देश
शेयर कीमत पर नहीं, कारोबार वृद्धि और लाभप्रदता पर ध्यान दें कंपनियां: एनएसई प्रमुख
मुंबई, एजेंसी। एनएसई के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) आशीष चौहान ने शुक्रवार को कहा कि कंपनियों को केवल शेयर कीमत बढ़ाने की दौड़ में शामिल होने के बजाय टिकाऊ कारोबार खड़ा करने, लाभप्रदता बढ़ाने और दीर्घकालिक मूल्य सृजन पर ध्यान देना चाहिए। चौहान ने यहां जेआईटीओ इन्क्यूबेशन एंड इनोवेशन फाउंडेशन (जेआईआईएफ) के नौवें स्थापना दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि किसी कंपनी का बाजार मूल्यांकन उसके कारोबार के प्रदर्शन और वृद्धि को दर्शाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उद्यमियों का उद्देश्य कारोबार का विस्तार करना और मजबूत बुनियादी आधार के जरिए शेयरधारकों के लिए मूल्य सृजित करना होना चाहिए।

एनएसई के सीईओ ने कहा, “अगर कंपनी का मुनाफा बढ़ेगा तो उसके शेयर का मूल्य भी बढ़ेगा। वास्तविक कारोबारी वृद्धि के बिना मूल्य में लगातार बढ़ोतरी संभव नहीं है।” उन्होंने कहा कि उद्यमियों को बाजार के रुझानों या प्रतिस्पर्धियों के दबाव से प्रभावित होने के बजाय अपने मूल कारोबार पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। जो कंपनियां लगातार वृद्धि करती हैं और बेहतर प्रदर्शन करती हैं, उन्हें अंततः बाजार में पहचान मिलती है। चौहान ने कहा कि सार्वजनिक बाजार लाभ कमाने वाली कंपनियों को ऐसा मूल्यांकन देते हैं, जिसकी बराबरी निजी बही खाता नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि यदि कोई कंपनी सालाना दो करोड़ रुपए का मुनाफा कमा रही है तो सूचीबद्ध होने के बाद उसका बाजार पूंजीकरण 40 से 50 करोड़ रुपए तक हो सकता है। इससे प्रवर्तकों को पूंजी जुटाने, नए साझेदार जोड़ने और कारोबार का विस्तार करने का अवसर मिलता है।
चौहान ने कहा कि सूचीबद्ध होने से कंपनी को अपनी खुद की एक मुद्रा भी मिल जाती है। प्रवर्तक अपने शेयरों का इस्तेमाल दूसरी कंपनियों के अधिग्रहण, साझेदार जोड़ने और कर्मचारियों को शेयर विकल्प देकर प्रोत्साहित करने के लिए कर सकते हैं। चौहान ने उदाहरण देते हुए कहा कि इन्फोसिस के शुरुआती दौर में एन.आर. नारायण मूर्ति और नंदन नीलेकणी ने प्रतिभाशाली कर्मचारियों को आकर्षित करने के लिए कर्मचारी शेयर विकल्प योजना का प्रभावी उपयोग किया था। उन्होंने कहा, “आप जो भी काम करते हैं, यदि उसे अलग और बेहतर तरीके से करते हैं तो वह भी नवोन्मेष है।”
चौहान ने कहा कि कारोबार खड़ा करने की यात्रा चुनौतीपूर्ण होती है और सफलता हासिल करने से पहले कई उद्यमियों को वर्षों तक संघर्ष करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना उतना भी कठिन नहीं है, जितना आमतौर पर माना जाता है। हालांकि, सूचीबद्ध होने के बाद कंपनियों को अनुपालन, सुशासन और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। चौहान ने कहा कि पूंजी बाजार कंपनियों को धन जुटाने और विस्तार के अवसर उपलब्ध कराते हैं लेकिन इसके लिए कारोबार में अनुशासन बनाए रखना और दीर्घकालिक मूल्य सृजन पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है।
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MSME की मांग, GST में अनुलोम शुल्क ढांचे से उत्पन्न बाधाएं दूर की जाएं
नई दिल्ली, एजेंसी। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) चाहते हैं कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में अनुलोम शुल्क ढांचे (Progressive fee structures) से उत्पन्न बाधाओं को दूर किया जाए ताकि उनके समक्ष कार्यशील पूंजी की समस्या न पैदा हो। आगामी एक जुलाई को देश में जीएसटी व्यवस्था लागू हुए नौ साल पूरे हो जाएंगे। इस अवसर पर लेखा कंपनी डेलॉयट द्वारा कराए गए एक सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाले आधे से अधिक एमएसएमई ने अनुलोम शुल्क ढांचे और रिफंड में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

