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छत्तीसगढ़

कोल लेवी घोटाला: सूर्यकांत के ड्राइवर की बेल खारिज:हाईकोर्ट बोला- ड्राइवर नहीं, वसूली नेटवर्क का एक्टिव मेंबर था, कारोबारी ने उसके नाम खरीदी संपत्ति

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बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ कोल लेवी घोटाले के आरोपी और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी के ड्राइवर की जमानत हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि नारायण साहू सिर्फ ड्राइवर नहीं, बल्कि पूरे वसूली नेटवर्क का एक्टिव मेंबर था, सूर्यकांत ने उसके नाम पर संपत्ति भी खरीदी है।

बता दें कि, कोयला घोटाला केस में ईओडब्ल्यू आरोपी ड्राइवर की 2 साल से तलाश कर रही थी। उसे करीब दो महीने पहले गिरफ्तार किया गया था। केस में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कोयला लेवी के पैसे के कलेक्शन और ट्रांसफर का भी काम करता था।

कोल लेवी घोटाले के आरोपी सूर्यकांत तिवारी का ड्राइवर नारायण साहू।

कोल लेवी घोटाले के आरोपी सूर्यकांत तिवारी का ड्राइवर नारायण साहू।

हाईकोर्ट में लगाई थी जमानत अर्जी

ईओडब्ल्यू की गिरफ्तारी के बाद उसे जेल दाखिल गया था, जिसके बाद आरोपी नारायण साहू ने ईडब्ल्यू की स्पेशल कोर्ट में जमानत के लिए अर्जी लगाई, जिसे खारिज कर दी गई।

इसके बाद उसने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की। याचिका में उसने कहा कि ईओडब्ल्यू को उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। उसका कहना है कि वह केवल कारोबारी का ड्राइवर था। कोयला घोटाले में उसका कोई हाथ नहीं है।

उसने यह भी आरोप लगाया कि पहले उस पर खिलाफ में बयान देने के लिए दबाव बनाया गया। बाद में उसे फंसाने के लिए आरोपी बना दिया गया।

राज्य सरकार ने जमानत का किया विरोध

एजेंसियों के मुताबिक, इन दस्तावेजों से करोड़ों रुपए की अवैध वसूली के लेन-देन का लिंक सामने आया है। इसी आधार पर कोर्ट ने माना कि प्रथम दृष्टया आरोपी की भूमिका गंभीर है और उसे जमानत दिए जाने का आधार नहीं बनता।

राज्य शासन की तरफ से कहा गया कि जांच में यह सामने आया कि नारायण साहू कथित कोल लेवी सिंडिकेट के जरिए करीब 13 करोड़ रुपए की नकद अवैध वसूली में शामिल था। आरोपी पिछले करीब ढाई साल से फरार चल रहा था।

एजेंसी की पूछताछ से लगातार बचने की कोशिश कर रहा था। साथ ही जांच में सहयोग नहीं कर रहा था। इस मामले में पहले ही कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया था।

हाईकोर्ट ने माना -एजेंसी के पास पर्याप्त सबूत

इस मामले में सभी पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने माना कि नारायण साहू सिर्फ ड्राइवर नहीं, बल्कि पूरे वसूली नेटवर्क का एक्टिव मेंबर था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में माना कि जांच एजेंसियों को नारायण साहू के खिलाफ गंभीर और ठोस सबूत मिले हैं।

कोर्ट के अनुसार, नारायण साहू सूर्यकांत तिवारी का भरोसेमंद व्यक्ति था और कथित अवैध वसूली तंत्र में अहम भूमिका निभा रहा था। जांच के दौरान जब्त की गई हैंड रिटन डायरी में भी नारायण साहू के नाम से कई एंट्रियां मिलने का दावा किया गया है।

कोयला लेवी घोटाले के बारे में जानिए

ED का दावा है कि, छत्तीसगढ़ में कोयला घोटाला किया गया है। इस मामले में 36 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। ईडी का आरोप है कि कोयले के परिचालन, ऑनलाइन परमिट को ऑफलाइन करने समेत कई तरीकों से करीब 570 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध वसूली की गई है।

