देश
भारत-ब्रिटेन एफटीए का मुख्य लक्ष्य परिवर्तनकारी वृद्धि: गोयल
लंदन/नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का प्रमुख लक्ष्य दोनों देशों के बीच परिवर्तनकारी आर्थिक वृद्धि होना चाहिए। गोयल भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) के 15 जुलाई से लागू होने से पहले दोनों देशों की तैयारियों की समीक्षा के लिए तीन दिवसीय ब्रिटेन दौरे पर हैं। लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग की ओर से आयोजित एक संवाद कार्यक्रम में उन्होंने भारतीय उद्योग परिसंघ (फिक्की) के नेतृत्व वाले कारोबारी प्रतिनिधिमंडल से सीईटीए के तहत उन्नत विनिर्माण, उपभोक्ता वस्तुओं, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों पर चर्चा की।

गोयल ने कहा, “मेरे विचार से भारतीय और ब्रिटेन की कंपनियों के लिए सहयोग, साझेदारी और संयुक्त प्रयास तेजी से आगे बढ़ने का सबसे प्रभावी तरीका होगा। इससे कारोबार का विस्तार तेज हो सकेगा।” उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार सामान्य तौर पर चार से छह प्रतिशत की दर से बढ़ता है, लेकिन भारत को इससे कहीं अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखने होंगे। गोयल ने कहा कि यदि भारत केवल इतनी ही वृद्धि को लक्ष्य बनाएगा तो यह दुनिया के भारत पर बढ़ते भरोसे के साथ न्याय नहीं होगा। मंत्री ने बताया कि सीईटीए के साथ ही अगले महीने लागू होने वाला दोहरा योगदान समझौता (डीसीसी) दोनों देशों में पांच वर्ष तक के अस्थायी कार्यकाल पर काम करने वाले कर्मचारियों पर लागू होगा। गोयल ने कहा कि सीईटीए केवल शुल्क और मूल नियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लगभग 48 अरब पाउंड के द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को नई ऊंचाई देने का व्यापक अवसर है। उन्होंने कहा कि कारोबारी समुदाय को नए क्षेत्रों में प्रवेश और परिवर्तनकारी वृद्धि को प्राथमिकता देनी चाहिए।
कार्यक्रम में गोयल ने कई रिपोर्ट जारी कीं, जिनमें भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की ‘इंडियन रूट्स, ब्रिटिश सॉयल’ रिपोर्ट शामिल है। इसमें पिछले एक दशक में ब्रिटेन में भारतीय निवेश की यात्रा का विवरण दिया गया है। इसके अलावा, यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल (यूकेआईबीसी) की सीईटीए कार्यान्वयन पुस्तिका, रेटिंग एजेंसी केयरएज की रिपोर्ट और फिक्की की भारत-ब्रिटेन आर्थिक साझेदारी पर आधारित रिपोर्ट भी जारी की गई।
गोयल ने कहा, “अब तक हमारे पास केवल फिच, मूडीज और स्टैंडर्ड एंड पुअर्स जैसी रेटिंग एजेंसियां थीं। मैं यह रिकॉर्ड पर कह सकता हूं कि उन्होंने भारत के साथ निष्पक्ष व्यवहार नहीं किया। उन्होंने भारत की वृद्धि गाथा, मजबूत आर्थिक बुनियाद, उसकी क्षमता और भविष्य का उतना सही आकलन नहीं किया, जितना किसी रेटिंग एजेंसी को करना चाहिए। मैं उनके इरादों पर कोई सवाल नहीं उठा रहा हूं, लेकिन यह बात मुझे निश्चित रूप से हैरान करती है।”
गोयल ने कहा, ”मुझे लगता है कि ‘केयरएज’ ने अपना काम पूरी तरह से निष्पक्ष होकर किया है। उसने भारत की तुलना में बेहद कमजोर और भविष्य की कम संभावनाओं वाली अर्थव्यवस्थाओं का आकलन किया है, जिन्हें अन्य रेटिंग एजेंसियों ने न जाने किन कारणों से भारत से बेहतर रेटिंग दे रखी है।” भारत में पर्यटन की अपार संभावनाओं पर चर्चा के दौरान मंत्री ने अधिक विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए निर्यात संवर्धन के दृष्टिकोण से सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) परियोजनाओं में सरकार की ओर से वित्तीय सहयोग देने की पेशकश की। गोयल ने कहा, “हमें विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के लिए गंभीरता से काम करने की जरूरत है। साथ ही यह भी देखना होगा कि उच्च खर्च करने वाले पर्यटकों को भारत कैसे आकर्षित किया जाए। वैश्विक कंपनियों के निदेशक मंडल की बैठकें भारत में आयोजित कराकर उन्हें देश में हो रहे बदलाव और विकास से रूबरू कराया जा सकता है।”
