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15 साल तक किया निवेश, मिला लाखों का रिटर्न, ICICI के इन फंड्स ने बढ़ाई निवेशकों की दौलत
मुंबई, एजेंसी। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद लॉन्ग टर्म के निवेशकों के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड लगातार आकर्षक विकल्प बने हुए हैं। खासकर सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए नियमित निवेश करने वालों के लिए लंबे समय तक संपत्ति बनाने का मजबूत माध्यम साबित हुए हैं। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड की कई इक्विटी स्कीमों ने बीते 15 सालों में शानदार प्रदर्शन करते हुए निवेशकों को 15 से 18.5 फीसदी तक सालाना का रिटर्न दिया है।

ICICI Prudential Midcap Fund
सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली स्कीमों में ICICI प्रूडेंशियल मिडकैप फंड (ICICI Prudential Midcap Fund) शामिल है। लगभग 7,789 करोड़ रुपए के एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) वाले इस फंड ने 15 सालों में 18.50% का CAGR रिटर्न दिया है। इसका मतलब है कि अगर किसी ने 5 हजार रुपए की एसआईपी शुरू की होती तो उसका निवेश बढ़कर 48.41 लाख रुपए हो जाता। इस दौरान निवेश की गई राशि महज 9 लाख रुपए रही, जबकि रिटर्न के रूप में करीब 39 लाख रुपए मिले हैं। इसी तरह, 10 हजार रुपए की एसआईपी शुरू करने वाले का कुल रिटर्न बढ़कर 15 साल में 96.83 लाख रुपए पहुंच गया है। हालांकि, इस दौरान निवेश की गई राशि महज 18 लाख रुपए थी।
इस स्कीम ने दिया 16% से ज्यादा रिटर्न
वहीं 58,954 करोड़ रुपए के AUM वाला ICICI प्रूडेंशियल वैल्यू फंड ‘वैल्यू इन्वेस्टिंग’ का तरीका अपनाता है। इस फंड ने 15 साल में 16.44% का CAGR रिटर्न दिया है। इसका मतलब है कि 15 साल में 5,000 की SIP बढ़कर लगभग 39.14 लाख रुपए हो गई है, जबकि 10,000 की मासिक SIP से लगभग 78.28 लाख जमा हो गए।
ICICI Prudential Multicap Fund
17,675.80 करोड़ के AUM के साथ ICICI प्रूडेंशियल मल्टीकैप फंड लार्ज-कैप, मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियों में निवेश करता है। इस फंड ने बीते 15 साल में 15.65% का CAGR रिटर्न दिया है। इन 15 साल में हर महीने 5,000 की SIP की रकम बढ़कर 36.12 लाख और 10,000 की SIP की रकम 72.25 लाख हो गई है।
ICICI Prudential Large & Mid Cap Fund
इसी तरह 30,147 करोड़ के AUM के साथ ICICI प्रूडेंशियल लार्ज एंड मिड कैप फंड ने 15 सालों में 15.36% का CAGR रिटर्न दिया है। इन 15 सालों में 5,000 की SIP की रकम बढ़कर 35.08 लाख रुपए हो गई है, जबकि 10,000 की मासिक SIP से लगभग 70.17 लाख रुपए जमा हो गए हैं।
ICICI Prudential Focused Equity Fund भी बेहतर प्रदर्शन करने वाली स्कीमों में शामिल है। इसने 15 साल में लगभग 15% का CAGR रिटर्न दिया है। 5,000 की मासिक SIP की रकम 15 साल में 32.81 लाख और 10,000 की मंथली SIP लगभग 65.62 लाख बन गई है।
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Citroen Cars Discount : कार खरीदने का शानदार मौका! Citroen ने इन गाड़ियों पर किया डिस्काउंट का ऐलान
मुंबई, एजेंसी। Citroen ने अपने ग्राहकों के लिए चुनिंगा गाड़ियों पर डिस्काउंट का ऐलान किया है। ये डिस्काउंट मॉडल के आधार पर दिए जाएंगे और ग्राहक इसका फायदा 30 जून तक उठा सकते हैं। डिटेल में जानते हैं इन डिस्काउंट के बारे में-

Citroen Basalt
Basalt कूप-SUV पर इस महीने 1.4 लाख रुपये तक का डिस्काउंट मिल रहा है। इसमें 82hp, 115Nm वाला 1.2-लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड (NA) पेट्रोल इंजन या 110hp, 190Nm वाला 1.2-लीटर टर्बोचार्ज्ड पेट्रोल इंजन मिलता है। NA इंजन के साथ 5-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन मिलता है, जबकि टर्बो-पेट्रोल इंजन 6-स्पीड मैनुअल या 6-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ आता है। ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ, टर्बो-पेट्रोल इंजन 205Nm का ज़्यादा टॉर्क देता है। मार्केट में इसकी कीमत 8.55 लाख रुपये से 13.75 लाख रुपये की के बीच है।

