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ईरान ने एक और इजरायली को दी मौत, जासूसी के आरोप में फांसी पर चढ़ाया

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तेहरान, एजेंसी। ईरान ने इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद  के लिए कथित तौर पर काम करने वाले एक व्यक्ति को फांसी दे दी है। ईरानी न्यायपालिका की वेबसाइट के अनुसार एहसान अफरेशतेह नाम के इस व्यक्ति पर इजरायल को संवेदनशील और गोपनीय जानकारी बेचने का आरोप था।  रिपोर्ट में दावा किया गया कि उसे नेपाल में मोसाद की ओर से प्रशिक्षण दिया गया था।ईरान के अनुसार आरोपी को “जासूसी और यहूदी शासन के साथ सहयोग” के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। बाद में अदालत ने उसे दोषी ठहराया और देश के सर्वोच्च न्यायालय ने भी सजा को बरकरार रखा।

इसके बाद बुधवार सुबह उसे फांसी दे दी गई।  यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। फरवरी 2026 के बाद से ईरान में जासूसी और सुरक्षा मामलों में फांसी की घटनाएं बढ़ी हैं। कुछ दिन पहले भी ईरान ने एक एयरोस्पेस इंजीनियरिंग छात्र को फांसी दी थी, जिस पर अमेरिका और इजरायल के लिए जासूसी करने का आरोप था।

मानवाधिकार संगठनों के अनुसार चीन के बाद ईरान दुनिया में सबसे अधिक फांसी देने वाले देशों में शामिल है। इस बीच पश्चिम एशिया में हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। इजरायली सेना ने दावा किया है कि उसने दक्षिणी लेबनान में एक संदिग्ध हवाई लक्ष्य को मार गिराया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव आने वाले समय में क्षेत्रीय सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

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ट्रंप के चीन पहुंचने से पहले जिनपिंग ने दिखाए तेवर, कहा-‘ये चार लाल रेखाएं पार मत करना’

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वाशिंगठन/बीजिंग, एजेंसी। चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा से पहले साफ संदेश देते हुए कहा है कि दोनों देशों के संबंधों में मौजूद “चार लाल रेखाओं” को चुनौती नहीं दी जानी चाहिए। अमेरिका में स्थित चीनी दूतावास ने सोशल मीडिया पर जारी संदेश में कहा कि चीन-अमेरिका संबंधों में कुछ मुद्दे बेहद संवेदनशील हैं और उन्हें पार नहीं किया जाना चाहिए। बीजिंग ने जिन चार मुद्दों को “लाल रेखा” बताया है, उनमें ताइवान का प्रश्न, लोकतंत्र और मानवाधिकार, राजनीतिक व्यवस्था और चीन के विकास का अधिकार शामिल हैं।

चीनी दूतावास ने यह भी कहा कि दोनों देशों को आपसी सम्मान, शांतिपूर्ण सहअस्तित्व और सहयोग के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए। इसी बीच  ट्रंप ने कहा कि वह चीन यात्रा के दौरान व्यापार और आर्थिक सहयोग पर विशेष जोर देंगे। ट्रंप ने बताया कि कई बड़े अमेरिकी उद्योगपति भी उनके साथ चीन जा रहे हैं। इनमें एलोन मस्क, टिम कुक और जेन्सेन हुआंग जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। ट्रंप ने कहा कि वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग  से चीन के बाजार को और खोलने की मांग करेंगे ताकि अमेरिकी कंपनियों को अधिक अवसर मिल सकें।  

उन्होंने शी  को “बेहद प्रभावशाली नेता” बताते हुए कहा कि यह यात्रा बहुत महत्वपूर्ण और उत्साहजनक रहने वाली है।  ईरान मुद्दे पर भी ट्रंप ने सख्त रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि ईरान सैन्य रूप से कमजोर पड़ चुका है और या तो समझौता करेगा या फिर अमेरिका कार्रवाई पूरी करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि  दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच होने वाली यह वार्ता आने वाले समय में वैश्विक व्यापार, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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अमेरिका का ईरान पर नया दांवः IRGC के गुप्त नेटवर्क पर गढ़ाई नजर, जानकारी देने वाले को मिलेगा 1.5 करोड़ डॉलर का ईनाम