मंत्री ने लघु एवं मझोले उद्यमों (एसएमई) से भी व्यापार प्रतिनिधिमंडलों में उत्साहपूर्वक भाग लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारतीय कारोबारियों के लिए दुनिया भर में ऐसे 500 व्यापार प्रतिनिधिमंडल भेजने की योजना है। इससे पहले गोयल ने कहा कि उन्होंने ब्रिटेन के व्यापार एवं वाणिज्य मंत्री पीटर काइल के साथ सार्थक चर्चा की, जिसमें दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को और गहरा करने के नए अवसरों पर विचार किया गया। गोयल ने कहा, “इस बातचीत में वह गर्मजोशी, भरोसा और दूरदर्शी दृष्टिकोण झलकता है, जो हमारे द्विपक्षीय संबंधों की पहचान बने हुए हैं। हम ऐसे परिवेश को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो नवाचार, निवेश और दोनों देशों की समग्र वृद्धि को प्रोत्साहित करे।”
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MSME की मांग, GST में अनुलोम शुल्क ढांचे से उत्पन्न बाधाएं दूर की जाएं
नई दिल्ली, एजेंसी। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) चाहते हैं कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में अनुलोम शुल्क ढांचे (Progressive fee structures) से उत्पन्न बाधाओं को दूर किया जाए ताकि उनके समक्ष कार्यशील पूंजी की समस्या न पैदा हो। आगामी एक जुलाई को देश में जीएसटी व्यवस्था लागू हुए नौ साल पूरे हो जाएंगे। इस अवसर पर लेखा कंपनी डेलॉयट द्वारा कराए गए एक सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाले आधे से अधिक एमएसएमई ने अनुलोम शुल्क ढांचे और रिफंड में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

डेलॉयट साउथ एशिया के इनडायरेक्ट टैक्स लीडर महेश जयसिंग ने कहा, ‘भारत के एमएसएमई ने अनुलोम शुल्क ढांचे से उत्पन्न होने वाली कार्यशील पूंजी की बाधाओं को दूर करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है। लगभग 69 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने अनुलोम शुल्क की रिफंड व्यवस्था में इनपुट सेवाओं और पूंजीगत वस्तुओं को शामिल करने का समर्थन किया है। वहीं, 63 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने इनवर्जन से जुड़ी विसंगतियों को कम करने के लिए जीएसटी दरों को और अधिक तकर्संगत बनाने की जरूरत बतायी है। उत्तरदाताओं में 51 प्रतिशत एसमएसई ने संचित आईटीसी शेष के साल के अंत में रिफंड का समर्थन का समर्थन किया है जबकि 49 प्रतिशत पिछली अवधियों के लिए अनंतिम रिफंड शुरू करने का समर्थन करते हैं।’
सर्वेक्षण में पता चला है कि व्यापक प्रणालीगत सुधारों की भी मजबूत मांग है। उत्तरदाताओं में 72 प्रतिशत केंद्रीयकृत ऑडिट प्रणाली का समर्थन कर रहे हैं। लगभग 89 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने विलंबित जीएसटी रिफंड और प्री-डिपॉजिट पर ब्याज के स्वत: भुगतान का समर्थन किया, जबकि 88 प्रतिशत ने इनवॉइस-आधारित आईटीसी पात्रता और 87 प्रतिशत ने तिमाही कर भुगतान व्यवस्था का समर्थन किया। एमएसएमई के बीच तिमाही रिटर्न फाइलिंग का सबसे व्यापक समर्थन मिला है।
