य अधिकारी अजय यादव, व्यापारी मनीष चौधरी और गौरव गैस एजेंसी के संचालक पंकज चंद्राकर ने एक सोची-समझी साजिश रची थी।
इन्होंने गैस से भरे 6 बड़े कैप्सूल (टैंकर) को सीधे अभनपुर स्थित ठाकुर पेट्रोकेमिकल को सौंप दिया। बाजार में इस गैस की कीमत करीब 1.5 करोड़ रुपए से अधिक आंकी जा रही है।
बता दें कि गौरव गैस एजेंसी भाजपा के पूर्व राज्यमंत्री पूनम चंद्राकर के बड़े भाई धन्नजय चंद्राकर का है। पंकज चंद्राकर धनंजय चंद्राकर का दामाद है।

ठाकुर पेट्रोकेमिकल के मालिक फरार
पुलिस को इस पूरे खेल में अभनपुर के ठाकुर पेट्रोकेमिकल के संचालकों की संलिप्तता के पुख्ता सबूत मिले हैं। हालांकि, पुलिस की दबिश से पहले ही फर्म के मालिक संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर फरार हो गए हैं। पुलिस की टीमें उनकी तलाश में संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।

पेट्रोकेमिकल्स कंपनी के मालिक ने 90 मीट्रिक टन LPG गैस चुराए।
जानकारी के अनुसार, दिसंबर 2025 में सिंघोड़ा थाना पुलिस ने 6 एलपीजी गैस से भरे कैप्सूल ट्रक जब्त किए गए थे। थाने में किसी भी हादसे के खतरा देखते हुए, इन ट्रकों को सुरक्षित जगह पर रखने के लिए महासमुंद पुलिस ने जिला कलेक्टर को पत्र भेजा।
इसके बाद कलेक्टर ने खाद्य विभाग को ट्रकों को सुरक्षित जगह पर रखने के निर्देश दिए। इसी आदेश के तहत 30 मार्च 2026 को खाद्य विभाग की टीम ने ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक संतोष सिंह ठाकुर से संपर्क किया और 6 कैप्सूल ट्रक सुरक्षित रखने के लिए कहा।
खाद्य निरीक्षक अविनाश दुबे, खाद्य अधिकारी हरिश सोनेश्वरी और मनीष चौधरी की मौजूदगी में संतोष ठाकुर को ये 6 कैप्सूल ट्रक सुरक्षित रखने के लिए सौंप दिए। संतोष अपने स्टाफ की मदद से सभी गाड़ियां सिंघोड़ा थाना से रायपुर के अभनपुर के ग्राम उरला स्थित अपने प्लांट ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स ले गया।

कंपनी के एक स्टाफ को पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया था।
कंपनी के मालिक ने गैस बेचने की प्लानिंग की
हैंडओवर के समय या उसके तुरंत बाद कैप्सूल ट्रकों का वजन नहीं कराया गया। इसी लापरवाही का फायदा उठाकर मालिक संतोष ठाकुर (56), डायरेक्टर सार्थक ठाकुर ने गैस को अवैध रूप से बेचने की प्लानिंग की।
सिंघोड़ा से अभनपुर तक लगभग 200 किलोमीटर के रास्ते में 15 से ज्यादा धर्मकांटे (वजन करने की जगह) होने के बावजूद कहीं भी वजन नहीं कराया गया। सभी 6 कैप्सूल ट्रकों को प्लांट से करीब 200 मीटर दूर पार्किंग में खड़ा कर दिया गया।
इसके बाद 5 गाड़ियों का वजन 6 अप्रैल को और 1 गाड़ी का वजन 8 अप्रैल को कराया गया।
8 दिनों में प्लांट के बुलेट टैंकों में खाली किया गैस
इन 8 दिनों में एक-एक कर कैप्सूल ट्रकों को प्लांट के अंदर मौजूद बुलेट टैंकों में खाली किया गया। जब वे टैंक भी भर गए तो गैस को कंपनी के मालिकाना और वहां चल रहे दो निजी टैंकरों में भर दिया गया।
इसके बावजूद चोरी की गई गैस बची रह गई, जो तय क्षमता से ज्यादा थी। इसके बाद रायपुर की अलग-अलग एजेंसियों और प्लांटों को करीब 4 से 6 टन गैस बिना पक्के बिल के, सिर्फ कच्चे चालान पर भेजी गई।
वजन में देरी का मुख्य कारण यह रहा कि कैप्सूल ट्रकों को समय पर खाली नहीं किया गया और प्लांट में एक साथ 6 कैप्सूल खाली करने की कैपेसिटी भी नहीं थी।
इसके बाद कंपनी मालिक ने प्रशासन को बताया कि सभी एलपीजी कैप्सूल ट्रक खाली हैं। इसके बाद जब पुलिस ने मामले की जांच की तो पूरा घोटाला सामने आया।
इतनी बड़ी मात्रा में लीकेज असंभव
इस पूरे मामले में जब राष्ट्रीय स्तर के एक्सपर्ट की मदद से जांच की गई तो पाया गया कि कैप्सूल पूरी तरह सुरक्षित था और इतनी बड़ी मात्रा में गैस का लीकेज होना संभव नहीं था। इससे साफ हुआ कि गैस जानबूझकर किसी ने निकाली है।
एक्सपर्ट ने यह भी बताया कि बिना किसी बड़ी दुर्घटना के 3 महीने में एक कैप्सूल से 20 टन गैस का निकल जाना संभव ही नहीं है।
दस्तावेज में जितनी गैस खरीदी उससे 3 गुना बेची
जब्त दस्तावेजों की जांच में पता चला कि जितनी गैस खरीदी गई थी, उससे कई गुना ज्यादा बिक्री दिखाई गई है। 3 दिन की जांच और दस्तावेजों की चेकिंग में बड़ी गड़बड़ी सामने आई।
रिकॉर्ड के अनुसार अप्रैल महीने में ठाकुर पेट्रोकेमिकल कंपनी ने सिर्फ 47 टन एलपीजी गैस खरीदी थी, लेकिन कागजों में 107 टन गैस की बिक्री दिखाई गई।
यानी करीब 60 टन गैस ऐसी बेची गई, जो असल में खरीदी ही नहीं गई थी। इसके अलावा कच्चे रजिस्टर में भी और थोक बिक्री का रिकॉर्ड मिला है, जिससे घोटाले का पता चला।

