देश
सरकार ने प्याज खरीद मूल्य बढ़ाकर 16.50 रुपए प्रति किलो किया
नई दिल्ली, एजेंसी। सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से बफर स्टॉक कार्यक्रम के तहत प्याज का खरीद मूल्य बढ़ाकर 16.50 रुपए प्रति किलोग्राम कर दिया है, जो पहले 15.80 रुपए प्रति किलो था। यह संशोधित दर शनिवार से प्रभावी होगी। सरकार का यह कदम बाजार में दामों को संतुलित रखने के साथ-साथ किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के प्रयासों का हिस्सा है। देश के सबसे बड़े प्याज उत्पादक महाराष्ट्र के किसानों ने राज्य में खेती की ऊंची लागत को देखते हुए 30 रुपए प्रति किलो की खरीद दर की मांग की थी।

बाजार में दखल देने के मकसद से ‘मूल्य स्थिरीकरण कोष’ (पीएसएफ) के तहत हर साल बफर स्टॉक बनाए रखा जाता है। सरकार ने इस साल के लिए दो लाख टन खरीद का लक्ष्य रखा है, जो वित्त वर्ष 2025-26 में की गई तीन लाख टन खरीद से कम है। केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बृहस्पतिवार को उपभोक्ता मामलों के विभाग के अधिकारियों के साथ एक बैठक की, ताकि प्याज की खरीद को बेहतर बनाया जा सके और किसानों को बेहतर लाभ मिल सके।
जोशी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ”मौजूदा मंडी कीमतों और भंडारण-योग्य प्याज की गुणवत्ता की जरूरतों के आधार पर, ‘न्यूनतम शुनिश्चित खरीद कीमत’ (एमएपीपी) को 13 जून 2026 से संशोधित कर 1,650 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया है।” उन्होंने कहा कि खरीद प्रक्रिया को बाजार की स्थितियों के हिसाब से और बेहतर बनाने के लिए कीमत तय करने के तरीके में भी सुधार किया गया है। केंद्र ने पहले बाजार की स्थितियों और किसानों के हितों की रक्षा की जरूरत को देखते हुए कीमत को 12.70 रुपए प्रति किलो से बढ़ाकर 15.80 रुपए प्रति किलो किया था। मौजूदा सत्र के लिए प्याज की खरीद 15 मई को शुरू हुई थी।
नवीनतम सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फसल वर्ष 2024-25 में 307.67 लाख टन की तुलना में फसल वर्ष 2025-26 में प्याज का उत्पादन 307.37 लाख टन होने का अनुमान है। महाराष्ट्र के किसान 3,000 रुपए प्रति क्विंटल (30 रुपए प्रति किलो) की न्यूनतम खरीद कीमत की मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ लिमिटेड (नैफेड) और भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (एनसीसीएफ) की ओर से दी जा रही लगभग 1,580 रुपए प्रति क्विंटल की खरीद दर, बाजार की मौजूदा उम्मीदों से कम थी और खेती की लागत निकालने के लिए भी काफी नहीं थी।
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Citroen Cars Discount : कार खरीदने का शानदार मौका! Citroen ने इन गाड़ियों पर किया डिस्काउंट का ऐलान
मुंबई, एजेंसी। Citroen ने अपने ग्राहकों के लिए चुनिंगा गाड़ियों पर डिस्काउंट का ऐलान किया है। ये डिस्काउंट मॉडल के आधार पर दिए जाएंगे और ग्राहक इसका फायदा 30 जून तक उठा सकते हैं। डिटेल में जानते हैं इन डिस्काउंट के बारे में-

Citroen Basalt
Basalt कूप-SUV पर इस महीने 1.4 लाख रुपये तक का डिस्काउंट मिल रहा है। इसमें 82hp, 115Nm वाला 1.2-लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड (NA) पेट्रोल इंजन या 110hp, 190Nm वाला 1.2-लीटर टर्बोचार्ज्ड पेट्रोल इंजन मिलता है। NA इंजन के साथ 5-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन मिलता है, जबकि टर्बो-पेट्रोल इंजन 6-स्पीड मैनुअल या 6-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ आता है। ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ, टर्बो-पेट्रोल इंजन 205Nm का ज़्यादा टॉर्क देता है। मार्केट में इसकी कीमत 8.55 लाख रुपये से 13.75 लाख रुपये की के बीच है।