Citroen Aircross
Citroen Aircross पर कंपनी इस महीने 1.4 लाख रुपये तक का डिस्काउंट दे रही है। अपने सेगमेंट में यह एकमात्र 7 सीटर एसयूवी है। इसकी कीमत 8.89 लाख रुपये से 13.99 लाख रुपये तक जाती है।
Citroen C3
Citroen C3 की खरीदी करने पर आप 1.1 लाख रुपए तक की बचत कर सकते हैं। इसकी कीमत 4.99 लाख रुपये से 9.60 लाख रुपये के बीच की है।
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Tata के iPhone प्लांट पर पर्यावरण नियमों के उल्लंघन का आरोप, बंद हो सकती है फैक्ट्री
मुंबई, एजेंसी। भारत में iPhone निर्माण से जुड़े एक प्रमुख संयंत्र को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। तमिलनाडु के होसुर स्थित टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के प्लांट पर आसपास की कृषि भूमि और भूजल को प्रदूषित करने के आरोप लगे हैं। मामले की जांच के बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कंपनी से जवाब मांगा है और संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिलने पर फैक्ट्री बंद करने तक की चेतावनी दी है।
यह प्लांट Apple के iPhone के लिए बैक पैनल और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जों का निर्माण करता है। पिछले कई महीनों से प्लांट के आसपास के किसानों ने शिकायत की थी कि फैक्ट्री से निकलने वाला अपशिष्ट जल के कारण उनकी खेती और जल स्रोत को प्रभावित कर रहा है। किसानों की शिकायत के बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जांच शुरू की और अब मामला गंभीर रूप ले चुका है।

जांच के दौरान बोर्ड ने नोटिस में कहा कि फैक्ट्री परिसर के एक तालाब से निकला पानी आसपास के कृषि क्षेत्रों तक पहुंचा, जिससे भूजल प्रदूषण की आशंका पैदा हुई। बोर्ड ने यह भी आरोप लगाया कि दिसंबर 2025 में जारी निर्देशों के बावजूद कंपनी ने जरूरी सुधारात्मक कदम नहीं उठाए। इसी वजह से मई में जारी नोटिस में पूछा गया कि आखिर क्यों न यूनिट की बिजली आपूर्ति काट दी जाए और संचालन बंद कर दिया जाए। यह चेतावनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है।
टाटा ने आरोपों को किया खारिज
वहीं, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि उसने एक मान्यता प्राप्त स्वतंत्र प्रयोगशाला द्वारा कराई गई जांच में संयंत्र को सभी पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप पाया गया है। कंपनी ने दावा किया है कि वह पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों को अपना जवाब सौंप चुकी है।
पर्यावरण और उद्योग के बीच संतुलन की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। एक तरफ भारत वैश्विक कंपनियों के लिए उत्पादन केंद्र बनने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय समुदायों और किसानों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब सभी की नजर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के बीच होने वाली आगे की कार्रवाई पर टिकी है।
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स्मार्टफोन की बिक्री में 35% की बड़ी गिरावट, कीमत बढ़ने से मांग पर दबाव
नई दिल्ली, एजेंसी। देश में स्मार्टफोन की बढ़ती कीमतों का असर अब बिक्री पर साफ दिखाई देने लगा है। रिटेलरों का कहना है कि मई में मोबाइल की बिक्री में सालाना आधार पर रिकॉर्ड 30-35 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसकी वजह यह है कि मेमरी चिप की बढ़ती लागत की भरपाई के लिए कंपनियां नवंबर 2025 से लगातार कीमतों में बढ़ोतरी कर रही हैं। अभी कुल बिक्री में से 60 प्रतिशत हिस्सा ऑफलाइन का है, जबकि 40 प्रतिशत बिक्री ऑफलाइन के जरिए होती है। कुल मिलाकर ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की बिक्री में भारी गिरावट आएगी।

काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार मई में शिपमेंट में सालाना आधार पर 15-20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। जून में भी इसी तरह की कमजोरी बने रहने की संभावना जताई गई है। साल 2026 की पहली तिमाही में मोबाइल शिपमेंट में गिरावट 3 प्रतिशत रही थी लेकिन दूसरी तिमाही में यह गिरावट 15 प्रतिशत से ज्यादा रहने का अनुमान है।
रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी और मई के बीच स्मार्टफोन की औसत कीमत में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह बढ़ोतरी पिछले साल हुई कीमतों में वृद्धि के अलावा है। रिटेलरों का कहना है कि कीमतें बढ़ने के बाद से कुछ मामलों में कुल असर 40-45 प्रतिशत तक रहा है।
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