डेलॉयट साउथ एशिया के अध्यक्ष (कर) गोकुल चौधरी ने देश के एमएसई पारितंत्र को मजबूत करने में जीएसटी की भूमिका पर कहा, ‘भारत के एमएसएमई हमारे देश के कुल उत्पादन का एक-तिहाई हिस्सा तैयार करते हैं। कुल निर्यात में उनका योगदान लगभग 50 प्रतिशत है। देश की आपूर्ति श्रृंखला के कामकाज और एक पारदर्शी, औपचारिक पारितंत्र बनाने में जीएसटी एक प्रमुख उत्प्रेरक है। अगली पीढ़ी के सुधारों के तहत रिफंड में सुधार करके, इनपुट टैक्स क्रेडिट नियमों को सरल बनाकर और क्रेडिट के निर्बाध उपयोग को सक्षम करके दक्षता और नकदी को बढ़ावा देना चाहिए।’
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Vadilal ब्रांड को लेकर बढ़ा विवाद, बॉम्बे हाईकोर्ट में पहुंचा मामला
नई दिल्ली, एजेंसी। देश की प्रमुख आइसक्रीम कंपनी वाडीलाल (Vadilal) से जुड़े पारिवारिक विवाद ने एक बार फिर कानूनी मोड ले लिया है। कंपनी की मुंबई इकाई वाडीलाल डेयरी इंटरनेशनल (VDIL) ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अहमदाबाद समूह पर उसके कारोबारी अधिकारों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है। कंपनी ने अदालत से अंतरिम राहत की मांग करते हुए ब्रांड के तहत अपने कारोबार को बिना किसी रुकावट जारी रखने की अनुमति देने की अपील की है।

मुंबई समूह का कहना है कि वर्ष 1993 में हुए पारिवारिक समझौते के तहत उसे महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल और अविभाजित आंध्र प्रदेश में वाडीलाल ब्रांड के नाम से आइसक्रीम और जूस के निर्माण, बिक्री और वितरण का स्थायी अधिकार मिला था। कंपनी का दावा है कि इस समझौते के बदले उसने समूह की ट्रेडमार्क होल्डिंग कंपनी में अपनी हिस्सेदारी भी छोड़ दी थी।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि अहमदाबाद समूह ने विभिन्न कानूनी कार्रवाइयों और अन्य कदमों के जरिए मुंबई इकाई के कारोबार को प्रभावित करने की कोशिश की। इनमें विदेश में ट्रेडमार्क से जुड़े मामले, उत्पादों की गुणवत्ता पर सवाल उठाना और अन्य कानूनी कार्रवाई शामिल हैं।
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Credit Card जारी करने में SBI, ICICI और HDFC में किसने मारी बाजी? सामने आए मई 2026 के आंकड़े
मुंबई, एजेंसी। देश में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। खरीदारी, बिल भुगतान और अन्य दैनिक खर्चों के लिए लोग पहले के मुकाबले अधिक संख्या में क्रेडिट कार्ड का उपयोग कर रहे हैं। प्राइवेट बैकों के क्रेडिट कार्डों से ज्यादा इन दिनों सरकारी बैंक ज्यादा पसंद कर रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में नए क्रेडिट कार्ड जारी करने के मामले में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) सबसे आगे रहा।

आंकड़ों के मुताबिक, मई 2026 में SBI बैंक की तरफ से लोगों को 1.82 लाख नए क्रेडिट कार्ड जारी किए गए हैं। इस दौरान SBI कार्ड से कुल 38556 करोड़ रुपए का खर्च हुआ, जो अप्रैल के मुकाबले 2% ज्यादा है। ये आंकड़े किसी भी अन्य संस्था से कहीं ज्यादा हैं।
अन्य बैंकों का डाटा
- ICICI बैंक ने मई 2026 में 1.68 लाख नए क्रेडिट कार्ड जारी किए, जिससे 32,818 करोड़ रुपए का खर्च हुआ, जो अप्रैल के मुकाबले 1% ज्यादा है।
- HDFC बैंक ने 1.42 लाख नए क्रेडिट कार्ड जारी किए, जिससे कार्डधारकों ने 59,138 करोड़ रुपए खर्च किए।
- HDFC बैंक के कार्ड में एक महीने क हिसाब से 2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- कोटक महिंद्रा बैंक ने 54,000 नए क्रेडिट कार्ड जारी किए, जिससे खर्च 6% बढ़कर 6,389 करोड़ रुपए पहुंच गया।
- एक्सिस बैंक ने मई में 52,000 नए क्रेडिट कार्ड जारी किए हैं, जिससे खर्च 6% बढ़कर 23,301 करोड़ रुपए हो गया।
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