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वाशिंगठन, एजेंसी। अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए उसकी सैन्य संस्था Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) के वित्तीय नेटवर्क की जानकारी देने वालों के लिए 1.5 करोड़ डॉलर तक के इनाम की घोषणा की है।  अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि यह कदम ईरान के कथित अवैध तेल कारोबार और उससे जुड़े वित्तीय तंत्र को निशाना बनाने के लिए उठाया गया है। अमेरिका के अनुसार IRGC और उसकी विभिन्न शाखाएं तेल बिक्री, फर्जी कंपनियों और गुप्त वित्तीय चैनलों के जरिए धन जुटाती हैं, जिसका इस्तेमाल क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों और सहयोगी संगठनों को समर्थन देने में किया जाता है।

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि ट्रंप प्रशासन “आर्थिक प्रहार” नीति के तहत ईरान पर दबाव बढ़ा रहा है। उन्होंने बताया कि अमेरिका ने ईरानी तेल की बिक्री और ढुलाई से जुड़े एक नेटवर्क तथा आईआरजीसी के तीन वरिष्ठ अधिकारियों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिका का आरोप है कि ये अधिकारी तेल कारोबार से जुड़े वित्तीय लेनदेन का समन्वय कर रहे थे। इनाम योजना के तहत अमेरिका ऐसी जानकारी मांग रहा है जिससे आईआरजीसी के वित्तीय ढांचे, प्रतिबंधों से बचने वाले नेटवर्क, फर्जी कंपनियों, गुप्त बैंकिंग चैनलों और दोहरे उपयोग वाली तकनीकों की खरीद प्रणाली को बाधित किया जा सके।

अमेरिका ने यह भी कहा कि ईरान की जनता आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रही है, जबकि शासन अपने संसाधनों का उपयोग हथियार कार्यक्रमों और क्षेत्रीय संघर्षों में कर रहा है। यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और अमेरिका-ईरान संबंध बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की यह रणनीति ईरान की आर्थिक ताकत और उसके क्षेत्रीय प्रभाव को कमजोर करने की कोशिश है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और पश्चिम एशियाई राजनीति पर भी पड़ सकता है।

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देश में बच्चे न पैदा होने से परेशान सनकी किंग, तंग आकर कर्मचारियों  को लेकर लिया बड़ा फैसला

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प्योंगयांग, एजेंसी। उत्तर कोरिया (North Korea) के सनकी किंग किम जोंग उन ने देश में  बढ़ती उम्रदराज आबादी और घटती जन्मदर की चुनौती के बीच बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु तीन वर्ष बढ़ा दी है। नई व्यवस्था के अनुसार अब पुरुष कर्मचारी 63 वर्ष और महिला कर्मचारी 58 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होंगे। पहले यह सीमा पुरुषों के लिए 60 और महिलाओं के लिए 55 वर्ष थी। यह बदलाव 2024 में संशोधित श्रम कानून के तहत किया गया है। हालांकि यह नया नियम केवल दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारियों पर लागू होगा। मजदूरों और किसानों की सेवानिवृत्ति आयु में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

उत्तर कोरिया के एक शैक्षणिक शोधपत्र में कहा गया कि देश में बढ़ती जीवन प्रत्याशा और बुजुर्ग आबादी को देखते हुए पेंशन आयु बढ़ाना स्वाभाविक कदम है। रिपोर्ट के अनुसार उत्तर कोरिया में बौद्धिक कार्यों और प्रशासनिक कामों का महत्व बढ़ रहा है, इसलिए अनुभवी कर्मचारियों को अधिक समय तक सेवा में बनाए रखने का फैसला लिया गया। आंकड़ों के मुताबिक 2024 तक उत्तर कोरिया की कुल आबादी लगभग 2 करोड़ 58 लाख थी, जिनमें 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों की हिस्सेदारी 11 प्रतिशत से ज्यादा हो चुकी है।  विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति उत्तर कोरिया को “बुजुर्ग समाज” की श्रेणी में ले जाती है।

वहीं देश की कुल प्रजनन दर भी घटकर 1.60 तक पहुंच गई है, जो आबादी को स्थिर बनाए रखने के लिए जरूरी स्तर 2.1 से काफी कम मानी जाती है। उत्तर कोरिया ने हाल ही में अपने संविधान में भी बदलाव किए थे। इसके तहत न्यूनतम कामकाजी आयु 16 से बढ़ाकर 17 वर्ष कर दी गई, जबकि मतदान और चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु भी 18 वर्ष तय की गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि उत्तर कोरिया अब जनसंख्या संकट और श्रमबल की कमी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए नए सामाजिक और आर्थिक बदलावों की ओर बढ़ रहा है।

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