देश
खुदकुशी की कोशिश करने वाले डीएमके सांसद का निधन
हॉस्पिटल में आया हार्ट अटैक, कहा जा रहा टिकट न मिलने से डिप्रेशन में थे
चेन्नई,एजेंसी। तमिलनाडु की डीएमके पार्टी के सांसद गणेशमूर्ति का 76 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने गुरुवार की सुबह पांच बजे कोयंबटूर के निजी अस्पताल में आखिरी सांस ली। चार दिन पहले उन्होंने कीटनाशक पीकर आत्महत्या करने की कोशिश की थी, तब से वे अस्पताल में भर्ती थे। उनका अंतिम संस्कार आज किया जाएगा। मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक, कयास लगाए जा रहे हैं कि लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी की तरफ से टिकट न मिलने पर वे डिप्रेशन में थे, जिसके चलते उन्होंने सुसाइड की कोशिश की। कीटनाशक पीने के बाद उन्हें उल्टी और बैचेनी होनी लगी। जब उन्होंने जहर खाने की बात परिवार को बताई तो पहले उन्हें इरोड शहर के एक अस्पताल लाया गया, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें कोयंबटूर के एक प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट कर दिया। जहां उनकी हालत लगातार गंभीर बताई जा रही थी।
ईसीएमओ सिस्टम पर चल रहा था इलाज
गणेशमूर्ति की हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें ईसीएमआ (एक्स्ट्राकोर्पोरियल मेम्बर्स ऑक्सीजन) सिस्टम पर रखा था, लेकिन बॉडी इस इलाज पर रिस्पॉन्स नहीं दे रही थी। उनके निधन पर डीएमके पार्टी के प्रमुख वाइको ने कहा कि अस्पताल में भर्ती होने के दौरान वह बेहोश थे उन्होंने ऐसा क्यों किया हमें नहीं पता। पार्टी सूत्रों के मुताबिक सांसद के पार्थिव शरीर को इरोड के पेरियार नगर स्थित उनके गृह आवास पर ले जाया जाएगा।
1989 में पहली बार विधायक, 1998 में लोकसभा सांसद बने
गणेशमूर्ति अपने स्कूल के दिनों में डीएमके की छात्र शाखा के संयुक्त आयोजक थे। 1984 में उन्हें डीएमके छात्र विंग के इरोड जिला सचिव के तौर पर नियुक्त किया गया। 1989 में उन्होंने पार्टी के टिकट पर मोडाकुरिचि विधानसभा सीट से जीत हासिल की। 1996 में जब वाइको ने पार्टी को विभाजित कर मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कडग़म को लॉन्च किया, तब गणेशमूर्ति उनके साथ नई पार्टी में शामिल हो गए। 1998 और 2009 में वे एमडीएमके के टिकट पर इरोड से लोकसभा के लिए चुने गए। 2019 में उन्होंने डीएमके के टिकट पर जीत हासिल की।
डीएमके सूत्र बोले- गणेशमूर्ति ने पारिवारिक परेशानियों की वजह से जहर खाया
गणेमूर्ति के निधन के बाद एमडीएमके के सूत्रों ने कहा कि ऐसा कहना गलत होगा कि गणेशमूर्ति ने टिकट न मिलने की वजह से आत्महत्या की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव के लिए सीट-बंटवारे की बातचीत के बीच गणेशमूर्ति को टिकट मिलने की पूरी संभावना थी। सूत्रों ने इस बात की आशंका जताई कि गणेशमूर्ति ने पारिवारिक परेशानी के चलते जहर खाया होगा।
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Major Decision: कंपनियों को बड़ी राहत, भारत सरकार ने चीन से उपकरण खरीद पर दी ढील
मुंबई, एजेंसी। वैश्विक सप्लाई चेन में दबाव और घरेलू परियोजनाओं में देरी को देखते हुए भारत सरकार ने चीन से जरूरी औद्योगिक उपकरणों की खरीद पर आंशिक ढील देने का फैसला किया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस कदम के तहत कई सरकारी कंपनियों को सीमित दायरे में चीन से क्रिटिकल उपकरण आयात करने की अनुमति दी गई है।
इस फैसले का सबसे ज्यादा फायदा भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) और स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) जैसी कंपनियों को होगा। BHEL को चीन से 21 प्रकार के महत्वपूर्ण उपकरण खरीदने की मंजूरी मिली है, जबकि SAIL को भी अपने प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी कंपोनेंट्स आयात करने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा कुछ अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को कोल गैसीफिकेशन से जुड़े उपकरण खरीदने की छूट दी गई है।

2020 में किए थे सख्त नियम लागू
दरअसल, वर्ष 2020 में सीमा पर तनाव बढ़ने के बाद भारत ने चीन से आयात और निवेश पर सख्त नियम लागू कर दिए थे लेकिन हाल के महीनों में कई इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक परियोजनाओं में देरी और उपकरणों की कमी सामने आने के बाद सरकार ने इन नियमों में आंशिक ढील देने का निर्णय लिया है। नए आदेश के तहत अब सरकारी ठेकों में शामिल चीनी कंपनियों को पहले की तरह हर बार राजनीतिक और सुरक्षा मंजूरी के लिए अलग से रजिस्ट्रेशन कराने की आवश्यकता नहीं होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वैश्विक व्यापार में हो रहे बदलावों के बीच संतुलन बनाने की रणनीति का हिस्सा है। खासकर संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा टैरिफ बढ़ाने और सप्लाई चेन में बदलाव के चलते भारत अपने औद्योगिक हितों को ध्यान में रखते हुए लचीला रुख अपना रहा है।