छत्तीसगढ़ में अवैध कोल लेवी वसूली का मामला ईडी की रेड में सामने आया था। दावा है कि, कोल परिवहन में कोल व्यापारियों से वसूली करने के लिए ऑनलाइन मिलने वाले परमिट को ऑफलाइन कर दिया गया था। खनिज विभाग के तत्कालीन संचालक आईएएस समीर विश्नोई ने 15 जुलाई 2020 को इसके लिए आदेश जारी किया था।

2 पूर्व मंत्रियों, विधायकों समेत 36 पर FIR

छत्तीसगढ़ में कोयला घोटाले मामले में ED की रिपोर्ट पर ACB /EOW ने दो पूर्व मंत्रियों, विधायकों सहित 36 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की है। जिस पर अब ACB-EOW की टीम जांच कर रही है।

इस मामले में IAS रानू साहू के अलावा IAS समीर विश्नोई, सौम्या चौरसिया, जेडी माइनिंग एसएस नाग और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी को गिरफ्तार किया गया था।

सूर्यकांत तिवारी की क्या थी भूमिका

ईडी की जांच के मुताबिक सूर्यकांत तिवारी ने कोयला परिवहन और परमिट प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं के जरिए करोड़ों की अवैध वसूली का मास्टरमाइंड माना गया है।

आरोप है कि प्रति टन 25 रुपए की दर से वसूली कर रकम उसके कर्मचारियों के जरिए जमा कराई जाती थी, और इसके बदले संबंधित व्यापारियों को खनिज विभाग से परमिट जारी किए जाते थे।

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कोरबा

कोरबा में सरकारी अस्पताल में प्रसूता की मौत:परिजनों के कॉल नहीं उठाए, स्वास्थ्यकर्मी और मितानिन पर लगाए लापरवाही के आरोप

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कोरबा। कोरबा जिले के हरदीबाजार थाना क्षेत्र में प्रसव के बाद एक 26 वर्षीय महिला की मौत हो गई। मृतका के परिजनों ने सरकारी अस्पताल की महिला स्वास्थ्यकर्मी और मितानिन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को अस्पताल में अकेला छोड़ दिया गया, जिससे समय पर इलाज नहीं मिल सका।

जानकारी के अनुसार, ग्राम रैकी निवासी अनिल पटेल ने वर्ष 2021 में ग्राम बोईदा की संगीता पटेल से विवाह किया था। अनिल कोल ट्रांसपोर्ट कंपनी में वाहन चालक हैं। दंपती की एक तीन वर्षीय बेटी भी है।

लापरवाही के चलते प्रसूता की मौत हो गई

लापरवाही के चलते प्रसूता की मौत हो गई

प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल पहुंचे

संगीता गर्भवती थीं और गांव के सरकारी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। शुक्रवार देर शाम उन्हें प्रसव पीड़ा शुरू हुई। इसके बाद परिजनों ने मितानिन गिरीश बाई को सूचना दी। अनिल अपनी पत्नी को मितानिन के साथ अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां एक महिला स्वास्थ्यकर्मी ड्यूटी पर मौजूद थी।

रात में हुआ प्रसव, फिर अस्पताल में छोड़ गए

परिजनों के मुताबिक, रात करीब 11:30 बजे मितानिन के सहयोग से प्रसव कराया गया। आरोप है कि प्रसव के बाद महिला स्वास्थ्यकर्मी और मितानिन जच्चा-बच्चा को अस्पताल में छोड़कर अपने घर चले गए।

उस समय अस्पताल में संगीता और नवजात की देखरेख के लिए केवल परिवार के सदस्य ही मौजूद थे।

थाने पहुंचे पुलिसकर्मी और शिकायत दर्ज कराइ है

थाने पहुंचे पुलिसकर्मी और शिकायत दर्ज कराइ है

देर रात बिगड़ी हालत, फोन नहीं उठाने का आरोप

परिजनों का कहना है कि देर रात अचानक संगीता की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें तेज दर्द और अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा। घबराए परिवार वालों ने महिला स्वास्थ्यकर्मी को कई बार फोन किया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुआ।