डेलॉयट साउथ एशिया के इनडायरेक्ट टैक्स लीडर महेश जयसिंग ने कहा, ‘भारत के एमएसएमई ने अनुलोम शुल्क ढांचे से उत्पन्न होने वाली कार्यशील पूंजी की बाधाओं को दूर करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है। लगभग 69 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने अनुलोम शुल्क की रिफंड व्यवस्था में इनपुट सेवाओं और पूंजीगत वस्तुओं को शामिल करने का समर्थन किया है। वहीं, 63 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने इनवर्जन से जुड़ी विसंगतियों को कम करने के लिए जीएसटी दरों को और अधिक तकर्संगत बनाने की जरूरत बतायी है। उत्तरदाताओं में 51 प्रतिशत एसमएसई ने संचित आईटीसी शेष के साल के अंत में रिफंड का समर्थन का समर्थन किया है जबकि 49 प्रतिशत पिछली अवधियों के लिए अनंतिम रिफंड शुरू करने का समर्थन करते हैं।’
सर्वेक्षण में पता चला है कि व्यापक प्रणालीगत सुधारों की भी मजबूत मांग है। उत्तरदाताओं में 72 प्रतिशत केंद्रीयकृत ऑडिट प्रणाली का समर्थन कर रहे हैं। लगभग 89 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने विलंबित जीएसटी रिफंड और प्री-डिपॉजिट पर ब्याज के स्वत: भुगतान का समर्थन किया, जबकि 88 प्रतिशत ने इनवॉइस-आधारित आईटीसी पात्रता और 87 प्रतिशत ने तिमाही कर भुगतान व्यवस्था का समर्थन किया। एमएसएमई के बीच तिमाही रिटर्न फाइलिंग का सबसे व्यापक समर्थन मिला है।
डेलॉयट साउथ एशिया के अध्यक्ष (कर) गोकुल चौधरी ने देश के एमएसई पारितंत्र को मजबूत करने में जीएसटी की भूमिका पर कहा, ‘भारत के एमएसएमई हमारे देश के कुल उत्पादन का एक-तिहाई हिस्सा तैयार करते हैं। कुल निर्यात में उनका योगदान लगभग 50 प्रतिशत है। देश की आपूर्ति श्रृंखला के कामकाज और एक पारदर्शी, औपचारिक पारितंत्र बनाने में जीएसटी एक प्रमुख उत्प्रेरक है। अगली पीढ़ी के सुधारों के तहत रिफंड में सुधार करके, इनपुट टैक्स क्रेडिट नियमों को सरल बनाकर और क्रेडिट के निर्बाध उपयोग को सक्षम करके दक्षता और नकदी को बढ़ावा देना चाहिए।’
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Vadilal ब्रांड को लेकर बढ़ा विवाद, बॉम्बे हाईकोर्ट में पहुंचा मामला
नई दिल्ली, एजेंसी। देश की प्रमुख आइसक्रीम कंपनी वाडीलाल (Vadilal) से जुड़े पारिवारिक विवाद ने एक बार फिर कानूनी मोड ले लिया है। कंपनी की मुंबई इकाई वाडीलाल डेयरी इंटरनेशनल (VDIL) ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अहमदाबाद समूह पर उसके कारोबारी अधिकारों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है। कंपनी ने अदालत से अंतरिम राहत की मांग करते हुए ब्रांड के तहत अपने कारोबार को बिना किसी रुकावट जारी रखने की अनुमति देने की अपील की है।

मुंबई समूह का कहना है कि वर्ष 1993 में हुए पारिवारिक समझौते के तहत उसे महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल और अविभाजित आंध्र प्रदेश में वाडीलाल ब्रांड के नाम से आइसक्रीम और जूस के निर्माण, बिक्री और वितरण का स्थायी अधिकार मिला था। कंपनी का दावा है कि इस समझौते के बदले उसने समूह की ट्रेडमार्क होल्डिंग कंपनी में अपनी हिस्सेदारी भी छोड़ दी थी।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि अहमदाबाद समूह ने विभिन्न कानूनी कार्रवाइयों और अन्य कदमों के जरिए मुंबई इकाई के कारोबार को प्रभावित करने की कोशिश की। इनमें विदेश में ट्रेडमार्क से जुड़े मामले, उत्पादों की गुणवत्ता पर सवाल उठाना और अन्य कानूनी कार्रवाई शामिल हैं।
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Credit Card जारी करने में SBI, ICICI और HDFC में किसने मारी बाजी? सामने आए मई 2026 के आंकड़े
मुंबई, एजेंसी। देश में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। खरीदारी, बिल भुगतान और अन्य दैनिक खर्चों के लिए लोग पहले के मुकाबले अधिक संख्या में क्रेडिट कार्ड का उपयोग कर रहे हैं। प्राइवेट बैकों के क्रेडिट कार्डों से ज्यादा इन दिनों सरकारी बैंक ज्यादा पसंद कर रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में नए क्रेडिट कार्ड जारी करने के मामले में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) सबसे आगे रहा।

आंकड़ों के मुताबिक, मई 2026 में SBI बैंक की तरफ से लोगों को 1.82 लाख नए क्रेडिट कार्ड जारी किए गए हैं। इस दौरान SBI कार्ड से कुल 38556 करोड़ रुपए का खर्च हुआ, जो अप्रैल के मुकाबले 2% ज्यादा है। ये आंकड़े किसी भी अन्य संस्था से कहीं ज्यादा हैं।
अन्य बैंकों का डाटा
- ICICI बैंक ने मई 2026 में 1.68 लाख नए क्रेडिट कार्ड जारी किए, जिससे 32,818 करोड़ रुपए का खर्च हुआ, जो अप्रैल के मुकाबले 1% ज्यादा है।
- HDFC बैंक ने 1.42 लाख नए क्रेडिट कार्ड जारी किए, जिससे कार्डधारकों ने 59,138 करोड़ रुपए खर्च किए।
- HDFC बैंक के कार्ड में एक महीने क हिसाब से 2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- कोटक महिंद्रा बैंक ने 54,000 नए क्रेडिट कार्ड जारी किए, जिससे खर्च 6% बढ़कर 6,389 करोड़ रुपए पहुंच गया।
- एक्सिस बैंक ने मई में 52,000 नए क्रेडिट कार्ड जारी किए हैं, जिससे खर्च 6% बढ़कर 23,301 करोड़ रुपए हो गया।
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