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बिज़नस

आखिर AI का तिलिस्म टूटाः Ford कंपनी ने निकाले 300 से अधिक इंजीनियर दोबारा नौकरी पर बुलाए, कहा- AI नहीं कर सकता इंसानों की बराबरी

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वाशिंगठन, एजेंसी। अमेरिका की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी Ford Motor Company ने स्वीकार किया है कि कृत्रिम मेधा (AI) गुणवत्ता जांच (Quality Check) में अनुभवी इंजीनियरों की जगह नहीं ले सकी। इसी कारण कंपनी ने हाल के वर्षों में 300 से अधिक अनुभवी गुणवत्ता निरीक्षकों और इंजीनियरों को दोबारा नियुक्त किया है। Ford ने उत्पादन प्रक्रिया को तेज करने, लागत कम करने और गुणवत्ता जांच बेहतर बनाने के लिए अपने कई संयंत्रों में AI तकनीक लागू की थी। कंपनी ने लगभग 900 AI कैमरे लगाए थे, जिनका उद्देश्य उत्पादन के दौरान खामियों की पहचान करना और सप्लाई चेन में आने वाली समस्याओं को कम करना था। Ford के वाहन हार्डवेयर इंजीनियरिंग के उपाध्यक्ष चार्ल्स पून ने कहा कि AI एक बेहतरीन तकनीक है, लेकिन उसकी क्षमता इस बात पर निर्भर करती है कि उसे किस गुणवत्ता के डेटा और अनुभव से प्रशिक्षित किया गया है।

उन्होंने स्वीकार किया कि कंपनी ने पहले अपने सबसे अनुभवी इंजीनियरों के दशकों के अनुभव का पर्याप्त उपयोग नहीं किया। इसका असर AI सिस्टम की गुणवत्ता पर पड़ा।  उनके अनुसार, केवल डिज़ाइन डेटा AI में डाल देने से उच्च गुणवत्ता वाला उत्पाद तैयार नहीं हो जाता। कंपनी ने अब 300 से अधिक अनुभवी इंजीनियरों और गुणवत्ता निरीक्षकों को वापस नियुक्त किया है जिनका काम AI और मशीन लर्निंग सिस्टम को बेहतर प्रशिक्षण देना, वर्षों के व्यावहारिक अनुभव को नई तकनीक में शामिल करना  और युवा इंजीनियरों का मार्गदर्शन करना होगा। चार्ल्स पून ने कहा कि कंपनी ने महसूस किया कि ऑटोमेशन और AI को बेहतर बनाने के लिए सबसे अनुभवी लोगों के ज्ञान की जरूरत है।  

यही कारण है कि अनुभवी इंजीनियरों को वापस लाकर AI सिस्टम को वास्तविक उत्पादन अनुभव से प्रशिक्षित किया जा रहा है। Ford ने बताया कि इन बदलावों के बाद वह अमेरिका की JD Power Initial Quality Study में मुख्यधारा (Mainstream) वाहन निर्माताओं की श्रेणी में पहले स्थान पर पहुंच गई है। कंपनी का कहना है कि गुणवत्ता सुधार के लिए नेतृत्व में बदलाव और अनुभवी इंजीनियरों की वापसी महत्वपूर्ण रही। Ford का अनुभव बताता है कि AI कई काम आसान बना सकता है, लेकिन अभी भी वह दशकों के व्यावहारिक अनुभव, निर्णय क्षमता और मानवीय समझ का पूरी तरह विकल्प नहीं बन पाया है। भविष्य में AI और अनुभवी विशेषज्ञों का संयोजन ही सबसे प्रभावी मॉडल माना जा रहा है।

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देश

सरकार ने नहीं बदलीं स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की ब्याज दरें, निवेशकों को मिलेगा वही रिटर्न

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नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) के लिए छोटी बचत योजनाओं (Small Savings Schemes) की ब्याज दरों का ऐलान कर दिया है। सरकार ने इस बार भी किसी भी योजना की ब्याज दर में बदलाव नहीं किया है। ऐसे में निवेशकों को अपनी जमा राशि पर पहले की तरह ही रिटर्न मिलता रहेगा।

वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), सुकन्या समृद्धि योजना (SSY), सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम (SCSS), नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC), किसान विकास पत्र (KVP) और डाकघर की विभिन्न बचत योजनाओं पर मौजूदा ब्याज दरें जुलाई से सितंबर तिमाही के दौरान भी लागू रहेंगी।

सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब बाजार में ब्याज दरों को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। हालांकि, सरकार ने निवेशकों को राहत देते हुए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया।

छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों की समीक्षा हर तिमाही की जाती है। सरकार बॉन्ड यील्ड और बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इन दरों पर फैसला लेती है। इस बार भी समीक्षा के बाद मौजूदा दरों को बरकरार रखने का निर्णय लिया गया है।
  

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देश

सरकार ने पेट्रोरसायन आयात पर शुल्क छूट 15 जुलाई तक बढ़ाई

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नई दिल्ली, एजेंसी। सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के बीच आपूर्ति की निरंतरता और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण पेट्रोरसायन उत्पादों के आयात पर शून्य सीमा शुल्क छूट की अवधि 15 दिन बढ़ाकर 15 जुलाई तक कर दी है। सरकार ने दो अप्रैल को करीब 40 महत्वपूर्ण पेट्रोरसायन उत्पादों के आयात पर पूर्ण सीमा शुल्क छूट दी थी। यह अस्थायी और लक्षित राहत 30 जून को समाप्त होने वाली थी। वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को जारी अधिसूचना में सीमा शुल्क छूट की अवधि बढ़ाकर 15 जुलाई तक कर दी। 

आयात शुल्क में यह छूट प्लास्टिक, पैकेजिंग, कपड़ा, दवा, रसायन, मोटर वाहन कलपुर्जों और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों जैसे पेट्रोरसायन कच्चा माल तथा मध्यवर्ती उत्पादों पर निर्भर उद्योगों (डाउनस्ट्रीम) को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से दी गई थी। वित्त मंत्रालय ने दो अप्रैल को कहा था कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में आए व्यवधान को देखते हुए सरकार ने महत्वपूर्ण पेट्रोरसायन उत्पादों पर 30 जून तक पूर्ण सीमा शुल्क छूट देने का फैसला किया है। 

मंत्रालय ने कहा था कि इस कदम का उद्देश्य घरेलू उद्योग के लिए महत्वपूर्ण पेट्रोरसायन कच्चे माल की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना, ‘डाउनस्ट्रीम’ उद्योगों पर लागत का दबाव कम करना और देश में आपूर्ति की स्थिरता बनाए रखना है। इससे अंतिम उत्पादों के उपभोक्ताओं को भी राहत मिलेगी। मेथनॉल, एनहाइड्रस अमोनिया, टोल्यून, स्टाइरीन, डाइक्लोरोमीथेन (मेथिलीन क्लोराइड), विनाइल क्लोराइड मोनोमर, पॉलीब्यूटाडाइन, स्टाइरीन ब्यूटाडाइन को सीमा शुल्क से छूट दी गई है। पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण समुद्री मार्गों में व्यवधान से उर्वरक, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के आयात को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। भारत उर्वरक और पेट्रोलियम का प्रमुख आयातक है। 

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वित्त मंत्रालय ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपए किए मंज़ूर

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नई दिल्ली, एजेंसी। भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 2.0 के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपए के बजट प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सूत्रों ने यह जानकारी दी। यह मंजूरी आईएसएम 1.0 के लिए निर्धारित किए गए 76,000 करोड़ रुपए के आवंटन से काफी अधिक है। सूत्रों के मुताबिक, व्यय वित्त समिति ने आईएसएम 2.0 के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपए के खर्च को मंज़ूरी दे दी है और अब इस प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष पेश किया जाएगा। 

फरवरी में पेश किए गए बजट में देश की विनिर्माण क्षमता को बढ़ावा देने के प्रयास किए गए थे। इसमें कई उपायों के साथ-साथ ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ के दूसरे चरण की घोषणा की गई थी, जिसका मुख्य मकसद देश में चिप विनिर्माण परिवेश को बढ़ावा देना था। इसमें उपकरण, सामग्री, स्वदेशी डिज़ाइन और अन्य संबंधित कलपुर्जे शामिल हैं। सरकार का कहना है कि केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ चिप विनिर्माण के प्रति भारत की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। 

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पहले कहा था कि ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ के तहत देश में ही चिप डिज़ाइन, उत्पादन आदि बढ़ाने को प्राथमिकता दी जाएगी। ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ के तहत लगभग 1.64 लाख करोड़ रुपये के निवेश वाली 12 सेमीकंडक्टर विनिर्माण परियोजनाओं को मंज़ूरी दी गई है। इनमें एक सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाई, दो कंपाउंड सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाई और नौ पैकेजिंग इकाइयां शामिल हैं।  

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