छत्तीसगढ़ में प्राइवेट स्कूल खोलने के नियम बदले:अब एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट जरूरी नहीं, एक रूम में अधिकतम 45 बच्चे बैठेंगे, बिल्डिंग-सेफ्टी की जानकारी देनी होगी
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में प्राइवेट स्कूल शुरू करने और उनकी मान्यता को लेकर नियम बदल गए हैं। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 7 सितंबर 2026 को नई गाइडलाइन जारी की है। ये नियम एकेडमिक सेशन 2026-27 से लागू होंगे। इससे पहले 2018 के नियम लागू थे।
राज्य सरकार के जून 2026 के नोटिफिकेशन के बाद अब नए नियम बनाए गए हैं। नई गाइडलाइन में स्कूल संचालकों को कुछ बड़ी राहत दी गई है। अब स्कूल खोलने के लिए एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट जरूरी नहीं होगा।
मान्यता के लिए स्कूल को सेल्फ सर्टिफिकेशन देना होगा। इसमें स्कूल को खुद बताना होगा कि उसकी बिल्डिंग सेफ है, लैब, लाइब्रेरी और प्लेग्राउंड की सुविधा है, टीचिंग स्टाफ क्वालिफाइड है और बच्चों की सेफ्टी के जरूरी इंतजाम किए गए हैं।
अगर सेल्फ सर्टिफिकेशन में गलत जानकारी दी गई तो स्कूल की मान्यता सस्पेंड या कैंसिल की जा सकती है। फाइन भी लगाया जा सकता है। इसके अलवा अब एक रूम में अधिकतम 45 बच्चें ही बैठ सकेंगे।
नई गाइडलाइन में क्या बदला?
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि स्कूल खोलने के लिए अब अनिवार्यता प्रमाण पत्र (एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट) नहीं लेना होगा। इसके अलावा स्कूल के लिए न्यूनतम कॉर्पस फंड रखने की अनिवार्यता भी खत्म कर दी गई है।
स्कूल को सिर्फ यह बताना होगा कि उसके पास स्कूल चलाने और स्टाफ की सैलरी देने के लिए पर्याप्त फाइनेंस है। स्कूल को हर एकेडमिक सेशन खत्म होने के 3 महीने के अंदर अपनी ऑडिट रिपोर्ट जमा करनी होगी।
नई मान्यता के लिए ऑनलाइन अप्लाई करना होगा
स्कूल की नई मान्यता के लिए पूरा प्रोसेस ऑनलाइन होगा। स्कूल के ऑथराइज्ड अधिकारी को मंडल के पोर्टल पर फॉर्म भरना होगा और फीस भी ऑनलाइन जमा करनी होगी। एक ही समय पर हाईस्कूल और हायर सेकंडरी की मान्यता नहीं मिलेगी। पहले हाईस्कूल की मान्यता लेनी होगी।
इसके बाद ही हायर सेकंडरी की मान्यता के लिए अप्लाई किया जा सकेगा। नई मान्यता के लिए स्कूल को 2 साल पहले 15 अप्रैल तक अप्लाई करना होगा। लेट फीस के साथ 31 जुलाई तक आवेदन किया जा सकेगा। रिन्यूअल के लिए 31 दिसंबर तक नॉर्मल फीस के साथ आवेदन करना होगा।
इसके बाद 28 फरवरी तक 4 हजार रुपए लेट फीस लगेगी। 28 फरवरी के बाद हर दिन 100 रुपए अतिरिक्त फीस लगेगी। हाईस्कूल और हायर सेकंडरी के लिए लेट फीस अलग-अलग लगेगी।
बिना मान्यता 9वीं से 12वीं तक क्लास नहीं चला सकेंगे
जिस प्राइवेट स्कूल के पास मंडल की मान्यता नहीं है, वह 9वीं से 12वीं तक की क्लास नहीं चला सकेगा। अगर किसी स्कूल की मान्यता कैंसिल हो जाती है तो वहां पढ़ रहे बच्चों को नजदीकी सरकारी स्कूल में शिफ्ट किया जाएगा।
स्कूल की जमीन स्कूल संचालक के नाम होनी चाहिए।
हिंदी और इंग्लिश मीडियम के लिए अलग सेटअप
नई गाइडलाइन में हिंदी और इंग्लिश मीडियम स्कूलों के लिए भी नियम सख्त किए गए हैं। अगर कोई स्कूल हिंदी और इंग्लिश दोनों मीडियम चलाना चाहता है तो दोनों के लिए जमीन, बिल्डिंग, प्रिंसिपल और टीचिंग स्टाफ अलग-अलग रखना होगा।