एजेंसियों को करीब 4 से 6 टन गैस बिना पक्के बिल के, सिर्फ कच्चे चालान पर भेजी गई।
कंपनी का स्टाफ गिरफ्तार, मालिक डायरेक्टर फरार
इससे पहले पुलिस ने कंपनी के स्टाफ निखिल वैष्णव (41) को गिरफ्तार किया था, जबकि इस मामले का मुख्य आरोपी संतोष सिंह ठाकुर (मालिक) और अन्य डायरेक्टर के साथ प्लांट मैनेजर फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।
इसके अलावा पुलिस ने 7 एलपीजी टैंकर, 4 बड़े बुलेट टैंक, 100 गैस सिलेंडर, कंप्यूटर, DVR और कई दस्तावेज जब्त किए थे।
सबूत और दस्तावेज मिटाने की कोशिश
जांच में यह भी पता चला कि ठाकुर पेट्रोकेमिकल के ऑफिस में आरोपियों ने सबूत और दस्तावेज मिटाने की कोशिश की। प्लांट के गेट पर जो वाहनों की एंट्री-एग्जिट और खरीद-बिक्री का रजिस्टर रखा जाता था, उससे अवैध लेन-देन करने वाली गाड़ियों और एजेंसियों की पहचान हो सकती थी।
इसी तरह ऑफिस में बिना बिल की खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड भी रखा जाता था। लेकिन जांच में सामने आया कि अप्रैल महीने का बिना बिल वाला रजिस्टर ही गायब कर दिया गया।
जब जांच के दौरान आरोपियों को बुलाया गया, तो उन्होंने सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश भी की। इसी आधार पर उनके खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया।

कोरबा
कोरबा में सरकारी अस्पताल में प्रसूता की मौत:परिजनों के कॉल नहीं उठाए, स्वास्थ्यकर्मी और मितानिन पर लगाए लापरवाही के आरोप
कोरबा। कोरबा जिले के हरदीबाजार थाना क्षेत्र में प्रसव के बाद एक 26 वर्षीय महिला की मौत हो गई। मृतका के परिजनों ने सरकारी अस्पताल की महिला स्वास्थ्यकर्मी और मितानिन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को अस्पताल में अकेला छोड़ दिया गया, जिससे समय पर इलाज नहीं मिल सका।

जानकारी के अनुसार, ग्राम रैकी निवासी अनिल पटेल ने वर्ष 2021 में ग्राम बोईदा की संगीता पटेल से विवाह किया था। अनिल कोल ट्रांसपोर्ट कंपनी में वाहन चालक हैं। दंपती की एक तीन वर्षीय बेटी भी है।

