बिज़नस
रू.9.4 करोड़ की Google नौकरी छोड़ AI स्टार्टअप शुरू करने निकला युवक, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान
न्यूयॉर्क, एजेंसी। जहां एक ओर टेक इंडस्ट्री में लगातार छंटनी की खबरें सामने आ रही हैं, वहीं एक टेक प्रोफेशनल यूसुफ इमरान ने Google में करोड़ों रुपये के सालाना पैकेज वाली नौकरी छोड़कर अपना AI स्टार्टअप शुरू करने का फैसला किया। यूसुफ इमरान ने ने अपना खुद का AI स्टार्टअप शुरू करने के लिए Google की लगभग 9.4 करोड़ रुपये सालाना की नौकरी छोड़ दी। उनका कहना है कि टेक इंडस्ट्री में बढ़ती छंटनी और AI के तेजी से बढ़ते अवसरों ने उन्हें यह बड़ा फैसला लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपनी बचत का इस्तेमाल करते हुए सेल्स प्रोफेशनल्स के लिए AI आधारित ऑटोमेटेड टूल्स बनाने वाली कंपनी शुरू की।

41 वर्षीय यूसुफ इमरान ने Google में लगभग 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 9.4 करोड़ रुपये) के सालाना वेतन और कमीशन पैकेज को छोड़कर अपना AI बिजनेस शुरू किया। वह Google के सिलिकॉन वैली मुख्यालय में अकाउंट एग्जीक्यूटिव के पद पर कार्यरत थे।
एक रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश में जन्मे और बचपन में न्यूयॉर्क चले गए इमरान ने सेल्स इंडस्ट्री में करीब 20 साल तक काम किया। वर्ष 2020 में उन्होंने Google जॉइन किया। उनकी बेस सैलरी लगभग 1.7 लाख अमेरिकी डॉलर थी, लेकिन शानदार सेल्स प्रदर्शन के कारण कमीशन मिलाकर उनकी कुल वार्षिक कमाई पिछले साल 9.86 लाख अमेरिकी डॉलर (करीब 9.32 करोड़ रुपये) तक पहुंच गई।
इतनी बड़ी आय के बावजूद इमरान का मानना था कि AI सेक्टर में नए अवसर कहीं अधिक बड़े हैं। उनका कहना है कि OpenAI और Anthropic जैसी कंपनियां कर्मचारियों को ऐसे स्टॉक ऑप्शन दे रही हैं, जिनसे भविष्य में भारी आर्थिक लाभ हो सकता है, जबकि Google उस स्तर पर प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहा था।
उन्होंने यह भी महसूस किया कि Google में हाल के वर्षों में हुई छंटनी ने कॉर्पोरेट नौकरी की सुरक्षा पर उनका भरोसा कम कर दिया। उनके कई प्रतिभाशाली सहकर्मियों की नौकरी जाने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि स्थायी नौकरी की गारंटी अब पहले जैसी नहीं रही।
Google में नौकरी के दौरान इमरान अपनी शाम और सप्ताहांत AI मॉडल्स पर प्रयोग करने और नए सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन विकसित करने में बिताते थे। इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने अब ‘मैंगोस्टीन स्टूडियो’ (Mangosteen Studio) नाम से अपना सोलो स्टार्टअप शुरू किया है। यह स्टार्टअप सेल्स टीमों के लिए ऐसे AI टूल्स विकसित करता है, जो डील्स को तेजी से क्लोज करने और बिक्री प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करते हैं।
अपने स्टार्टअप को पूरी तरह स्वतंत्र रूप से खड़ा करने के लिए इमरान ने बाहरी निवेशकों से फंड लेने के बजाय अपनी निजी बचत का सहारा लिया। उन्होंने व्यवसाय के शुरुआती खर्चों के लिए लगभग 2 लाख अमेरिकी डॉलर अलग रखे, जबकि अगले दो वर्षों तक मॉर्गेज और व्यक्तिगत खर्चों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त 1.5 लाख अमेरिकी डॉलर की व्यवस्था पहले से कर ली।
इमरान का मानना है कि सफल टेक फाउंडर बनने के लिए केवल कंप्यूटर साइंस की डिग्री जरूरी नहीं है। उनके अनुसार, किसी विशेष इंडस्ट्री की गहरी समझ और AI टूल्स का सही उपयोग किसी भी अच्छे आइडिया को सफल बिजनेस में बदल सकता है।
देश
सरकार ने नहीं बदलीं स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की ब्याज दरें, निवेशकों को मिलेगा वही रिटर्न
नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) के लिए छोटी बचत योजनाओं (Small Savings Schemes) की ब्याज दरों का ऐलान कर दिया है। सरकार ने इस बार भी किसी भी योजना की ब्याज दर में बदलाव नहीं किया है। ऐसे में निवेशकों को अपनी जमा राशि पर पहले की तरह ही रिटर्न मिलता रहेगा।

वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), सुकन्या समृद्धि योजना (SSY), सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम (SCSS), नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC), किसान विकास पत्र (KVP) और डाकघर की विभिन्न बचत योजनाओं पर मौजूदा ब्याज दरें जुलाई से सितंबर तिमाही के दौरान भी लागू रहेंगी।
सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब बाजार में ब्याज दरों को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। हालांकि, सरकार ने निवेशकों को राहत देते हुए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया।
छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों की समीक्षा हर तिमाही की जाती है। सरकार बॉन्ड यील्ड और बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इन दरों पर फैसला लेती है। इस बार भी समीक्षा के बाद मौजूदा दरों को बरकरार रखने का निर्णय लिया गया है।
देश
सरकार ने पेट्रोरसायन आयात पर शुल्क छूट 15 जुलाई तक बढ़ाई
नई दिल्ली, एजेंसी। सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के बीच आपूर्ति की निरंतरता और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण पेट्रोरसायन उत्पादों के आयात पर शून्य सीमा शुल्क छूट की अवधि 15 दिन बढ़ाकर 15 जुलाई तक कर दी है। सरकार ने दो अप्रैल को करीब 40 महत्वपूर्ण पेट्रोरसायन उत्पादों के आयात पर पूर्ण सीमा शुल्क छूट दी थी। यह अस्थायी और लक्षित राहत 30 जून को समाप्त होने वाली थी। वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को जारी अधिसूचना में सीमा शुल्क छूट की अवधि बढ़ाकर 15 जुलाई तक कर दी।

आयात शुल्क में यह छूट प्लास्टिक, पैकेजिंग, कपड़ा, दवा, रसायन, मोटर वाहन कलपुर्जों और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों जैसे पेट्रोरसायन कच्चा माल तथा मध्यवर्ती उत्पादों पर निर्भर उद्योगों (डाउनस्ट्रीम) को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से दी गई थी। वित्त मंत्रालय ने दो अप्रैल को कहा था कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में आए व्यवधान को देखते हुए सरकार ने महत्वपूर्ण पेट्रोरसायन उत्पादों पर 30 जून तक पूर्ण सीमा शुल्क छूट देने का फैसला किया है।
मंत्रालय ने कहा था कि इस कदम का उद्देश्य घरेलू उद्योग के लिए महत्वपूर्ण पेट्रोरसायन कच्चे माल की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना, ‘डाउनस्ट्रीम’ उद्योगों पर लागत का दबाव कम करना और देश में आपूर्ति की स्थिरता बनाए रखना है। इससे अंतिम उत्पादों के उपभोक्ताओं को भी राहत मिलेगी। मेथनॉल, एनहाइड्रस अमोनिया, टोल्यून, स्टाइरीन, डाइक्लोरोमीथेन (मेथिलीन क्लोराइड), विनाइल क्लोराइड मोनोमर, पॉलीब्यूटाडाइन, स्टाइरीन ब्यूटाडाइन को सीमा शुल्क से छूट दी गई है। पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण समुद्री मार्गों में व्यवधान से उर्वरक, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के आयात को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। भारत उर्वरक और पेट्रोलियम का प्रमुख आयातक है।
देश
वित्त मंत्रालय ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपए किए मंज़ूर
नई दिल्ली, एजेंसी। भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 2.0 के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपए के बजट प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सूत्रों ने यह जानकारी दी। यह मंजूरी आईएसएम 1.0 के लिए निर्धारित किए गए 76,000 करोड़ रुपए के आवंटन से काफी अधिक है। सूत्रों के मुताबिक, व्यय वित्त समिति ने आईएसएम 2.0 के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपए के खर्च को मंज़ूरी दे दी है और अब इस प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष पेश किया जाएगा।

फरवरी में पेश किए गए बजट में देश की विनिर्माण क्षमता को बढ़ावा देने के प्रयास किए गए थे। इसमें कई उपायों के साथ-साथ ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ के दूसरे चरण की घोषणा की गई थी, जिसका मुख्य मकसद देश में चिप विनिर्माण परिवेश को बढ़ावा देना था। इसमें उपकरण, सामग्री, स्वदेशी डिज़ाइन और अन्य संबंधित कलपुर्जे शामिल हैं। सरकार का कहना है कि केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ चिप विनिर्माण के प्रति भारत की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पहले कहा था कि ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ के तहत देश में ही चिप डिज़ाइन, उत्पादन आदि बढ़ाने को प्राथमिकता दी जाएगी। ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ के तहत लगभग 1.64 लाख करोड़ रुपये के निवेश वाली 12 सेमीकंडक्टर विनिर्माण परियोजनाओं को मंज़ूरी दी गई है। इनमें एक सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाई, दो कंपाउंड सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाई और नौ पैकेजिंग इकाइयां शामिल हैं।
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