एक ही बिल्डिंग में 2 अलग बोर्ड भी नहीं चलाए जा सकेंगे। अगर कोई स्कूल इंग्लिश मीडियम शुरू करना चाहता है तो उसे इसके लिए नया स्कूल मानकर नई मान्यता लेनी होगी। इंग्लिश मीडियम में पढ़ाने वाले टीचर के पास इंग्लिश मीडियम बैकग्राउंड का सर्टिफिकेट भी होना जरूरी होगा।
स्कूल की जमीन और बिल्डिंग के लिए भी नए नियम
स्कूल की जमीन स्कूल संचालक के नाम होनी चाहिए। इसके अलावा कम से कम 3 साल का रेंट एग्रीमेंट या रजिस्टर्ड लीज भी मान्य होगी। जमीन का बी-1 खसरा और सिविल इंजीनियर से तैयार बिल्डिंग मैप नगर निगम, नगर पालिका या पंचायत से सर्टिफाइड होना चाहिए।
मैप में जमीन, पूरी बिल्डिंग और हर रूम का एरिया अलग-अलग दिखाना होगा। अगर शुरुआत में स्कूल के पास खुद की जमीन नहीं है तो जमीन खरीदने और बिल्डिंग बनाने का वर्क प्लान देना होगा। इस प्लान को 3 साल में पूरा करना होगा। ऐसा नहीं होने पर चौथे साल से हर साल पेनल्टी लगेगी।
स्कूल में बच्चों के लिए खेल, प्रेयर और पार्किंग की खुली जगह भी रखनी होगी। कृषि संकाय वाले स्कूलों में प्रैक्टिकल के लिए कृषि जमीन जरूरी होगी। इसके अलावा मल्टीस्टोरी बिल्डिंग के लिए स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट जरूरी होगा।
नए नियम के तहत एक रूम में अधिकतम 45 बच्चे ही बैठ सकेंगे।
एक क्लासरूम में 45 से ज्यादा बच्चे नहीं
नई गाइडलाइन के मुताबिक क्लासरूम कम से कम 300 स्क्वायर फीट का होना चाहिए। एक रूम में अधिकतम 45 बच्चे बैठ सकेंगे। हर बच्चे के लिए कम से कम 6 स्क्वायर फीट जगह जरूरी होगी। हाईस्कूल के लिए कम से कम 7 क्लासरूम जरूरी हैं। हायर सेकंडरी में चुने गए संकाय के हिसाब से अतिरिक्त रूम रखने होंगे।
एक बिल्डिंग में एक ही शिफ्ट चलेगी और स्कूल की शिफ्ट कम से कम 6 घंटे की होनी चाहिए। अधूरी बिल्डिंग, जंगल की जमीन, सरकारी जमीन या अतिक्रमण वाली जमीन पर स्कूल को मान्यता नहीं मिलेगी। इंस्पेक्शन के समय स्कूल की बिल्डिंग की वीडियोग्राफी भी दिखानी होगी।
व्यावसायिक दुकानों के बीच, फ्लैट्स के बीच या नियमों के खिलाफ जगह पर स्कूल को मान्यता नहीं मिलेगी। स्कूल कैंपस के अंदर कोई दूसरा बिजनेस भी नहीं चलाया जा सकेगा।
नई गाइफलाइन के अनुसार लाइब्रेरी और लैब शेयर करने की भी सुविधा होनी चाहिए। (फाइल)
लाइब्रेरी और लैब शेयर करने की भी सुविधा
नई गाइडलाइन में स्कूलों को कुछ सुविधाएं शेयर करने की अनुमति दी गई है। लाइब्रेरी, लैब, प्लेग्राउंड और कंप्यूटर लैब स्कूल के अंदर होना बेहतर माना गया है, लेकिन स्कूल चाहे तो पास के सरकारी इंस्टीट्यूट, नगर पालिका, कॉलेज या दूसरे मान्यता प्राप्त स्कूल के साथ इन सुविधाओं को शेयर कर सकता है।
इसके लिए फॉर्मल एग्रीमेंट जरूरी होगा। बच्चों की एंट्री का रिकॉर्ड रखना होगा और उनकी सेफ्टी की जिम्मेदारी भी स्कूल की होगी। हाईस्कूल में एक लैब रूम पर्याप्त होगा। वहीं हायर सेकंडरी में फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और कृषि के लिए अलग-अलग लैब रखनी होंगी।
कंप्यूटर पढ़ाने के लिए पीजीडीसीए क्वालिफिकेशन वाला टीचर जरूरी होगा।
हायर सेकंडरी में फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और कृषि के लिए अलग-अलग लैब रखनी होंगी।