परिजन पूरी रात मदद का इंतजार करते रहे और उन्हें सुबह होने तक अस्पताल में ही रहना पड़ा।

सुबह रेफर किया गया, रास्ते में मौत

तड़के सुबह अनिल पटेल स्वास्थ्यकर्मी को उनके घर से बुलाकर अस्पताल लाए। संगीता की गंभीर हालत देखकर उन्हें तत्काल अन्य अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई।

इसके बाद परिजन उन्हें हरदीबाजार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, जहां से मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया गया। हालांकि, मेडिकल कॉलेज पहुंचने से पहले ही संगीता की मौत हो गई।

पुलिस जांच शुरू

घटना की सूचना अस्पताल पुलिस को दी गई। मामला महिला की मौत से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने कार्यपालिक दंडाधिकारी को भी अवगत कराया है। दंडाधिकारी ने पीड़ित पक्ष के बयान दर्ज किए हैं।

पति बोला- ‘पत्नी पूरी तरह स्वस्थ थी’

मृतका के पति अनिल पटेल ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी पूरी तरह स्वस्थ थीं और प्रसव के बाद लापरवाही बरती गई। उनका कहना है कि यदि समय पर स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहते और तत्काल इलाज मिलता, तो उनकी पत्नी की जान बच सकती थी।

फिलहाल मामले की जांच जारी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रशासनिक जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों और कथित लापरवाही की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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कोरबा

कोरबा में कोयले से भरा ट्रेलर बाइक पर पलटा:दादी की मौत, दो पोते घायल, ड्राइवर पर कार्रवाई, पसान थाना क्षेत्र की घटना

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कोरबा। कोरबा के पसान थाना क्षेत्र में लैंगा-जटगा मुख्य मार्ग पर शनिवार को एक बड़ा हादसा हो गया। कोयले से भरा एक तेज रफ्तार ट्रेलर अनियंत्रित होकर एक बाइक पर पलट गया। इस दुर्घटना में बाइक सवार एक बुजुर्ग महिला की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके दो पोते मामूली रूप से घायल हो गए।

मृतका की पहचान बालकुंवर (62) के रूप में हुई है, जो पसान के धनरास गांव की निवासी थीं। वह अपने दो पोतों के साथ बाइक से इलाज कराकर घर लौट रही थीं। लैंगा-जटगा मुख्य मार्ग की घाटी में पीछे से आ रहे ट्रेलर ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया।

कोयले से भरी ट्रेलर बाइक पर पलट गई

कोयले से भरी ट्रेलर बाइक पर पलट गई

बुजुर्ग महिला की कोयले में दबने से मौके पर ही मौत

हादसा इतना भीषण था कि ट्रेलर पलटते ही बाइक सवार तीनों लोग कोयले के ढेर में दब गए। एक पोता कोयले में पूरी तरह दब गया था, जबकि दूसरा सड़क किनारे जा गिरा। मौके पर मौजूद राहगीरों ने तुरंत मदद की और कोयले में दबे युवक को बाहर निकाला।

हालांकि, बुजुर्ग बालकुंवर की कोयले में दबने से मौके पर ही मौत हो चुकी थी। उनके दोनों पोतों को मामूली चोटें आई हैं।

दो पोते मामूली रूप से घायल

दो पोते मामूली रूप से घायल

ड्राइवर के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई

घटना की सूचना मिलते ही पसान थाना प्रभारी चंद्रपाल खांडे अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। थाना प्रभारी ने बताया कि ट्रेलर ड्राइवर के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।

दूसरे वाहन की मदद से हटाकर यातायात बहाल किया गया

हादसे के बाद सड़क पर बिखरे कोयले को दूसरे वाहन की मदद से हटाकर यातायात बहाल किया गया। मृतका के परिजन मौके पर पहुंचे और उनकी मौत की खबर सुनकर शोक में डूब गए। ग्रामीणों ने बताया कि लैंगा-जटगा मार्ग की घाटी में अक्सर तेज रफ्तार भारी वाहन हादसों का कारण बनते हैं।