लापरवाही के चलते प्रसूता की मौत हो गई
प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल पहुंचे
संगीता गर्भवती थीं और गांव के सरकारी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। शुक्रवार देर शाम उन्हें प्रसव पीड़ा शुरू हुई। इसके बाद परिजनों ने मितानिन गिरीश बाई को सूचना दी। अनिल अपनी पत्नी को मितानिन के साथ अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां एक महिला स्वास्थ्यकर्मी ड्यूटी पर मौजूद थी।
रात में हुआ प्रसव, फिर अस्पताल में छोड़ गए
परिजनों के मुताबिक, रात करीब 11:30 बजे मितानिन के सहयोग से प्रसव कराया गया। आरोप है कि प्रसव के बाद महिला स्वास्थ्यकर्मी और मितानिन जच्चा-बच्चा को अस्पताल में छोड़कर अपने घर चले गए।
उस समय अस्पताल में संगीता और नवजात की देखरेख के लिए केवल परिवार के सदस्य ही मौजूद थे।

थाने पहुंचे पुलिसकर्मी और शिकायत दर्ज कराइ है
देर रात बिगड़ी हालत, फोन नहीं उठाने का आरोप
परिजनों का कहना है कि देर रात अचानक संगीता की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें तेज दर्द और अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा। घबराए परिवार वालों ने महिला स्वास्थ्यकर्मी को कई बार फोन किया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुआ।
परिजन पूरी रात मदद का इंतजार करते रहे और उन्हें सुबह होने तक अस्पताल में ही रहना पड़ा।
सुबह रेफर किया गया, रास्ते में मौत
तड़के सुबह अनिल पटेल स्वास्थ्यकर्मी को उनके घर से बुलाकर अस्पताल लाए। संगीता की गंभीर हालत देखकर उन्हें तत्काल अन्य अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई।
इसके बाद परिजन उन्हें हरदीबाजार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, जहां से मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया गया। हालांकि, मेडिकल कॉलेज पहुंचने से पहले ही संगीता की मौत हो गई।
पुलिस जांच शुरू
घटना की सूचना अस्पताल पुलिस को दी गई। मामला महिला की मौत से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने कार्यपालिक दंडाधिकारी को भी अवगत कराया है। दंडाधिकारी ने पीड़ित पक्ष के बयान दर्ज किए हैं।
पति बोला- ‘पत्नी पूरी तरह स्वस्थ थी’
मृतका के पति अनिल पटेल ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी पूरी तरह स्वस्थ थीं और प्रसव के बाद लापरवाही बरती गई। उनका कहना है कि यदि समय पर स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहते और तत्काल इलाज मिलता, तो उनकी पत्नी की जान बच सकती थी।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रशासनिक जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों और कथित लापरवाही की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

कोरबा
कोरबा में कोयले से भरा ट्रेलर बाइक पर पलटा:दादी की मौत, दो पोते घायल, ड्राइवर पर कार्रवाई, पसान थाना क्षेत्र की घटना
कोरबा। कोरबा के पसान थाना क्षेत्र में लैंगा-जटगा मुख्य मार्ग पर शनिवार को एक बड़ा हादसा हो गया। कोयले से भरा एक तेज रफ्तार ट्रेलर अनियंत्रित होकर एक बाइक पर पलट गया। इस दुर्घटना में बाइक सवार एक बुजुर्ग महिला की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके दो पोते मामूली रूप से घायल हो गए।

मृतका की पहचान बालकुंवर (62) के रूप में हुई है, जो पसान के धनरास गांव की निवासी थीं। वह अपने दो पोतों के साथ बाइक से इलाज कराकर घर लौट रही थीं। लैंगा-जटगा मुख्य मार्ग की घाटी में पीछे से आ रहे ट्रेलर ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया।

कोयले से भरी ट्रेलर बाइक पर पलट गई
बुजुर्ग महिला की कोयले में दबने से मौके पर ही मौत
हादसा इतना भीषण था कि ट्रेलर पलटते ही बाइक सवार तीनों लोग कोयले के ढेर में दब गए। एक पोता कोयले में पूरी तरह दब गया था, जबकि दूसरा सड़क किनारे जा गिरा। मौके पर मौजूद राहगीरों ने तुरंत मदद की और कोयले में दबे युवक को बाहर निकाला।
हालांकि, बुजुर्ग बालकुंवर की कोयले में दबने से मौके पर ही मौत हो चुकी थी। उनके दोनों पोतों को मामूली चोटें आई हैं।