हाईस्कूल में 13 पदों का स्टाफ सेटअप
हाईस्कूल के लिए कुल 13 पदों का स्टाफ सेटअप तय किया गया है। इसमें एक प्रिंसिपल, 6 लेक्चरर और बाकी सपोर्ट स्टाफ शामिल हैं। हायर सेकंडरी में हर संकाय के हिसाब से करीब 10 पदों का स्टाफ रखना होगा। प्रिंसिपल और लेक्चरर के लिए पोस्ट ग्रेजुएशन के साथ बीएड जरूरी होगा।
प्रिंसिपल के पास कम से कम 5 साल का टीचिंग एक्सपीरियंस होना चाहिए। स्कूल में काउंसलर की व्यवस्था भी करनी होगी। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन करना होगा। स्टाफ की लिस्ट के साथ फोटो, आधार, बैंक अकाउंट, मोबाइल नंबर और सैलरी स्लिप भी जमा करनी होगी।
बच्चों की सेफ्टी के लिए ये इंतजाम जरूरी
स्कूल में बच्चों के लिए साफ पीने का पानी, लड़के-लड़कियों के लिए अलग टॉयलेट, दिव्यांगों के लिए टॉयलेट और स्टाफ के लिए अलग टॉयलेट जरूरी होगा। बिजली, पर्याप्त फर्नीचर और सीसीटीवी कैमरे भी अनिवार्य होंगे।
अगर स्कूल बस चलाता है तो हर साल बस का टेक्निकल चेकअप कराना होगा। ड्राइवर और कंडक्टर का हेल्थ चेकअप भी जरूरी होगा।
स्कूल के नाम को लेकर भी नियम बनाए गए हैं।
स्कूल के नाम में भी कई शब्द नहीं लगा सकेंगे
नई गाइडलाइन में स्कूल के नाम को लेकर भी नियम बनाए गए हैं। प्राइवेट स्कूल अपने नाम में नेशनल, इंटरनेशनल, नवोदय, एकलव्य, प्रयास, केंद्रीय, राष्ट्रीय, पीएमश्री, स्वामी आत्मानंद और स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट जैसे शब्द इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।
मंडल के मुताबिक, ऐसे नाम से पैरेंट्स को स्कूल के बारे में गलतफहमी हो सकती है। स्कूल को कम से कम एक बोर्ड एग्जाम तक चलाना होगा। मान्यता मिलने के बाद स्कूल को कम से कम एक बोर्ड एग्जाम तक चलाना जरूरी होगा। यानी बच्चों को बीच में स्कूल बदलने की स्थिति नहीं बननी चाहिए।
अगर स्कूल लगातार 2 साल तक रिन्यूअल फीस और एग्जाम फॉर्म जमा नहीं करता है तो उसकी मान्यता अपने आप कैंसिल हो जाएगी।
दूसरे बोर्ड में जाना है तो मंडल से NOC जरूरी
अगर कोई स्कूल सीबीएसई या किसी दूसरे बोर्ड से मान्यता लेना चाहता है तो उसे मंडल में 3 साल की फीस एक साथ जमा करनी होगी। इसके बाद ही एनओसी मिलेगी। स्कूल की जगह, बिल्डिंग, नाम या मीडियम बदलना है तो पहले सरकार से परमिशन लेनी होगी।
इसके बाद 30 दिन के अंदर मंडल में आवेदन करना होगा। बिना परमिशन बदलाव करने पर स्कूल की मान्यता कैंसिल की जा सकती है। इसी तरह स्कूल का मैनेजमेंट भी मंडल की परमिशन के बिना ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा।
मंडल ने साफ किया- ये सिर्फ मिनिमम स्टैंडर्ड हैं
मंडल ने नई गाइडलाइन में साफ किया है कि ये स्कूलों के लिए मिनिमम स्टैंडर्ड हैं। जो स्कूल इन नियमों को पूरा नहीं करेंगे, अगले साल उनकी मान्यता पर विचार नहीं किया जाएगा।
यानी नई गाइडलाइन में जहां स्कूल खोलने वालों को एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट और कॉर्पस फंड से राहत दी गई है, वहीं बिल्डिंग, स्टाफ, सेफ्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्कूल संचालन के नियमों को सख्त रखा गया है।
संभावित फर्जीवाड़े की रोकथाम के लिए अधिकारियों एवं चिकित्सकों के कथन दर्ज किए जाएंगे
