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सरकार ने GSTAT में अपील दाखिल करने की समयसीमा 31 जुलाई तक बढ़ाई

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नई दिल्ली, एजेंसी। सरकार ने माल एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (जीएसटीएटी) में अपील दाखिल करने की अंतिम तिथि मंगलवार को एक महीने बढ़ाकर 31 जुलाई, 2026 कर दी। जीएसटीएटी की शुरुआत पिछले वर्ष सितंबर में हुई थी। इसके बाद सरकार ने जीएसटीएटी में अपील दाखिल करने की अंतिम तिथि 30 जून, 2026 तय की थी। वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा, ”सरकार ने माल एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (जीएसटीएटी) में अपील दाखिल करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 31 जुलाई, 2026 कर दी है।” 

मंत्रालय ने बताया कि विभिन्न हितधारकों के अनुरोधों के बाद यह निर्णय लिया गया। इन अनुरोधों में कहा गया था कि जीएसटीएटी मंच पर अत्यधिक दबाव के कारण अपील दाखिल करने में तकनीकी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पिछले 15 दिनों में ही 30,000 अपीलें दाखिल की गईं, जबकि एक दिन में सर्वाधिक 5,500 अपीलें दर्ज की गईं। मंत्रालय ने करदाताओं को सलाह दी कि वे अंतिम समय तक इंतजार न करें और समय रहते अपनी अपील दाखिल कर दें। सरकार अब तक जीएसटीएटी की 31 राज्य पीठों और दिल्ली स्थित एक प्रधान पीठ को अधिसूचित कर चुकी है।

फिलहाल अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष 4.80 लाख से अधिक मामले लंबित हैं और इन सभी के जीएसटीएटी में आने की उम्मीद है। सरकार ने मई 2024 में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) संजय कुमार मिश्रा को जीएसटीएटी की प्रधान पीठ का अध्यक्ष नियुक्त किया था। एक जुलाई, 2017 को जीएसटी लागू होने के बाद करदाताओं और जीएसटी विभाग के बीच सभी विवादों का निपटारा उच्च न्यायालयों या उच्चतम न्यायालय में होता था, जिससे मामलों के समाधान में देरी होती थी। सितंबर 2025 में जीएसटीएटी का संचालन शुरू होने के बाद विवादों के निपटारे की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद बनी है। 

एएमआरजी ग्लोबल के प्रबंध साझेदार रजत मोहन ने कहा कि सरकार का यह फैसला व्यावहारिक है और जीएसटीएटी के पूर्ण रूप से कामकाज शुरू होने तक करदाताओं के अपील करने के अधिकार की रक्षा करता है। उन्होंने कहा, ”अतिरिक्त समय से काफी राहत मिलेगी, लेकिन करदाताओं को अंतिम तिथि तक इंतजार नहीं करना चाहिए।” केपीएमजी में अप्रत्यक्ष कर प्रमुख एवं साझेदार अभिषेक जैन ने कहा, ” समयसीमा बढ़ने से करदाताओं और पेशेवरों को नए जीएसटीएटी तंत्र के अनुरूप खुद को ढालने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। इससे वास्तविक अपीलें समयसीमा के कारण खारिज होने से बचेंगी और जीएसटीएटी व्यवस्था में सुचारु बदलाव सुनिश्चित होगा।” 

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लैंडिंग के दौरान स्पाइसजेट विमान का टायर फटा, मची चीख-पुकार; 148 यात्री थे सवार

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दरभंगा, एजेंसी। बिहार के दरभंगा हवाई अड्डे पर मुंबई से आए स्पाइसजेट के एक विमान का उतरते समय टायर फट गया। इस घटना में विमान में सवार करीब 148 यात्रियों की जान बाल-बाल बच गई। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। 

