कोरिया/मनेंद्रगढ़, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में रेत तस्करी विवाद में बीजेपी नेता भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह समेत 3 लोगों की हत्या कर दी गई। इस मामले के शनिवार को मुख्य आरोपी मनोज त्रिपाठी समेत 4 और आरोपियों ने मनेंद्रगढ़ थाने में सरेंडर कर दिया है। वहीं 9वें नामजद आरोपी गौरव त्रिपाठी को खड़गवां क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया है।
इस गिरफ्तारी के साथ ही हत्याकांड में नामजद सभी 9 आरोपियों की गिरफ्तारी पूरी हो गई है। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर रही है।
दरअसल, कोरिया जिले के नौगईं गांव में आरोपियों ने 16 जून की देर रात फॉर्च्यूनर के आगे-पीछे हाईवा अड़ाकर रास्ता रोका, फिर वाहन पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। इस हमले में भाजपा के पूर्व जनपद पंचायत अध्यक्ष भरत सिंह उर्फ लल्ला सिंह जिंदा जल गए।
फॉर्च्यूनर में सवार लल्ला सिंह के चचेरे भाई और शिक्षक नागेंद्र सिंह की भी बिलासपुर और तीसरे घायल की अंबिकापुर में मौत हो गई थी। घटना के बाद पुलिस ने 9 आरोपियों के खिलाफ नामजद केस दर्ज किया था। इनमें से 4 लोगों को पहले गिरफ्तार कर लिया गया था।
मुख्य आरोपी समेत 4 आरोपी का सरेंडर
फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस टीमें लगी हुई थीं। आरोपियों की पतासाजी के लिए उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश की पुलिस टीमों को भी आरोपियों की फोटो भेजी गई थी। इधर, शनिवार को मुख्य आरोपी मनोज त्रिपाठी सहित निशांत त्रिपाठी, अमन, आशुतोष त्रिपाठी ने सरेंडर कर दिया है।
एमसीबी एसीप रत्ना सिंह भी थाने पहुंची। मनेंद्रगढ़ एसपी रत्ना सिंह ने बताया कि, पुलिस के लगातार दबाव के कारण सभी आरोपियों ने सरेंडर किया है। आगे की विवेचना कोरिया पुलिस करेगी। घटना के विरोध में करणी सेना ने प्रदर्शन का ऐलान किया था। पुलिस की लगातार छापेमारी से आरोपियों पर भी सरेंडर करने का दबाव था।
बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में मंगलवार को तेज रफ्तार ट्रेलर ने मवेशियों के झुंड को कुचल दिया। बिलासपुर-कोरबा नेशनल हाईवे पर हुए हादसे में 9 मवेशियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक मवेशी गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना कोनी थाना क्षेत्र की है।
1 साल में मवेशियों के कुचले जाने की यह चौथी बड़ी घटना है। इससे पहले जुलाई 2025 में मस्तूरी-रायपुर नेशनल हाईवे पर अज्ञात वाहन ने 23 गायों को कुचल दिया था, इनमें से 18 गायों की मौत हुई थी। इस घटना से पहले बिलासपुर-रायपुर हाईवे पर ट्रक ने 15 गायों के ऊपर गाड़ी चढ़ा दी थी, हादसे में सभी गायों की मौत हो गई थी।
वहीं, सितंबर 2025 में रतनपुर रोड पर तेज रफ्तार ट्रक ने गायों के झुंड को रौंद दिया था। इसमें एक गर्भवती गाय समेत 8 गायों की जान चली गई। गर्भवती गाय का पेट फट गया था, जिससे बछड़ा बाहर आ गया था। इन सभी बड़ी घटनाओं पर हाईकोर्ट सख्ती दिखा चुका है। इसके अलावा भी प्रदेश में कई हादसे आए दिन होते रहते हैं।
मृत 9 मवेशियों का अंतिम संस्कार
बुधवार सुबह गतौरी के पास ग्रामीणों और राहगीरों ने सड़क पर लहूलुहान पड़े मवेशियों को देखा और इसकी सूचना पुलिस व गौसेवकों को दी।
मौके पर पहुंची टीम ने गौसेवकों की मदद से घायल नंदी का रेस्क्यू कर उसे छतौना स्थित गौरी गोपाल गौसेवा धाम भेजा, जहां उसका उपचार जारी है। वहीं, मृत 9 मवेशियों का गौसेवकों ने अंतिम संस्कार किया।
हाईकोर्ट में लगातार सुनवाई जारी
दरअसल, सड़कों पर आवारा मवेशियों के जमावड़े को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर लगातार सुनवाई चल रही है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट कई बार राज्य सरकार और एनएचएआई पर नाराजगी जता चुका है।
हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव और एनएचएआई के अधिकारियों को मवेशियों को सड़कों पर आने से रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश भी दिए हैं। इसके बावजूद हाईवे पर मवेशियों की मौजूदगी कम नहीं हो रही है और लगातार हादसे हो रहे हैं।
हाईकोर्ट कितनी बार सख्त हुआ?