कोरबा, 08 सितंबर 2026। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी कोरबा कुणाल दुदावत ने राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 के अंतर्गत जनहानि के प्रकरणों में आर्थिक अनुदान स्वीकृति की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष एवं तथ्यपरक बनाने तथा संभावित फर्जीवाड़े की रोकथाम के लिए संबंधित अधिकारियों एवं चिकित्सकों के कथन दर्ज किए जाने के निर्देश दिए हैं। निर्देश के अनुसार राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 के अंतर्गत होने वाली जनहानि की सूचना संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार, पटवारी अथवा कोटवार के माध्यम से दी जाएगी। सूचना प्राप्त होने के बाद संबंधित क्षेत्र के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) द्वारा घटना स्थल का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मृत्यु प्राकृतिक आपदा के कारण हुई है अथवा नहीं। जनहानि से संबंधित प्रकरणों में संबंधित थाने के विवेचक एवं शव परीक्षणकर्ता चिकित्सक को संबंधित राजस्व न्यायालय में बुलाकर उनके कथन दर्ज किए जाएंगे। कथन दर्ज होने के पश्चात ही प्रकरण को विधिवत अनुशंसा सहित प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि आर्थिक अनुदान स्वीकृति की प्रक्रिया में आवश्यक तथ्य एवं साक्ष्य स्पष्ट रूप से उपलब्ध रहें। कलेक्टर ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 के अंतर्गत प्राप्त जनहानि प्रकरणों में निर्धारित प्रक्रिया का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें तथा प्रत्येक प्रकरण में पारदर्शिता एवं निष्पक्षता बनाए रखें। उन्होंने कहा कि जनहानि के प्रकरणों में पात्र हितग्राहियों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। साथ ही, अनुदान स्वीकृति की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता अथवा संभावित फर्जीवाड़े की गुंजाइश न रहे, इसके लिए सभी स्तरों पर आवश्यक सावधानी बरती जाए।
सभी शिक्षण संस्थानों में कोटपा एक्ट का पालन सुनिश्चित कराने के दिए निर्देश कोरबा, 08 सितम्बर 2026। जिले में नशे के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिला दंडाधिकारी कुणाल दुदावत की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला स्तरीय एनकॉर्ड समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों की समीक्षा करते हुए नशे की रोकथाम, जनजागरूकता तथा तंबाकू नियंत्रण से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई और संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक में पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी, सीईओ जिला पंचायत प्रतीक जैन, नगर निगम आयुक्त आशुतोष पांडेय, एसडीएम कटघोरा विपिन दुबे, ओएसडी तरुण कुमार किरण, अपर कलेक्टर देवेंद्र पटेल सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में कलेक्टर ने शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रो के सभी शिक्षण संस्थानों को तम्बाकू मुक्त संस्थान बनाने हेतु 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री करने वाले दुकानदारों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने समाज कल्याण विभाग को विकासखंड स्तर पर आयोजित होने वाले नशा मुक्ति जागरूकता अभियान में भारत वाहिनी की इकाइयों को