अधिकारियों के अनुसार, स्पाइसजेट की उड़ान संख्या एसजी-115 सोमवार सुबह 9:48 बजे रनवे पर उतर रही थी, तभी विमान का एक टायर फट गया। यात्रियों ने बताया कि क्षतिग्रस्त पहिया कुछ दूरी तक रनवे पर घिसटता रहा, जिससे विमान में तेज कंपन महसूस हुआ और यात्रियों के बीच अफरा-तफरी मच गई। दरभंगा हवाई अड्डे के निदेशक दिलीप कुमार ने कहा, “विमान की सुरक्षित लैंडिंग हुई और सभी यात्रियों को सामान्य तरीके से विमान से उतार लिया गया। विमान के पूरी तरह रुकते ही हवाई अड्डा प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई शुरू की और सभी 148 यात्रियों तथा चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।” 
निदेशक ने बताया कि घटना के बाद विमान को मुख्य रनवे से हटाकर एप्रन पर ले जाया गया, जहां तकनीकी जांच की गई और टायर फटने के कारणों का पता लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई। निदेशक के अनुसार, टायर बदले जाने और संबंधित अधिकारियों से सभी आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद विमान को सोमवार शाम 6:13 बजे उड़ान भरने की अनुमति दे दी गई। 

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सरकार ने नहीं बदलीं स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की ब्याज दरें, निवेशकों को मिलेगा वही रिटर्न

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नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) के लिए छोटी बचत योजनाओं (Small Savings Schemes) की ब्याज दरों का ऐलान कर दिया है। सरकार ने इस बार भी किसी भी योजना की ब्याज दर में बदलाव नहीं किया है। ऐसे में निवेशकों को अपनी जमा राशि पर पहले की तरह ही रिटर्न मिलता रहेगा।

वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), सुकन्या समृद्धि योजना (SSY), सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम (SCSS), नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC), किसान विकास पत्र (KVP) और डाकघर की विभिन्न बचत योजनाओं पर मौजूदा ब्याज दरें जुलाई से सितंबर तिमाही के दौरान भी लागू रहेंगी।

सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब बाजार में ब्याज दरों को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। हालांकि, सरकार ने निवेशकों को राहत देते हुए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया।

छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों की समीक्षा हर तिमाही की जाती है। सरकार बॉन्ड यील्ड और बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इन दरों पर फैसला लेती है। इस बार भी समीक्षा के बाद मौजूदा दरों को बरकरार रखने का निर्णय लिया गया है।
  

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सरकार ने पेट्रोरसायन आयात पर शुल्क छूट 15 जुलाई तक बढ़ाई

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नई दिल्ली, एजेंसी। सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के बीच आपूर्ति की निरंतरता और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण पेट्रोरसायन उत्पादों के आयात पर शून्य सीमा शुल्क छूट की अवधि 15 दिन बढ़ाकर 15 जुलाई तक कर दी है। सरकार ने दो अप्रैल को करीब 40 महत्वपूर्ण पेट्रोरसायन उत्पादों के आयात पर पूर्ण सीमा शुल्क छूट दी थी। यह अस्थायी और लक्षित राहत 30 जून को समाप्त होने वाली थी। वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को जारी अधिसूचना में सीमा शुल्क छूट की अवधि बढ़ाकर 15 जुलाई तक कर दी। 

आयात शुल्क में यह छूट प्लास्टिक, पैकेजिंग, कपड़ा, दवा, रसायन, मोटर वाहन कलपुर्जों और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों जैसे पेट्रोरसायन कच्चा माल तथा मध्यवर्ती उत्पादों पर निर्भर उद्योगों (डाउनस्ट्रीम) को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से दी गई थी। वित्त मंत्रालय ने दो अप्रैल को कहा था कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में आए व्यवधान को देखते हुए सरकार ने महत्वपूर्ण पेट्रोरसायन उत्पादों पर 30 जून तक पूर्ण सीमा शुल्क छूट देने का फैसला किया है। 

मंत्रालय ने कहा था कि इस कदम का उद्देश्य घरेलू उद्योग के लिए महत्वपूर्ण पेट्रोरसायन कच्चे माल की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना, ‘डाउनस्ट्रीम’ उद्योगों पर लागत का दबाव कम करना और देश में आपूर्ति की स्थिरता बनाए रखना है। इससे अंतिम उत्पादों के उपभोक्ताओं को भी राहत मिलेगी। मेथनॉल, एनहाइड्रस अमोनिया, टोल्यून, स्टाइरीन, डाइक्लोरोमीथेन (मेथिलीन क्लोराइड), विनाइल क्लोराइड मोनोमर, पॉलीब्यूटाडाइन, स्टाइरीन ब्यूटाडाइन को सीमा शुल्क से छूट दी गई है। पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण समुद्री मार्गों में व्यवधान से उर्वरक, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के आयात को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। भारत उर्वरक और पेट्रोलियम का प्रमुख आयातक है। 

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