स्थानीय लोगों ने कोयला परिवहन में लगे ट्रेलरों की बेलगाम गति पर चिंता व्यक्त की और प्रशासन से इस मार्ग पर भारी वाहनों की गति पर नियंत्रण तथा सुरक्षा उपाय बढ़ाने की मांग की है। पुलिस ने ट्रेलर को जब्त कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।

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कोरबा

मदर्स डे (10 मई) पर विशेष:माँ शब्द नहीं जीवन का एहसास है

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विशेष लेख-गुरूनंदन प्रसाद राजवाड़े (कनकी/कोरबा)
जीवन में माँ का स्थान कोई नहीं ले सकता। माँ प्रकृति प्रदत्त जीवन की अमूल्य धरोहर है। हम जीवन में कितनो भी सफल हो जाएं, लेकिन माँ की बराबरी नहीं कर सकते। माँ है तो जीवन की सारी खुशियां होती हैं। माँ पूरे ब्रह्माण्ड में सबसे प्रिय और प्यार का अटूट विश्वास है। ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं, जिसकी कलम माँ की महिमा लिख सके। माँ एहसास है और एहसास सिर्फ अनुभव कर ही प्राप्त किया जा सकता है। सनातन काल से अब तक हुए देवपुरूष एवं कवियों ने माँ की महिमा का गुणगान किया, लेकिन वह संपूर्ण नहीं। माँ पर हम जितनी भी कविता या लेख लिख लें, वह कभी सम्पूर्ण नहीं होता। सम्पूर्ण सिर्फ माँ होती है, न कविता सम्पूर्ण होती है और न ही लेख।

मातृ दिवस पर माँ द्वारा उड़ेले गए दुलार का बखान करने का ही समय नहीं है, संकल्प लेने का भी समय है, कि हम चाहे युवा हो, माँ चाहे बुजूर्ग हो, हर समय उसका ख्याल मन में हो और उसकी हमेशा पूछ परख और ख्याल रखें। माँ ईश्वर तो नहीं, लेकिन ईश्वर से कम भी नहीं।
माँ वह रामायण है, जो जीवन के सुख-दुख में हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। हर संकट को झेलती है और हमें हर संकट से बचाती है। माँ अभिलेख है और हम इस अभिलेख का एक पन्ना। माँ की जगह कोई नहीं ले सकता। माँ जीवन का स्वर्णीम एहसास है और माँ के कदमों में ही स्वर्ग है। माँ का हमेशा ध्यान रखो। माँ जब तक है, उससे बढ़ कर कोई नहीं। जिन्दगी आती-जाती है, लेकिन माँ सदैव अमर और अखण्ड है। हमारे ऋषि-महर्षियों ने माँ को भगवान से भी ऊपर रखा है, क्योंकि माँ के कारण ही हम ईश्वर को जान पाए और ईश्वर से पहले माँ इस धरती पर आई। माँ के जाने के बाद भी वह हमेशा अपनी संतानों के प्रति चिंतित रहती है और उसका एहसास ही हमें जीवन जीने के लिए प्रेरणा देता है।
जब तक माँ इस दुनिया में है, कभी उसकी उपेक्षा मत करना, क्योंकि माँ से बढ़कर इस दुनिया में कोई नहीं। माँ हमारे जीवन का आधार है। माँ है तो घर स्वर्ग है और स्वर्ग में जीवन की खुशियां। छोटी-छोटी खुशियों से हमें बड़ा करने वाली माँ को अंतिम समय में भी आप छोटी-छोटी खुशियों से उसके जीवन को आबाद रखें। माँ की ख्वाहिश ज्यादा नहीं होती, उसे सिर्फ बच्चों का प्यार चाहिए, क्योंकि माँ के लिए बच्चे ही उनका संसार होता है और हमें भी एहसास होना चाहिए कि माँ ही हमारा संसार है।

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