सक्रिय रूप से शामिल कर ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए। बैठक में जिले के नशा मुक्ति केंद्र का निर्धारित क्षमता के अनुरूप प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने रेस्टोरेंट व स्ट्रीट वेंडर्स संचालको की कार्यशाला आयोजित कर स्वच्छता सम्बंधी आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ नशा मुक्ति अभियान में आधिकाधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए नियमित जागरूकता गतिविधियां संचालित करने निर्देशित किया।
सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में सुरक्षित एवं सुगम यातायात के लिए विभागों को समयबद्ध कार्रवाई के दिए गए निर्देश
सड़क दुर्घटना पीड़ितों को पीएम राहत योजना का लाभ दिलाने व्यापक प्रचार-प्रसार के दिए निर्देश
सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान जिला स्तरीय क्विज प्रतियोगिता विजेताओं को किया गया सम्मानित
कोरबा 08 सितम्बर 2026। कलेक्टर कुणाल दुदावत एवं पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी की अध्यक्षता में जिले में सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने तथा यातायात नियमों के पालन को और बेहतर बनाने हेतु जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों तथा सड़क सुरक्षा के लिए किए जा रहे विभिन्न कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने राष्ट्रीय राजमार्ग में सड़क हादसे में हुए मृत्यु प्रकरणों के संभावित स्थिति व कारणों की समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों को सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यों में त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करने निर्देशित किया। साथ ही यातायात नियमों के उल्लंघन पर प्रभावी नियंत्रण, संवेदनशील एवं दुर्घटना संभावित स्थानों पर आवश्यक सुरक्षा उपाय तथा आमजन में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने निर्देशित किया।
कलेक्टर श्री दुदावत ने राष्ट्रीय राजमार्ग में सड़क हादसों में कमी लाने हेतु पूर्व बैठक में दिए निर्देशों के क्रियान्वयन की जानकारी लेते हुए विभागीय प्रगति पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने एनएचएआई को एनएच में हादसे रोकने हेतु दिए निर्देशों का गम्भीरता से पालन करने के निर्देश दिए। कलेक्टर श्री दुदावत ने कटघोरा-अंबिकापुर राजमार्ग के चिन्हाकित ब्लैक स्पॉट, तीव्र मोड़ों, घाट एवं अन्य दुर्घटना संभावित स्थलों पर रंबल स्ट्रिप, रोड शोल्डर, क्रैश बैरियर एवं स्पीडोमीटर स्थापित कर यातायात को सुरक्षित एवं सुगम बनाने की कार्रवाई शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश एनएचएआई को दिए। साथ ही क्षतिग्रस्त एवं निम्न स्तर के रोड शोल्डर की मरम्मत, आवश्यक स्थानों पर रेडियमयुक्त चेतावनी व संकेतक बोर्ड लगाने, स्पीड ब्रेकर, रंबल स्ट्रिप, केटआई, डेलिनेटर तथा सोलर लाइट की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने एनएच के दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में वाहनों की गति धीमी रखने हेतु अन्य प्रभावी व्यवस्था भी सुनिश्चित करने के लिए कहा।’ साथ ही भारी वाहनों के पीछे विजिबल रेडियम पट्टी लगाने के लिये कहा। जिससे रात्रि में वाहन के राजमार्ग में खड़े होने पर वाहन चालक को जानकारी हो सके। उन्होंने यातायात नियमों के उल्लंघन पर नियमित जांच एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि नियमों का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए।