Citroen Aircross
Citroen Aircross पर कंपनी इस महीने 1.4 लाख रुपये तक का डिस्काउंट दे रही है। अपने सेगमेंट में यह एकमात्र 7 सीटर एसयूवी है। इसकी कीमत 8.89 लाख रुपये से 13.99 लाख रुपये तक जाती है।
Citroen C3
Citroen C3 की खरीदी करने पर आप 1.1 लाख रुपए तक की बचत कर सकते हैं। इसकी कीमत 4.99 लाख रुपये से 9.60 लाख रुपये के बीच की है।
देश
Tata के iPhone प्लांट पर पर्यावरण नियमों के उल्लंघन का आरोप, बंद हो सकती है फैक्ट्री
मुंबई, एजेंसी। भारत में iPhone निर्माण से जुड़े एक प्रमुख संयंत्र को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। तमिलनाडु के होसुर स्थित टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के प्लांट पर आसपास की कृषि भूमि और भूजल को प्रदूषित करने के आरोप लगे हैं। मामले की जांच के बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कंपनी से जवाब मांगा है और संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिलने पर फैक्ट्री बंद करने तक की चेतावनी दी है।
यह प्लांट Apple के iPhone के लिए बैक पैनल और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जों का निर्माण करता है। पिछले कई महीनों से प्लांट के आसपास के किसानों ने शिकायत की थी कि फैक्ट्री से निकलने वाला अपशिष्ट जल के कारण उनकी खेती और जल स्रोत को प्रभावित कर रहा है। किसानों की शिकायत के बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जांच शुरू की और अब मामला गंभीर रूप ले चुका है।

जांच के दौरान बोर्ड ने नोटिस में कहा कि फैक्ट्री परिसर के एक तालाब से निकला पानी आसपास के कृषि क्षेत्रों तक पहुंचा, जिससे भूजल प्रदूषण की आशंका पैदा हुई। बोर्ड ने यह भी आरोप लगाया कि दिसंबर 2025 में जारी निर्देशों के बावजूद कंपनी ने जरूरी सुधारात्मक कदम नहीं उठाए। इसी वजह से मई में जारी नोटिस में पूछा गया कि आखिर क्यों न यूनिट की बिजली आपूर्ति काट दी जाए और संचालन बंद कर दिया जाए। यह चेतावनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है।
टाटा ने आरोपों को किया खारिज
वहीं, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि उसने एक मान्यता प्राप्त स्वतंत्र प्रयोगशाला द्वारा कराई गई जांच में संयंत्र को सभी पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप पाया गया है। कंपनी ने दावा किया है कि वह पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों को अपना जवाब सौंप चुकी है।
पर्यावरण और उद्योग के बीच संतुलन की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। एक तरफ भारत वैश्विक कंपनियों के लिए उत्पादन केंद्र बनने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय समुदायों और किसानों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब सभी की नजर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के बीच होने वाली आगे की कार्रवाई पर टिकी है।
देश
स्मार्टफोन की बिक्री में 35% की बड़ी गिरावट, कीमत बढ़ने से मांग पर दबाव
नई दिल्ली, एजेंसी। देश में स्मार्टफोन की बढ़ती कीमतों का असर अब बिक्री पर साफ दिखाई देने लगा है। रिटेलरों का कहना है कि मई में मोबाइल की बिक्री में सालाना आधार पर रिकॉर्ड 30-35 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसकी वजह यह है कि मेमरी चिप की बढ़ती लागत की भरपाई के लिए कंपनियां नवंबर 2025 से लगातार कीमतों में बढ़ोतरी कर रही हैं। अभी कुल बिक्री में से 60 प्रतिशत हिस्सा ऑफलाइन का है, जबकि 40 प्रतिशत बिक्री ऑफलाइन के जरिए होती है। कुल मिलाकर ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की बिक्री में भारी गिरावट आएगी।

काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार मई में शिपमेंट में सालाना आधार पर 15-20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। जून में भी इसी तरह की कमजोरी बने रहने की संभावना जताई गई है। साल 2026 की पहली तिमाही में मोबाइल शिपमेंट में गिरावट 3 प्रतिशत रही थी लेकिन दूसरी तिमाही में यह गिरावट 15 प्रतिशत से ज्यादा रहने का अनुमान है।
रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी और मई के बीच स्मार्टफोन की औसत कीमत में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह बढ़ोतरी पिछले साल हुई कीमतों में वृद्धि के अलावा है। रिटेलरों का कहना है कि कीमतें बढ़ने के बाद से कुछ मामलों में कुल असर 40-45 प्रतिशत तक रहा है।
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