1. जुलाई 2025: रतनपुर हाईवे हादसे पर स्वत: संज्ञान
17 गोवंश की मौत की घटना पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया।
मुख्य सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा।
पूछा कि इतनी बड़ी लापरवाही के लिए किस अधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई।
कोर्ट ने कहा कि पहले भी कई बार निर्देश देने के बावजूद ऐसे हादसे लगातार हो रहे हैं, जो गंभीर चिंता का विषय हैं।
2. 2025 में लंबित जनहित याचिका की निगरानी
हाईकोर्ट ने सड़कों पर आवारा गोवंश के मुद्दे पर सुनवाई जारी रखी।
सरकार और NHAI से प्रभावी कार्ययोजना मांगी।
कहा कि केवल गौधाम बनाना पर्याप्त नहीं, उनका संचालन भी प्रभावी होना चाहिए ताकि गोवंश सड़क पर न आए।
मुख्य सचिव, पशुपालन विभाग और अन्य एजेंसियों से नियमित प्रगति रिपोर्ट मांगी गई।
सरकार ने कोर्ट को क्या बताया?
गोवंश के लिए नए शेड स्वीकृत किए गए।
हाईवे पर गोवंश के गले में रेडियम पट्टी लगाने का अभियान शुरू किया गया।
कुछ गो-मालिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
NHAI ने बैरियर और शेड निर्माण के लिए राशि उपलब्ध कराने की जानकारी दी।
फेंसिंग, स्पीड लिमिट और गौ एम्बुलेंस की मांग
4 अगस्त को हुए हादसे के बाद सामाजिक संगठनों और गौसेवकों ने नेशनल और स्टेट हाईवे पर गौ सुरक्षा फेंसिंग लगाने की मांग उठाई। गौसेवकों का कहना है कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो ऐसे हादसे आगे भी होते रहेंगे।
साथ ही दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में गति सीमा निर्धारित करने, प्रत्येक जिले में गौ एम्बुलेंस की व्यवस्था करने और आवारा मवेशियों के लिए पर्याप्त शेड व चारे की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील की।
मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026 के लिए आवेदन आमंत्रित
चयनित कलाकारों को मिलेंगे प्रतिवर्ष 12 से 24 हजार रुपये तक प्रोत्साहन राशि
रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक कला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और कलाकारों को आर्थिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय द्वारा मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026 के अंतर्गत प्रदेश के लोक कलाकारों से प्रविष्टियां आमंत्रित की गई हैं। योजना का उद्देश्य पारंपरिक लोक कलाओं को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करना, कलाकारों का सम्मान बढ़ाना तथा कला दलों के सतत विकास को नई गति प्रदान करना है।
योजना के अंतर्गत नृत्य-संगीत, लोक नाट्य, लोकगाथा, छत्तीसगढ़ी गीतकार, वाद्ययंत्र वादक, शिल्प कलाकार, छत्तीसगढ़ी पाक कला (पारंपरिक व्यंजन) तथा छत्तीसगढ़ी सौंदर्यकला (श्रृंगार) से जुड़े कलाकार आवेदन कर सकते हैं। आवेदन निर्धारित प्रारूप में पंजीकृत डाक के माध्यम से भेजे जाएंगे। आवेदन प्रपत्र विभाग की वेबसाइटwww.cgculture.inपर उपलब्ध हैं तथा संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय, नया रायपुर स्थित कार्यालय से भी प्राप्त किए जा सकते हैं।
योजना के तहत पात्र कलाकारों का चिन्हारी पोर्टल में पंजीयन अनिवार्य होगा। चयनित कलाकारों को प्रतिवर्ष न्यूनतम 12 हजार रुपये से अधिकतम 24 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि ई-पेमेंट के माध्यम से प्रदान की जाएगी। यह राशि एक वित्तीय वर्ष में एक बार प्रदान की जाएगी।
योजना का लाभ केवल ऐसे कलाकारों को मिलेगा जिनकी सभी स्रोतों से वार्षिक आय 96 हजार रुपये से अधिक नहीं है। इसके लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी आय प्रमाण-पत्र संलग्न करना अनिवार्य होगा। आवेदन के साथ बैंक खाते का विवरण, आईएफएससी कोड तथा पैन कार्ड की छायाप्रति भी प्रस्तुत करनी होगी।
प्रविष्टियां भेजने का पता – संचालक, संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल, व्यावसायिक परिसर, द्वितीय तल, सेक्टर-27, नया रायपुर, अटल नगर (छत्तीसगढ़) – 492018
प्रविष्टियां प्राप्त होने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। आवेदन भेजते समय लिफाफे पर “मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026” स्पष्ट रूप से अंकित करना आवश्यक होगा। प्राप्त प्रविष्टियों का परीक्षण समिति द्वारा किया जाएगा तथा समिति का निर्णय अंतिम एवं मान्य होगा।
मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना प्रदेश की समृद्ध लोक कला परंपराओं के संरक्षण, कलाकारों के सम्मान और आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से लोक कलाकारों को न केवल आर्थिक सहयोग मिलेगा, बल्कि अपनी कला को व्यापक पहचान दिलाने और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर भी प्राप्त होगा।
रायपुर। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आज मंत्रालय में राज्य कैबिनेट की बैठक के बाद पत्रकार-वार्ता को संबोधित किया। उन्होंने पत्रकार-वार्ता में कैबिनेट की बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी दी।
मंत्रिपरिषद के निर्णय :
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए –
1. मंत्रिपरिषद ने ’छत्तीसगढ़ राज्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मिशन’ को मंजूरी दी है। इस मिशन का उद्देश्य राज्य में सुशासन, नई तकनीक, कौशल विकास और डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है। यह मिशन 5 वर्षों के लिए होगा, जिस पर 500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
इस मिशन के तहत – 100 AI डेटा लैब बनाई जाएंगी, 5 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे, 300 से अधिक AI स्टार्टअप्स को सहायता दी जाएगी, 6 लाख विद्यार्थियों और 1.5 लाख सरकारी कर्मचारियों को AI का प्रशिक्षण दिया जाएगा। शासन के कार्यों को आसान और तेज़ बनाने के लिए 50 से अधिक AI आधारित सेवाएं विकसित की जाएंगी।
यह मिशन भारत सरकार के IndiaAI Mission के अनुरूप छत्तीसगढ़ को उत्तरदायी, नवाचार-आधारित और भविष्य उन्मुख डिजिटल राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
2. मंत्रिपरिषद् ने छत्तीसगढ़ में हैवी अर्थ मूविंग इक्वीपमेंट (Heavy Earth Moving Equipment) मैन्युफैक्चरिंग संयंत्र की स्थापना के लिए भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) को रियायती दर पर भूमि आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। बीईएमएल भारत सरकार का एक प्रतिष्ठित मिनीरत्न सार्वजनिक उपक्रम है। हैवी अर्थ मूविंग इक्वीपमेंट मैन्युफैक्चरिंग संयंत्र हेतु यह राज्य का पहला उद्योग होगा, जिसकी स्थापना से छत्तीसगढ़ को देश के औद्योगिक मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी और राज्य में आधुनिक भारी मशीन निर्माण उद्योग की शुरुआत होगी।
मंत्रिपरिषद के इस महत्वपूर्ण निर्णय से राज्य में बड़े निवेश को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) को भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा। राज्य में संयंत्र की स्थापना से औद्योगिक विकास को गति मिलेगी, स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और छत्तीसगढ़ विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरेगा।
3. मंत्रिपरिषद् ने लोक निर्माण विभाग में निर्माण कार्यों के डिजिटल प्रबंधन के लिए वर्क्स एण्ड अकाउंट मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (WAMIS) लागू करने के प्रथम चरण को मंजूरी दी है। इस प्रणाली के माध्यम से कार्यों की स्वीकृति, ई-प्राक्कलन, ई-प्रोक्योरमेंट, ई-मेजरमेंट बुक (e-MB), बिल भुगतान, लेखा प्रबंधन तथा गुणवत्ता की निगरानी जैसी सभी प्रक्रियाएं एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित होंगी। सी-डैक (C-DAC), पुणे द्वारा विकसित इस प्रणाली को पहले लोक निर्माण विभाग में लागू किया जाएगा, जिसके बाद अन्य निर्माण एवं अधोसंरचना विभागों में भी इसका विस्तार किया जाएगा। इससे निर्माण कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी, भुगतान की प्रक्रिया तेज होगी, कार्यों की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी और परियोजनाओं का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी एवं जवाबदेह बनेगा।