रोड सेफ्टी के कार्यों में धीमी प्रगति पर ईई पीडब्ल्यूडी को नोटिस जारी करने के दिए निर्देश
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने जिले के भैंसमा स्कूल से सक्ती मोड़, बालको ऐश डेक रोड, रिस्दी ब्रिज से बजरंग चौक मार्ग, दीपका-झाबर रोड, दीपका थाना चौक सहित अन्य स्थानों पर सड़क निर्माण, जंक्शन सुधार, रंबल स्ट्रिप एवं संकेतक बोर्ड लगाने जैसे सौपे गए कार्यों में लोक निर्माण विभाग द्वारा अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर नाराजगी व्यक्त की। ’उन्होंने लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता को नोटिस जारी करने के निर्देश देते हुए लंबित कार्यों को शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए।
ओवरस्पीड, शराब पीकर वाहन चलाने एवं यातायात नियमों के उल्लंघन करने वालो पर होगी कार्यवाही – पुलिस अधीक्षक सभाकक्ष में आयोजित बैठक में एसपी श्री तिवारी ने ओवरस्पीड व शराब पीकर वाहन चलाने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने, तीन सवारी बैठाने, बिना नंबर प्लेट के वाहन संचालित करने, नो-पार्किंग क्षेत्रों में वाहन खड़े करने तथा अन्य यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। साथ ही नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने एवं यातायात नियमों के उल्लंघन पर भी विशेष अभियान संचालित कर कार्यवाही करने के लिए कहा। कलेक्टर श्री दुदावत ने सड़क दुर्घटना में होने वाले घायलों का अस्पताल में पीएम राहत में प्रकरण दर्ज कर उपचार करने के निर्देश दिए। इस हेतु स्वास्थ्य विभाग को जिले के सभी शासकीय एवं निजी अस्पतालों में पीएम राहत योजना के सम्बंध बैठक लेकर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करने की बात कही। साथ ही सभी स्वास्थ्य केंद्र, पंचायत भवन सहित ग्रामीण क्षेत्रो में बैनर पोस्टर के माध्यम से योजना का व्यापक प्रचार प्रसार सुनिश्चित करने हेतु निर्देशित किया। उन्होंने राहवीर योजना के संबंध में भी आमजनों में जागरूकता हेतु प्रभावी कार्य करने के लिए कहा। बैठक में विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने हेतु आयोजित सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान के जिला स्तरीय क्विज प्रतियोगिता के विजेता स्कूली छात्र छात्राओं को सम्मानित भी किया गया। जिसके अंतर्गत बालिका वर्ग में तृतीय स्थान सावित्री खैरवार, द्वितीय स्थान सौम्या जायसवाल एवं प्रथम स्थान विभूति ताम्रकार, बालक वर्ग में प्रथम रितेश अनंत, द्वितीय जितेश कुमार व तृतीय स्थान खगेश यादव ने हासिल किया। इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत प्रतीक जैन, नगर निगम आयुक्त आशुतोष पाण्डेय, एसडीएम कटघोरा विपिन दुबे, ओएसडी तरुण कुमार किरण, अपर कलेक्टर देवेंद्र पटेल, जिला परिवहन अधिकारी अतुल कुमार असैय्या सहित लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, एसईसीएल, बालको एवं विभिन्न औद्योगिक प्रतिष्ठानों के अधिकारी उपस्थित रहे।