सहयोग बढ़ाने के लिए उठाए गए अहम कदम
हाल के समय में दोनों देशों के बीच संबंधों में भी कुछ नरमी देखी गई है। नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच मुलाकात के बाद द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसके तहत डायरेक्ट फ्लाइट्स बहाल करने और बिजनेस वीजा प्रक्रिया को आसान बनाने जैसे कदम भी उठाए गए हैं। सरकार का यह कदम जहां एक ओर घरेलू परियोजनाओं को गति देने में मदद करेगा, वहीं दूसरी ओर भारत-चीन आर्थिक संबंधों में संतुलन बनाने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।
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3 सरकारी बैंकों पर चला RBI का डंडा, लगाया भारी जुर्माना
मुंबई, एजेंसी। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग नियमों का पालन न करने पर चार संस्थाओं पर मौद्रिक जुर्माना लगाया है। इसमें तीन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक—यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया—के साथ-साथ फिनटेक कंपनी पाइन लैब्स शामिल है।
आरबीआई द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया पर 95.40 लाख रुपए, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया पर 63.60 लाख रुपए, बैंक ऑफ इंडिया पर 58.50 लाख रुपए और पाइन लैब्स पर 3.10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है।

बैंकों पर क्यों हुई कार्रवाई
केंद्रीय बैंक ने बताया कि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ग्राहकों से जुड़े अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन के मामलों में निर्धारित समय सीमा के भीतर राशि वापस करने में विफल रहा। साथ ही, बैंक ने 24×7 शिकायत सुविधा उपलब्ध नहीं कराई और कुछ मामलों में सिस्टम आधारित प्रक्रियाओं में मैन्युअल हस्तक्षेप भी पाया गया।
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया पर केवाईसी नियमों के उल्लंघन के चलते कार्रवाई की गई। बैंक समय पर ग्राहकों के केवाईसी रिकॉर्ड केंद्रीय रजिस्ट्री में अपलोड नहीं कर पाया और कुछ ग्राहकों के लिए एक से अधिक बेसिक सेविंग्स खाते खोले गए। वहीं, बैंक ऑफ इंडिया पर प्राथमिकता क्षेत्र के ऋण खातों में अतिरिक्त शुल्क वसूलने और कुछ सावधि जमा पर समय पर ब्याज भुगतान न करने के कारण जुर्माना लगाया गया है।
इसके अलावा, पाइन लैब्स को बिना पूर्ण केवाईसी प्रक्रिया पूरी किए प्रीपेड भुगतान उपकरण (PPI) जारी करने के लिए दंडित किया गया। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई नियामकीय अनुपालन सुनिश्चित करने और बैंकिंग व फिनटेक सिस्टम में पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है।

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iPhone यूजर्स को झटका! Apple ने हटाया बड़ा डिस्काउंट सपोर्ट
मुंबई, एजेंसी। भारत में स्मार्टफोन खरीदारों के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आया है। Apple ने अपने लोकप्रिय iPhone मॉडल्स की कीमतों को अप्रत्यक्ष रूप से महंगा करने का फैसला लिया है। कंपनी ने रिटेलर्स और चैनल पार्टनर्स को मिलने वाला ‘डिमांड जेनरेशन (DG) सपोर्ट’ बंद करने का निर्णय लिया है, जिससे iPhone 16 और iPhone 15 जैसे मॉडल अब ग्राहकों के लिए करीब 5,000 रुपए तक महंगे पड़ सकते हैं।

क्या करता है DG सपोर्ट
DG सपोर्ट एक तरह का बैकएंड इंसेंटिव होता है, जिसकी मदद से रिटेलर्स बिना MRP बदले ग्राहकों को आकर्षक डिस्काउंट दे पाते थे। इस वजह से iPhone 15 और iPhone 16 जैसे मॉडल मिड-प्रीमियम सेगमेंट में काफी प्रतिस्पर्धी बने हुए थे लेकिन अब इस सपोर्ट के हटने के बाद रिटेलर्स पहले जितनी छूट नहीं दे पाएंगे, जिससे ग्राहकों को अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी।
किन ग्राहकों पर पड़ेगा ज्यादा असर
इससे पहले कंपनी कैशबैक ऑफर्स में भी बड़ी कटौती कर चुकी है। जहां पहले ग्राहकों को 6,000 रुपए तक का कैशबैक मिलता था, उसे घटाकर 1,000 रुपए कर दिया गया है। लगातार कम हो रहे इन फायदों का सीधा असर खरीदारों की जेब पर पड़ने वाला है।
रिटेलर्स के अनुसार, यह बदलाव तुरंत प्रभाव से लागू हो सकता है और मौजूदा कीमतों पर खरीदारी करने का मौका सीमित समय के लिए ही बचा है। खासतौर पर उन ग्राहकों पर इसका ज्यादा असर पड़ेगा, जो पुराने iPhone मॉडल्स की कीमतों में गिरावट का इंतजार कर रहे थे।

कई एंड्रॉइड ब्रांड्स बढ़ा चुके हैं दाम
हालांकि, कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला नए iPhone 17 लाइनअप पर लागू नहीं होगा और केवल मौजूदा या पुराने मॉडल्स तक ही सीमित रहेगा। भारत में iPhone की मांग मजबूत बनी रहने की उम्मीद है, खासकर EMI विकल्पों के चलते, जो बढ़ी हुई कीमत के असर को कुछ हद तक कम कर सकते हैं।
इसी बीच, Samsung, Xiaomi और Motorola जैसे कई एंड्रॉइड ब्रांड्स भी बढ़ती उत्पादन लागत के कारण अपने स्मार्टफोन्स की कीमतें पहले ही बढ़ा चुके हैं, जिससे पूरे बाजार में कीमतों का दबाव बना हुआ है।
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