4. मंत्रिपरिषद की बैठक में मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना अंतर्गत बारहमासी सड़कों के निर्माण हेतु जारी दिशा-निर्देशों में संशोधन को मंजूरी प्रदान की गई। संशोधनों के तहत ग्रामीण आंतरिक गलियों में सीसी सड़क एवं नाली निर्माण तथा सड़क निर्माण से पूर्व मनरेगा से मिट्टी कार्य की अनिवार्यता समाप्त की गई है। योजना की पात्रता का दायरा बढ़ाकर ऐसे सभी ग्रामीण मार्गों को शामिल किया गया है, जो प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अथवा अन्य योजनाओं में सम्मिलित नहीं हैं। आवश्यकता अनुसार नाबार्ड ऋण, पर्यावरण एवं अधोसंरचना विकास मद, खनिज न्यास मद सहित अन्य स्रोतों से भी वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जा सकेंगे। कार्यों का अनुमोदन प्रशासनिक विभाग करेगा तथा क्रियान्वयन की समीक्षा एवं अंतर्विभागीय समन्वय के लिए राज्य स्तरीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति गठित की जाएगी।
5. मंत्रिपरिषद् ने वित्त विभाग के उस प्रस्ताव का अनुमोदन किया है, जिसके तहत Asian Development Bank (ADB) से छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के क्रियान्वयन हेतु “Anjor LIGHT (Anjor Linked Implementation & Guidance for Holistic Tracking)’’ तकनीकी सहायता परियोजना के लिए 15 करोड़ रुपये का पूर्णतः अनुदान (Grant) प्राप्त किया जाएगा। यह तीन वर्ष (1 दिसंबर 2026 से 30 नवंबर 2029) की बहु-क्षेत्रीय परियोजना है, जिसमें राज्य शासन अथवा भारत सरकार का कोई वित्तीय अंशदान नहीं होगा।
परियोजना के अंतर्गत सार्वजनिक वित्त प्रबंधन को सुदृढ़ करना, PPP इकोसिस्टम का विकास, ग्रीन एवं ब्लेंडेड फाइनेंस को बढ़ावा देना, राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों (SOEs) की कार्यक्षमता में सुधार, क्लाइमेट-रेजिलिएंट परियोजनाओं का विकास तथा छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के अनुरूप प्राथमिकता आधारित परियोजनाओं की पाइपलाइन तैयार की जाएगी। इसके लिए परियोजना प्रबंधन इकाई (PMU) की स्थापना की जाएगी।
यह परियोजना पूर्णतः अनुदान आधारित होने से राज्य पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा तथा इससे संस्थागत क्षमता निर्माण, निवेश संवर्धन और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति को गति मिलेगी।
6. मंत्रिपरिषद् ने राज्य योजनाओं के लिए State Single Nodal Agency (S-SNA) मॉडल लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी योजनाओं की राशि का अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है। अब योजनाओं की राशि विभिन्न बैंक खातों में लंबे समय तक निष्क्रिय नहीं रहेगी, बल्कि एक केंद्रीकृत मदर अकाउंट के माध्यम से आवश्यकता होने पर ही सीधे हितग्राहियों या वेंडरों को भुगतान किया जाएगा। यह मॉडल भारत सरकार द्वारा केंद्र प्रायोजित योजनाओं में लागू SNA प्रणाली की तर्ज पर राज्य की योजनाओं में भी लागू किया जाएगा, जिससे शासन व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को और मजबूती मिलेगी।
इस व्यवस्था से योजनाओं के क्रियान्वयन की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी, वित्तीय अनुशासन मजबूत होगा और निष्क्रिय राशि, गबन तथा बैंकिंग धोखाधड़ी जैसी संभावनाओं पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा। साथ ही, राज्य की नकदी प्रबंधन क्षमता बेहतर होगी, ब्याज का अनावश्यक बोझ कम होगा और उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
7. मंत्रिपरिषद् ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (CSPGCL) को आमजन एवं संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से 200 करोड़ रूपए तक के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD)/बॉन्ड जारी कर स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध (लिस्टिंग) किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस निर्णय से कंपनी के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने के नए विकल्प उपलब्ध होंगे, ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा तथा राज्य के विद्युत अवसंरचना विकास को और गति मिलेगी।
इसके लिए राज्य शासन द्वारा मूलधन एवं ब्याज के भुगतान पर प्रत्याभूति शुल्क में छूट सहित गारंटी प्रदान की जाएगी। साथ ही, लिस्टिंग प्रक्रिया से संबंधित आवश्यक निर्णय लेने हेतु कंपनी के संचालक मंडल तथा आवश्यक निर्देश जारी करने के लिए ऊर्जा विभाग को अधिकृत किया गया है।