दो पोते मामूली रूप से घायल
ड्राइवर के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही पसान थाना प्रभारी चंद्रपाल खांडे अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। थाना प्रभारी ने बताया कि ट्रेलर ड्राइवर के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।
दूसरे वाहन की मदद से हटाकर यातायात बहाल किया गया
हादसे के बाद सड़क पर बिखरे कोयले को दूसरे वाहन की मदद से हटाकर यातायात बहाल किया गया। मृतका के परिजन मौके पर पहुंचे और उनकी मौत की खबर सुनकर शोक में डूब गए। ग्रामीणों ने बताया कि लैंगा-जटगा मार्ग की घाटी में अक्सर तेज रफ्तार भारी वाहन हादसों का कारण बनते हैं।
स्थानीय लोगों ने कोयला परिवहन में लगे ट्रेलरों की बेलगाम गति पर चिंता व्यक्त की और प्रशासन से इस मार्ग पर भारी वाहनों की गति पर नियंत्रण तथा सुरक्षा उपाय बढ़ाने की मांग की है। पुलिस ने ट्रेलर को जब्त कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।

कोरबा
मदर्स डे (10 मई) पर विशेष:माँ शब्द नहीं जीवन का एहसास है
विशेष लेख-गुरूनंदन प्रसाद राजवाड़े (कनकी/कोरबा)
जीवन में माँ का स्थान कोई नहीं ले सकता। माँ प्रकृति प्रदत्त जीवन की अमूल्य धरोहर है। हम जीवन में कितनो भी सफल हो जाएं, लेकिन माँ की बराबरी नहीं कर सकते। माँ है तो जीवन की सारी खुशियां होती हैं। माँ पूरे ब्रह्माण्ड में सबसे प्रिय और प्यार का अटूट विश्वास है। ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं, जिसकी कलम माँ की महिमा लिख सके। माँ एहसास है और एहसास सिर्फ अनुभव कर ही प्राप्त किया जा सकता है। सनातन काल से अब तक हुए देवपुरूष एवं कवियों ने माँ की महिमा का गुणगान किया, लेकिन वह संपूर्ण नहीं। माँ पर हम जितनी भी कविता या लेख लिख लें, वह कभी सम्पूर्ण नहीं होता। सम्पूर्ण सिर्फ माँ होती है, न कविता सम्पूर्ण होती है और न ही लेख।

मातृ दिवस पर माँ द्वारा उड़ेले गए दुलार का बखान करने का ही समय नहीं है, संकल्प लेने का भी समय है, कि हम चाहे युवा हो, माँ चाहे बुजूर्ग हो, हर समय उसका ख्याल मन में हो और उसकी हमेशा पूछ परख और ख्याल रखें। माँ ईश्वर तो नहीं, लेकिन ईश्वर से कम भी नहीं।
माँ वह रामायण है, जो जीवन के सुख-दुख में हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। हर संकट को झेलती है और हमें हर संकट से बचाती है। माँ अभिलेख है और हम इस अभिलेख का एक पन्ना। माँ की जगह कोई नहीं ले सकता। माँ जीवन का स्वर्णीम एहसास है और माँ के कदमों में ही स्वर्ग है। माँ का हमेशा ध्यान रखो। माँ जब तक है, उससे बढ़ कर कोई नहीं। जिन्दगी आती-जाती है, लेकिन माँ सदैव अमर और अखण्ड है। हमारे ऋषि-महर्षियों ने माँ को भगवान से भी ऊपर रखा है, क्योंकि माँ के कारण ही हम ईश्वर को जान पाए और ईश्वर से पहले माँ इस धरती पर आई। माँ के जाने के बाद भी वह हमेशा अपनी संतानों के प्रति चिंतित रहती है और उसका एहसास ही हमें जीवन जीने के लिए प्रेरणा देता है।
जब तक माँ इस दुनिया में है, कभी उसकी उपेक्षा मत करना, क्योंकि माँ से बढ़कर इस दुनिया में कोई नहीं। माँ हमारे जीवन का आधार है। माँ है तो घर स्वर्ग है और स्वर्ग में जीवन की खुशियां। छोटी-छोटी खुशियों से हमें बड़ा करने वाली माँ को अंतिम समय में भी आप छोटी-छोटी खुशियों से उसके जीवन को आबाद रखें। माँ की ख्वाहिश ज्यादा नहीं होती, उसे सिर्फ बच्चों का प्यार चाहिए, क्योंकि माँ के लिए बच्चे ही उनका संसार होता है और हमें भी एहसास होना चाहिए कि माँ ही हमारा संसार है।

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